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कैसे होने वाला है CBSE का बोर्ड एग्ज़ाम?

कोविड की दूसरी लहर के बीच CBSE 12वीं के बोर्ड एग्जाम पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. एक ओर जहां केंद्र और कई राज्य सरकारें परीक्षा कराने के विकल्प पर विचार कर रही हैं, वहीं कुछ अन्य राज्य और स्टूडेंट्स परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. शुक्रवार, 28 मई को CBSE 12वीं की परीक्षा रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. स्टूडेंट्स की ओर से यह याचिका वकील ममता शर्मा ने लगाई है. हालांकि जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने सुनवाई टाल दी. अब इस मामले में सोमवार 31 मई को सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट की वकील ममता शर्मा ने केंद्र सरकार, CBSE और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन CISCE से 12वीं की परीक्षाएं रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है. इसमें कहा गया है कि मौजूदा हालात के कारण परीक्षा स्थगित होने से नतीजे आने में देरी हो सकती है. इसका असर आगे की पढ़ाई पर पड़ेगा. इसके अलावा कोरोना के बीच लाखों बच्चों का परीक्षा में शामिल होना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में परीक्षाओं को रद्द कर देना चाहिए. साथ ही CBSE और CISCE को तय समय में ऑब्जेक्टिव मेथड के आधार पर 12वीं का रिजल्ट जारी करना चाहिए.

Supreme Court
12वीं का एग्जाम कैंसिल करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब 31 मई को सुनवाई होगी. (फाइल फोटो)

वहीं 300 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने CJI एनवी रमना को परीक्षा के फिजिकल आयोजन के प्रस्ताव को रद्द करने और वैकल्पिक मूल्यांकन योजना तय करने के लिए पत्र लिखा है. दूसरी ओर 12वीं के बाद विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों ने भी CBSE को एक पत्र लिखाकर एग्जाम कैंसिल करने की मांग की है. लेटर में लिखा है कि मौजूदा परिस्थिति में जुलाई-अगस्त 2021 की शुरुआत से पहले आधिकारिक पासिंग सर्ट‍िफिकेट मिलना संभव नहीं होगा. इसके अतिरिक्त छात्रों को एक शैक्षणिक वर्ष का नुकसान उठाना पड़ेगा और उड़ान रद्द करने वीजा शुल्क और अन्य खर्चों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

राज्य क्या चाहते हैं?

अब सवाल उठता है इस पूरे मसले पर राज्य क्या चाहते हैं? उन्होंने क्या कुछ सुझाव दिए हैं.

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा को लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सुझाव मांगे थे. 32 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में से 29 बोर्ड परीक्षा कराए जाने के पक्ष में हैं. 23 मई को हुई उच्च स्तरीय बैठक में CBSE क्लास 12 एग्जाम में इस बार सिर्फ प्रमुख विषयों की परीक्षा कराये जाने संबंधी दो प्रस्ताव रखे गए थे.

CBSE वर्तमान में 12वीं क्लास के विद्यार्थियों को 174 विषय ऑफर करती है, जिनमें से वह 20 विषयों को प्रमुख मानती है. इनमें शामिल है-फिजिक्स, केमेस्ट्री ,मैथमेटिक्स, बायोलॉजी, इतिहास,पॉलिटिकल साइंस, बिजनेस स्टडीज़, अकाउंटेंसी, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश. CBSE के विद्यार्थियों को कम से कम 5 विषय और अधिक से अधिक 6 को चुनना होता है .आमतौर पर इनमें से चार विषय प्रमुख होते हैं.

अब आगे बढ़ने से पहले ये भी जान लेते हैं कि क्या थे ये दो प्रस्ताव?

