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चीन ने ऐसी तबाही 100 सालों में नहीं देखी!

एक देश है. वहां नदियों में हर साल बाढ़ आती थी. लाखों लोग बेघर हो जाते थे. करोड़ों टन पैदावार बर्बाद हो जाती थी. इस सालाना बर्बादी से उबरने के लिए तय हुआ कि एक बांध बनाया जाए. बांध भी ऐसा-वैसा नहीं. 594 फुट ऊंचा और 7,700 फुट लंबा दुनिया का सबसे विशाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक बांध. इतना बड़ा कि इसका रिर्ज़वॉयर, यानी जलाशय एक हज़ार स्क्वैयर किलोमीटर बड़ा है.

इस बांध को बनने में करीब दो दशक लगे. लागत आई लगभग दो लाख करोड़ रुपये. इसकी वजह से करीब 13 लाख लोग विस्थापित हुए. 153 शहर और 1,300 गांव डूब गए. इतना कुछ करने के बाद भी बांध अपना बुनियादी वायदा नहीं निभा सका. न लोगों को बाढ़ से मुक्ति मिली. न बर्बादी ही रुकी.

ये बात है चीन की

वहां यैंगसे नाम की एक नदी है. तिब्बत से निकलकर दक्षिण दिशा में बहते हुए ये जाकर पूर्वी चाइना सी में मिल जाती है. करीब 6,300 किलोमीटर लंबी यैंगसे एशिया की सबसे बड़ी नदी और दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी है. इसी यैंगसे नदी पर बना है दुनिया का सबसे बड़ा पनबिजली बांध. इसका नाम है- थ्री गॉजेस डैम. गॉज का मतलब होता है, पहाड़ों के बीच की संकरी घाटी. चूंकि इस बांध से तीन घाटियों में पानी भरा, इसीलिए इसका नाम है थ्री गॉजेस डैम. ये तीन घाटियां हैं- क्यूतांग, वु ज़िया और शिलिंग.

Yangtze River
यैंगसे नदी, दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी है. (फोटो: गूगल मैप्स)

इस बांध की कहानी पर आगे बढ़ने से पहले हम इसके बनने की ज़रूरत पर थोड़ी बात कर लेते हैं. इसकी शुरुआत करते हैं बारिश के मौसम से. चीन में बारिश का मौसम अप्रैल से सितंबर के बीच होता है. बारिश की शुरुआत होती है दक्षिणी चीन में. बारिश की शुरुआत के कुछ ही दिनों में बाढ़ की ख़बरें आने लगती हैं. बाढ़ लाने का मुख्य ज़रिया बनती हैं यैंगसे और उसकी सहायक नदियां. अब ये जो यैंगसे का रीवर बेसिन इलाका है, वो समझिए कि चीन के अनाज की टोकरी है. देश के कुल धान पैदावार का लगभग 70 फीसदी हिस्सा इसी इलाके से आता है. बाढ़ के कारण न केवल लोग मरते और बेघर होते थे, बल्कि पूरे चीन में अनाज की किल्लत हो जाती थी.

संसद के एक तिहाई लोग डैम के विरोध में थे

इन्हीं वजहों से चीन में बहुत पहले से यैंगसे नदी पर एक विशाल बांध बनवाने की बात चल रही थी. रिपब्लिक ऑफ चाइना के फाउंडर सन यात सेन से लेकर च्यांग काई शेक और फिर माओ ने भी इस बांध को बनवाने के सपने देखे. माओ ने तो 1956 में यैंगसे नदी में तैरते हुए ‘स्मूद लेक’ नाम की एक कविता भी लिख दी थी.

Mao Zedong Poem
माओ की कविता तो पढ़ लीजिए.

सरकार के मुखिया भले इस बांध को लेकर बड़े उत्सुक हों, मगर चीन की एक बड़ी आबादी और एक्सपर्ट्स इस योजना का विरोध करते आए थे. इन आपत्तियों के बावजूद 1991 में चीनी संसद ने यैंगसे बांध परियोजना पर मुहर लगा दी. मगर बांध से जुड़ी आशंकाओं की गंभीरता देखिए कि आमतौर पर एकसाथ कदमताल करने वाले चीनी सांसदों में से करीब एक तिहाई ने इस योजना पर हामी नहीं भरी. इसके बावजूद बांध प्रॉजेक्ट फाइनल हो गया. सरकार ने कहा कि एक बार ये बांध बन जाए, तो लाखों लोगों को विनाशक बाढ़ से मुक्ति मिलेगी. इसी वायदे के साथ साल 1994 में शुरू हुआ थ्री गॉजेस डैम का निर्माण. ठीक उस जगह पर, जहां यैंगसे नदी अपना पहाड़ी रास्ता छोड़कर मैदानों में प्रवेश करती है.

