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कोरोना डायरीज़: त्रिलोकी बमबाज को इलाहबाद यूनिवर्सिटी के भैया ने ‘कोरोना मैन’ क्यूं बोला?

त्रिलोकी नाथ (तस्वीर आधी है, क्योंकि इनका विशेष आग्रह था कि इन्हें छुपाया भी जाए और दिखाया भी जाए
त्रिलोकी नाथ (तस्वीर आधी है, क्योंकि इनका विशेष आग्रह था कि इन्हें छुपाया भी जाए और दिखाया भी जाए

नाम- त्रिलोकी (बदला हुआ नाम)

काम- मल्लाह

पता- इलाहाबाद

दिन में मल्लाही करीथी औ रात में खोजीथी कोरोना. बस इत्ता भर हमार परिचय है. तीन पीढ़ी से यहां संगम में नाव चलाता हूं. जिंदगी भर नाव में लोगों को संगम दर्शन कराया. कोई आज तक पलट के नहीं पूछा. आज हमारा इंटरव्यू हो रहा है. काहे कि सेठ लोग मर रहे हैं. तब याद आय रही है तिरलोकी बमबाज की. बम अब नहीं बनाता. पहिले गुल के डिब्बा में बहुत बम बांधा. यूनिवर्सिटी से लेकर दारागंज तक कई जगह हमारे बम के निसान अब तक हैं. सबके बच्चे जाते हैं यूनिवर्सिटी, हमाए बम गए थे यूनिवर्सिटी. बकायदा डिग्री सर्टिफ़िकेट सब मिला हमारे बमों को. पुलिस से.

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तब जवानी थी. अब बुढाए गए तो नाव खेते हैं. लेकिन अबकी भगवान बम छोड़े हैं. कोरोना बम. मोदी जी आके बोल दिए कि सब बंद. सबका सब बंद हुआ तो हमारी मल्लाही भी बंद हो गई. जब कोई आएगा ही नहीं तो नाव किसके लिए चलाएंगे. अपनी पत्नी बाल-बच्चे तो हैं नहीं. इसलिए भाई के बच्चे पालता हूं. ऊपर वाले का भी मुंह देखाना है न. यहीलिए करता हूं सब.

मोदी जी कहेन कि राशन दूध सब मिलीगा. लेकिन भाई ई नै बताए मोदी जी कि पईसा कहां से आवेगा. दिन भर ख़ाली नाव हम फेंटे लगे तो पईसा उपजेगा? नहीं ना? हम लोग रोज कमाए खाए वाले लोग हैं. कम से कम हजार तो मल्लाह हैं. जाके पूछो चार रोटी की दो रोटी खा रहे हैं, दो टाइम का एक टाइम खा रहे हैं.

हमका मोदी जी पे बिस्वास है भाई. सब घर में चुप्पे बईठे रहें तो कोरोना जाएगा मर. लेकिन लोग सिविल लाइन से लगाई बंधवा वाले हनुमान जी तक परसादी चढ़ाय रहे हैं. दीया-बत्ती कर रहे हैं.

यही लिए हम रात को लुंगी लपेट के बनते हैं कोरोना. हमरे डर से अब दारागंज में लोग रात के नै निकलत हैं. सबका लगत है कि कोरोना घूम रहा है. एक यूनिवर्सिटी के भईया हमका कहेन कि तिरलोकी तुम ‘कोरोना मैन’ हो. हम सौक से नहीं करते भाई. एक रात सब बंद रहा तो हम बाहर निकले चुप्पे से घाट तक जाने के लिए. कोई अंधेरे में देख के ‘कोरोना कोरोना’ चिल्लाए लगा. बस हमका वहीं से आयडिया आया.

एक दिन दुई सिपाही हमका पकड़ के पीट भी दिए. लेकिन हमका जब तक कोरोना मिली नै तब तक हम घाट पे जाएंगे. गंगा मईया से हाथ जोड़ के बिनती करेंगे कि ‘मईया रोटी नमक दे दो.’

लोग जित्ता हनुमान जी के परसादी चढ़ाए दिए ना भाई, उत्ते में हम सब मल्लाह कई दिन रोटी खाय लेते. लेकिन हमार लोगन की कोई गिनती तो है नहीं. कल मर बहा जाएं तिरलोकी बमबाज. किसको पड़ी है?

यहीलिए कह रहे हैं कि हम गरीबन के लिए भी कुछ करें मोदी जी. बनारस में चुनाव रहा तो कहे रहेन कि मैं गंगा का बेटा हूं. तो ई हिसाब से हम तुम्हार भाई भए मोदी जी. मजदूर लोग का खाय रहे हैं एक बार देख लो भाई.

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

कोट-

जो रोज कुंआ खोद के पानी पी रहा है, उससे तो फावड़ा छीन लिया कोरोना ने. 


कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं. है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें. corona.diaries.LT@gmail.com


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