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कोरोना में प्लाज़्मा देने के बारे में आपके जो सवाल हैं, उन सबका जवाब आपको इस ख़बर में मिलेगा

कोरोना से जुड़ी ख़बरों में प्लाज़्मा का नाम बार बार आ रहा है. शायद आपने भी कहीं पढ़ा हो कि प्लाज़्मा थेरेपी के जरिए कोविड पेशेंट का इलाज संभव है. काफी लोगों ने सोशल मीडिया पर हमसे इस बारे में जानना चाहा. कई लोग सोशल मीडिया पर ख़ास ब्लड ग्रुप का प्लाज़्मा मांगते भी हैं. लेकिन इसी समय प्लाज़्मा पर सवाल भी उठ रहे हैं. सवाल ये कि क्या प्लाज़्मा ज़रा भी ज़रूरी है? क्या प्लाज़्मा से सच में जान बचायी जा सकती है या ये सिर्फ़ कोरी अफ़वाह है? हमने डॉक्टरों से बात की. सवालों के जवाब पता किया ताकि आपको प्लाज़्मा थेरेपी से जुड़ी हर बात पता चल सके.

प्लाज़्मा होता क्या है?

हमारे खून में रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल के अलावा एक पीले रंग का लिक्विड भी मौजूद होता है. इस लिक्विड में 90 प्रतिशत पानी के अलावा प्लेटलेट्स, प्रोटीन, मिनरल्स, हार्मोन्स व अन्य चीजें मौजूद होती है. इसमें ही होता है प्लाज़्मा. अब इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि हमारे ख़ून का करीब 55 प्रतिशत प्लाज्मा ही होता है. शरीर को रोगों से बचाने में प्लाज़्मा का बहुत बड़ा रोल होता है. जब शरीर पर कोई बीमारी हमला करती है तब इसी प्लाज़्मा में मौजूद रोग प्रतिरोधक तत्त्व बीमारी का मुकाबला करते हैं. हेल्थ पॉलिसी एक्सपर्ट डॉक्टर विकास केशरी कहते हैं,

“खून से लाल और सफेद ब्लड सेल को हटाने के बाद जो चीज बचती है, वह प्लाज़्मा होती है. कोरोना के केस में जो प्लाज़्मा मरीज को दिया जाता है उसे convalescent plasma कहते हैं. यानी बीमारी से जो शख्स रिकवर हुआ है, उसके शरीर से निकाला गया प्लाज़्मा.”

Plasma
अक्टूबर 2020 में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी प्लाज़्मा डोनेट किया था. फोटो- PTI

प्लाज़्मा थेरेपी क्या है?

दिल्ली के पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर मणि शंकर प्रियदर्शी बताते हैं कि एक शख्स के शरीर से खून निकाला जाता है, उसे फिल्टर किया जाता है. प्लाज्मा को अलग करने के बाद बाकी खून शरीर में वापस चढ़ा दिया जाता है. निकाले गए प्लाज़्मा को बीमार शख्स को दिया जाता है ताकि वह रोगों का मुकाबला कर सके. वो दिलचस्प उदाहरण देते हैं,

“मान लें कि आपके घर में कोई हत्यारा घुस आया है और आपको मारने की कोशिश कर रहा है. आप खुद को बचाने में सक्षम नहीं हैं, ऐसे में आप पुलिस को फोन करते हैं और पूरी पुलिस फोर्स आपको बचाने आ जाती है. ये जो प्लाज़्मा है, वही पुलिस फोर्स है और हत्यारा समझिए की बीमारी है. आप इसे कोविड कह सकते हैं.”

कोविड में कितना फायदेमंद है?

प्लाज़्मा थेरेपी कोरोना से लड़ने में कितनी मददगार है, इसका सही जवाब पूरी दुनिया में कहीं नहीं है. दरअसल ऐसा माना जाता है कि अगर आप किसी रोग से लड़कर सही हुए हैं तो आपके शरीर में उस बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनी होगी. ये रेडीमेड एंटीबॉडी यदि किसी ऐसे मरीज को दी जाए जो उसी रोग से पीड़ित है तो शायद उसकी रिकवरी तेजी से होगी क्योंकि उसे एक्टिव एंटीबॉडी मिली हैं. डॉक्टर विकास केशरी कहते हैं,

“पिछले साल फर्स्ट वेव के दौरान हमने देखा कि प्लाज़्मा थेरेपी का बहुत अधिक इस्तेमाल किया जा रहा था. इस पर काफी स्टडी भी हुई, भारत में भी हुई और विदेशों में भी हुई. लेकिन किसी भी स्टडी में ये नहीं पाया गया कि प्लाज़्मा थेरेपी का बहुत अधिक फायदा होता है. भारत का Indian Council of Medical Research, अमेरिका का National Institutes of Health और ऑक्सफोर्ड, इन सभी की स्टडी में प्लाज़्मा थेरेपी की भूमिका ना तो रोग की गंभीरता को कम करने वाली पाई गई और ना ही ऐसा कोई साक्ष्य मिला कि इससे मृत्यु दर को कम किया जा सकता है.”

