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क्रिकेट के फ़ेमस करन-अर्जुन, जिनमें अब चाहर बंधु भी शामिल हो गए

3 अगस्त से शुरू हो रहे वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम इंडिया की घोषणा कर दी गई है. टीम इस दौरे में तीन टी20, तीन वनडे और दो टेस्ट मैच खेलने वाली है. टी20 सीरीज के लिए चाहर बंधुओं, दीपक और राहुल चाहर को टीम में जगह दी गई है. आईपीएल 2019 के फाइनल में दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खेल रहे थे. दोनों को आईपीएल में शानदार प्रदर्शन का लाभ मिला है. दीपक आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हैं. वे नई गेंद को स्विंग कराने में माहिर हैं. वहीं राहुल चाहर मुंबई इंडियंस के लिए स्पिन डिपार्टमेंट की कमान संभालते हैं. दीपक और राहुल रिश्ते में चचेरे भाई हैं. दीपक चाहर इंडिया के लिए एक टी20 मुकाबला खेल चुके हैं. 8 जुलाई 2018 को इंग्लैंड के खिलाफ. दीपक ने अपने पहले मैच में 1 विकेट लिया था. अगर राहुल चाहर को वेस्टइंडीज दौरे में खेलने का मौका मिलता है तो वह उनके करियर का पहला इंटरनेशनल मैच होगा.

यह पहली बार नहीं है जब रिश्ते में भाई क्रिकेटरों को एक साथ खेलने का मौका मिला हो. ऐसे क्रिकेटरों को ढूंढ़ें तो लंबी लिस्ट नजर आती है.

युसूफ़ पठान – इरफ़ान पठान

ऐसी किसी लिस्ट के बारे में सोचने पर ज़हन में सबसे पहला नाम पठान बंधुओं का ही आता है.

छोटे भाई इरफ़ान को अपने जौहर दिखाने का मौका बड़े भाई से पहले हाथ लगा. 2003-04 की बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी में डेब्यू के बाद से ही इरफ़ान तेज़ी से उभरने लगे. इतनी तेज़ी से कि क्रिकेट के गलियारों में और मीडिया के बाज़ारों में उन्हें कपिल देव के बाद का सबसे उम्दा ऑलराउंडर कहा जाने लगा. 2006 के पाकिस्तान दौरे के वो स्टार रहे. कराची में टेस्ट मैच के पहले ही ओवर में हैट्रिक लेकर छा गए. कहते हैं कि बाद में ग्रेग चैपल ने उनके साथ तरह-तरह के प्रयोग कर उनकी प्रतिभा का सत्यानाश मार दिया. उन्हें बॉलिंग से ज़्यादा बैटिंग में ध्यान दिलवाया गया. रन-अप छोटा कर दिया गया. इतने रोल में उनको फिट करने की कोशिश की कि वो किधर के भी न रहे. पठान को कपिल देव बनाने की हर संभव कोशिश की. वहीं से पठान का ग्राफ़ नीचे गिरना शुरू हुआ. पिछले कुछ सालों से सिर्फ आईपीएल में नज़र आ रहे थे. इस साल तो वहां से भी नदारद हैं.

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बड़े भइया युसूफ़ का इंटरनेशनल क्रिकेट में आगाज़ बहुत भव्य स्टेज पर हुआ. सीधे टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप के फाइनल में. वो भी पाकिस्तान के खिलाफ़. साल था 2007. पहले ही ओवर में मोहम्मद यूसुफ़ को उसकी खोपड़ी के ऊपर छक्का मारा. अगले साल का आईपीएल – जो कि आईपीएल का पहला सीज़न था – युसूफ के ही नाम रहा. राजस्थान रॉयल्स जैसी कमतर आंके जाने वाली टीम को उन्होंने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के दम पर कप जितवाया. तबसे आईपीएल के स्टार खिलाड़ी रहे हैं. भारत की टीम में इनका ऑन-ऑफ लगा रहा. आजकल सिर्फ आईपीएल में खेलते हैं. 2011 में रॉयल्स से छूटे, तो केकेआर ने भारी भरकम रकम देकर उन्हें ख़रीदा. तब से अबतक शाहरुख़ की टीम के प्रमुख अस्त्र बने हुए हैं. 2014 में केकेआर को कप जितवाने में इनका बहुत बड़ा हाथ रहा.


सुरिंदर अमरनाथ – मोहिंदर अमरनाथ

भारत के लिए पहली टेस्ट सेंचुरी बनाने वाले लाला अमरनाथ के दो बेटे.