Chiang Kai Shek And Mao Zedong
च्यांग काई-शेक और माओ त्से-तुंग (फोटो: एएफपी)

दुनिया का सबसे विवादित डैम

करीब 26 हज़ार लोगों की मेहनत से 12 साल बाद 2009 में ये बांध बनकर तैयार हुआ. इस दौरान इसपर इतनी कन्ट्रोवर्सी हुई कि इसे दुनिया के सबसे विवादित डैम का ओहदा मिला. मगर चीन की सरकार को इसपर बड़ा गर्व था. उनके लिए ये राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का एक महान प्रतीक था.

चीन की सरकार जहां इसे अपनी महान उपलब्धि बता रही थी, वहीं जानकारों को इस बांध में दूरदर्शिता की कमी नज़र आ रही थी. इसकी बड़ी वजह है इस बांध का भूकंप प्रभावित हॉट ज़ोन में बना होना. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस विशाल बांध के कारण इस इलाके में ज़मीन की प्लेट्स अस्थिर हो रही हैं. चाइना अर्थक्वैक अडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़े भी इस आशंका की पुष्टि करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2000 से मई 2003 के बीच इस इलाके में भूकंप के 94 झटके महसूस हुए. वहीं बांध का जलाशय भरे जाने के बाद इस इलाके में करीब साढ़े तीन हज़ार झटके रेकॉर्ड किए गए. इससे इतर गाद रोकने और इकोलॉजिकल सिस्टम को पहुंचने वाले पर्यावरणीय नुकसान अलग हैं.

Three Gorges Dam 1996
थ्री गॉजेस डैम का निर्माण 1994 में शुरू हुआ था. (फोटो: एएफपी)

बांध के कॉन्सेप्ट में एक और भी बड़ी दिक्कत है. ये आम बारिश के लिए तो ठीक था. मगर जब बारिश अपने पिछले रेकॉर्ड तोड़ दे, तब के लिए ये उतना कारगर नहीं था. इस स्थिति में क्या होगा, इसके लिए हम आपको बताते हैं एक गणना. ये गणना है चीन के जाने-माने जियोलॉजिस्ट फैन शियाओ की. फैन के मुताबिक, अगर 1935 या 1954 या 1998 जैसी विकराल बाढ़ आए तो इस नदी के भीतर केवल दो महीनों में ही 244 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी बह सकता है.

ये कितना पानी है?

इतना कि इज़रायल के पास है न डेड सी. उससे दोगुना पानी. पता है, थ्री गॉजेस डैम के जलाशय में इस पानी का कितना हिस्सा समा सकेगा? केवल नौ फीसद. इन्हीं गणनाओं के कारण कुछ विशेषज्ञ इस बांध को पानी से भरे बड़े टब को छोटे से कप में बांधने की कोशिश भी कहते हैं. उनका कहना है कि दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी की लाई बाढ़ को मात्र एक बांध से रोकना नामुमकिन है.

एक और भी दिक्कत है इस बांध की. बारिश के मौसम में अगर नियमित पानी बरसे, तो आप बांध में कितना पानी रोक सकेंगे? आपको पुराना पानी छोड़ना होगा. इतना पानी छोड़ने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति और ज़्यादा ख़तरनाक हो जाएगी. वैसे ही, जैसे इस साल हो रही है.

Three Gorges Dam
चीन के लिए थ्री गॉजेस डैम राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का एक महान प्रतीक था. (फोटो: एपी )

चीन में इस बार की बाढ़ ने पिछले कई दशकों के रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं. मई से मूसलाधार बारिश शुरू हुई. यैंगसे की तकरीबन 400 छोटी-बड़ी नदियां ओवरफ्लो हो गईं. जून का महीना आते-आते कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए. बाढ़ के बीच भी पानी बरसना जारी रहा. आंकड़ों के मुताबिक, ये पिछले 60 बरसों में सबसे गीला जून था. चीन की सरकार ने कहा, ये वन्स इन अ सेंचुरी फ्लड है.

क्या हुआ इस बाढ़ का नतीजा?

