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जॉइनिंग से ठीक पहले 'अंडर प्रोसेस' क्यों कर दिए गए असिस्टेंट लोको पायलट कैंडिडेट?

2018 में वैकेंसी आई थी. 3-4 स्टेज के एग्जाम के बाद जुलाई 2019 में हमारा मेडिकल हो गया था. दिसंबर में हमारा पैनल बना. 17 जनवरी, 2020 को हमारा डिवीजन अलॉटमेंट हो गया था. घर पर जॉइनिंग लेटर भी आ गया था. हम जॉइनिंग की तैयारी में लग गए. प्राइवेट नौकरी करते थे, वहां छोड़ दिए. लेकिन जॉइनिंग से एक दिन पहले ही हमें पता चला कि डिवीजन अलॉटमेंट कैंसिल हो गया है. कहा गया कि फिर से डिवीजन अलॉट किया जाएगा. बाद में एक दूसरी लिस्ट आई, जिसमें आधे लोगों को डिवीजन अलॉट हुआ और आधे लोगों को अंडर प्रोसेस कर दिया गया. 

ये कहानी है सत्यम की. सत्यम सीकर राजस्थान के रहने वाले हैं. पिछले तीन साल से रेलवे के असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. लोको पायलट यानी कि ट्रेन का ड्राइवर. असिस्टेंट लोको पायलट यानी जो ड्राइवर का सहायक.  2018 में वैकेंसी आई, तो सत्यम ने भी अप्लाई किया. RRB मुंबई की ओर से आयोजित परीक्षा में सेंट्रल रेलवे के लिए उनका सेलेक्शन भी हो गया. लेकिन जॉइनिंग से एक दिन पहले उन्हें अंडर प्रोसेस कर दिया गया.

ऐसा केवल सत्यम के ही साथ नहीं हुआ है, बल्कि 565 ऐसे कैंडिडेट हैं, जिन्हें RRB मुंबई की ओर से डिवीजन अलॉट किया गया और फिर अंडर प्रोसेस कर दिया गया. इन कैंडिडेट का आरोप है कि जब इन लोगों ने जॉइनिंग डेट के बारे में अधिकारियों से पूछा, तो जवाब मिला कि अभी वैकेंसी नहीं है. जब वैकेंसी आएगी, तब जॉइन कराएंगे.

बाईं लिस्ट में कैंडिडेट्स को डिविजन अलॉट किया गया है जबकि कुछ दिन बाद उन्हीं कैंडिडेट्स को अंडर प्रोसेस कर दिया गया है(दाई लिस्ट में)
बाईं लिस्ट में कैंडिडेट को डिविजन अलॉट किया गया है, जबकि कुछ दिन बाद उन्हीं कैंडिडेट को अंडर प्रोसेस कर दिया गया है (दाई लिस्ट में)

क्या है पूरा मामला?

रेलवे में भर्ती के लिए रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड यानी RRB बनाए गए हैं. देशभर में कुल 21 RRB हैं. RRB अपने-अपने जोन में खाली पदों के हिसाब से वैकेंसी निकालते हैं. परीक्षा कराते हैं और सफल कैंडिडेट को जोनल हेडक्वॉर्टर के हवाले कर देते हैं. भारतीय रेलवे में कुल 17 जोन और 73 डिवीजन हैं. इसके बाद इन सफल कैंडिडेट को डिवीजन बांटा जाता है और फिर ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है.

ऐसी ही एक वैकेंसी आई थी जनवरी, 2018 में. रेलवे की भाषा में इसे CEN- 01/2018 कहा जाता है.  26,502 पदों की इस भर्ती में 17,673 असिस्टेंट लोको पायलट और 8,829 पद टेक्नीशियन के थे. सितंबर, 2018 में एक और नोटिफिकेशन निकाला गया और पदों की संख्या बढ़ाकर 64,371 कर दिया गया. अब असिस्टेंट लोको पायलट के 27,795 और टेक्नीशियन के 36,576 पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई. 

RRB की रिवाइज्ड नोटिफिकेशन जिसमें पदों की संख्या बढ़ा दी गई थी.
RRB की रिवाइज्ड नोटिफिकेशन, जिसमें पदों की संख्या बढ़ा दी गई थी.

इस वैकेंसी में RRB मुंबई की ओर से 1866 असिस्टेंट लोको पायलट की वैकेंसी जारी की गई. वैकेंसी पूरी भी हुई. तीन स्टेज के एग्जाम, मेडिकल और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद सेलेक्टेड कैंडिडेट की लिस्ट भी जारी की गई. जुलाई, 2019 में फाइनल रिजल्ट आया. रिजल्ट आने के बाद 596 कैंडिडेट के एक पैनल को जॉइनिंग के लिए बुलाया गया. दिसंबर, 2019 में 973 कैंडिडेट का दूसरा पैनल भी बनाया गया.