पहला- सिर्फ प्रमुख विषयों की परीक्षा निर्धारित सेंटर्स पर कराई जाए. इन परीक्षाओं के नंबर्स को आधार बनाकर अन्य विषयों में भी नंबर दे दिए जाएं. इस विकल्प के तहत परीक्षा करवाने के लिए प्री-एग्जाम के लिए 1 महीना, एग्जाम और रिजल्ट डिक्लेयर करने के लिए 2 महीने और कंपार्टमेंट एग्जाम के लिए 45 दिनों का समय चाहिए. यानी इस विकल्प को तब ही अपनाया जा सकता है, जब CBSE बोर्ड के पास 3 महीने की विंडो हो.

Exams During Corona Period
प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई

दूसरा- इस विकल्प में सभी सब्जेक्ट्स के एग्जाम के लिए डेढ़ घंटे (90 मिनट) का समय निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है. इसके साथ ही पेपर में सिर्फ ऑब्जेक्टिव या शॉर्ट क्वेश्चन ही पूछने की सलाह दी गई है. इस तरह 45 दिन में ही एग्जाम कराए जा सकते हैं. इसमें कहा गया है कि 12वीं के बच्चों के मेजर सब्जेक्ट की परीक्षा उनके ही स्कूल में ले ली जाए.

रिपोर्ट के अनुसार, CBSE ने 15 जुलाई से 26 अगस्त के बीच 12वीं बोर्ड परीक्षा आयोजित करने और रिजल्ट्स सितंबर में घोषित करने का प्रस्ताव रखा है.

किस राज्य ने क्या कहा है?

उत्तर प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, असम, आंध्र प्रदेश मिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम ऐसे राज्य हैं जो 3 घंटे के बजाए डेढ़ घंटे की परीक्षा करवाना चाहते हैं.

मौजूदा फ़ॉर्मैट में परीक्षा के पक्ष में तीन राज्य हैं. राजस्थान, त्रिपुरा और तेलंगाना.

पंजाब, झारखंड, सिक्किम, दमन और दीव ने कहा है कि वे वैक्सीनेशन के बाद ही परीक्षा आयोजित कराएंगे. केरल और असम ने भी अपने फीडबैक में वैक्सीनेशन की बात कही है. दिल्ली और महाराष्ट्र ने भी टीचर्स और स्टूडेंट्स को वैक्सीन लगाने की बात कही है.

तमिलनाडु, कर्नाटक, हरियाणा और मध्यप्रदेश ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि बोर्ड परीक्षा के पैटर्न में बहुत अधिक बदलाव ना किया जाए.

वहीं दिल्ली, महाराष्ट्र, गोवा और अंडमान- निकोबार ने स्टूडेंट्स और शिक्षकों के लिए पहले कोरोना टीके की मांग की है.

मोटामोटी बात हो गयी. महीन डीटेल जानते हैं. राज्यों ने तर्क क्या दिए हैं.

राज्यों के शिक्षामंत्री क्या कह रहे हैं?

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए 12वीं बोर्ड की परीक्षा का आयोजन होना चाहिए. शिक्षा मंत्री ने राजस्थान शिक्षा बोर्ड की भी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के लिए योजना बना रहा है.

तमिलनाडु सरकार ने प्रस्ताव दिया कि कोविड-19 की स्थिति सुधरने के बाद राज्य में परीक्षा करायी जा सकती है. राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोयामोझी का कहना है कि अन्य राज्यों की तरह तमिलनाडु भी 12वीं बोर्ड परीक्षा आयोजित करना चाहता है, क्योंकि यह छात्रों के कैरियर को लेकर महत्वपूर्ण होता है.

महाराष्ट्र की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने कहा था कि महामारी को देखते हुए 12वीं के छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित नहीं कराने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाएगा क्योंकि कोरोना के नए स्ट्रेन का बच्चों पर ज्यादा असर होने की आशंका जताई जा रही है. बच्चों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य एवं मानसिक स्थिति को महत्व देते हुए ही कोई फैसला लिया जाएगा.

