Submit your post

Follow Us

इस बेघर कबीले के लोग अपने घर क्यों नहीं जाना चाहते?

ब्रू सुनते ही हमारे दिमाग में आती है कॉफी और उसके बढ़िया इश्तेहार. हमारे दिमाग में एक भयंकर दंगा और उसके बाद बजबजाते रेफ्यूजी कैंप में रहने को मजबूर लोग नहीं आते. आने चाहिए. क्योंकि ब्रू भारत के वो लोग हैं जो अपने ही देश में रेफ्यूजी बनने को मजबूर हुए. उन्हें अपने राज्य मिज़ोरम को छोड़कर त्रिपुरा में बसना पड़ा. कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक कहानी वाले ब्रू लोगों की बात हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इनकी मिज़ोरम वापसी के लिए केंद्र सरकार, मिज़ोरम सरकार और ब्रू लोगों के संगठन मिज़ोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपल्स फोरम (MBDPF)के बीच हुए समझौते के टूटने का खतरा पैदा हो गया है. MBDPF ने समझौते से बाहर होने का ऐलान कर दिया है.

कौन हैं ब्रू लोग?

ब्रू पूर्वोत्तर में बसने वाला एक जनजाति समूह है. इनकी छिटपुट आबादी पूरे पूर्वोत्तर में है. मिज़ोरम के ज़्यादातर ब्रू मामित और कोलासिब ज़िलों में रहते हैं. तकरीबन एक दर्जन उपजातियां ब्र के अंदर आती हैं. मिज़ोरम में ब्रू शेड्यूल्ड ट्राइब्स का एक समूह माना जाता है और त्रिपुरा में एक अलग जाति. लेकिन त्रिपुरा में इन्हें रियांग नाम से पुकारते हैं. इनकी भाषा भी ब्रू है. फिलहाल इस भाषा की अपनी कोई लिपि नहीं है. लेकिन ब्रू लोग जिस राज्य में बसते हैं, वहां की भाषाएं भी बोल लेते हैं. जैसे बंगाली, असमिया या मिज़ो. कुछ ब्रू हिंदी और अंग्रेज़ी भी बोलते हैं. ब्रू पहले झुम खेती करते थे. इसमें जंगल के एक हिस्से को साफ करके वहां खेती की जाती है. कुछ फसलें लेने के बाद जंगल के किसी दूसरे हिस्से में यही कवायद फिर की जाती है. तो ब्रू एक बंजारा जाति समूह रहा है.

मिज़ोरम में रिफ्यूजी कैंप में रह रहे ब्रू.
मिज़ोरम में रिफ्यूजी कैंप में रह रहे ब्रू.

इन्हें अपना घर क्यों छोड़ना पड़ा?

पूर्वोत्तर में लोग अपनी जातीय पहचान जैसे पहनावे, खान-पान और भाषा को लेकिर बहुत भावुक हैं. जातीय पहचान को मुद्दा बनाकर ही कभी अलग राज्य तो कभी अलग देश की मांग हुई. और इसके लिए उग्रवाद का सहारा लिया गया. तो मिज़ो उग्रवादियों ने भी देश से अलग होने की कोशिश की. जब ऐसा होने की संभावना दूर नज़र आने लगी तो मिज़ो उग्रवाद ने मिज़ोरम पर मिज़ो जनजातियों का कब्ज़ा बनाए रखने के मकसद से हर उस जनजाति को निशाने पर ले लिया जिसे वो बाहरी समझते थे.

1995 में ब्रू और मिज़ो के बीच टकराव बढ़ने के बाद यंग मिज़ो असोसिएशन और मिज़ो स्टूडेंट्स असोसिएशन ने ब्रू जनजाति को बाहरी घोषित कर दिया. और मांग की कि उन्हें राज्य में होने वाले चुनावों में वोट न डालने दिया जाए. ब्रू मिज़ो उग्रवादियों के निशाने पर आ गए. इसके जवाब में ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (BNLF) नाम से ब्रू उग्रवादी खड़े हो गए. राजनीति के लिए ब्रू नेशनल यूनियन (BNU) भी बनी. BNU की मांग थी कि ब्रू लोगों के लिए एक ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल भी बने.

