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एंटीलिया केस में NIA ने जो 10 हज़ार पेज की चार्जशीट दाखिल की, वो क्या कहती है?

मुकेश अंबानी को धमकाने के केस में NIA ने चार्जशीट दायर की है. आज हम चार्जशीट की डिटेल्स पर आपसे बात करेंगे. इस केस से मालूम चलता है कि पुलिस के अंदर का अपराध तंत्र कितना मजबूत है. थोड़े से पैसे के लिए, या किसी से दुश्मनी निकालने के लिए, या प्रमोशन के लिए, ये किसी भी हद तक जा सकते हैं. किसी आतंकी की तरह बम का इंतजाम कर सकते हैं. कमिश्नकर के दफ्तर में बैठकर किसी की हत्या का प्लान रच सकते हैं. खुद को बचाने के लिए किसी निर्दोष को मारकर, खुदकुशी का नाम दे सकते हैं. गाड़ियों की फर्ज़ी नंबर प्लेट, फर्ज़ी सिम, सुपारी किलर सबका इतंजाम पुलिस वालों के पास है. शायद बहुत बार तो ये केस बाहर भी नहीं आते होंगे. यहां कातिल ही मुंसिफ होता है. अपराध करने वाले ही जांच करने वाले होते हैं. तो क्या ही किसी को मालूम चलेगा.

अंबानी केस से मालूम चलता है कि पुलिस वालों का पूरा गिरोह है, जो अपराध में या पकड़े जाने से बचाने में एक दूसरे के काम आता है. एनकाउंटर्स स्पेशलिस्ट की हमारे यहां महानता गढ़ी जाती है. फिल्मों में उन्हें हीरो की तरफ पेश किया जाता है. तमगे और इज्जत की लालसा में ये तथाकथित स्पेशलिस्ट एनकाउंटर्स के नंबर बढ़ाते जाते हैं. तारीफ में अखबारों में रिपोर्ट लिखी जाती हैं. लेकिन ऐसे नायकों की हकीकत कितनी घिनौनी हो सकती है, एंटिलिया केस में सामने आया है. तो केस की चार्जशीट में क्या लिखा गया है, हम उस पर आएंगे लेकिन पहले आपको रिमाइंड करा देते हैं कि मामला शुरू कहां से हुआ था.

मामला शुरू कहां से हुआ?

25 फरवरी 2021. इस दिन देश के सबसे अमीर आदमी के बंगले एंटिलिया के बाहर मुंबई में एक स्कॉर्पियो कार खड़ी मिली. इसमें जिलेटिन की 20 छड़ियां मिलीं. मानी विस्फोटक चीज़ें मिलीं. एक चिट्ठी भी थी. चिट्ठी में मुकेश अंबानी और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी थी. शुरू में लगा कि ये किसी आंतकी गुट का काम है. जैश-उल-हिंद नाम के गुट की तरफ से इसकी जिम्मेदारी ली गई. मामले की जांच मुंबई पुलिस ने असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे को दी. वाजे मुंबई क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के हेड थे. लेकिन जांच पर ही सवाल उठने लगे. 10 दिन में ही मामला पूरा पलट गया. जांच करने वाले अधिकारी सचिन वाजे की भूमिका पर संदेह होने लगा.

विस्फोटक जिस आदमी की गाड़ी में मिले थे, उसकी 5 मार्च को लाश मिली. मनसुख हिरेन उसका नाम था. उसकी सचिन वाजे से जान पहचान थी. परिवार ने वाजे पर आरोप लगाए. और फिर मार्च के दूसरे हफ्ते में ये मामला NIA यानी नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दिया गया. NIA ने सचिन वाजे को मुख्य आरोपी मानकर गिरफ्तार किया. मुंबई पुलिस के कई अधिकारियों, सिपाहियों की भी गिरफ्तारी हुई है. जांच के दौरान भी इस मामले में सूत्रों के हवाले से छन छनकर जानकारियां आती रही. और ऐसी जानकारियों के आधार पर केस का मुख्य आरोपी तो सचिन वाजे लग रहा था. लेकिन वो मुकेश अंबानी को क्यों धमकाना चाहता था, अंबानी से क्या फायदा लेना चाहता था, विस्फोटक कहां से लाया, मनसुख हिरेन की हत्या क्यों और कैसे की थी, ऐसे सवालों के जवाब नहीं मिल रहे थे. इनका जवाब मिलता है NIA की चार्जशीट में. जांच के बाद NIA ने करीब 10 हज़ार पेज की चार्जशीट दायर की है.

