Submit your post

Follow Us

क्या गांधी के कहने पर सावरकर ने अंग्रेज़ों से मांगी थी माफी?

सावरकर. 20वीं सदी में इस नाम को लेकर जनता की राय बार बार बदली है. क्योंकि सावरकर की शख्सियत के अलग-अलग पहलू अलग-अलग समय पर दूसरों से प्रमुख होते गए. एक क्रांतिकारी, जिसने अंग्रेज़ों के खिलाफ आवाज़ उठाई और जेल गया. एक विचारक, जिसने हिंदुत्व के विचार की नींव में कई पत्थर लगाए. एक और नामी शख्सियत, जिस पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगा. इन सारी वजहों के चलते ही सावरकर एक पोलराइज़िंग फिगर हैं. प्रशंसक और आलोचक दोनों पक्षों के पास अपने अपने तर्क और तथ्य हैं. सबसे ज़्यादा विवाद दो चीज़ों पर है – सावरकर द्वारा अंग्रेज़ सरकार से मांगी गई माफी. और महात्मा गांधी की हत्या में उनकी कथित भूमिका.

सावरकर और गांधी दोनों के जाने के इतने दशकों बाद भी ये दोनों विषय गज़ब की असहजता पैदा करने वाले बने हुए हैं. और ये असहजता फिर से चर्चा में है, क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह माफी और गांधी – ये दो शब्द एक ही वाक्य में सावरकर के साथ इस्तेमाल कर दिए. रक्षा मंत्री ने कह दिया कि सावरकर ने माफी इसलिए मांगी, क्योंकि महात्मा गांधी ने उनसे ऐसा करने को कहा था. आइए महात्मा गांधी, सावरकर और माफी के इस नए त्रिकोण को समझने की चेष्टा करते हैं.

कौन थे सावरकर?

विनायक दामोदार सावरकर. सावरकर स्वतंत्रता सेनानी थे, या अंग्रेज़ों के एजेंट थे, या गांधी के हत्या में शामिल थे, या मुसलमानों से नफरत करने वाले हिंदू महासभा के नेता थे, या वो आदमी थे जो देश का विभाजन रोक सकता था. कौन थे सावरकर, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपको सावरकर के बारे में बता कौन रहा है, या किस किताब में आप सावरकर के बारे में पढ़ रहे हैं. सावरकर कभी आरएसएस में नहीं रहे, ना ही जनसंघ में रहे. लेकिन सावरकर की हिंदुत्व वाली विचारधारा में बीजेपी अपनी विचारधारा की बुनियाद खोजती है. गांधी, नेहरू जैसे स्वतंत्रता आंदोलन के महापुरुषों के समानांतर बीजेपी सावरकर को अपनी विरासत का प्रतीक बनाती है.

सावरकर पर आमने-सामने बीजेपी और कांग्रेस

सालों से बीजेपी और आरएसएस इस कोशिश में लगे हैं कि वो इतिहास में सावरकर की महानता स्थापित कर पाएं. वाजपेयी सरकार ने सावरकर को भारत रत्न देने की सिफारिश की थी. लेकिन तब के राष्ट्रपति के आर नारायणन ने नाम खारिज कर दिया था. 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने सावरकर को भारत रत्न दिलाने का मुद्दा रखा था. जबकि सावरकर की आलोचना करने वाले कहते हैं कि उन्होंने कई बार अंग्रेज़ों से माफी मांगी थी. माफीनामे के बाद ही अंग्रेजों ने सावरकर को अंडमान की सेलुलर जेल, जिसे काला पानी कहा जाता था, वहां से रिहा किया था. और वो अंग्रेज़ों से पेंशन लेकर अंग्रेज़ी हुकूमत की मदद करते थे.

बीजेपी कहती है कि सावरकर ने कभी माफी नहीं मांगी. और इस माफी वाले विवाद में अब सावरकर की तरफ से एक नया तर्क आया है. राजनाथ सिंह ने कहा है कि सावरकर के बारे में झूठ फैलाया जा रहा है. गांधी के कहने पर उन्होंने मर्सी पिटिशन दायर की थी. उन्होंने कहा,

सावरकर के खिलाफ झूठ फैलाया गया. बार-बार ये कहा गया कि अंग्रेजी सरकार के सामने उन्होंने अनेकों मर्सी पिटिशन फाइल कीं. लेकिन सच्चाई ये है कि उन्होंने मर्सी पिटीशन अपने को रिहा करने के लिए नहीं फाइल कीं. सामान्यतया जो एक कैदी को अधिकार होता है कि अगर वो चाहे तो मर्सी पिटिशन फाइल कर सकता है. महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने मर्सी पिटिशन फाइल की थी.

