Submit your post

Follow Us

कोरोना डायरीज़: 'ए भईया! का होई हमहन के?'- बनारसी बुनकरों का बुरा हाल

नाम- अतुल पांडेय

काम- बनारसी साड़ी का कारोबार

जगह- बनारस

मैं बनारसी साड़ियां बनवाता हूं. डोर स्टेप्स पर डिलवरी कराता हूं. खुद की कई हैंडलूम हैं. काम जम चुका था और अब पिछले कुछ दिनों से बस उखड़ने का हिसाब लगा रहा. सब कुछ अचानक से बंद है. ठेठ में समझें कि मेरा करीब छह से सात लाख का माल कुरियर में फंसा है. अमेरीका से लेकर बंगलुरु तक के ऑर्डर थे. फिलहाल पता ही नहीं है कि कहां हैं. कुछ स्पेशल साड़ियां एक्जीबिशन के लिए खास तैयार करवाईं थीं, वो सब बन गईं हैं लेकिन अब एक्जीबिशन ही नहीं हो रहीं.

Corona Banner
यहां क्लिक करिए, कोरोना डायरीज़ के और पन्ने पढ़िए.

बनारसी साड़ियों का जो व्यवसाय है वो लोवर क्लास से लेकर, उसके खरीददार, अपर क्लास तक का है. एक बनारसी साड़ी के बनाने में रेशम देने वाले से लेकर पहनने वाले तक शामिल होते हैं. ये बनारसी साड़ियां हाथ से बनती हैं. ऐसे समझिए कि साड़ी को मेरे हाथ में आने से पहले तकरीबन 20- 22 लोग डायरेक्टली इफैक्ट होते हैं. मजदूर से लूम मालिक तक. सबका काम बंद है.आप साड़ी बना नहीं सकते.

बनारसी साड़ीयों के बनाने में हर स्टेप पर कारीगर होते हैं. जैसे रेशम देने वाला. उसे बताने पर कि कैसी और कितनी साड़ी बनानी है, वह साड़ी के बॉर्डर के लिए अलग रेशम निकाल के देगा. पल्लू के लिए अलग और बॉडी के लिए अलग. अब सबसे ज्यादा रेशम चाइना से आता था. वह आना ही बंद हो गया है.  इसलिए उस रेशम पर सीधा प्रभाव पड़ा है.

इतना ही नुकसान है बुनकर और डाई करने वाले का. डाई करने वाला अलग-अलग रेट है साड़ीयों के हिसाब से. ये काम एकदम से बंद हो गया है. इस पर निर्भर व्यक्ति के पास तो कोई साधन नहीं दूसरा कमाई का. लूम पर तानी चढ़ाने वाले का काम बंद हो गया. लूम पर कई तरह के लोग होते हैं सबका काम बंद है.

बनारस के नक्शे में देखिए यहां-यहां साड़ीयां बनती हैं. तस्वीर- हर्षित श्याम
बनारस के नक्शे में देखिए यहां-यहां साड़ीयां बनती हैं. तस्वीर- हर्षित श्याम

बगल में मुबारकपुर (आजमगढ़) का भी सारा कारोबार ठप है. आज वहां के कारीगर ने फोन किया. कहने लगा,

अतुल भइया, दस-पन्द्रह हजार रुपया हमें दे देता तो हमार काम चल जाइत कुछ दिन.

ये करीगर वो होते हैं जो साड़ी बनाते हैं. मै कुछेक की मदद कर भी दूं तो बाकी का क्या. यहां कोंटवा (बनारस के पास की एक और जगह जहां कारीगरों की हैंडलूम है) के भी कुछ कारीगरों ने कहा कि ए भईया! का होई हमहन के? कुछ मदद करा. (भईया हमारा क्या होगा? कुछ मदद करिए) मैंने कहा कि घबरा जिन, योगी जी कुछ मदद करीहें. (घबराओ मत योगी जी कुछ करेंगे)

इसके आलावा जो जो ऑर्डर्स थे, सब कैंसिल हो रहे. सोशल गेदरिंग खत्म हो गई है जिसकी वजह से नए ऑर्डर नहीं हैं. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि साड़ियां बनें ही ना. क्योंकि जब चीजें ठीक होंगी तो आपको हो सकता है की साड़ियों की जरुरत हो लेकिन तब तक बुनकर बचेंगे क्या? इस पर सोचिएगा.

कोट– मैं कुछ टाइम में साड़ी कारोबारी से बड़ा साड़ी कारोबारी और फिर उससे भी बड़ा बिजनेस मैन हो सकता हूं. मगर कारीगर, शुरु से आखिरी तक कारीगर ही होता है. इस पर भी सोचिएगा.


कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं. है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें.

corona.diaries.LT@gmail.com


वीडियो देखें: कोरोना डायरीज: लॉकडाउन में घर में बंद कस्टमर केयर मैनेजर ने दिल की बात कह दी

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

90000 डॉलर का कर्ज़ा उतारकर प्राइवेट जेट खरीद लिया था इस 'गैंबलर' ने

उस अमेरिकी सिंगर की अजीब दास्तां, जो बात करने के बजाए गाने में ज़्यादा कंफर्टेबल महसूस करता था

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.

क्या भारत सरकार से पूछे बिना पाकिस्तान चली गई इंडियन कबड्डी टीम?

अब ढेरों खेल-तमाशा हो रहा है.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

QUIZ: देश के सबसे महान स्पोर्टसमैन को कितना जानते हैं आप?

आज इस जादूगर की बरसी है.

चाचा शरद पवार ने ये बातें समझी होती तो शायद भतीजे अजित पवार धोखा नहीं देते

शुरुआत 2004 से हुई थी, 2019 आते-आते बात यहां तक पहुंच गई.