वहीं इस मुद्दे पर डॉक्टर मणि शंकर प्रियदर्शी कहते हैं कि ये थेरेपी उन लोगों को दी जाती है जिनमें कोरोना गंभीर रूप में नहीं होता. यानी माइल्ड से मॉडरेट स्थिति में होता है. शुरुआती स्थिति में प्लाज़्मा थेरेपी फायदेमंद हो सकती है लेकिन सीवियर स्थिति में यानी गंभीर हालत में ये बहुत कारगर सिद्ध नहीं हुई है. वे कहते हैं,

“इस पर कोई बहुत बड़ा डेटा उपलब्ध नहीं है. हमने देखा है कि मरीज को अगर मॉडरेट कोविड है और उसे प्लाज़्मा थेरेपी दी जाती है तो अच्छे नतीजे सामने आते हैं लेकिन हालत गंभीर होने के बाद जब इन्फेक्शन बढ़ने के कारण और भी इन्फेक्शन होने लगते हैं तब ये थेरेपी काम नहीं करती. वेंटीलेटर पर जो मरीज हैं, उन पर काम नहीं करती. हम इसे रामबाण इलाज नहीं कह सकते.”

कौन दे सकता है प्लाज़्मा?

एक सवाल जो अक्सर पूछा जाता है जिस पर लोग थोड़ा कन्फ्यूज़ हो जाते हैं, वो ये कि प्लाज़्मा कौन दे सकता है? सीधा जा जवाब है, ब्लड डोनेट जो लोग कर सकते हैं वो प्लाज़्मा भी डोनेट कर सकते हैं. लेकिन कोरोना के केस में स्थिति अलग हो जाती है. प्लाज़्मा डोनेट वो लोग कर सकते हैं जिनको कोविड-19 हुआ हो और वो इससे ठीक हो चुके हों. ध्यान ये रखना है कि सेम ब्लड ग्रुप से हों, बूढे ना हों, बीमार ना हों, गर्भवती ना हों, HIV ना हो. और समयसीमा की पाबंदी भी है. डॉक्टर विकास केशरी कहते हैं,

“कोविड से लड़ने के दौरान जो एंटीबॉडी बनती हैं उन्हीं के लिए प्लाज्मा डोनेट किया जाता है. तो खून देने के दौरान जो सावधानियां बरतते हैं वह तो बरतते ही हैं, साथ ही ये भी देखते हैं कि जिससे प्लाज़्मा लिया जा रहा है वह कितने दिन पहले कोविड से रिकवर किए हैं. लक्षण समाप्त होने के 14 दिनों के बाद प्लाज़्मा डोनेट किया जा सकता है.”

इसके अलावा डॉक्टर मणि शंकर प्रियदर्शी कहते हैं कि,

“अगर आज आप नेगेटिव हो जाते हैं तो उसके 15वें दिन से लेकर 3 महीने तक आप प्लाज्मा दे सकते हैं. ये कोई नियम नहीं है लेकिन मोटा मोटी अनुमान यही है. डोनेट करने वाला शख्स HIV या HCV यानी हेपेटाइटस सी वाला पेशेंट नहीं होना चाहिए. गर्भवती महिला नहीं होनी चाहिए. 18 से कम नहीं होना चाहिए और बूढा नहीं होना चाहिए. इनके अलावा बाकी लोग दे सकते हैं.”

जिसको वैक्सीन लग चुकी है क्या वो प्लाज़्मा दे सकता है?

डॉक्टरों का मानना है कि जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है वह प्लाज़्मा नहीं दे पाएंगे. उदाहरण से समझिए. किसी को कोरोना हुआ. वह ठीक हुआ. उसके महीने भर बाद उसने वैक्सीन लगवाई. इसके बाद किसी को प्लाज़्मा की जरूरत पड़ती है तो वैक्सीनेटेड शख्स, बेशक उसे रिकवर हुए दो ही महीने हुए हैं. लेकिन चूंकि उसने एक महीने पहले वैक्सीन ली है. तो ऐसे में वह प्लाज़्मा डोनेट नहीं कर पाएगा. हालांकि यह कोई नियम नहीं है और इस पर अभी भी रिसर्च जारी है.

दूसरी बात ये भी कि अगर किसी ने वैक्सीन लगवा ली है और उसके बाद उसे कोरोना हो गया है. तब क्या उसे प्लाज़्मा दिया जाएगा? डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीनेटेड शख्स को प्लाज़्मा नहीं दिया जा सकता है. वैसे यहां पर ये भी बात है कि जिस शख़्स को वैक्सीन के दोनों डोज़ लगे हैं, उन्हें प्लाज़्मा जैसे जटिल ट्रीटमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ती है. वैक्सीन से मिली रोग प्रतिरोधक क्षमता यहां मदद करती है.

लेकिन हम बार नहीं कई बार और ज़ोर देकर कह रहे हैं कि प्लाज़्मा थेरेपी पर अभी भी बहुत सारी रिसर्च बाक़ी है. ख़ुद से कोई ट्रीटमेंट मत करिए. डॉक्टर मुझसे या आपसे ज़्यादा जानता है, उनकी सलाह और उनके परामर्श पर ही आगे बढ़ें.


वीडियो- जानिए, दूसरी के बाद तीसरी लहर से बचने के लिए क्या-क्या करना होगा?

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