राजनाथ सिंह सावरकर पर एक किताब के विमोचन पर बोल रहे थे. किताब का नाम है- वीर सावरकर – द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन. यानी वो आदमी जो विभाजन रोक सकता था. उदर माहुरकर और चिरायु पंडित ने ये किताब लिखी है. किताब के विमोचन में राजनाथ सिंह के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत थे.

राजनाथ सिंह के गांधी और सावरकर पर दावे का विरोधी मज़ाक उड़ा रहे हैं. कहा जा रहा है कि राजनाथ सिंह ने गलत तथ्य बताए. हैदराबाद से सांसद और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,

गांधी तो ये कहते थे कि जेल जाना तो अहिंसा का एक रास्ता है. और सावरकर अंग्रेजों से माफीनामा लिखते हैं. दूसरे क्यों नहीं लिखे जो काला पानी में थे. ये लोग आज इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं. ऐसा ही चलता रहा तो एक वक्त ऐसा आएगा जब गांधी को हटाकर सावरकर को राष्ट्रपिता बना देंगे.

राजनीतिक पार्टियों के आरोप अपनी जगह हैं. पर राजनाथ सिंह का दावा ऐतिहासिक तथ्यों के हिसाब से कितना सही है, इस पर आते हैं.

कैसे पहुंचे काला पानी?

वीडी सावरकर को 1910 में लंदन से गिरफ्तार किया गया था. नासिक के कलेक्टर जैकसन की हत्या के केस में उनकी गिरफ्तारी हुई थी. वीडी सावरकर से पहले उनके भाई गणेश सावरकर की गिरफ्ताई हुई थी. वीडी सावरकर पर आरोप था कि उन्होंने लंदन से हत्या में इस्तेमाल पिस्टल भेजी थी. जब सावरकर को गिरफ्तारी से समुद्र के रास्ते भारत लाया जा रहा था, तब फ्रांस के तट के पास उन्होंने बचकर भागने की कोशिश भी की, लेकिन पकड़े गए. 1911 में उन्हें काला पानी की सजा दे दी गई. यानी अंडमान की सेलुलर जेल में डाल दिया गया. करीब 10 साल सावरकर अंडमान की जेल में रहे. जेल से रिहाई के लिए उन्होंने 6 बार पत्र लिखे. सावरकर की आलोचना करने वाले कहते हैं कि जेल से छूटने के लिए उन्होंने अंग्रेज़ों से माफी मांगी थी. और अब राजनाथ सिंह कह रहे हैं कि गांधी के कहने पर सावरकर ने मर्सी पिटिशन दायर की थी.

गांधी ने की थी सावरकर के रिहाई की वकालत?

ये बात तो सही है कि गांधी ने सावरकर की रिहाई की वकालत की थी. अपने यंग इंडिया अखबार में गांधी ने 26 मई 1920 को एक लेख में सावरकर का ज़िक्र किया था. गांधी ने लिखा था कि कि कई अहम राजनैतिक अपराधियों को अभी तक रिहा नहीं किया गया है, जिनमें सावरकर बंधु भी हैं. यानी विनायक दामोदर सावरकर और गणेश दामोदर सावकर. गांधी लिखते हैं कि इनका अपराध भी उतना ही, जितना पंजाब में रिहा किए गए कई राजनैतिक अपराधियों का. दोनों भाइयों को अभी तक नहीं छोड़ा गया है जबकि उनकी रिहाई पर रोयल प्रोक्लेमेशन को छपे 5 महीने बीत गए हैं. यानी उनकी रिहाई का ऐलान हो चुका है.

कई और लेखों में भी गांधी सावरकर का ज़िक्र करते हैं. 6 अप्रैल 1921 के लेख में गांधी लिखते हैं कि सावरकर बंधुओं का टैलेंट जन कल्याण के काम आना चाहिए. गांधी विनायक सावरकर के बारे में लिखते हैं कि उनसे वो लंदन में मिले थे. वो बहादुर हैं और चतुर हैं. देशभक्त हैं. 25 जनवरी 1920 को महात्मा गांधी ने सावरकर के भाई एनडी सावरकर की चिट्ठी का जवाब लिखा था. इसमें गांधी ने सावरकर की रिहाई वाली याचिका को लेकर सुझाव दिए थे. गांधी ने ये भी लिखा था कि इस मामले में वो भी अपने तरीके से आगे बढ़ रहे हैं.

