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ठाकरे ने घोड़ा मेला के लिए गुजरात की फर्म का 321 करोड़ का ठेका कैंसल किया

महाराष्ट्र में हर साल दिसंबर के महीने में घोड़ों का एक मेला लगता है. इसका नाम है- सारंगखेड़ा चेतक महोत्सव. ये भारत के सबसे पुराने घोड़ा बाज़ारों में से एक माना जाता है. महाराष्ट्र में बनी उद्धव ठाकरे सरकार के शुरुआती फैसलों में एक इस मेले से जुड़ा है.

ये करीब 300 साल पुराना मेला बताया जाता है. कहानी है कि छत्रपति शिवाजी भी इस मेले में आए थे कभी. अपनी सेना के घुड़सवार लड़ाकों के लिए बेहतरीन घोड़े लेने. एक-से-एक बेहतरीन घोड़े लाए जाते थे इस मेले में. दूर-दराज़ के इलाकों से, यहां तक कि बलूचिस्तान और अरब से भी लोग यहां घोड़े खरीदने आते थे. अब वो सेनाएं नहीं हैं. न ही अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में घोड़ों से हमारा बहुत साबका ही पड़ता है. मगर फिर भी ये मेला लगता है हर साल. अब भी ख़ूब सारे अच्छी-अच्छी क्वॉलिटी वाले घोड़े पहुंचते हैं यहां. अब भी इस मेले में घोड़ों की ख़रीद-बिक्री होती है.

तीन साल पहले इस मेले के आयोजन को लेकर फडणवीस सरकार के कार्यकाल में एक डील हुई. 321 करोड़ रुपये की. इस डील के स्वभाव पर काफी सवाल उठे. न केवल विपक्ष ने उठाए, बल्कि सरकार के अपने ही विभागों से भी आपत्तियां आईं. पैसों के गड़बड़झाले और नियमों की अनदेखी की शिकायतें जुड़ी थीं इस डील से. इसके लपेटे में फडणवीस सरकार के एक मंत्री- जयकुमार रावल पर उंगलियां भी उठीं. अब उद्धव ठाकरे की सरकार में पार्टनर हैं NCP और कांग्रेस भी हैं. जिन्होंने विपक्ष में रहते हुए इस डील और जयकुमार रावल की भूमिका पर सवाल उठाया था.

इस बारे में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने विस्तार से ख़बर छापी है. इसके मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट का ब्योरा यूं है-

– ये साइन हुआ 26 दिसंबर, 2017 को. 
– कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ महाराष्ट्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (MTDC) लिमिटेड और अहमदाबाद की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ‘लल्लूजी ऐंड सन्स’ के बीच. 
– इसके तहत, कंपनी को सारंगखेड़ा चेतक महोत्सव के आयोजन का जिम्मा उठाना था.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, उद्धव ठाकरे के शपथ लेने वाले दिन की ही बात है. मुख्य सचिव अजय मेहता ने निर्देश जारी किया. इसमें महाराष्ट्र पर्यटन विभाग से कहा गया था कि वो तत्काल ही ये कॉन्ट्रैक्ट रद्द करे. महाराष्ट्र के अंडर सेक्रटरी (टूरिज़म) एस लंभाते ने इस बारे में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया-

ये जो करार था, वो सरकार की मंजूरी के बिना पास हुआ था. चूंकि ये केंद्र के मानदंडों से भी मेल नहीं खाता, ऐसे में इसमें गंभीर वित्तीय अनियमितता हुई है.

MTDC और लल्लूजी ऐंड सन्स कैसे जुड़े इस महोत्सव से?
MTDC इस महोत्सव के साथ जुड़ा दिसंबर 2016 में. मकसद था, इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना. फिर नवंबर 2017 में MTDC के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने तय किया कि इस महोत्सव का और बड़े स्तर पर आयोजन किया जाए. इस समय MTDC के मुखिया थे जयकुमार रावल. जो कि फडणवीस सरकार में पर्यटन मंत्री भी थे. अगले महीने, यानी दिसंबर में महोत्सव होना था. MTDC ने तय किया कि इसके आयोजन का जिम्मा एक इवेंट कंपनी को दिया जाए. इसके लिए फटाफट एक टेंडर निकाला गया. और यूं टेंडर की प्रक्रिया के मार्फ़त फिर ‘लल्लूजी ऐंड सन्स’ को चुना गया.

समझौते की खास बातें
MTDC और ‘लालूजी ऐंड सन्स’ के बीच हुए समझौते के मुताबिक-

– 2017-18 से 2026-27 के बीच इस महोत्सव के आयोजन में 321 करोड़ रुपये ख़र्च किए जाने थे.
– इसके अलावा MTDC ने 75.45 करोड़ रुपये की भी एक रकम डील में रखी थी. वाइबिलिटी गैप फंड (VGF) के तौर पर. 
– VGF के लिए MTDC ने जो कमिटमेंट किया, उसकी पहले से कोई मंज़ूरी नहीं थी.
– MTDC ने करार करने के बाद फाइनैंस विभाग को एक फाइल भेजी. इसमें VGF वाली रकम पर मंज़ूरी मांगी गई थी.

आपत्ति किस बात पर आई?
सितंबर 2018 की बात है. ऑफिस ऑफ प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने एक आपत्ति उठाई. आरोप लगाया कि लालूजी ऐंड सन्स को अतिरिक्त पैसा दिया गया. फिर मई 2019 में महाराष्ट्र के योजना विभाग ने भी इस प्रॉजेक्ट पर आपत्ति उठा दी. आपत्ति का सबसे बड़ा आधार था 75.45 करोड़ रुपये का VGF. विभाग का कहना था कि महाराष्ट्र में ऐसी कोई पर्यटन नीति ही नहीं है, जो कि इस तरह VGF दिए जाने की मंजूरी दे. वो भी बिना पहले से इजाज़त लिए. विभाग ने कहा कि बिना राज्य सरकार/कैबिनेट की मंजूरी के सरकार की ओर से पैसा भुगतान करने का आश्वासन देना, ऐसा समझौता करना, अपने आप में गंभीर वित्तीय गड़बड़ी है. वित्त विभाग की भी यही राय थी इस कॉन्ट्रैक्ट पर.

मंत्री जयकुमार रावल पर भी उंगलियां उठीं
ये मामला महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठा. कांग्रेस और NCP, दोनों तब विपक्ष में थे. इन्होंने इल्ज़ाम लगाया कि मंत्री जयकुमार रावल ने गड़बड़ी की है. चूंकि समझौते के समय MTDC के मुखिया रावल ही थे. अपने ऊपर लग रहे आरोपों से इनकार किया रावल ने. विपक्ष के लगाए आरोपों के बीच फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्तमंत्री सुधीर मुंगंतिवार को इस मामले को देखने के लिए कहा.

कमाई टका नहीं, बिल आ गया छह करोड़ का
फिर ये बात भी आई कि इस महोत्सव से सरकारी खजाने की कमाई नहीं हो रही थी. पर्यटन विभाग के मुताबिक, पिछले दो सालों में सरकार को इस आयोजन से कोई पैसा नहीं मिला. दूसरी तरफ ‘लालूजी ऐंड सन्स’ अब तक 6.8 करोड़ रुपये का बिल थमा चुकी है. नई सरकार के आने के बाद ये कॉन्ट्रैक्ट भले रद्द हो गया हो, लेकिन बड़ा सवाल बचा है. अगर गड़बड़ियां हुई हैं तो उसका जिम्मा तो तय करना होगा.


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