ब्रू लोगों के विस्थापन की कहानी कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक है.
ब्रू लोगों के विस्थापन की कहानी कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक है. (फोटोःपीटीआई)

21 अक्टूबर, 1997 को ब्रू उग्रवादियों ने डम्पा टाइगर रिज़र्व में एक मिज़ो फॉरेस्ट अधिकारी की हत्या कर दी. इसके बाद इलाके में ब्रू लोगों के खिलाफ जमकर हिंसा हुई. ब्रू गुट दावा करते हैं कि 41 गावों में 1400 घर जलाए गए. हत्या और रेप हुए. मिज़ोरम पुलिस घर जलाने की बात तो मानती है लेकिन हत्या और रेप के आंकड़ों पर कुछ नहीं कहती. ब्रू लोग जान बचाकर भागे. तब से ये 6 रिलीफ कैंप्स में रह रहे हैं. ये कैंप त्रिपुरा में उत्तर त्रिपुरा ज़िले के कंचनपुर और पानीसागर सब-डिविज़न में हैं.

नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिलीफ कैंप में रह रहे लोगों की ज़िंदगी बद से बदतर होती गई है. लोगों के पास काम लायक स्किल नहीं है इसीलिए वो मज़दूरी करते हैं या जंगलों से खाना बटोरते हैं. हर 10 में से एक बच्चा किसी न किसी तरह का नशा करता है. शराब से लेकर ड्रग्स तक.

ब्रू बच्चों में से कम से कम 10 फीसदी किसी न किसी तरह का नशा करते हैं. ये सरकार की ही रिपोर्ट्स में ही समाने आया है.
ब्रू बच्चों में से कम से कम 10 फीसदी किसी न किसी तरह का नशा करते हैं. ये सरकार की ही रिपोर्ट्स में ही समाने आया है.

वापसी के लिए क्या हो रहा है?

इनकी वापसी के लिए केंद्र, मिज़ोरम और त्रिपुरा की सरकारें और MBDPF के बीच कई दौर की बातचीत हुई है. 2010 में पहली बार तकरीबन 1600 परिवारों के साढ़े आठ हज़ार ब्रू लोगों को वापस मिज़ोरम में बसाया गया लेकिन मिज़ो गुटों के विरोध के बाद ये रुक गया. 3 जुलाई, 2018 को जिस समझौते का ऐलान केंद्र की ओर से हुआ था, उसमें केंद्र, मिज़ोरम सरकार और MBDPF शामिल थे. इसमें 5,407 ब्रू परिवारों के 32,876 लोगों के लिए 435 करोड़ का राहत पैकेज था. इसमें हर परिवार को 4 लाख रुपए की एक एफडी, 1.5 लाख रुपए घर बनाने के लिए, 2 साल के लिए मुफ्त राशन और हर महीने पांच हज़ार रुपए दिए जाने थे. इसके अलावा त्रिपुरा से मिज़ोरम जाने के लिए मुफ्त ट्रांसपोर्ट, पढ़ाई के लिए एकलव्य स्कूल, डोमिसाइल (मूल निवासी) और जाति प्रमाणपत्र (एसटी) मिलने थे. ब्रू लोगों को मिज़ोरम में वोट डालने का हक भी मिलेगा.

ब्रू अपने गुज़र बसर के लिए छोटे-मोटे काम, मज़दूरी और जंगलों पर निर्भर हैं.
ब्रू अपने गुज़र बसर के लिए छोटे-मोटे काम, मज़दूरी और जंगलों पर निर्भर हैं.

त्रिपुरा सरकार को 30 सितंबर, 2018 से पहले इन सभी लोगों के आधार कार्ड बनवाने थे और मिज़ोरम को इनकी सुरक्षा का इंतज़ाम करना था. ब्रू लोगों ने एक ही जगह बसने की मांग की थी जिसे मिज़ोरम ने नहीं माना. अब ब्रू वही बसेंगे जहां वो विस्थापन से पहले बसते थे.

कौन लोग वापस जाएंगे?
जो ब्रू मिज़ोरम के मूल निवासी पाए जाएंगे, उन्हीं को वापस मिज़ोरम में बसाया जाएगा. इनकी पहचान के लिए 1996 की वोटर लिस्ट का सहारा लिया गया है. वापसी का काम 30 नवंबर, 2017 से शुरू होना था. लेकिन सर्वे में वापस जाने वाले लोगों की संख्या 21,000 से बढ़कर 32,857 (5,413 परिवार) हो गई. इससे कार्रवाई का बजट बढ़ाने की ज़रूरत पड़ी और मामला अटक गया.

ब्रू क्या चाहते हैं?
मिज़ोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपल्स फोरम (MBDPF) ने जनवरी 2018 में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मांग की थी कि मिज़ोरम लौटने वाले हर ब्रू परिवार को 15 लाख दिए जाएं और हर स्वस्थ युवा को सरकारी नौकरी.