मुख्य आरोपी- सचिन वाजे

NIA ने सचिन वाजे को मुख्य आरोपी मानते हुए 17 केस लगाए हैं. इसमें मनसुख हिरेन की हत्या, आतंकवादी गतिविधि और UAPA के तहत आरोप, सबूतों को नष्ट करना आदि इत्यादि शामिल हैं. किस तरह से ये पूरा मामला प्लान हुआ था और कैसे अंजाम दिया गया, इसको सिलसिलेवार तरीके से चार्जशीट में बताया है. और चार्जशीट में उन सवालों के जवाब मिलते हैं जो आप और हम जानना चाहते हैं.
पहला सवाल तो ये कि सचिन वाजे ने ये पूरा खेल रचा क्यों. चार्जशीट के मुताबिक वाजे अमीरों को डराकर पैसे वसूलना चाहता था. साथ ही वो अपनी सुपरकॉप वाली छवि वापस हासिल करना चाहता था. आपको पता ही होगा कि एक फर्जी एनकाउंटर के केस में आरोपी होने की वजह सचिन वाजे निलंबित कर दिया गया था. 2020 में ही उसकी दोबारा बहाली हुई थी. तो अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक की जांच अपने हाथ में लेकर वो अपनी धाक फिर से जमाना चाहता था.

कैसे रची गई साजिश?

अब आते हैं इस मामले की प्लानिंग पर. प्लानिंग पर वाजे ने खूब मेहनत की थी. चार्जशीट के मुताबिक दक्षिण मुंबई के एक होटल में 100 रातों के लिए कमरा बुक कराया था. ये रूम किसी सुशांत खेमकर के नाम से फर्जी आईडी पर बुक हुआ था. वाजे ने इस रूम को सेफ हाउस के तौर पर इस्तेमाल किया था. उसने पहले से ही प्लान कर रखा था कि अपराध में गाड़ी कौनसी इस्तेमाल करनी है. घटना के एक हफ्ते पहले ही उसने मनसुख हिरेन से गाड़ी चोरी होने की शिकायत थाने में दर्ज करवा दी थी. ताकि जांच मनसुख हिरेन तक ना पहुंचे.

चार्जशीट के मुताबिक 25 फरवरी को वाजे ने खुद ही विस्फोटकों के साथ स्कॉर्पियो को अंबानी के बंगले एंटिलिया के बाहर खड़ा किया था. गाड़ी की नंबर प्लेट बदल दी थी. जब वाजे स्कॉर्पियो गाड़ी एंटिलिया के बाहर छोड़ने जा रहा था, तो उसके पीछे क्राइम इंटिलेंस यूनिट की गाड़ी भी थी, जिसमें वाजे का ही एक साथी था. उसको वाजे ने बताया था कि ये कोई सीक्रेट ऑपरेशन है. उसके साथी ने सरकारी गवाह बनकर उस रात का पूरा घटनाक्रम NIA को बताया है, जो चार्जशीट में दर्ज है.

फर्ज़ी आतंकी संगठन भी बना दिया

जब गाड़ी पार्क करने के सीसीटीवी वीडियो आए तो जिज्ञासा ये भी कि वो दोबारा गाड़ी के पास क्यों गया था. इसका जवाब चार्जशीट में है. वाजे को लगा था कि उसका पुलिस आईकार्ड गाड़ी में रह गया. आईकार्ड से वो पकड़ा जा सकता था. स्कॉर्पियो में आईकार्ड ढूंढने वो वापस आया था. विस्फोटक वाली गाड़ी छोड़ने के बाद वाजे को इसमें आतंकी एंगल लाना था. ताकि मामला असली लगे. इसके लिए टेलीग्राम ऐप पर जैश उल हिंद नाम के फर्ज़ी संगठन की तरफ से जिम्मेदारी ली गई. अब यहां मुंबई पुलिस के उस वक्त के कमिश्नर परमबीर सिंह का नाम भी आता है. साइबर एक्सपर्ट के ज़रिए आतंकी संगठन की पहचान पुख्ता करने में परमबीर सिंह का रोल माना गया है.