यानी ये दावा तो मिलता है कि गांधी ने सावरकर को रिहा करने की वकालत की. वीडी सावरकर के भाई को गांधी ने बताया कि याचिका किस तरह से दायर करनी चाहिए. लेकिन सावरकर की रिहाई की मांग करते समय भी उन्होंने सावरकर के विचारों की आलोचना की थी.

सावरकर की आलोचना में क्या बोले थे गांधी?

26 मई 1920 के लेख में गांधी लिखते हैं कि – दोनों सावरकर भाइयों ने अपने विचारों का ऐलान कर दिया है. कहा है कि वो किसी क्रांतिकारी विचार का समर्थन नहीं करते हैं. अगर उन्हें रिहा किया जाएगा तो रिफॉर्म्स एक्ट के तहत काम करेंगे. रिफॉर्म एक्ट यानी 1919 का गर्वनमेंट ऑफ इंडिया एक्ट. लेख में गांधी लिखते हैं कि सावरकर बंधु भारत की आज़ादी के बजाय ब्रिटिश असोसिएशन के समर्थक हैं.

यानी गांधी ने सावरकर की तारीफ भी की, उनकी विचारों से असहमति भी जताई. पर सवाल ये कि क्या गांधी के कहने पर ही सावरकर ने मर्सी पिटिशन फाइल की. जैसा राजनाथ सिंह ने दावा किया है. सावरकर के पोते रणजीत सावरकर दावा कहते हैं कि सावरकर ने अपने किसी भी लेटर में अंग्रेजों से माफी नहीं मांगी थी और न ही खेद जताया था. वे कहते हैं,

1920 में गांधी ने सावरकर के भाई को याचिका दायर करने के लिए पत्र लिखा था. उसके बाद याचिका लगाई गई थी. सावरकर ने 1913 के बाद कई याचिकाएं लगाई थीं जो सभी कैदियों की रिहाई के लिए थीं. इसमें उन्होंने ये भी कहा था कि अगर मेरी रिहाई अन्य कैदियों की रिहाई के आड़े आ रही हो तो उन्हें रिहा कर देना चाहिए.

सावरकर ने 6 दया याचिकाएं दायर की. 1911, 1913, 1914, 1918 और 1920 में. कहीं कहीं ये भी दावा मिलता है कि सावरकर ने 1913 में रिहाई के लिए पहली याचिका दायर की थी. दक्षिणपंथी इतिहासकार माने जाने वाले विक्रम संपत ने सावरकर पर किताब लिखी है. सावरकर – ईकोज़ फ्रॉम फोरगोटन पास्ट. इसमें भी विक्रम संपत सावरकर की उस पिटिशन का ज़िक्र करते हैं जो 14 नवंबर 1913 को लिखी गई थी.

हाल में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में विक्रम संपत ने कहा कि सावरकर ने जो याचिकाएं दायर की थीं, उन्हें दया याचिका नहीं कहना चाहिए. उन्होंने माफी नहीं मांगी थी. वो सभी कैदियों की रिहाई के लिए लिख रहे थे. विक्रम संपत ये भी कहते हैं कि अंग्रेज़ों को सावरकर पर भरोसा नहीं था. इसलिए अंडमान से रिहाई के बाद भी कई महीनों तक सावरकर को रत्नागिरी की जेल में रखा गया. कई याचिकाओं के बाद भी रिहा नहीं किया गया.

खैर, राजनाथ सिंह की बात पर लौटते हैं. रिकॉर्ड मिलता है कि सावरकर ने 1911 में पहली बार अंग्रेजों से रिहाई की गुहार लगाई. तब गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा नहीं थे. गांधी की एंट्री 1915 के आसपास होती है. सावरकर की रिहाई की मांग गांधी ने 1920 में की. रिहाई की याचिका पर गांधी ने सावरकर के भाई को चिट्ठी भी 1920 में लिखी थी. तो ये कहना कि गांधी के कहने पर सावरकर ने मर्सी पिटिशन दायर की, इतिहास के हिसाब से सही नहीं होगा.


किसी एयरपोर्ट की चाबी प्राइवेट कंपनी को मिलने का पूरा सिस्टम समझ लीजिए

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.