दिल्लीके शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि मौजूदा हालात में परीक्षा के लिए न तो बच्चे तैयार हैं न ही उनके अभिभावक और न शिक्षक. पहले बच्चों को वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाए उसके बाद परीक्षा ली जाए. शिक्षकों को भी प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन उपलब्ध करवाए. अगर वैक्सीन नहीं उपलब्ध होती है तो परीक्षा रद्द कर दी जाए. 10वीं की तर्ज पर मूल्यांकन कर रिजल्ट घोषित किया जाए.

लेकिन एक ही पक्ष के निर्णय को सुनने से बात नहीं बने.बात ये है कि जिन्हें एग्जाम देना है वो क्या सोचते हैं? इस साल 12वीं में पढ़ रहे ऐसे ही कुछ बच्चों से हमने बात की. सुनिए उनका क्या कहना है?

लखनऊ की एक छात्रा जो अपना नाम नहीं बताना चाहती हैं, उनका कहना है,

इस वक्त ऑफलाइन एग्जाम करना, बच्चों को डेंजर में डालने जैसा है.इंटरनल असेसमेंट, ऑनलाइन एग्जाम या किसी और तरीके को अपनाया जाए जिससे हेल्थ रिस्क अवॉइड किया जा सके. 12वीं का एग्जाम इंपोर्टेंट हैं लेकिन इस साल को हर साल की तरह नहीं देखा जा सकता है. जब हालात सामान्य ना हों तो फैसले भी उस स्थिति को देखकर लेने पड़ते हैं. पीएम ने कहा था कि नंबर लॉन्ग रन में मैटर नहीं करते हैं. एजुकेशन करती है तो वक्त आ गया है कि हम भी उस बात पर अमल करें.

12वीं की छात्रा गौरी शाह का कहना है,

पिछले कुछ महीने से बोर्ड एग्जाम को लेकर काफी कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. मेरे अनुसार ये कंफ्यूजन खत्म होने चाहिए. कई सवाल हैं जिनके उत्तर नहीं मिल रहा है. कोरोना जिस तरह से फैल रहा है ऐसे में बोर्ड की परीक्षा फिलहाल के लिए रद्द कर देनी चाहिए. स्टूडेंट की हेल्थ से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है. बोर्ड की परीक्षा रद्द करके इंटरनल असेसमेंट के बेस पर, दो साल की परफॉर्मेंश के आधार पर अंक मिल जाने चाहिए.

एक और छात्रा मरियम मलिक का कहना है,

ये समय हमारे लिए बहुत ज्यादा डायरेक्शनलेस है. कोई फैसला नहीं आया है कि बोर्ड होंगे कि नहीं होंगे. कोई मोटिवेशन नहीं है पढ़ने की क्योंकि डेडलाइन नहीं है. 12वीं के बाद एंट्रेस की तैयारी करते हैं लेकिन वो भी हॉल्ट पर है. हम प्रायॉरिटी सेट नहीं कर पा रहे हैं कि बोर्ड एग्जाम पर फोकस करें कि एंट्रेस एग्जाम पर फोकस करें. बोर्ड एग्जाम होने चाहिए. एग्जाम नहीं होगें तो मेहनत वेस्ट हो जाएगी. बोर्ड एग्जाम कैंसिल करना समस्या का हल नहीं है. हां जब तक स्थिति ठीक नहीं है इसे टाल सकते हैं.

शिवनागर स्कूल गुड़गांव के छात्र राजेश का कहना है,

एग्जाम नहीं होने चाहिए. लाइफ के लिए रिस्क है. सारे हॉस्पिटल मरीजों से भर चुके हैं. हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर फॉल कर रहा है. वैक्सीनेशन सारे स्टूडेंट को पहुंच नहीं पाएगी. कई स्टूडेंट 18 के नहीं हुए हैं. मैं एग्जाम नहीं चाहता हूं.