ब्रू पारंपरिक रूप से झुम खेती करते रहे हैं. ब्रू अब मिज़ोरम सरकार से एक जगह खेती के लिए ज़मीन चाहते हैं. मिज़ोरम सरकार इसके लिए तैयार नहीं है.
ब्रू पारंपरिक रूप से झुम खेती करते रहे हैं. ब्रू अब मिज़ोरम सरकार से एक जगह खेती के लिए ज़मीन चाहते हैं. मिज़ोरम सरकार इसके लिए तैयार नहीं है.

ब्रू लोगों की सबसे बड़ी मांग सुरक्षा की है. कई लोग डर के मारे मिज़ोरम वापस जाना ही नहीं चाहते. इस बात को सरकार भी समझती है. केंद्रीय गृह मंत्रालय में पूर्वोत्तर मामलों के सलाहकार महेश सिंगला के कहने पर केंद्र सरकार अपनी ओर से ढाई करोड़ रुपए इस मद में खर्च करने को तैयार है. लेकिन केंद्र का कहना है कि इस मामले में उसके हाथ में ज़्यादा चीज़ें हैं नहीं. ब्रू जो सुरक्षा चाहते हैं, वो मिज़ोरम की राज्य सरकार ही दे सकती है.

लेकिन ब्रू आश्वस्त नहीं हैं. MBDPF के अध्यक्ष ए सविबुंगा का कहना है कि उन्हें अपने लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. वो एक ही जगह बसना चाहते हैं और अपने मंदिर और खेतों के लिए ज़मीन चाहते हैं. मिज़ोरम सरकार इन मांगों के खिलाफ है. ब्रू विधानसभा में और नौकरियों में आरक्षण भी चाहते थे. मिज़ोरम ने इस बात से तो साफ इनकार कर दिया था. त्रिपुरा में तकरीबन 5000 ब्रू लोगों ने MBDPF का दफ्तर घेर लिया था. इसी के बाद MBPDF की ओर से समझौता खत्म करने का ऐलान हुआ.

ब्रू लोग इस समझौते के बाद से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वो मौजूदा पुनर्वास पैकेज से संतुष्ट नहीं हैं.
ब्रू लोग इस समझौते के बाद से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वो मौजूदा पुनर्वास पैकेज से संतुष्ट नहीं हैं.

आगे क्या होगा?
केंद्र सरकार ने कहा है वो समझौते पर कायम है और जो लोग लौटना चाहते हैं, उनके प्रति अपने हिस्से के वादे निभाएगी. मिज़ोरम वो अकेला राज्य है जहां भाजपा सरकार में नहीं है. वहां चुनाव होने वाले हैं. मिज़ोरम में आज भी क्षेत्रिय और बाहरी का मुद्दा बहुत मायने रखता है. भाजपा मिज़ो या ब्रू में से किसके पाले में खड़ी दिखती है, इससे उसकी चुनावी संभावनाओं पर फर्क पड़ सकता है.


ये भी पढ़ेंः
त्रिपुरा में लाल सलाम को राम राम
नागा शांति समझौताः वो दस्तखत जो मोदी को इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज कर सकते हैं
नागालैंड: जहां नेहरू-इंदिरा जूझते रहे, वहां पका-पकाया खा रहे हैं नरेंद्र मोदी
माणिक सरकार: बिना कार-फोन वाला गरीब सीएम जो सर्जिकल स्ट्राइक कराता है
त्रिपुरा की सियासत की पूरी कहानी, जहां बीजेपी ने लेफ्ट को पटका है
नागालैंड में मचा सियासी कोहराम गेम ऑफ़ थ्रोन्स से भी धाकड़ है

वीडियोः शिमला समझौता साइन करने आए जुल्फिकार अली भुट्टो के कोड वर्ड ”बेटा” का मतलब क्या था ?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

विधायक विजय मिश्रा, जिन्हें यूपी पुलिस लाने लगी तो बेटियां बोलीं- गाड़ी नहीं पलटनी चाहिए

चलिए, विधायक जी की कन्नी-काटी जानते हैं.

नेशनल हैंडलूम डे: और ये है चित्र देखो, साड़ी पहचानो वाली क्विज

कभी सोचा नहीं होगा कि लल्लन साड़ियों पर भी क्विज बना सकता है. खेलो औऱ स्कोर करो.

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.