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वो क्रिकेटर जिसने द्रविड़ से लेकर सचिन को डराया, लेकिन चोट से घबरा गया

क्रिकेट देखने वाली नई जेनरेशन ने मैल्कम मार्शल को नहीं देखा, डैनिस लिली को नहीं देखा. लेकिन हां, वो ये कह सकेंगे कि हमने डेल स्टेन को देखा है. डेल स्टेन, मॉर्डन जेनरेशन का वो गेंदबाज़ है जिसने मॉर्डन जेनरेशन क्रिकेट के आलोचकों को भी उनकी तारीफ करने पर मजबूर कर दिया.

क्रिकेट इतिहास में बड़े से बड़े गेंदबाज़ हुए लेकिन 2000 के बाद अगर किसी एक गेंदबाज़ को सबसे आगे और सबसे खतरनाक माना जाए तो वो डेल स्टेन ही हैं. वैसे तो मॉर्डन डे क्रिकेट में जेम्स एंडरसन, मिचेल स्टार्क, स्टुअर्ट ब्रॉड, वर्नेन फिलेंडर कई गेंदबाज़ हुए. लेकिन जब भी बात एशिया में गेंदबाज़ी की आई. या फिर अपने देश से बाहर खेलने की. तो इनके प्रदर्शन में गिरावट देखी गई. लेकिन स्टेन इकलौते ऐसे गेंदबाज़ रहे, जिन्हें कंडीशंस से बहुत ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता था. उनकी कामयाबी का अपना सीक्रेट था. तेज़ और लाइन पकड़कर गेंदबाज़ी करना.

क्रिकेट में ‘स्टेनगन’ की शुरूआत:

1992 से 2008 के बीच वाले वक्त में एलन डोनाल्ड और शॉन पोलक साउथ अफ्रीका के सबसे अहम गेंदबाज़ रहे. लेकिन इन दोनों के जाने के बाद डेल स्टेन का वक्त आया. स्टेन, स्टेन कभी नहीं बनना चाहते थे. वो पोलक और डोनाल्ड का मिक्स्ड वर्ज़न बनना चाहते थे. स्टेन ने एक इंटरव्यू में कहा भी था,

मैं तेज़ी से गेंदबाज़ी करना चाहता था. मैं हवा में एलेन डोनाल्ड जैसा बनना चाहता था, जबकि गेंद को पिच करवाते वक्त पॉली(पोलक  जैसा. मैं शॉन पोलक का फास्टर वर्ज़न बनना चाहता था. इसलिए मैंने पोलक की ट्रेनिंग को देखा और फिर उनके जैसा करने की कोशिश की.

Boucher
मार्क बाउचर.

इसके बाद मार्क बाउचर के साथ ट्रेनिंग करते हुए मुझे एक जगह पर गेंद लैंड कराने का रास्ता मिल गया. उन्होंने विकेटों के पीछे मेरी बहुत सी गेंदों को पकड़ा. वो हमेशा विकेट के पीछे से मेरी गेंदों को पकड़कर कहते थे, ‘सुनो कल तुम्हारा सिर उधर था, आज इधर है. क्या चल रहा है ये?’ और उनके ऐसा कहने के बाद मैं ऐसा होता था, ‘आह, शायद मेरे हाथ की वजह से होगा.’ और फिर वो कहते थे, ‘वो अलग गलती है जो मैंने नोटिस की है. तुम्हारा बायां हाथ ज़्यादा खिंच रहा है.’

साल 2004 में साउथ अफ्रीकन टीम में हुई डेल स्टेन की एंट्री

21 साल की उम्र में शॉन पोलक और मखाया एनटिनी के फर्स्ट रिप्लेसमेंट पेसर के रूप में डेल स्टेन की टीम में एंट्री हुई. साल था 2004 और महीना था दिसंबर. पोर्ट एलिज़ाबेथ में इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज़ शुरू होनी थी. पहले मैच में ही बॉलिंग से पहले स्टेन की बैटिंग आ गई. जितनी तेज़ी से उनका हाथ घूमता है, उन्होंने उतनी ही तेज़ी से पहली गेंद पर बल्ला घुमाया और इंग्लिश स्पिनर एशले जाइल्स को छक्का जड़ दिया. इसके बाद अगली ही गेंद पर वो आउट भी हो गए.

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डेल स्टेन.