जांच के दौरान एक साइबर एक्सपर्ट ने NIA को बताया कि 9 मार्च को उसने परम बीर सिंह से मुलाकात की थी. मुलाकात क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के सिलसिले में हुई थी. इस दौरान साइबर एक्सपर्ट ने परमबीर को बताया था कि इजरायल दूतावास के बाहर हुए विस्फोट मामले में दिल्ली पुलिस की मदद कर रहा था. परमवीर सिंह को ये भी बताया गया कि स्पेशल सेल ने तिहाड़ जेल के एक फोन नंबर पर टेलीग्राम चैनल का पता लगाया था. चार्जशीट के मुताबिक साइबर परमबीर सिंह ने साइबर एक्सपर्ट से टेलीग्राम चैनल की रिपोर्ट में जैश उल हिंद का नाम जोड़ने के लिए कहा था. इसके लिए 5 लाख रुपये दिए गए थे.

मनसुख हिरेन की मौत का सच

अब आते हैं मनसुख हिरेन की हत्या मामले पर. चार्जशीट में लिखा है कि सचिन वाजे चाहता था कि विस्फोटक रखने और धमकी वाली चिट्ठी की जिम्मेदारी मनसुख हिरेन ले. वाजे ने हिरेन को लालच दिया कि वो उसकी ज़मानत करवा देगा, जल्दी छुड़वा लेगा. लेकिन मनसुख हिरेन नहीं माना. अब वाजे को लगा कि मनसुख सारी बात जानता है, वो इस केस में कमज़ोर कड़ी साबित हो सकता है.

अगर स्कॉर्पियो कार के आधार पर जांच हिरेन तक पहुंची तो वो पूरी बात उगल देगा. इसीलिए वाजे ने प्रदीप शर्मा और बाकी आरोपियों के साथ मनसुख हिरेन को खत्म करने का प्लान बनाया. और संतोष शैलार नाम के आदमी को पैसों का भरोसा देकर वाजे ने ये काम दिया. वाजे ने हिरेन को अपने दफ्तर बुलाया ताकि उसको मारने वाले चेहरा अच्छे से पहचान लें. सुनील माने नाम के पुलिस अधिकारी को भी इसमें शामिल किया गया. रिटायर्ड पुलिस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले प्रदीप शर्मा की भी वजे ने मदद ली. और सब के साथ मिलकर पूरी प्लानिंग रची गई.

मनसुख हिरेन की हत्या कर सचिन वाजे इसे खुदकुशी का रूप देना चाहता था. वाजे ने हिरेन को कहा कि वो लिखित में मीडियाा और अधिकारियों को शिकायत दे, कि लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियां उसको परेशान कर रही हैं. वाजे ने अपने दफ्तर में एक वकील को बुलाकर शिकायत का ड्राफ्ट तैयार करवाया था. इस चिट्ठी से ये जताने की कोशिश हुई कि मनसुख हिरेन मानसिक रूप से परेशान चला रहा था.

वाजे ने नए सिम और नए फोन खरीदे ताकि मनसुख हिरेन को फोन पर बुलाएं तो पीछे कोई सबूत ना रहे. 4 मार्च को पुलिस अधिकारी सुनील माने खुद को इंस्पेक्टर तावडे बताकर नई सिम से मनसुख हिरेन को बुलाता है. उसको सुपारी किलर को सौंपता है. ये लोग गाड़ी में मनसुख हिरेन का गला दबाकर उसकी हत्या करते हैं, और फिर एक नाले में शव को फेंक देते हैं. मनसुख हिरेन का शव 5 मार्च को मिला था. और हत्या करवाने के लिए वाजे 45 लाख रुपये दिए थे.

ये सारी जानकारी हमने NIA की चार्जशीट के आधार पर दी है. चार्जशीट पर कोर्ट में सुनवाई होनी है. अभी सचिन वाजे या बाकी पुलिसवाले आरोपी हैं, उन पर दोष साबित नहीं हुआ. और NIA की चार्जशीट में लिखी हर बात सही साबित हो जाए, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है. लेकिन इस पूरे मामले में लग रहा है कि ऊपर से नीचे तक कई बड़े अधिकारियों की मिलीभगत थी.


अम्बानी एंटीलिया केस में मुंबई के टॉप कॉप रहे प्रदीप शर्मा NIA के शिकंजे में कैसे आ गए?

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