डीपीएस स्कूल गुड़गांव की आकृति का कहना है,

मैं चाहती हूं कि बोर्ड एग्जाम हों, क्योंकि स्टूडेंट्स चाहते हैं कि उन्हें अच्छा कॉलेज मिले. क्योंकि बोर्ड के नंबर के आधार पर ही अच्छे कॉलेज मिलते हैं. एग्जाम होने चाहिए ताकि मेहनत वेस्ट ना जाए.

अब बारी आती है टीचरों की. शिक्षाविदों की. उनका इस पूरी गुत्थी पर क्या सोचना है. आइए सुनते हैं.

टीचर ओम शंकर त्रिपाठी का कहना है,

मेरे हिसाब से परीक्षा होनी चाहिए. लेकिन परीक्षा, परीक्षा की तरह से होनी चाहिए. परीक्षा के लिए वायुमंडल ठीक होना चाहिए. परिस्थितियां ठीक होनी चाहिए. विद्याथी का मन और मस्तिष्क बहुत ही शांत और सुलझा हुआ होना चाहिए. बड़े तनाव में परीक्षा करना माने एक प्रकार से उनके साथ भी अन्याय है और साथ ही साथ उन अन्याय का जो परिणाम निकलते हैं अच्छे नहीं होते हैं. लेकिन परीक्षा ना हो तो क्या हो ये भी समस्या है. परीक्षा हो लेकिन कैसे हो ये विचार का प्रश्न है.

डॉक्टर धर्म सिंह- प्रिंसिपल, गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल खिचड़ीपुर दिल्ली. का कहना है,

एग्जाम कराने चाहिए. रही बात बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर की किसी भी तरह उन्हें इंफेक्शन ना हो, तो SOP डिपार्टमेंट फोलो करते हैं. जनवरी में स्कूल खुले थे. दिल्ली सरकार ने गाइडलाइन जारी की उसे फोलो किया. जहां तक टाइमिंग की बात है तो ये डिपेंट करता है कि किस तरह का पैटर्न है. अगर ऑब्जेक्टिव सवाल होंगो तो 90 मिनट भी बहुत ज्यादा होगा. ऑब्जेक्टिव से सारी चीजें अपने आप में निकल कर नहीं आती हैं. जब तक सब्जेक्टिव नहीं होगा. डिस्क्रिप्टिव नहीं होगा तो बच्चों के व्यू नहीं आएंगे किसी विषय के ऊपर. तो ऐसे में बच्चों के साथ भी जस्टिस नहीं हो पाएगा.

वहीं एक टीचर ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा,

एक टीचर होने के नाते मैं सोचती हूं कि एग्जाम होना चाहिए. बच्चों ने साल भर मेहनत की है. कल को अगर बच्चे को किसी अच्छी यूनिटवर्सिटी या कॉलेज में जाना है तो किस बेस पर एडमिशन होगा. अगर सबको सेम नंबर दे दिए जाएं तो क्या होगा. इसलिए मैं पूरी तरह से एग्जाम के फेवर में हूं.

दिल्ली अध्यापक परिषद के महामंत्री और गणित के प्रवक्ता राजेंद्र कुमार गोयल का कहना है,

किसी भी सूरत में 12वीं का परिणाम 10वीं की तरह नहीं निकाला जाए. 10वीं का परिणाम अधिकांशत: केवल जन्म तिथि के रूप में काम आता है. एग्जाम होने चाहिए. छात्रों के स्कूल में ही परीक्षा होनी चाहिए. जिस तरह टीकाकेंद्र चल रहे हैं, बड़ी संख्या में लोग जा रहे हैं. यहां तो बहुत कम संख्या में छात्र हैं जिन्हें परीक्षा देनी है. इसलिए कोविड के नियमों का पालन करते हुए परीक्षा संपन्नन की जा सकती है. छात्र को तीन मुख्य विषयों और एक भाषा में एग्जाम हो. पेपर लंबा ना हो. पूरे विषय के छोटे-छोटे प्रश्न बनाकर पूछे जाएं, उनके आधार पर बच्चे का पूरा ज्ञान चेक करके परिणाम निकाला जाए. जो भी निर्णय लें, जल्दी लें, इसी के आधार पर बच्चे को छात्रवृत्ति मिलती है, बच्चा अपने को हायर एजुकेशन में लेकर जाता है. भविष्य निर्धारित करता है. एक से डेढ़ महीने देकर परीक्षा ली जाए. चाहे यह जुलाई में हो या अगस्त में.

