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क्या लेटर और पार्सल के जरिए फैल सकता है कोरोना वायरस?

चीन ने कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन संक्रमण को लेकर एक ऐसा दावा किया है, जिसने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. दरअसल, हाल ही में चीन की राजधानी बीजिंग में एक 26 साल की महिला ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित पाई गई. इसके बाद बीजिंग स्थित सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CCDC) ने कहा कि जो महिला वायरस से संक्रमित पाई गई है, उसने ना तो किसी दूसरे देश की यात्रा की और ना ही वो बीजिंग शहर से बाहर गई. संस्थान ने आशंका जताई कि हो सकता है महिला को ओमिक्रॉन का संक्रमण कनाडा से आए एक लेटर से हुआ है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CCDC के अधिकारियों ने कहा कि महिला के पास 7 जनवरी को एक लेटर आया था. ये अमेरिका और हांग कांग के रास्ते बीजिंग पहुंचा. अधिकारियों का कहना है कि महिला ने इसे खोला जिससे उसके संक्रमित होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता. अधिकारियों का दावा है कि उन्हें लेटर पर कोरोना वायरस के ट्रेस मिले हैं. जीनोम सीक्वेंसिंग करने पर पता चला कि ये वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट है.

कनाडा के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चीन आरोपों के पीछे कोई साइंटिफिक आधार नहीं है.
कनाडा के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चीन आरोपों के पीछे कोई साइंटिफिक आधार नहीं है.

दूसरी तरफ. कनाडा के स्वास्थ्य मंत्री वेस डुक्लॉस समेत वहां की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने चीन के इन दावों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि लेटर के जरिए संक्रमण फैलने की आशंका बहुत कम है. वेस डुक्लॉस ने कहा कि चीन के आरोपों में किसी भी स्तर पर साइंटिफिक आधार नहीं है. वहीं कनाडा की चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉक्टर सुप्रिया शर्मा ने मीडिया को बताया,

“लेटर के जरिए संक्रमण होना लगभग असंभव है. लेटर इतनी दूर गया. ये संभव ही नहीं है कि लेटर पर वायरस मौजूद रहा हो और फिर उसने किसी को संक्रमित किया हो.”

चीन के इन दावों के बाद कनाडा की पब्लिक हेल्थ एजेंसी की तरफ से भी एक बयान जारी किया गया. इसमें कहा गया कि सतह के जरिए कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलने का खतरा बहुत कम है.

एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन के दावे में दम नहीं है. हमने अमेरिका में काम करने वाले वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर उज्ज्वल राठौर से बात की. उन्होंने हमें बताया,

“चीन के इस दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता. सतह से कोरोना वायरस का संक्रमण ना के बराबर है. सतहों पर वायरस सर्वाइव ही नहीं कर पाता. हालांकि, वायरस का RNA काफी समय तक बना रहता है, लेकिन उसकी संक्रमण फैलाने की क्षमता थोड़ी ही देर में खत्म हो जाती है. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी बीच पर कोई गुजरा हो और उसके पैरों के निशान पड़ गए हों. ये निशान काफी देर तक बने रहेंगे, उस व्यक्ति के जाने के बाद भी.”

डॉक्टर उज्ज्वल राठौर ने हमें आगे बताया,

“किसी सतह से कोरोना वायरस का संक्रमण तब हो सकता है, जब कोई ऐसी जगह मौजूद हो, जहां ढेर सारे लोग संक्रमित हों और किसी एक निश्चित जगह पर लगातार वायरस ड्रॉपलेट्स गिर रही हों. फिर कोई स्वस्थ व्यक्ति उस जगह को छू ले और फिर अपना हाथ नाक या मुंह में लगा ले. लेकिन अगर लोग सैनिटाइजर का प्रयोग कर रहे हैं और मास्क लगाए हुए हैं, तो ऐसी जगहों पर भी सतह से संक्रमण की आशंका बहुत कम हो जाती है. कोरोना संक्रमण का मुख्य जरिया सांस ही है.”

चीन के दावों पर सवाल अमेरिका में ही काम करने वाले एक और वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव भी उठाते हैं. उन्होंने इस संबंध में हाल ही में हुई एक स्टडी का हवाला दिया. ये स्टडी ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के एरोसॉल रिसर्च सेंटर की तरफ से की गई है. डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव ने हमें बताया,

“ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस के सबसे पहले वेरिएंट, फिर आए डेल्टा और अब ओमिक्रॉन, तीनों पर ही एक रिसर्च की है. रिसर्च में पाया गया है कि वायरस का कोई भी वेरिएंट हवा में आने के 20 मिनट के बाद 90 फीसदी तक निष्क्रिय हो जाता है. शुरू के पांच मिनट में ये इतना निष्क्रिय हो जाता है कि किसी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित करने की क्षमता खो देता है.”

डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव ने आगे बताया कि कोरोना वायरस को फेफड़ों के अंदर फैलने का एकदम अनुकूल माहौल मिलता है. क्योंकि फेफड़ों के अंदर कॉर्बन डाईऑक्साइड के मौजूद होने से pH लेवल कम होता है. उन्होंने कहा,

“लेकिन जैसे ही वायरस बाहर हवा में आता है, एक तो वातावरण में सूखापन बढ़ जाता है और फिर pH लेवल भी अधिक हो जाता है, जिसकी वजह से ये ज्यादा देर तक एक्टिव नहीं रहता.”

डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव ने चीन के दावों पर ये कहते हुए सवाल उठाए कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत से ही चीन ने भ्रामक जानकारियां दी हैं और इस दावे की भी स्वतंत्र तौर पर जांच नहीं हुई है.

वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव अमेरिका में काम करते हैं. (फोटो: विशेष इंतजाम)
वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव अमेरिका में काम करते हैं. (फोटो: विशेष इंतजाम)

दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में वायरोलॉजी की प्रोफेसर डॉक्टर एकता गुप्ता भी मानती हैं कि सतह के जरिए कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका लगभग असंभव है. उन्होंने हमें बताया,

“बहुत सारी स्टडीज हो चुकी हैं जिनमें ये सामने आया है कि कोरोना वायरस ड्रॉपलेट्स के जरिए इंसानी शरीर से बाहर निकलता है. जाहिर है कि ओमिक्रॉन भी कोरोना वायरस का ही एक वेरिएंट है, तो ये भी इसी तरह से बाहर आता है. लेकिन बाहर आकर सतहों के जरिए संक्रमण फैलने की आशंका लगभग असंभव है. किसी ने बहुत ज्यादा म्यूकस थूका है, तो उसमें वायरस जरूर ज्यादा से ज्यादा दो दिन तक जिंदा रह सकता है. लेकिन साफ-सफाई के चलते वो भी नष्ट हो जाता है. ऐसे में किसी लेटर के जरिए, जो कई दिनों के ट्रांसपोर्ट के जरिए कहीं पहुंचा हो, उससे संक्रमण की आशंका ना के बराबर है.”

यूनाइडेट किंगडम की प्रतिष्ठित नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) से जुड़े डॉक्टर अविरल वत्स से भी हमने बात की. उन्होंने हमें बताया कि सतह के जरिए कोरोना वायरस के संक्रमण की घटनाएं यदा-कदा ही होती हैं. खासकर जब हम कोरोना वायरस के कुल मामलों के संदर्भ में इस तरह के संक्रमण के मामलों की संख्या को देखते हैं. अविरल वत्स ने कहा,

“सतह से संक्रमण की बात को पूरी तरह से नहीं नकारा जा सकता, लेकिन एक लेटर के जरिए दूसरे देश में ऐसा होने की बाद लगभग असंभव लगती है. (हालांकि) ये अच्छी बात है चीन कोविड को लेकर बहुत चौकन्ना है और कोई भी मामला सामने आने पर वहां बहुत कड़े निर्णय लिए जाते हैं. इसकी वजह से मामले भी कम रहते हैं और मौतें भी कम रही हैं.”

चीन और कनाडा के खराब रिश्ते

चीन की तरफ ये दावा तब किया गया है, जब बीते समय में कनाडा और उसके संबंध लगातार खराब हुए हैं. साल 2018 में कनाडा में चीनी नागरिक मेंग वांगझोऊ को गिरफ्तार किया गया था. ये गिरफ्तारी अमेरिका के कहने पर हुई थी. मेंग उस समय चीन की टेक्नॉलजी एक्जूक्यूटिव थीं. अमेरिका ने उनके ऊपर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. इसे लेकर चीन और कनाडा के बीच के रिश्तों में बहुत खटास आई. बाद में मेंग को चीन वापस लौटने की मंजूरी मिली. उन्हें फिर हुवेई प्रांत का मुख्य वित्तीय अधिकारी नियुक्त किया गया. मेंग की गिरफ्तारी के जवाब में चीन में भी कनाडा के कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

पिछले साल फरवरी में कनाडा की संसद ने चीन में उईगर मुसलमानों के साथ किए जा रहे व्यवहार को नरसंहार घोषित कर दिया था. इसके बाद जून में खबर आई कि कनाडा के एक रेजिडेंशियल स्कूल में सैकड़ों कब्रें मिली हैं. इन कब्रों पर मृतकों के नाम नहीं लिखे थे. चीन ने मांग करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को इसकी जांच करनी चाहिए.

मेंग वांगझोऊ को साल 2018 में गिरफ्तार किया गया था. (फोटो: एपी)
मेंग वांगझोऊ को साल 2018 में गिरफ्तार किया गया था. (फोटो: एपी)

एक महीने पहले यानी पिछले साल दिसंबर में कनाडा ने चीन में आयोजित होने जा रहे विंटर ओलंपिक खेलों के कूटनीतिक बहिष्कार की घोषणा की थी. कनाडा की तरफ से कहा गया कि 4 फरवरी से आयोजित होने वाले इन खेलों में कनाडा के एथलीट्स तो हिस्सा लेंगे, लेकिन देश के सरकारी अधिकारी शामिल नहीं होंगे. चीन ने इस कूटनीतिक बहिष्कार को महज एक तमाशा बताया.

इस बीच कनाडा से आए लेटर से बीजिंग की महिला के संक्रमित होने के चीन के दावों को कनाडा के विपक्षी नेता एरिन ओ टूले ने हास्यास्पद करार दिया है. उन्होंने कहा कि चीन की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इससे पहले साल 2020 में भी चीन ने कुछ ऐसा ही दावा किया था. कहा था कि उसने दूसरे देशों से जो ‘फ्रोजेन फूड आइटम्स’ आयात किए हैं, उनकी सतह पर कोरोना वायरस के सबूत मिले हैं. ऐसा कहते हुए चीन ने अपने देश के लोगों को इन फूड आइटम्स को खोलने में सावधानी बरतने को कहा था. हालांकि, तब भी एक्सपर्ट्स ने इस दावे को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस का संक्रमण इस तरह से नहीं फैलता.


वीडियो- कोरोना संक्रमित लोगों का आईसोलेशन पीरियड घटाना कितना खतरनाक है?

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