अकेले यैंगसे नदी के इलाके में ही करीब छह करोड़ लोग इसकी चपेट में आए हैं. लगभग डेढ़ करोड़ एकड़ की फसल ख़राब हो गई है. अनाज का नुकसान बस इतना नहीं है. चूंकि अगस्त महीने में भी खेत पानी से डूबे हैं, ऐसे में फसल बुआई का अगला सीज़न भी बर्बाद होने की आशंका है. चीन की इमरजेंसी मैनेजमेंट मिनिस्ट्री के मुताबिक, इस बाढ़ से अब तक 21 बिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है.

फसल के नुकसान का मतलब है अन्न संकट. कोरोना के कारण पहले ही चीन की अर्थव्यवस्था सदमे में है. ऐसे में अनाज का ये नुकसान उसके लिए बहुत बुरी ख़बर है. चीन में पिछले कुछ समय से अनाज की किल्लत है. इसी वजह से चीन को अनाज का अपना आयात बढ़ाना पड़ा. जनवरी से जून 2020 के बीच चीन ने करीब 61 मिलियन टन अनाज खरीदा बाहर से. 2019 के मुकाबले ये 21 फीसदी ज़्यादा आयात है.

आने वाले दिनों में चीन की अनाज आयात पर निर्भरता बढ़ जाएगी. यहां पूरे अगस्त में मूसलाधार बारिश का अनुमान है. ऐसे में उत्तरी चीन में बहने वाली येलो रीवर भी कहर ढाएगी. उस इलाके में गेहूं, सोयाबीन और मक्के की फसल होती है. अंदेशा है कि बाढ़ के कारण कहीं ये फसलें भी न बह जाएं. अगर ऐसा हुआ, तो इंसानों के साथ-साथ मवेशीपालन पर भी बहुत गंभीर असर पड़ेगा. चीन में सबसे ज़्यादा सूअर पाले जाते हैं. इन सूअरों का मुख्य भोजन है मक्का. ‘फॉल आर्मीवर्म’ नाम के एक कीड़े की वजह वहां मक्के की पैदावार पहले से ही प्रभावित है. बाज़ार में मक्के की आमद काफी कम है. इसी वजह से मक्के की कीमतें पिछले पांच बरसों में सबसे ज़्यादा हैं.

Fall Armyworm
फॉल आर्मीवर्म नाम क कीड़े ने मक्के की पैदावार प्रभावित की है. (फोटो: एएफपी)

अगर बाढ़ के कारण पैदावार को और नुकसान हुआ, तो आम मवेशीपालक इस महंगाई का बोझ कैसे उठा सकेंगे?

चीन के लिए अनाज आयात करने का विकल्प भी सुरक्षित नहीं रह गया है. चीन सबसे ज़्यादा अनाज खरीदता है अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान जैसे देशों से. बीते कुछ महीनों से इन देशों के साथ चीन का तनाव बढ़ गया है. एक अंदेशा ये है कि बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका जैसे देश या तो चीन को जाने वाला अनाज निर्यात काफी घटा दें. या उसपर भारी आयात शुल्क लगा दें. इसके अलावा एक स्थिति कोरोना वायरस के कारण भी बनी है. कई देशों ने आपदा के कारण पैदा हुआ आपातकाल को देखते हुए अनाज निर्यात पर रोक लगा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये सारे हालात चीन के खाद्य संकट को बढ़ा सकते हैं.

चीन की इस मौजूदा आपदा में सबसे ज़्यादा निशाने पर आया थ्री गॉजेस डैम. जून के आख़िर से अब तक कई बार इस बांध के जलाशय से पानी छोड़ा जा चुका है. चीन की सोशल मीडिया पर थ्री गॉजेस डैम हॉट टॉपिक बना हुआ है. लोग कह रहे हैं कि पानी छोड़ने के कारण बाढ़ की स्थिति और भीषण हुई. उनका कहना है कि इतना ख़र्च करके, इतने इंसानों का घर-बार छीनकर उन्हें विस्थापित करने के बाद हाथ क्या आया? यहां बनने वाली 22 हज़ार मेगावॉट से ज़्यादा बिजली? मगर बाढ़ रोकने का जो प्राइमरी मकसद तय हुआ था, वो तो पूरा नहीं हो सका है.


विडियो- नील नदी पर डैम को लेकर लड़ने को तैयार हैं इथियोपिया, मिस्र और सूडान?

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