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CAG ने नई रिपोर्ट में NHAI के हवा-हवाई दावों की हवा निकाल दी है, जान लीजिए कैसे

NHAI के अकर्मण्य, भ्रष्ट और निकम्मे लोग इतने पावरफुल हैं कि मिनिस्ट्री के कहने के बाद भी वो अपने निर्णय ग़लत करते हैं.

ये हम नहीं कह रहे. विपक्षी दल भी नहीं कह रहा. ये तो कहा है, भारत सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने. जिनके अंडर में ये संस्था, NHAI आती है. NHAI  यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण. गडकरी ने ये बात NHAI के बड़े अधिकारियों के सामने कही थी. दिल्ली में NHAI की नई बिल्डिंग के वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन के दौरान.

ये बात हालांकि 26 अक्टूबर की है. लेकिन फिर से मौज़ूं हो गई, जब NHAI पर CAG की रिपोर्ट सामने आई.

# क्या है रिपोर्ट में?

फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि NHAI ने अपनी आय और संपत्ति बढ़ा-चढ़ाकर पेश की है. NHAI के कर्ज में वृद्धि हो रही है, लेकिन उस हिसाब से परिसंपत्तियां नहीं बढ़ रही हैं. सरकार इस दिक्कत को कम करके आंकती है, क्योंकि उसे लगता है कि लोन में सरकारी गारंटी है.

CAG ने NHAI के ‘प्रॉफ़िट एंड लॉस’ अकाउंट और बैलेंस शीट में कई अनियमितताएं पाई हैं. NHAI की वित्त वर्ष 2019 की वार्षिक रिपोर्ट के साथ ही ऑडिट कमेंट्स भी दिए हैं. इसके अनुसार CAG का मानना है-

#1. हाइवे अथॉरिटी की अचल संपत्तियों की कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है. ये वास्तविक मूल्य से 3,71,315 करोड़ रुपए ज़्यादा की दिखाई गई हैं. पूर्ण हो चुकी या चल रही परियोजनाओं को NHAI ने अपनी संपत्ति बता दिया है, जबकि वो सभी अब सरकार की हैं.

आसान भाषा में: इसे ऐसे समझें कि लल्लन प्रॉपर्टी रिनोवेशन का काम करता है. अब जितने मकान वो रिनोवेट करता जाता है, उनकी कीमत अपने खाते में गिनता चला जाता है.
(हालांकि हमारा ये उदाहरण ओवर-सिंपलीफ़ाइड है, पर बहुत हद तक ऐसा ही कुछ NHAI ने सरकारी संपत्तियों के साथ किया है.)

#2.TOT (टोल-ऑपरेटेड-ट्रांसफ़र) प्रोजेक्ट्स से होने वाली जिस 9,682 करोड़ रूपये की आय को 30 साल में बांटकर दिखाया जाना चाहिए था, वो एक ही वित्त वर्ष में दिखा दी गई है. चूंकि इन नौ TOT की रियायतें 30 साल की अवधि के लिए हैं इसलिए इससे होने वाली आय को विलंबित (डेफ़र्ड) आय/अग्रिम आय के रूप में दिखाया जाना चाहिए था न कि ‘टोल द्वारा हुई वार्षिक आय’ के रूप में.

आसान भाषा में: ये ऐसा ही है, जैसे आपने किसी को अपना मकान 30 साल के लिए लीज़ पर दिया और किराए से होने वाली 30 साल की आय को एक ही साल में जोड़ लिया. जबकि हर साल होने वाली आय, हर साल अलग-अलग जोड़नी थी. 30 साल तक.

एनएचएआई के अधिकारियों की एक टीम गुरुग्राम के हीरो होंडा चौक फ्लाईओवर की मज़बूती जांचने के लिए कंक्रीट के सेंपल लेती हुई. (तस्वीर: PTI)
NHAI देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव करने वाली अथॉरिटी है. (सांकेतिक फाइल फोटो: PTI)

#3. ‘सर्विस डेट’ के लिए अनिवार्य रिजर्व फंड बनाने में भी NHAI विफल रही है.