अब आप पूछेंगे कि भईया लल्लनटॉप, काहे केवल CBSE के बारे में बात किए. और भी तो बोर्ड हैं. जवाब सीधा सा है. ज़्यादातर मामलों में दूसरे राष्ट्रीय और स्टेट बोर्ड यानी राज्यों के एजुकेशन बोर्ड परीक्षाओं का वही पैटर्न फ़ॉलो करते हैं, जो CBSE में होता है. ऐसे में CBSE पर ख़ास नज़र बनाए रखना ज़रूरी है.

विकल्प क्या हैं?

एल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल के अनुशासन कमेटी के इंचार्ज ने आज तक से बातचीत में कहा कि जरूरी विषयों के एग्जाम होने चाहिए. 12वीं के छात्र इतने बड़े हैं कि कोरोना प्रोटोकॉल को फ़ॉलो करते हुए एग्जाम दे सकते हैं. 1.5 घंटे का एग्जाम हो, सवाल एमसीक्यू हों. इसके अलावा इसके आंसर ओएमआर शीट पर मार्क किए जाएं. कंप्युटराइज चेकिंग हो. पेपर दो शिफ्ट में हो. एग्जाम बच्चों के स्कूल में ही हो.

कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच एग्जाम हो जिससे बच्चों को रिविजन का टाइम मिल जाए. तब तक सरकार वैक्सीनेशन का भी इंतजाम कर ले.

इसके अलावा एक विकल्प ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम का भी दिया जा रहा है. ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम में ऑनलाइन कैमरे के सामने एग्जाम देना होता है. स्टूडेंट के पास किताब खोलकर उसमें से सवालों के जवाब खोजकर लिखने का विकल्प भी होता है. ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम के जरिए कई देशों ने अपने यहां एग्जाम कराए हैं. लेकिन इसमें भी सबसे बड़ी समस्या दूरदराज के इलाकों से आने वाले स्टूडेंट्स के लिए है. जिनके यहां नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं है या जिनके पास लैपटॉप या मोबाइल फोन नहीं है, वो कैसे एग्जाम देंगे ये बड़ा सवाल है.

लंबे समय से छात्रों की ओर से ऑनलाइन क्लास के लिए संसाधन की मांग की जा रही है. (सांंकेतिक तस्वीर PTI)
(सांंकेतिक तस्वीर PTI)

इस भरोसे पर रहना कि बच्चे कोविड प्रोटोकॉल को फ़ॉलो करेंगे, ग़लत है. हमने बड़ों को और नेताओं को कोविड प्रोटोकॉल भंग करते हुए देखा है. बच्चे तो बच्चे हैं. अगर संस्थाएं परीक्षाओं की वैकल्पिक व्यवस्था लेकर आती हैं, तो क्या दिक़्क़त है. जो संस्थाएं परीक्षा के तमाम संसाधनों पर ख़र्च कर सकती हैं, क्या वो संस्थाएं कुछ ही बच्चों को परीक्षा भर के लिए ही सही एक टैबलेट या फ़ोन मुहैया नहीं करा सकती हैं. उस रिक्त स्थान को पूर्ति करने की ज़िम्मेदारी किसकी है? हमारे संस्थानों की है. ऐसे में हमें तेज़ी से एक विकल्प तलाशना होगा. परीक्षाएं कराने का. जिंदगियों को सुरक्षित रखते हुए.


CBSE के 12वीं बोर्ड एग्ज़ाम को लेकर केंद्र और राज्य की हाई लेवल मीटिंग में क्या हुआ?

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