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चाचा-मामा के बच्चों से शादी के ये नियम आपको हैरान कर देंगे!

ये है गेम ऑफ़ थ्रोंस की कहानी. (सांकेतिक तस्वीर)

जेमी लैनिस्टर (Jaime Lannister) और सर्सी लैनिस्टर (Cersei Lannister). जुड़वां भाई-बहन हैं. जेमी और सर्सी बचपन से एक-दूसरे के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप में हैं. हालांकि सर्सी की शादी किंग रॉबर्ट बैरेथिऑन (King Robert Baratheon) से होती है. लेकिन इस शादी के बाद भी जेमी और सर्सी के बीच सेक्शुअल रिलेशन बना रहता है. रॉबर्ट बैरेथिऑन से शादी के बाद सर्सी के तीन बच्चे भी होते हैं. दो बेटे- जॉफरी और टॉमेन, और एक बेटी मार्सियेला. इल्ज़ाम है कि ये तीनों बच्चे जेमी के हैं. कहानी में कई जगह जेमी को इन बच्चों से पितृवत व्यवहार करता दिखाया जाता है.

‘गेम ऑफ़ थ्रोंस’. नॉवेलिस्ट जॉर्ज आरआर मार्टिन (George R.R.Martin) के नॉवेल पर बना टीवी सीरियल. सर्सी और जेमी की ये कहानी इसी सीरियल का एक बड़ा चर्चित हिस्सा है. वैसे ये सीरियल अपने और भी कई कहानी-किस्सों के लिए दुनिया भर में फेमस है, इतना कि इसे विदेशों की महाभारत मानिए. कुछ लोग इसे इतिहास के पन्नों में दबी हुई हकीकत भी मानते हैं. और जितनी कथा हमने आपको बताई है, उसका लेना-देना हमारी आज की स्टोरी से है.

जेमी और सर्सी का (कथित) बेटा जॉफरी मानसिक रूप से सामान्य नहीं है. लोगों को नुकसान पहुंचाता है, हत्याएं करता है. इसमें उसे आनंद आता है. एक शब्द में कहें तो जॉफरी ‘सैडिस्टिक सोशियोपैथ’ है. उसमें ये मानसिक विकार उन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर्स की वजह से है, जो उसके मां-बाप में हैं. आप कहेंगे कि इसमें असामान्य क्या, संतान में गुण और दोष तो मां-बाप से ही आएंगे.

कुछ जानकार ये भी कहते हैं कि इंसान के गुण-दोष ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं, अगर उसके माता-पिता के बीच ब्लड-रिलेशन, खून का रिश्ता रहा हो. ये भी, कि ऐसे बच्चों में फिजिकल और फंक्शनल डिसऑर्डर्स भी हो सकते हैं.

जेमी और सर्सी लैनिस्टर का बेटा जॉफरी (फोटो सोर्स- गेम ऑफ़ थ्रोंस)

तो हमारा सवाल है कि क्या ब्लड रिलेशंस में शादी करने से होने वाली संतान को दिक्कतें होती हैं? अगर होती हैं, तो क्या-क्या? दुनिया भर में इसपर बड़ी चर्चाएं हुईं, स्टडीज हुईं, उनपर बात करेंगे. अलग-अलग देशों में धार्मिक और कानूनी आधार पर इस मामले में क्या चल रहा है, इस पर भी बात करेंगे, एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं? ये भी जानेंगे. लेकिन सबसे पहले ब्लड रिलेशन समझ लें.

क्या हैं रक्त-संबंध

अंग्रेज़ी में शब्द है – कॉन्सैंन्ग्विनिटी (Consanguinity). हिन्दी में ‘रक्त-सम्बन्ध’ कह सकते हैं. यानी खून का रिश्ता. अब खून का रिश्ता मतलब सिर्फ वो नहीं जो अमर-अकबर-एंथनी के बीच था. कॉन्सैंन्ग्विनिटी को अंग्रेज़ी में ही तोड़कर समझते हैं.

# कॉन(Con): कनेक्ट, कंसेंसस, कांफ्रेंस, कॉन्क्लेव, कांग्रीगेशन. इन सभी शब्दों में रूट वर्ड अलग है, लेकिन आगे ‘कॉन’ लगा है. जिस भी शब्द के शुरू में कॉन लिखा हो उसके अर्थ में ‘एक-साथ’ या ‘सामूहिक’ जुड़ जाता है.

