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छत्तीसगढ़: 14,580 शिक्षकों की भर्ती निकले ढाई साल हो गया, जॉइनिंग का मामला कहां अटका है?

कुछ सरकारी विभागों की भर्ती परीक्षाओं का तो अब लगभग ये कायदा हो गया है कि हाई कोर्ट – सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे बिना भर्ती पूरी नहीं हो पाती. अधिकतर मामलों में इसके पीछे सरकारी विभागों की कथित लापरवाही, अनियमितता या फिर धांधली जिम्मेदार होती है. जिसका सीधा-सीधा खामियाजा उन अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ता है जो सालों-साल मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं. पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं. 2019 में निकली छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती का भी यही हाल है. कथित विभागीय गलतियों की वजह से भर्ती प्रक्रिया रुकी पड़ी है. लगभग आधे अभ्यर्थियों को जॉइनिंग मिली है. बाकी अभी भी कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्च 2019 में 14,580 पदों पर शिक्षकों की सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. अगस्त में परीक्षा हुई, जिसमें लगभग तीन लाख अभ्यर्थी शामिल हुए. नवंबर में रिजल्ट आए. इसके बाद मेरिट लिस्ट वेरिफिकेशन का काम शुरू हुआ जो कि फरवरी 2020 तक चला. यहां तक सब ठीक रहा. अब बस नियुक्ति आदेश और जॉइनिंग बाकी रह गई थी. लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी अब तक भर्ती पूरी नहीं हो सकी है. करीब 7 हजार अभ्यर्थियों को ही जॉइनिंग मिल सकी है. मामला हाई कोर्ट में लटका हुआ है. अभ्यर्थियों का आरोप है कि विभाग की ओर से अनियमितताएं की गईं. भर्ती नियम में स्पष्ट लिखा है कि भर्ती परीक्षा परिणाम के बाद का कोई भी दस्तावेज मान्य नहीं होगा. लेकिन फिर भी विभाग ने कुछ लोगों को पात्र कर दिया.

छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित बीएड संघ के अध्यक्ष दाउद खान कहते कहते हैं,

विभाग की ओर से इतनी अनियमितता हुई है कि पूछिए मत. किसी नियम को एक संभाग के अधिकारी मान रहे हैं लेकिन दूसरे संभाग के अधिकारी उसी नियम को नहीं मान रहे. जिस अनियमितता की याचिका पर हाई कोर्ट ने रोक लगाई है, वो टीईटी के रिजल्ट का मैटर था. नियम ये है कि व्यापम शिक्षक भर्ती परीक्षा के एग्जाम का रिजल्ट आने तक आपके पास सारी अर्हताएं आ जानी चाहिए. लेकिन टीईटी का रिजल्ट आया शिक्षक भर्ती का रिजल्ट आने के बीस दिन बाद.

इसकी वजह से कई अभ्यर्थियों को कई जिलों में पात्र किया गया और कई जिलों में अपात्र कर दिया गया. जिस अभ्यर्थी ने याचिका लगाई, उसके जिले ने उसे अपात्र कर दिया था. लेकिन उसके कई साथियों को दूसरे जिलों में पात्र कर दिया गया. इसी को लेकर वह कोर्ट गया. विभाग ने इस पर तुरंत एक्शन लेते हुए जिनको पात्र किया गया था, उन्हें अपात्र कर दिया. लेकिन इसके बावजूद स्टे अभी तक हटा नहीं.

छत्तीसगढ़ में कुल पांच संभाग हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि अभी तक जिन लोगों को नियुक्ति पत्र मिला है, वो इनमें से तीन संभाग रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के हैं. बाकी बस्तर और सरगुजा संभाग में अब तक एक भी नियुक्ति नहीं हुई है. जबकि यहीं के स्कूलों में शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी है.