आसान भाषा में: राकेश ने अपनी दुकान के लिए 6 लाख रुपए उधार लिए. उसे ब्याज़ मिलाकर अब 5 साल तक हर महीने 15,000 रूपये देने हैं. इसके लिए राकेश को सुनिश्चित करना होगा कि हर महीने की 5 तारीख़ को उसके पास कम से कम 15,000 रूपये तो रहें ही. क्यूंकि हर महीने की 5 तारीख़ को उसके लोन की किस्त जाती है. राकेश सोचता है कि हर महीने की 5 तारीख़ का इंतज़ार क्या करना. क्या पता लास्ट मोमेंट पर पैसे हों ही न. इससे अच्छा तो जिस अकाउंट से लोन की किस्त कट रही है, उसमें थोड़ा-थोड़ा पैसा रोज़ डालूं. ये सुनिश्चित करूं कि उस अकाउंट में हर समय लोन की एक-दो किस्त रहे ही रहें. यूं राकेश ने ‘सर्विस डेट’ के लिए रिजर्व फंड बना लिया, यही बनाने में NHAI विफल रही थी. जबकी NHAI के लिए ये अनिवार्य भी था.

#4.वित्त वर्ष 2019 की 11,331 करोड़ की उधारी को उन संपतियों से एडजस्ट कर दिया गया है जो दरअसल सरकार की हैं.

आसान भाषा में: ‘माइनस 11,331 करोड़ रूपये’ को ज़ीरो करने के लिए उस ‘प्लस 11,331 करोड़ रूपये’ का इस्तेमाल किया गया, जो NHAI का है ही नहीं.

अब सीएजी या कैग के बारे में भी जान लीजिए

आपको 2जी घोटाला याद है. वही 2जी घोटाला जो यूपीए 2 की सरकार पर सबसे बड़ा धब्बा बना था. इसे 2014 में यूपीए की हार का सबसे बड़ा कारण माना गया. इसे 20 लाख करोड़ रुपए का घोटाला कहा गया. इस घोटाले को सामने लाने का काम किया था तत्कालीन सीएजी यानी कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल विनोद राय ने.

सीएजी का काम देश की संसद और विधानसभाओं से पारित खर्चों के हो जाने के बाद उनकी पड़ताल करना है. कुल मिलाकर हर खर्च को खुर्दबीन से देखकर यह पता लगाना है कि कहीं गड़बड़ी तो नहीं. यह काम जितना जटिल है, उतना ही भारी-भरकम भी है. ऐसे में आपको बताते हैं मोटा-मोटी कैग करता क्या है:

#केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के किसी भी विभाग के सभी ट्रेडिंग, विनिर्माण, लाभ- हानि खातों, बैलेंस शीट और अन्य अतिरिक्त खातों का ऑडिट करता है.

#अगर सरकार ने किसी खास काम के लिए कोई पैसा निर्धारित किया तो क्या वह पैसा उस काम पर ही खर्च हुआ कि नहीं, ये चेक करता है.

#जो अधिकारी, उस खर्च को करने के लिए जिम्मेदार था, उसने नियम कायदे से यह खर्च किया कि नहीं, ये जांचता है.

#इस खर्चे में किसी भी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई. क्या काम किया गया.

#उसने जो रायशुमारी की थी, उस पर एक्शन हो रहा है या नहीं.

# सीएजी पूरी रिपोर्ट राष्ट्रपति को देता है जिसे संसद में पेश किया जाता है.

निष्कर्ष ये कि-

सरकारी खर्चे हो जाने के बाद उनका पोस्टमार्टम करने का काम सीएजी करता है.


वीडियो देखें: क्या होती हैं CAG की ताकतें, कितना निष्पक्ष होता है इसका चुनाव?

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