जनवरी में इन कैंडिडेट को डिवीजन भी अलॉट कर दिया गया. सेंट्रल रेलवे के अंतर्गत मुंबई, नागपुर, सोलापुर, पुणे और भुसावल डिवीजन आते हैं. डिवीजन अलॉट होने के बाद हर डिवीजन ने अपनी अपनी ओर से जॉइनिंग की अलग-अलग तारीख जारी कर दी गई. किसी ने 6 फरवरी को जॉइनिंग के लिए बुलाया, किसी ने 22 फरवरी को और किसी ने 29 मार्च को. लेकिन जॉइनिंग से ठीक पहले ही सेंट्रल रेलवे ने डिवीजन अलॉटमेंट को रद्द कर दिया. और फिर से डिवीजन अलॉट करते हुए नई लिस्ट जारी की. इस लिस्ट में 408 कैंडिडेट को डिवीजन अलॉट किया गया है. बाकी के 565 कैंडिडेट को अंडर प्रोसेस कर दिया गया है. इन कैंडिडेट का आरोप है कि सेंट्रल रेलवे अंडर प्रोसेस का न तो मतलब बता रहा है, न ही कैंडिडेट की जॉइनिंग डेट.

सत्यम कहते हैं,

कोई एक लिखित जवाब दे दें कि इतने दिनों में हमारी जॉइनिंग होगी, तो हम भी निश्चिंत हो जाएं. लेकिन कोई कहता है सितंबर में, कोई कहता है तीन साल बाद. ऑफिस में कॉल अटेंड करते नहीं हैं. ई-मेल का कोई जवाब नहीं आता. अब जब हम फोन करते हैं, तो बोलते हैं कि तीन साल में पूरा होगा. हमारे पास वैकेंसी नहीं है. एक बार हम सब लोग इकट्ठा होकर मुंबई गए थे, तो वहां हमें कहा गया कि हमारे पास इतनी वैकेंसी नहीं है. लेकिन आप खुद सोचिए, दो साल पहले जितनी वैकेंसी आपने निकाली थी, उतने लोगों को तो भरना पड़ेगा ना. आप बीच में ऐसे-कैसे कह सकते हैं. इनको कम से कम ऑफिशियली बताना पड़ेगा कि कितने दिन में भर्ती पूरी कराई जाएगी.

सेंट्रल रेलवे की ओर से भेजा गया जॉइनिंग लेटर
सेंट्रल रेलवे की ओर से भेजा गया जॉइनिंग लेटर

अमरावती के रहने वाले अक्षय को पुणे डिवीजन अलॉट हुआ था. 10 फरवरी को उनकी जॉइनिंग थी. 6 फरवरी को उन्हें पता चला कि जॉइनिंग टाल दी गई है. बाद में नई लिस्ट आई और उन्हें अंडर प्रोसेस कर दिया गया. अक्षय कहते हैं, 

पैनल की वैलिडिटी तीन साल तक रहती है, तो आपने अभी सबको डिवीजन क्यों अलॉट कर दिया? हमारे साथ ही सेलेक्ट हुए लोग जो पहले पैनल में थे, उनकी जॉइनिंग हो गई है. वो लोग तो अब ड्यूटी भी कर रहे हैं. और हम अपनी पिछली नौकरी भी गंवाकर बेरोजगार बैठे हैं.  

 

लातूर के रहने वाले हिमांशु भी उन 565 लोगों में से हैं, जिन्हें अंडर प्रोसेस कर दिया गया है. हिमांशु पिछले चार साल से तैयारी कर रहे हैं. जॉइनिंग लेटर जब घर आया, तो सब खुश थे. 29 मार्च को उन्हें सोलापुर में जॉइन करना था. लेकिन जॉइनिंग से पहले उन्हें अंडर प्रोसेस कर दिया गया. हिमांशु कहते हैं, 

अंडर प्रोसेस का मतलब क्या है? रेलवे ने इससे पहले इस तरह के टर्म का यूज नहीं किया. हमें ये भी नहीं बताया जा रहा कि हमें जॉइनिंग कब मिलेगी? एक बार बुलाकर आपने रद्द कर दिया. हम तो परेशान हैं ही, हमारे घर वाले भी परेशान हैं. अब तो अगल-बगल के लोग पूछने लगे हैं कि जॉइनिंग का क्या हुआ?

कैंडिडेट्स का सवाल जायज है. अगर रेलवे के पास वैकेंसी नहीं थी, तो फिर इतने पदों के लिए वैकेंसी क्यों निकाली? और जब वैकेंसी निकाली है और कैंडिडेट को एक बार जॉइनिंग का न्योता भी दे दिया, तो फिर अचानक पीछे क्यों हट गए? इन सब सवालों के जवाब के लिए हमने सेंट्रल रेलवे से बात करने की कोशिश की. लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ. हमने सेंट्रल रेलवे के CPO को भी कई बार कॉल किया. मैसेज किया, लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया. अगर उनकी तरफ से कोई जवाब आता है, तो हम स्टोरी में अपडेट कर देंगे.

अपने करियर को ध्यान में रखते हुए कैंडिडेट्स ने हमसे नाम न छापने की बात कही थी. इसलिए हमने इस स्टोरी में कैंडिडेट के नाम बदल दिए हैं. 


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