उस मुकाबले में इंग्लैंड के सामने साउथ अफ्रीका ने 337 रनों का लक्ष्य रखा. इंग्लैंड के लिए ओपनर मार्कस ट्रेस्कॉथिक और एंड्र्यू स्ट्रॉस ने पारी शुरू की. दोनों ने इंग्लैंड को ऐसी शानदार शुरूआत दी कि अफ्रीकी टीम मुश्किल में फंस गई. उस वक्त के स्टार बल्लेबाज़ ट्रेस्कॉथिक के साथ मिलकर स्ट्रॉस ने पहले विकेट के लिए 42 ओवरों में 152 रन जोड़े थे.

लेकिन पहले विकेट के लिए तरस रही अफ्रीकी टीम को स्टेन ने ट्रेस्कॉथिक के रूप में बड़ा राहत दी. उन्होंने अपनी तेज़ रफ्तार इन स्विंगर से ट्रेस्कॉथिक का मिडिल और लेग स्टम्प उखाड़ दिया. लेकिन पहला विकेट झटकने के बाद पारी के अगले 84 ओवरों तक उन्हें कोई विकेट नहीं मिला. आखिर में नंबर 10 पर उन्होंने साइमन जोन्स को आउट किया.

उस सीरीज़ में पहला बड़ा विकेट लेने के बावजूद स्टेन सीरीज़ में सिर्फ 8 विकेट ही ले पाए. जिसके बाद सीरीज़ के आखिरी टेस्ट से उन्हें बाहर कर दिया गया.

2006 में टीम में कमबैक

पहला सीरीज़ के बाद लगभग 15 महीने तक टीम से बाहर रहने के बाद. स्टेन की एक बार फिर से टीम में वापसी हुई. उन्हें न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टीम में मौका मिला. स्टेन ने वापसी करते हुए पहले सेंचुरियन टेस्ट की दूसरी इनिंग में ही न्यूज़ीलैंड की बैटिंग को पस्त कर दिया. टेस्ट बचाने के लिए कीवी टीम को सिर्फ 36 ओवर बल्लेबाज़ी करनी थी. जबकि उनके पास फ्लेमिंग, स्टाइरिस, ऐस्टल, मैक्कलम, मार्शल और फुल्टन जैसे बल्लेबाज़ों वाली मजबूत लाइन अप थी.

लेकिन स्टेन की रफ्तार के आगे उनकी पूरी टीम सिर्फ 120 रनों पर ढेर हो गई. स्टेन और एनटिनी दोनों ने उस मुकाबले में 5-5 विकेट लिए और कीवी टीम को 128 रनों से हराया. इस मैच की पहली पारी में भी स्टेन ने दो विकेट चटकाए थे.

सीरीज़ के दूसरे मैच में भी अपनी गेंदों से किवी टीम को परेशान किया और दो विकेट चटकाए. लेकिन जोहानिसबर्ग में खेले गए तीसरे टेस्ट में उन्होंने सात विकेट चटकाकर दुनिया को बता दिया कि अब एक नया तेज़ गेंदबाज़ क्रिकेट के लिए तैयार है.

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डेल स्टेन

एशिया में पहली सीरीज़

टीम में वापसी के बाद पहली सीरीज़ घर में थे, लेकिन अभी उनका एशिया में असली टेस्ट बाकी थी. वो भी ऐसी बैटिंग लाइनअप के खिलाफ जिसमें संगकारा, जयसूर्या, जयवर्धने, दिलशान, थरंगा जैसे बल्लेबाज़ मौजूद थे.

लेकिन स्टेन वहां भी नहीं डरे. श्रीलंका की बल्लेबाज़ी वाली विकेट पर उन्होंने दो टेस्ट में आठ विकेट चटकाकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा दिया.

साल 2006 के छह टेस्ट मैचों में स्टेन ने 24 विकेट चटकाए. लेकिन अभी उनका असली कमाल बाकी थी. साल 2007 में उन्होंने भारत, पाकिस्तान, न्यूज़ीलैंड और वेस्टइंडीज़ के बल्लेबाज़ों को अपनी गेंदों पर नचाना शुरू कर दिया.

साल 2007 के सात मैचों में उन्होंने 44 विकेट चटकाए और क्रिकेट में एक नए तूफान के संकेत दे दिए.