# सैंन्ग्विन: इसके माने होता है, ‘रक्त’ या ‘ब्लड’ या ‘रक्तिम’.

यानी सिर्फ सगे भाई-बहन नहीं, वे सभी लोग जो सामूहिक रूप से ब्लड कनेक्टेड हैं, वो कॉन्सैंन्ग्विन कहलाते हैं और कॉन्सैंन्ग्विनिटी यानी रक्त-संबंध के अंतर्गत आते हैं. आपके ग्रेट-ग्रेट-ग्रेट ग्रैंडपेरेंट्स से लेकर आपके नीचे की भी कई पीढ़ियों तक, सभी आपके कॉन्सैंन्ग्विन हैं. रक्त-संबंधी हैं. बेशक डिग्री अलग है. डिग्री या कहें कि इन्ब्रीडिंग कॉफिशियेंट की बात हम आगे करेंगे. वैसे एक बात और भी स्पष्ट है कि रक्त-संबंध दो तरह के हो सकते हैं. मैटर्नल और पैटर्नल. हम हिंदी भाषा में तो चचेरे और ममेरे भाई-बहन कह देते हैं, लेकिन अंग्रेज़ी में इनके लिए एक ही शब्द है – कज़न.

कॉन्सैंग्वीनियस मैरिज (Consanguineous Marriage)

हिंदी में बोलें तो, रक्त संबंधों के बीच विवाह. कॉन्सैंग्वीनियस-मैरिज को कज़न-मैरिज भी कहते हैं. तो कज़न मैरिज का मतलब हो गया ऐसे लोगों के बीच विवाह जो मां या पिता के पक्ष से भाई-बहन लगते हों.

नीला रंग उन देशों को दर्शा रहा है जहां फ़र्स्ट कज़न मैरिज लीगल है,आसमानी रंग – जहां कुछ प्रतिबंधों के साथ फर्स्ट कज़न मैरिज की अनुमति है, पीला रंग यानी भारत में इस बारे में कानून अलग-अलग धर्मों पर निर्भर करते हैं, गुलाबी रंग- जहां कुछ अपवादों को छोडकर फ़र्स्ट-कज़न मैरिज पर बैन है, हल्का लाल रंग-जहां कज़न मैरिज पर बैन है लेकिन कोई सज़ा नहीं है, गहरा लाल रंग – वे देश जहां कज़न मैरिज क्रिमिनल ऑफेंस है.

जेनेटिक्स की भाषा में

जेनेटिक्स के हिसाब से एक कॉन्सैंग्वीनियस मैरिज का मतलब है, ऐसे दो लोगों के बीच यूनियन, जो आपस में सेकंड कज़न या उससे भी क्लोज हों. और जिनके बीच इन्ब्रीडिंग कॉफिशियेंट (F), 0.0156 या उससे ज्यादा हो.

# इन्ब्रीडिंग कॉफिशियेंट: आपके पिता के भाई का लड़का आपका फर्स्ट कज़न कहा जाएगा. यानी उसके और आपके ग्रैंडपेरेंट्स एक ही हैं. लेकिन आपके पिता के चचेरे भाई का लड़का आपका सेकंड कज़न कहा जाएगा क्योंकि आपके और उसके ग्रैंडपेरेंट्स एक नहीं हैं, बल्कि ग्रेट-ग्रैंडपेरेंट्स एक हैं. इसी तरह से और थोड़ा व्यापक हों तो आप थर्ड कज़न भी समझ सकते हैं. यही तरीका मां की तरफ़ के रिश्तों में भी लागू होता है. और इन्ब्रीडिंग कॉफिशियेंट दरअसल जींस का अनुपात है, वो जींस जो आपको, आपकी पीढ़ियों से मिले हैं. और जितना ज़्यादा नज़दीक का रिश्ता इन्ब्रीडिंग कॉफिशियेंट उतना ज़्यादा.

आपको बता दें कि ये स्टोरी हम तीन पार्ट में कर रहे हैं तो इन्ब्रीडिंग कॉफिशियेंट की विस्तार पूर्वक चर्चा तीसरे एपिसोड में करेंगे.

