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ये पूरी तरह आपके हाथ में है कि कौन सा शब्द होगा 2018 का पॉपुलर हिंदी शब्द

जो मुकाम म्यूज़िक में मोज़ार्ट का है, खेलों में सॉकर का है, गाड़ियों में फरारी का है, वही शब्दों में ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी का है. और इस डिक्शनरी की सबसे बड़ी विशेषता है इसका ग्लोकल होना. ग्लोकल मतलब ग्लोबल और लोकल का सह-अस्तित्व. और स्पष्ट शब्दों में कहें तो ‘दुनिया’ भर के ‘लोकल’ शब्दों को आप इस डिक्शनरी में पा सकते हैं. पैजामा, जंगल, बाल्टी, चटनी जैसे कितने ही हिंदी शब्दों को इसमें जगह मिलती रही है.

लेकिन आज हम ‘ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी’ की बात क्यूं कर रहे हैं ये बताते हैं.

दरअसल इस साल के लिए साल का हिंदी शब्द (हिंदी वर्ड ऑफ़ दी इयर 2018) चुना जाना है. और इसे चुनने के लिए बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई गई है. मतलब ऐसा नहीं होगा कि ऑक्सफ़ोर्ड अचानक एक दिन घोषित कर देगा कि अमुक शब्द साल 2018 का हिंदी वर्ड ऑफ़ दी इयर है. बल्कि इसके लिए बाकयदा पोलिंग होगी. होगी नहीं अंकिल, हो रही है. आपको भी करती है तो इस लिंक में जाकर अपना हिंदी का फेवरेट शब्द सबमिट कर दो.

और हां आपका शब्द टॉप करे इसे सुनिश्चित करने के लिए अपने मम्मी-पापा, ताई-ताऊ, बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड, पति-पत्नी, दोस्त-रिश्तेदार, पड़ोसी-पड़ोसन सबको इसके बारे में जानकारी दें, और अधिक से अधिक संख्या में मतदान केंद्र में आकर मतदान करें. मतलब लिंक में क्लिक करके. वो क्या कहता है मोदी जी वाला व्हाट्सएप मैसेज – कुछ को तुम जगाओ, कुछ को मैं जगाता हूं.

और क्या आपको पता है, दी लल्लनटॉप भी इससे पेसिवली जुड़ा हुआ है. और एक्टिवली कौन जुड़ा हुआ है? हमारे संपादक सौरभ द्विवेदी. वो पैनल के सदस्य हैं. उनके साथ और कौन-कौन हैं? चलिए नाम तो बता ही देते हैं, कुछ को आप जानते होंगे बाकियों को गूगल, तो इनके बारे में उससे पूछने में कतई कोताही न बरतें – कृतिका अग्रवाल, रणधीर ठाकुर, नमिता गोखले, अशोक कुमार शर्मा और विजय नंदन.

पिछले साल कई कारणों के चलते 'आधार' शब्द चर्चा में रहा था. लेकिन अबकी बार का क्या?
पिछले साल कई कारणों के चलते ‘आधार’ शब्द चर्चा में रहा था. लेकिन अबकी बार का क्या?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछली बार यानी 2017 में भी ‘साल का हिंदी शब्द’ चुने जाने के लिए ठीक ऐसी ही व्यवस्था हुई थी, और चुना गया था शब्द – आधार.

और हां पिछली बार के पैनल में भी सौरभ द्विवेदी शामिल थे. उनके यानी सौरभ द्विवेदी के ही शब्दों में कहें तो –

हिंदी में हर बरस नए-नए जाबड़ शब्द जुड़ रहे हैं. कभी राजनीतिक तो कभी किसी और वजह से पुराने शब्द भी नए सिरे से चमक पा रहे हैं. ऐसे में साल भर सुर्खिययां सजाने वाले शब्दों से होकर गुजरने का मौका मिला, ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी वर्ड ऑफ द ईयर के चलते. मुझे पूरा भरोसा है कि ये आयोजन हर साल और बड़ा होगा. लोग इसके साथ जोश खरोश दिखाते हुए जुड़ेंगे. आखिर ये लोग ही तो हैं जो किसी भी शब्द की जिंदगी और जवानी तय करते हैं.

सौरभ द्विवेदी
सौरभ द्विवेदी

और हां कुछ जानकारी ऑक्सफ़ोर्ड की तरफ से भी है आपके लिए –

‘वर्ष का हिंदी शब्द’ या अभिव्यक्ति ऐसा शब्द होगा जिसने पिछले 12 महीनों में काफी हलचल मचाई है. इस शब्द के द्वारा साल का भाव, लोक-व्यवहार तथा मनोदशा व्यक्त होनी चाहिए. यह ज़रूरी नहीं है कि इस शब्द का प्रचलन पिछले 12 महीनों में ही शुरू हुआ हो या फिर यह आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण शब्द के रूप में स्थापित रहेगा. शब्द की प्रासंगिकता के बारे में पूर्व-घोषणा करना मुश्किल काम है. ‘वर्ष का हिंदी शब्द’ के रूप में यह शब्द इस साल की प्रतिध्वनि जरूर होगा पर इसका यह मतलब नहीं कि वह ऑक्सफ़ोर्ड के किसी शब्द-कोष का हिस्सा भी होगा.

तो मित्रों देर किस बात की, जाइए और आपके अपने शब्द को भारी मतों से विजयी बनाइए.


वीडियो देखें –

राजस्थान के स्टूडेंट्स क्यों बार-बार कट ऑफ में गड़बड़ी की बात कर रहे हैं? 

 

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