2008 से 2014 तक क्रिकेट जगत पर एकछत्र राज

साल 2006-07 से डेल स्टेन का आगाज़ हुआ. वहीं वर्ल्ड क्रिकेट के दिग्गज ग्लेन मैक्ग्रा, शॉन पोलक, चामिंडा वास और मुरलीथरन क्रिकेट जगत को अलविदा कहने के दौर में थे. 2006-07 में कमबैक करने के बाद स्टेन ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. साल 2008 में वो पहली बार मुरलीथरन के साथ आईसीसी रैंकिंग में नंबर एक टेस्ट गेंदबाज़ बने.

लेकिन 2009 से मुरली तो क्या दुनिया का कोई भी तेज़ गेंदबाज़ या स्पिनर उन्हें नहीं पकड़ सका. साल 2009 से 2013 तक लगातार 263 हफ्तों तक स्टेन नंबर एक टेस्ट गेंदबाज़ बने रहे. इतने लंबे समय तक क्रिकेट के नंबर एक गेंदबाज़ रहे स्टेन ने अपने बेहतरीन समय का शानदार उपयोग किया.

साल 2009 में नंबर वन रैंकिंग पर रहते हुए ही स्टेन को करियर की पहली चोट लगी. इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट से आखिरी मिनट पर बाहर हो गए. जब उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई. लेकिन दिसंबर के महीने में ही वो इस चोट से उबर गए. ये चोट उनके करियर को रोकने वाली नहीं थी. स्टेन ने ऐसी धमाकेदार वापसी की कि दुनिया देखती रह गई.

पूरी दुनिया लगा कि ये गेंदबाज़ ठहरने वाला नहीं है.

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डेल स्टेन

26 दिसंबर 2009 से 5 नवंबर 2015

जिसे गोल्डन पीरियड कहते हैं, ये तारीख या ये वक्त स्टेन के करियर का वही टाइम था. 26 दिसंबर 2009 से लेकर 5 नवंबर 2015 के बीच साउथ अफ्रीका ने कुल 48 टेस्ट खेले. इनमें से एक में भी स्टेन टीम से बाहर नहीं हुए.

स्टेन ने लगातार छह सालों तक लगभग 2200 दिन क्रिकेट खेली. ये छह साल उनके करियर के बेहतरीन छह साल भी रहे. इस दौरान उन्होंने

# 21.72 के औसत से 232 विकेट अपने नाम किए.
# जिसमें उन्होंने 14 बार पारी में 5 विकेट भी लिए.
# खासकर साल 2010 में नागपुर के मैदान पर उनका 7/51 का स्पेल भी इस दौर में आया.

साउथ अफ्रीका का गोल्डन पीरियड

साल 2009 से 2015 के बीच साउथ अफ्रीकी टीम का ग्राफ लगातार चढ़ता ही रहा. वो लगातार नंबर एक के स्थान पर भी रहे.

# इस दौरान साउथ अफ्रीका ने कुल 48 टेस्ट खेले.
# जिसमें से 24 टेस्ट जीते.
# 15 टेस्ट ड्रॉ किए.
# और 9 टेस्ट में हार मिली.

डेल स्टेन का गोल्डन आर्म

26 दिसंबर 2009 से पहले स्टेन ने 33 टेस्ट में 170 विकेट चटकाए थे. लेकिन 26 दिसंबर 2009 से पांच नवंबर 2015 के बीच उनके विकेटों की संख्या देखते ही देखते 402 हो गई.

कहते हैं जीवन में सुख-दुख हमेशा नहीं रहता. वैसे ही क्रिकेट में भी होता है. दुनिया का बड़ा से बड़ा बल्लेबाज़ हो या गेंदबाज़ किसी ने भी पूरे करियर राज़ नहीं किया. सूरज अगर चढ़ा है तो वो ढलेगा भी. स्टेन की भी वो ढलने वाली शाम 5 नवंबर 2015 के बाद शुरू हो चुकी थी.

पांच सालों तक चोट से जूझते रहे स्टेन

2015 में साउथ अफ्रीकी टीम भारत के दौरे पर आने वाली थी. स्टेन का प्रदर्शन देखकर दुनिया की बड़ी से बड़ी टीमें डरती थी. विराट कोहली की टीम भी स्टेन को हलके में नहीं लेने वाली थी. सीरीज़ शुरू हुई और फिर आया 6 नवंबर का दिन. 6 नवंबर 2015 को मोहाली में भारत के खिलाफ टेस्ट में स्टेन को दूसरी पारी में ग्रोइन स्ट्रेन इंजरी हुई. और वे गेंदबाज़ी नहीं कर पाए. ये चोट काफी गंभीर थी और 14 नवंबर से 13 दिसंबर 2015 के बीच उन्होंने इंडिया के खिलाफ एक नहीं बल्कि तीन टेस्ट मिस किए. यानि पूरी सीरीज़.