दुनिया भर में कज़न-मैरिज़ को कैसे देखा जाता है

पश्चिमी देशों में फर्स्ट-कज़न मैरिज 19वीं और 20वीं सदी के बीच कम हुईं हैं. लेकिन मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया में कज़न मैरिज के पक्षधर बड़ी तादात में हैं. दुनिया भर में ऐसी शादियां होने की ख़ास वजहें कई हो सकती हैं- जैसे अपनी कल्चरल वैल्यूज, जियोग्राफिक प्रोक्सिमिटी और फैमिली वेल्थ को बनाए रखने की कोशिश.

आपने अक्सर सुना होगा, किसी फैमिली गैदरिंग में जब शादी की बात चलती है तो कोई न कोई कह ही देता है कि दूर क्यों जाना, अपने फलां शहर वाले मौसा जी की बेटी है न. पढी-लिखी है, सुन्दर-सुशील है और फिर पुराना रिश्ता नया हो जाएगा. नए रिश्तेदार जाने कैसे हों, मौसा जी से ही बात चलाओ. और इसीलिए स्टडीज कहती हैं कि दुनियाभर में ज्यादातर कज़न-मैरिज अरेंज्ड होती हैं. माने व्यवस्था-विवाह. लेकिन दुनिया भर के देशों में इसे लेकर मत-भिन्नता है, कहीं-कहीं कुछ कानून भी बनाए गए हैं. धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी हैं. आइए समझते हैं.

चाइना

पब्लिक रिपब्लिक ऑफ़ चाइना ने 1981 में मैरिज एक्ट लाकर कज़न मैरिज पर बैन लगा दिया है. इस एक्ट के आर्टिकल-7 के मुताबिक़ कोई चीनी व्यक्ति थर्ड कज़न तक शादी नहीं कर सकता.

चीनी दार्शनिक, कवि और ऑटोमन पीरियड के दौर के नेता कन्फ़्यूशियस के मुताबिक-

शादी दो सरनेम्स का यूनियन है, जिनमें दोस्ती हो और प्रेम हो.

यानी चीन में डायनेस्टी रूल वाले वक़्त में भी पैटर्नल कज़न मैरिज पर आम सहमति नहीं थी. लेकिन फिर भी चीन के इतिहास में ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जब एलीट क्लास के लोगों में ब्लड रिलेशन में शादियां की गईं. एन्थ्रोपोलोजिस्ट फ्रांसिस ह्सू कहते हैं-

चीन में MBD (Mother’s Brother’s Daughter) यानी मां के भाई की बेटी से शादी करना, चीन के कज़न मैरिज का सबसे प्रेफ़र्ड (पसंदीदा) टाइप है.

MSD से उलट FBD यानी पिता के भाई की बेटी से शादी को गलत माना जाता है.

चीन में शादी (प्रतीकात्मक फोटो – Supchina.com)

ईस्ट और साउथ ईस्ट एशिया

साउथ कोरिया में 1997 के बाद से थर्ड कज़न तक शादियों को बैन कर दिया गया है. वहीं, ताइवान और नार्थ कोरिया में भी फर्स्ट कज़न से शादी करना पूरी तरह बैन है. वियतनाम में सन 2000 के कानून के आर्टिकल-10 के मुताबिक़ ब्लडलाइन की थर्ड डिग्री तक शादी करने पर बैन है. इसी तरह फिलीपींस में भी कज़न-मैरिज पर रोक है.

मिडिल ईस्ट

मिडिल ईस्ट का जितना भी उपलब्ध इतिहास है उसमें, कज़न मैरिज पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है. यहां लड़की को किसी मेल कज़न से शादी के लिए फ़ोर्स तो नहीं किया जा सकता, लेकिन वो बिना अपने मेल कज़न के कंसेंट के किसी और से शादी नहीं कर सकती. इराक में तो ये रूल तोड़ने पर लडकी को मार भी दिया जाता है. प्राचीन मिस्र के दौर और प्री-इस्लामिक टाइम में अगर तुलना की जाए तो कज़न-मैरिज प्राचीन मिस्र में ज्यादा हुई हैं, पैगम्बर मोहम्मद के वक्त मदीना में भी ऐसी शादियां हुई हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में आज ये दर मुहम्मद के वक़्त से कहीं ज्यादा है. क़तर, यमन और यूएई में भी आज की पीढी में कज़न-मैरिज की दर बढ़ रही है.