जॉइनिंग लेटर का इंतजार कर रहे उत्तम वर्मा बताते हैं,

हम लोगों को बस जॉइनिंग लेटर मिलना बाकी है. हमारी साथी जो दूसरे संभाग के हैं, वो जॉइन भी कर चुके हैं. मैं बस्तर संभाग का हूं. मेरा नाम फर्स्ट मेरिट लिस्ट में था. लेकिन अभी तक बस्तर, सरगुजा संभाग में एक भी नियुक्ति नहीं हुई है. जबकि शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि सबसे पहले ऐसे स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हो जो स्कूल एकल शिक्षक वाले हैं या शिक्षक विहीन हैं.

कितनी बड़ी विडंबना है कि बस्तर और सरगुजा संभाग में ही सबसे ज्यादा एकल शिक्षक और शिक्षक विहीन विद्यालय हैं. लेकिन यहां अभी एक भी पद नहीं भरा गया है. 14 जिलों में भर्ती शुरू हुई है जबकि 13 जिले छूटे हुए हैं. साढ़े छह हजार के आसपास ही लोगों की नियुक्ति हुई है. बाकी करीब आठ हजार पद अभी भी खाली है. विभाग से पूछने पर यही बताया जाता है कि जब तक हाईकोर्ट से केस खत्म नहीं होगा, तब तक कुछ नहीं हो सकता.

शिक्षकों की नियुक्ति में हो रही लेटलतीफी और दिक्कतों को लेकर दी लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सवाल पूछा था. छह महीने पहले दी लल्लनटॉप से भूपेश बघेल ने कहा था कि जॉइनिंग चल रही है, बहुत जल्दी प्रोसेस पूरा कर लिया जाएगा. आप चिंता न करिए. उन्होंने कहा,

जॉइनिंग चल रही है. कुछ लोग बचे हुए हैं, उनकी भी हो रही है. बहुत जल्दी प्रोसेस पूरा हो जाएगा. उसकी चिंता आप न करिए. लॉकडाउन है. स्कूल बंद हैं. राज्य सरकार के राजस्व में भारी कमी आई है. इसके बावजूद हम 14580 शिक्षक शुरू किए. जो 1998 के बाद छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश में नहीं हुआ था. हमारी सरकार ने उसे शुरू किया.


लेकिन अप्रैल से अक्टूबर आ गया. भर्ती प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है. हां, समय-समय पर राज्य सरकार शिक्षक भर्ती कराने के लिए अपनी पीठ खुद जरूर थपथपाती रहती है. उत्तम वर्मा कहते हैं,

हम लोग पीड़ित हैं. मानसिक रूप से परेशान हैं. हम लोगों की समझ में ही नहीं आ रहा है कि क्या करें. प्राइवेट सेक्टर में जाएं तो पता नहीं, कब छोड़ना पड़ जाए. सरकार की तरफ से भी कुछ नहीं किया जा रहा है. विभाग गलती करता है. पात्र को अपात्र करता है और अपात्र को पात्र करता है. लेकिन सजा हम लोग भुगतते हैं. भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुखिया हैं. लेकिन उनकी तरफ से कोई सकरात्मक जवाब नहीं आया. वे कुछ बोल ही नहीं रहे हैं. बस आए दिन न्यूजपेपर में आता रहता है कि हम 14580 की भर्ती कर दिए हैं. कई बार वह बोल चुके हैं. दूसरे राज्यों में भी जाकर बोल चुके हैं. नियुक्ति पूरी करके बोलते तो शोभा भी देता.

अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार कोर्ट में कायदे से पैरवी नहीं कर रही. कई बार ऐसा होता है जब सरकारी वकील कोर्ट में जाते ही नहीं है. इसी वजह से तारीख पर तारीख मिलती जा रही है. खाली सुनवाई बस होती है. कोई रिजल्ट नहीं आ रहा है. शिक्षक भर्ती पर सरकार का रुख जानने के लिए हमने विभाग के अधिकारियों और राज्य के शिक्षा मंत्री से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. अगर सरकार की तरफ से कोई जवाब आता है तो हम उसे आगे अपडेट कर देंगे.


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