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UP: जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में BJP के इन प्रत्याशियों का विवादों से क्या नाता है?

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव होने हैं. इसके लिए टिकट बांटे जा चुके हैं. नामांकन भी करे जा चुके हैं. लेकिन भाजपा के प्रत्याशियों में तमाम नाम ऐसे सामने आए, जिन पर विवाद हो गया. ये कौन से नाम हैं, और इनके साथ कौन सा विवाद जुड़ा है, जानते हैं.

उन्नाव

उन्नाव से टिकट दिया गया अरुण सिंह को. अरुण सिंह, उन्नाव रेप कांड के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर के बेहद करीबी हैं. उनको पंचायत अध्यक्ष का टिकट मिलते ही विवाद खड़ा हो गया. रेप कांड की पीड़िता की तरफ से की गई शिकायत में अरुण सिंह पर भी आरोप लगाए गए थे. इसके बाद पीड़िता के परिवार वालों का जब एक्सीडेंट हुआ था, तब भी अरुण सिंह को आरोपी बनाया गया था. ऐसे में अरुण सिंह को टिकट मिलने के बाद पीड़िता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखकर शिकायत की थी. पीड़िता ने अरुण सिंह का टिकट रद्द करने की मांग की थी.

इसके बाद बीजेपी ने अरुण सिंह का टिकट काट दिया. उनकी जगह पूर्व MLC स्वर्गीय अजित सिंह की पत्नी शकुन सिंह को टिकट दिया. लेकिन इस नाम पर भी कम विवाद नहीं है. अजित सिंह सपा से MLC रहे थे. 2004 में उनकी हत्या कर दी गई थी. वे अपने समय के दबंग नेता रहे थे. उनके ख़िलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज थे.

Arun Singh
साक्षी महाराज के साथ अरुण सिंह. (फाइल फोटो)

जालौन

जालौन से भाजपा का टिकट दिया गया है घनश्याम अनुरागी को. अनुरागी सपा के टिकट पर 2009 से 2014 तक सांसद रहे हैं. 2019 में वह भाजपा में आ गए थे. 2016 में घनश्याम अनुरागी पर उनकी पत्नी और बेटी ने गंभीर आरोप लगाए थे. बेटी ने दावा किया था –

“पापा को मैंने मामी के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा था. इसके बाद से वो मेरे दुश्मन बन गए. वे मेरे साथ भी गलत काम करने की फिराक में रहने लगे थे. इसलिए मां जब भी घर से बाहर जातीं, तो मुझे कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगाकर ही जातीं. ताकि कमरे में पापा न घुस आएं.”

इसके अलावा घनश्याम अनुरागी का नाम गायत्री प्रजापति के खनन घोटाले संबंधी मामले में भी आ चुका है. उनके घर की तलाशी भी हो चुकी है. अब वे जालौन से भाजपा प्रत्याशी हैं.

Anuragi
अपने सपा के दिनों में मुलायम सिंह के साथ घनश्याम अनुरागी. (फाइल फोटो)

बदायूं

यहां से बीजेपी की प्रत्याशी हैं वर्षा यादव. वे पूर्व MLC जितेंद्र यादव की पत्नी है. और जितेंद्र यादव हैं डीपी यादव के भतीजे. डीपी यादव वही हैं, जो भाजपा विधायक महेंद्र भाटी की हत्या में देहरादून की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. अभी डीपी यादव पैरोल पर जेल से बाहर आया हुआ है. इलाके में उसकी हनक है, ये सभी जानते हैं. ऐसे में चुनाव में उसका कितना असर रहेगा, ये देखने वाली बात होगी. डीपी यादव बसपा के टिकट पर 1996 में यूपी की संभल सीट से जीतकर सांसद बने थे. 1998 में उन्होंने मुलायम सिंह यादव के सामने चुनाव लड़ा. हालांकि हार गए. दबंगई के दम पर डीपी यादव ने अपनी राजनीति मजबूत की. उस पर हत्या समेत तमाम मामले चल रहे हैं.

हमीरपुर

हमीरपुर में भारतीय जनता पार्टी ने जयंती राजपूत को प्रत्याशी घोषित किया है. जयंती राजपूत ने कुछ समय पहले समाजवादी पार्टी की वंदना यादव को अविश्वास प्रस्ताव के जरिये हटाकर अध्यक्ष पद संभाला था. लेकिन इसके कुछ महीने बाद ही हाईकोर्ट ने जयंती राजपूत का निर्वाचन रद्द कर दिया, और वंदना यादव को फिर से अध्यक्ष घोषित कर दिया था. अब एक बार फिर से भाजपा ने जयंती राजपूत पर भरोसा करके उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी घोषित किया है.

Jayanti
जयंती राजपूत. (फाइल फोटो)

कन्नौज

कन्नौज में प्रिया शाक्य को टिकट दिया गया है. उनके पति ओमकार शाक्य भारतीय जनता युवा मोर्चा में जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं. प्रिया शाक्य वही हैं, जिन्हें अभी कुछ ही महीने पहले भाजपा ने अनुशासनहीनता के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसके बाद उन्होंने निर्दलीय पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीता. तब उन्होंने भाजपा की रेखा त्रिपाठी को बड़े अंतर से हराया था. जीतने के बाद उनकी भाजपा में वापसी हो गई. अब पंचायत अध्यक्ष का टिकट भी मिल गया है. फिलहाल वे छिबरामऊ से जिला पंचायत सदस्य हैं.

Priya Shakya
प्रिया शाक्य. (फाइल फोटो)

26 जून को नामांकन की आख़िरी तारीख़ निकल चुकी है और 10 से अधिक जिलों में भाजपा के प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने की बात आ रही है. क्योंकि इन जिलों में सामने वाले प्रत्याशी नामांकन ही नहीं कर सके. सपा का तो आरोप है कि 11 जिलों में उनके प्रत्याशियों को जोर-जबरदस्ती करके नामांकन स्थल तक पहुंचने ही नहीं दिया गया.


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