मिडिल ईस्ट के ज्यादातर देशों में कज़न मैरिज को लेकर कोई बैन नहीं है

अफ्रीका

अनुमानों के मुताबिक़, सब-सहारन अफ्रीकन देशों जैसे- अंगोला, बोत्सवाना, बुर्किना फासो, कैमेरून वगैरह में 35 से 50 फीसद पॉपुलेशन कज़न-मैरिज को प्रेफर करती है. नाइजीरिया, जो कि अफ्रीका का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, यहां ख़ास तौर पर तीन सबसे बड़ी ट्राइबल कम्युनिटीज हैं- हाउसा, योरूबा और इग्बो. हौसा मुस्लिम कज़न मैरिज को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, जबकि योरूबा लोगों में करीब 50 फीसद मुस्लिम, 40 फीसद क्रिस्चियन और 10 स्थानीय पारंपरिक समुदायों के लोग हैं. इनमें से करीब आधे लोग कज़न-मैरिज करते हैं. लेकिन नाइजीरिया के इग्बो लोग जोकि क्रिस्चियन हैं, वो कज़न-मैरिज नहीं करते. मां या पिता दोनों तरफ़ की लड़कियों से शादी यहां अभिशाप जैसी मानी जाती हैं.

नाइजीरियन विवाहित जोड़ा (प्रतीकात्मक फोटो – Guardian.com)

यूरोप और कैथोलिक चर्च

रोमन सिविल लॉ के तहत चार डिग्री तक कज़न-मैरिज प्रतिबंधित है. इस डिग्री को ऐसे समझिए कि अगर किसी लड़के और लड़की के चौथी पीढ़ी तक के पूर्वज एक हैं, तो वे आपस में शादी नहीं कर सकते. कैथोलिक चर्च के कानून के तहत भी चार पीढ़ी तक के रक्त संबंधों में शादी प्रतिबंधित है.

जर्मनी में भी कज़न मैरिज कानूनी तौर पर वैध है. एस्सेन(Essen Center) के एक सर्वे के मुताबिक़ जर्मनी में करीब 25 फ़ीसद तुर्किश लोग फैमिली रिलेटिव्स में शादी करते हैं.

वैसे अलग-अलग धर्म, कज़न-मैरिज को लेकर क्या कहते हैं, इसके बारे में विस्तार से हम दूसरे एपिसोड में बात करेंगे.

यूएसए

United States में कई मामलों में प्रान्तों के अलग क़ानून और नियम चलते हैं. और एक राज्य के क़ानून दूसरे राज्य के क़ानून से बिलकुल अलग होते हैं. कई बार तो उल्टे. जैसे वहां कई प्रांतों में गाँजा लीगल है और कई जगह दंडनीय अपराध. यही अनियमितता कज़न-मैरिज के मामले में भी दिखती है. अमेरिका के 24 स्टेट्स में फ़र्स्ट-कज़न से शादी करना बैन है, जबकि 19 स्टेट्स में फ़र्स्ट-कज़न्स को शादी करने की अनुमति है, और 7 स्टेट्स में आंशिक रूप से फ़र्स्ट-कज़न मैरिज होती हैं.

यूएसए में शादी (प्रतीकात्मक फोटो सोर्स- न्यूयॉर्क टाइम्स)

ब्राज़ील

ब्राज़ील में कज़न-मैरिज होती हैं, लेकिन 19वीं सदी की तुलना में 20वीं सदी में, ये दर 16 फ़ीसद से घटकर करीब 2 फ़ीसद हो गई है. और ये दर जियोग्राफिक डिस्ट्रीब्यूशन के हिसाब से भी अलग-अलग है. ग्रामीण इलाकों और तटों से दूर स्थित इलाकों में ये दर ज्यादा है, जबकि शहरी इलाकों में और कोस्टल रीजंस में ये दर कम है.

ब्राजील में शादी (फोटो सोर्स – Facebook)

जापान

जापान की बात करें तो यहां कज़न-मैरिज पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

इंग्लैंड

UK में 19वीं सदी तक सिर्फ़ 4 से 5 फ़ीसदी उच्च और मध्यम वर्गीय लोग फ़र्स्ट-कज़न मैरिज करते थे, फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद ये दर और कम हो गई. 1930 आते-आते प्रति 6000 शादियों में सिर्फ़ एक शादी फ़र्स्ट कज़न्स में हुई. जबकि लंदन के मिडिल क्लास लोगों पर हुई एक स्टडी के मुताबिक़ क़रीब 25000 लोगों में सिर्फ़ एक शादी फ़र्स्ट कज़न्स में हुई.