2015/16 इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज़

इसके बाद 28 दिसंबर 2015 से इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ के लिए उन्होंने फिर से वापसी की. लेकिन डरबन टेस्ट में शोल्डर में चोट की वजह से उन्होंने इंग्लैंड सीरीज़ के भी तीन टेस्ट मिस कर दिए. एक ऐसा खिलाड़ी जो हमेशा टीम के साथ रहा लगातार सालों खेला. वो अचानक से इस तरह दौरे छोड़ रहा था. ये स्टेन के लिए मुश्किल वक्त था.

दो जनवरी से 22 जनवरी 2016 तक स्टेन टीम से बाहर रहे.

स्टेन को इस चोट से उबरने में लगभग सात महीने का वक्त लगा. अगस्त के महीने में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सीरीज़ के लिए उनकी फिर से टीम में वापसी हुई. उन्होंने 19 से 31 अगस्त के बीच दो मैच की टेस्ट सीरीज़ में 10 विकेट लिए.

साल 2016 में वो एक बार फिर से नंबर एक टेस्ट गेंदबाज़ बने.

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डेल स्टेन

स्टेन के करियर की सबसे खराब इंजरी

नवंबर में एक बार फिर से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ में स्टेन को चोट लग गई. लेकिन ये चोट पुरानी चोटों से अलग और खतरनाक थी. पर्थ में सीरीज़ के पहले मैच के दूसरे दिन ही स्टेन का शोल्डर फ्रैक्चर हो गया. ये उनके लिए दिल तोड़ने वाला था. उन्होंने खुद बताया.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुझे मेरे दाएं कंधे में चोट लगी. मैं चार हफ्तों के लिए खेल बाहर हो गया. जब मैं डॉक्टर पास गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी चोट सीढ़ी से गिरने पर या मोटरबाइक से गिरने पर होती है. इस चोट के बाद दो महीने तक मैं अपना हाथ भी ठीक से नहीं हिला पाता था. लेकिन मेरी इस चोट ने समय से ज़्यादा समय ले लिया.

वाका के मैदान पर उस खास मैच से पहले शॉन पोलक को उम्मीद थी कि स्टेन साउथ अफ्रीका के लिए सबसे अधिक विकेट लेने के उनके रिकॉर्ड को तोड़ेंगे. जिसके बाद पोलक ने वादा किया था कि वो बतौर गिफ्ट स्टेन को एक महंगी शैंपेन की बोतल देंगे.

Shaun Pollock
शॉन पोलोक. फाइल फोटो

लेकिन स्टेन के लिए ये वक्त उनके करियर का सबसे खराब वक्त रहा. जब 12 नवंबर 2016 से 26 दिसंबर 2017 यानि पूरे एक साल तक वो एक भी मैच नहीं खेल सके. स्टेन की सर्जरी हुई और मैदान पर वापसी करने में उन्हें लंबा वक्त लग गया.

इस चोट ने स्टेन को फिर ठीक से उबरने नहीं दिया.

स्टेन ने साउथ अफ्रीका के लिए एक, दो नहीं बल्कि 15 टेस्ट मिस किए:

# 2 vs ऑस्ट्रेलिया
# 3 vs श्रीलंका
# 3 vs न्यूज़ीलैंड
# 4 vs इंग्लैंड
# 2 vs बांग्लादेश
# 1 vs ज़िम्बाबवे

स्टेन 2018 में भारत के खिलाफ फिर से एक शुरुआत करना चाहते थे.

साल 2018 की शुरूआत में भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका आना था. 4 जनवरी से केपटाउन में सीरीज़ शुरू होनी थी. स्टेन एक साल बाद टीम में वापसी कर रहे थे. ये ऐतिहासिक पल था. लेकिन पहले टेस्ट में ही स्टेन अपनी ऐड़ी चोटिल करवा बैठे.

जिसकी वजह से उन्होंने अगले दोनों मैच मिस कर दिए.