यहां कॉन्सैन्ग्वीनियस मैरिज को पूरी तरह बैन या डिस्करेज करने पर डिबेट होती रही है, क्योंकि यहां ज्यादातर ये माना गया कज़न-मैरिज, ऑटोसोमल रेसेसिव डिसऑर्डर्स के लिए ज़िम्मेदार है.

इंग्लैंड में शादी (फोटो सोर्स- ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी)

हिंदुस्तान

हमारा देश इस मामले में भी बहुत डायवर्सिफ़ाई है. अलग-अलग इलाकों और कल्चर्स में कज़न-मैरिज की दर काफ़ी अलग-अलग है. देश का फैमिली लॉ सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को ध्यान में रखता है, और कानून की नज़र में ये सभी समान हैं. मुस्लिमों के अपने पर्सनल लॉ के मुताबिक़ फर्स्ट कज़न से शादी एक्सेप्टेबल है, और यह कानूनी रूप से भी मान्य है. देश में मुस्लिम जनसंख्या करीब 14 फ़ीसदी है. साल 2000 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़ मुस्लिमों में करीब 22 फ़ीसदी शादियां कज़न-मैरिज की श्रेणी में आती हैं.

हिंदुओं में फ़र्स्ट- कज़न से शादी करना 1955 के हिंदू मैरिज एक्ट के तहत ग़ैर-कानूनी है. लेकिन इसमें एक अपवाद भी है, अपवाद कहें या छूट

“अगर किसी क्षेत्रीय रीति के अनुसार ऐसा विवाह होता है तो वो ग़ैर-कानूनी नहीं है.”

वहीं, ईसाई अल्पसंख्यकों में फ़र्स्ट-कज़न मैरिज की प्रथा भी लोकेशन पर निर्भर है. जैसे कि दक्षिणी राज्यों में ईसाई-कज़न-मैरिज की दर ज्यादा है.

धर्म आधारित पर्सनल लॉ के अलावा 1954 का स्पेशल मैरिज एक्ट भी शादियों को गवर्न करता है. यानी अगर कोई पर्सनल लॉ के मुताबिक़ शादी न करना चाहे, तो वो इस एक्ट के तहत भी शादी कर सकता है. लेकिन फर्स्ट-कज़न मैरिज इस क़ानून के तहत भी प्रतिबंधित है, ऐसे में किस डिग्री तक विवाह पर प्रतिबन्ध है इसे लेकर कई बार पर्सनल लॉ और स्पेशल मैरिज एक्ट में प्रतिरोध की स्थिति भी बनती है. उत्तर भारत के राज्यों जैसे असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और राजस्थान वगैरह में चचेरे भाई-बहन की शादी प्रतिबंधित है. और इसे ‘इन्सेस्ट’ यानी पारिवारिक व्यभिचार के तौर पर देखा जाता है. आंध्र प्रदेश में अंकल-नीस और फर्स्ट-कज़न मैरिज, कुल शादियों का करीब 30 प्रतिशत हैं. ये प्रथा आंध्र प्रदेश के उन ज़मींदार समुदायों में ज्यादा है, जो चाहते हैं कि उनकी धन संपदा परिवार में ही रहे- जैसे रेड्डीज और वेल्ललर्स. उत्तरी राज्यों के ब्राह्मणों के उलट यहां के ब्राह्मण भी कज़न-मैरिज करते हैं. वहीं कर्नाटक में लगभग 30 फ़ीसदी हिंदू शादियां सेकंड या फर्स्ट कज़न्स के बीच होती हैं.

भारतीय शादी (प्रतीकात्मक फोटो – आज तक)

भारत के पश्चिमी राज्यों में शादी को लेकर सोच ज्यादातर उत्तरी राज्यों जैसी है. कुछ स्टडीज के मुताबिक़ मुम्बई में क़रीब 7 फ़ीसद हिंदू शादियां कज़न्स से होती हैं. इन्हीं स्टडीज के मुताबिक़ मध्यप्रदेश में साल 2000 से पहले तक करीब एक तिहाई हिंदू शादियां कज़न-मैरिज के दायरे में हुईं. जबकि दिल्ली की बात करें तो यहां एक स्टडी के मुताबिक़ बहुत कम कज़न-मैरिज हुई हैं. 80 के दशक में ये आंकड़ा सिर्फ 0.1 फ़ीसद था.