28 जनवरी 2018 की तारीख को आंकलन किया गया. तो पता चला कि

# स्टेन ने पिछले 29 टेस्ट में सिर्फ छह टेस्ट खेले.
# जिनमें से चार मैचों में चोट के साथ वो बाहर हो गए.
# इस दौरान वो सिर्फ दो ही मैच खेल पाए.

नवंबर 2015 से फरवरी 2018:

ये चार सालों का समय स्टेन के करियर का सबसे खराब दौर रहा. उन्होंने इस दौरान सिर्फ 17 विकेट अपने नाम किए और साल 2015 में 402 विकेट पूरे करना वाले स्टेन फरवरी 2018 में सिर्फ 419 विकेटों तक ही पहुंच सके.

इसके बाद ऑस्ट्रेलियन टीम ने साउथ अफ्रीका का विवादास्पद दौरा किया. स्टेन चार मैचों की इस सीरीज़ से भी बाहर रहे.

2018 में श्रीलंका के खिलाफ सीरीज़

हील की चोट से उबरकर स्टेन ने एक बार फिर से वापसी करने की कोशिश की. श्रीलंका के खिलाफ साउथ अफ्रीका को दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ खेलनी थी. स्टेन ने टीम में वापसी की और इस सीरीज़ को पूरा किया. लेकिन सीरीज़ उनके करियर में सिर्फ नंबर मात्र ही रही. क्योंकि पहला तो साउथ अफ्रीका 2-0 से हारी और दूसरा स्टेन, अब वो स्टेन नहीं थे. जिन्होंने अपने शुरूआती दिनों में श्रीलंका के मजबूत बैटिंग लाइनअप को ढेर कर दिया था. उन्होंने दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ में सिर्फ दो विकेट चटकाए. जिसमें से एक मैच में तो वो विकेटलेस रहे.

2018 पाकिस्तान का साउथ अफ्रीका दौरा

इसके बाद पाकिस्तान की टीम साउथ अफ्रीका आई. इस दौरे पर सेंचुरियन में वो सपना पूरा होने वाला था. जो शॉन पोलक ने वाका के मैदान पर 2016 में देखा. स्टेन अब चोट से उबरकर खेल रहे थे. उन्होंने टेस्ट पारी पारी में 422वां विकेट लेकर इतिहास रच दिया. अब वो साउथ अफ्रीका के सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ थे.

लेकिन अब घर में भी स्टेन की वो धार नहीं दिख रही थी. जो कभी विदेश में भी दिखती थी. उन्होंने छह मैचों में 12 विकेट तो चटकाए. लेकिन उनका औसत अपनी टीम के तीनों तेज़ गेंदबाज़ों में सबसे कम रहा.

इतने सालों तक बल्लेबाज़ों को अपनी रफ्तार पर नचाने वाले स्टेन अब समझ गए थे कि उनका वक्त पूरा हो चला है. इसका बाद श्रीलंका के खिलाफ आखिरी टेस्ट सीरीज़ में उन्होंने सिर्फ छह विकेट चटकाए और सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों में छठे नंबर पर आए.

21 फरवरी 2019 को आखिरी बार सफेद कपड़े पहने स्टेन को फिर कभी मैदान पर नहीं देखा गया. बड़ी बात ये भी रही कि उस मैच में उनका प्रदर्शन देख फैंस को शक तो था. लेकिन यकीन नहीं था कि एक सुपरस्टार अब क्रिकेट के मैदान पर फिर कभी नहीं दिखेगा.

आज मैं खेल के उस प्रारूप को छोड़ रहा हूं जिसे मैं सबसे ज़्यादा प्यार करता हूं.

स्टेन ने विश्वकप 2019 खत्म होने के बाद पांच अगस्त 2019 को ये ऐलान कर दिया कि अब वो टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं. उन्होंने ऐलान किया कि वो टेस्ट के सबसे प्यार करने वाले प्रारूप को छोड़ रहे हैं.

मेरी रिकवरी ठीक हुई लेकिन उसने समय से ज़्यादा समय ले लिया.

टेस्ट से संन्यास के वक्त स्टेन की ये बातें उनके टूटे हुए दिल को साफ ज़ाहिर कर रही थीं कि किस तरह से एक फाइटर जो कभी मैदान पर नहीं हारा. उसे चोटों ने हरा दिया.

अब स्टेन ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों को छोड़ने का फैसला कर लिया है.


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