पाकिस्तान

पाकिस्तान में कज़न मैरिज कानूनी रूप से वैध है और आम है. 2014 में खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के आंकड़ों के मुताबिक़ पाकिस्तान में करीब 66 फ़ीसद शादियां कज़न-मैरिज की केटेगरी में आती हैं. पाकिस्तान के कुछ इलाकों में ये भी सामने आया कि कज़न मैरिज का अनुपात ज़्यादा होने और रिपीटेड कज़न मैरिज के चलते, वहां जेनेटिक डिसऑर्डर्स ज्यादा देखे गए. (जहां-जहां भी जेनेटिक डिसऑर्डर्स, जींस वग़ैरह की बात आ रही है, मान के चलिए कि उसे सिर्फ़ छूकर हम इसलिए निकल रहे हैं क्यूंकि उसके लिए पूरा एक भाग डेडिकेटेड है.)

पाकिस्तानी विवाहित जोड़ा (प्रतीकात्मक फोटो – आज तक )

सामाजिक पहलू

दुनिया के जिन भी देशों में कज़न-मैरिज के खिलाफ़ क़ानून हैं, वहां इन कानूनों के पीछे मोटा-माटी दो वजहें मानी जा सकती हैं. पहला सामजिक व्यवस्था और दूसरा ऐसी शादियों से होने वाले बच्चों में जेनेटिक डिसऑर्डर्स की प्रॉब्लम. शादी-शुदा कज़न्स को भारत ही नहीं विदेशों में भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है. वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर रॉबर्ट बेंनेट कहते हैं कि शादीशुदा कज़न्स के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया एक तरह का भेदभाव है. बेनेट कहते हैं-

ये एक तरह का भेदभाव है जिसके बारे में कोई बात नहीं करता. ये कहना कि जब कोई ज्ञात नुक्सान नहीं है तो इस आधार पर शादी नहीं करनी चाहिए कि आपका पार्टनर से रिश्ता क्या है, मेरे लिए ये एक तरह का भेदभाव ही है.

स्लेट मैगज़ीन के विलियम सालेटन कज़न मैरिज को लेकर जेनेटिक स्टडीज़ करने वालों पर ‘पैदाइशी उदारवादिता’ का आरोप लगाते हैं. विलियम कज़न-मैरिज पर लगाए जाने वाले बैन के पक्षधर हैं. कहते हैं कि विज्ञान सभी नैतिक प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकता. कज़न-मैरिज को जेनेटिक ग्राउंड पर उचित नहीं ठहराया जा सकता. विलियम पूछते हैं-

क्या अंकल-कज़न मैरिज या इस तरह के रिश्तों में हार्ड-कोर सेक्सुअल रिलेशन को कानूनी तौर पर सही ठहराए जाने को स्वीकार किया जा सकता है, क्या बाद में जेनेटिक स्क्रीनिंग करवाकर होने वाली दिक्कतें दूर की जा सकती हैं?

द न्यूयॉर्क टाइम्स के एक आर्टिकल के मुताबिक़ कज़न कपल्स को उपहास और अवमानना का डर रहता है. जबकि लोगों के पास कज़न्स पर क्रश और चुम्बनों की सीक्रेट स्टोरीज़ हैं. ज्यादातर अमेरिकी कज़न मैरिज को परेशानी का सबब मानते हैं. इसी आर्टिकल में एक कहानी मिसेज़ स्प्रिंग की है, जिनकी 29 वर्षीय बेटी किम्बर्ली विंटर्स ने 37 साल के अपने चचेरे भाई शेन विंटर्स से शादी की थी. मिसेज़ स्प्रिंग कहती हैं कि जब उन्होंने अपनी बेटी की शादी के बारे में लोगों को बताया, तो वे चौंक गए. इसलिए वो अब इस बारे में लोगों को नहीं बताती. वे पेंसिल्वेनिया में रहती हैं और उन्हें चिंता है कि उनके पोते-पोतियों को उनके कज़न मां-बाप के कारण बेइज्जत ना होना पड़े.

यानी सामाजिक ताना-बाना चाहे भारत का हो या अमेरिका का, कज़न मैरिज को लेकर सहजता तो नहीं ही है. इन शादियों को लेकर मनाही के पीछे का कारण जेनेटिक डिसऑर्डर्स से लेकर अलग-अलग समुदायों में इसे लेकर कुछ धार्मिक नियम भी हैं. इन दोनों की चर्चा अगले दो एपिसोड्स में करेंगे.

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