सुरिंदर दोनों भाइयों में बड़े थे. महज़ 15 साल की उम्र में रणजी क्रिकेट खेलने लग गए थे. उनका बैटिंग स्टाइल विध्वंसक था. अपने रंग में होने पर किसी भी बॉलिंग की धज्जियां उड़ा देते थे. जनवरी 1976 में जब न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ़ उनका डेब्यू हुआ तो पहले ही मैच में उन्होंने सेंचुरी ठोक दी. उनका क्रिकेट करियर लगभग 22 सालों तक चला. करीब 41 की एवरेज से उन्होंने 8175 रन बनाए जो कि एक इम्प्रेसिव आंकड़ा है.

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लिटल ब्रदर मोहिंदर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. ‘जिमी’ के नाम से मशहूर मोहिंदर भारत की पहली वर्ल्ड कप विजय के शिल्पकार रहे. उस वर्ल्ड कप के मैन ऑफ़ द सीरीज थे वो. यही नहीं, सेमी-फाइनल और फाइनल में मैन ऑफ़ द मैच भी रहे. आज भी वो विजुअल्स याद हैं जब आखिरी विकेट गिरने पर मोहिंदर स्टंप उखाड़ कर दौड़ते हुए मैदान से बाहर आ रहे थे. धोनी का 2011 में वानखेड़े पर लगाया छक्का भी उसे मिटा नहीं पाया है. एक ऑल-राउंडर के तौर पर उन्होंने भारत के लिए 20 साल क्रिकेट खेला. जिमी भारत के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं, जिन्हें पूरे विश्व में सराहना मिली. साथी खिलाड़ियों से भी.


सी के नायडू – सी एस नायडू

भारत में क्रिकेट के शुरूआती दिनों के हीरो सी के नायड़ू को क्रिकेट से इतना प्यार था कि 68 साल की उम्र में भी मैदान में उतरे थे.

वो भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे. 1927 में जब एमसीसी ने भारत का दौरा किया तब उनके खिलाफ़ खेलते हुए सी के ने 11 छक्कों के साथ 153 रन मार दिए. एक छक्का तो ऐसा था कि डेक्कन जिमखाना की छत पर जा पहुंचा. एमसीसी ने उन्हें इस प्रदर्शन के लिए सिल्वर बैट देकर उनका सम्मान किया. सी के पहले भारतीय खिलाड़ी थे जिन्होंने एंडॉर्समेंट की दुनिया में भी अपना परचम लहराया. एक लीवर टॉनिक के लिए उन्होंने ऐड किया. 1956 में उन्हें पद्मभूषण से नवाज़ा गया.

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उनके भाई सी एस नायडू उनसे बहुत छोटे थे. लगभग 19 साल छोटे. इनका करियर अपने बड़े भाई जितना चमकदार तो नहीं रहा, लेकिन इन्होने भी तकरीबन 18 साल तक भारत के लिए क्रिकेट खेला.


स्टीव वॉ – मार्क वॉ

स्टीव ऑस्ट्रेलिया के सफलतम कप्तानों में से एक हैं. कप्तान के तौर पर लगातार 15 टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाने का अनोखा रिकॉर्ड इनके नाम है. जिसे तोड़ना लगभग असंभव लगता है. क्रिकेट की अनिश्चितताओं के बावजूद. 168 टेस्ट मैच खेल चुके स्टीव कभी सबसे ज़्यादा टेस्ट खेलने वाले क्रिकेटर थे. बाद में सचिन तेंडुलकर ने उनको ओवरटेक किया. 1999 का वर्ल्ड कप जीतने वाली ऑस्ट्रलियन टीम के वो कप्तान थे.

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मार्क, स्टीव के जुड़वां भाई थे. मार्क को क्रिकेट वर्ल्ड में बेहद स्टाइलिश खिलाड़ी होने का तमगा मिला हुआ था. स्टीव से कुछ मिनट छोटे होने की वजह से उन्हें जूनियर भी बुलाया जाता था. मार्क मिडल ऑर्डर में खेलते थे और ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट की रीढ़ की हड्डी थे. बाद में उन्होंने ओपनिंग भी की. ऑफ स्पिन बॉलिंग भी किया करते थे. लेकिन उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत थी उनकी स्लिप में फील्डिंग. आज भी उनके द्वारा लिए गए एक से बढ़कर एक कैच यूट्यूब पर ढूंढ-ढूंढ कर देखे जाते हैं.  1996 के वर्ल्डकप में उन्होंने तीन सेंचुरी मारीं. इस रिकॉर्ड की बराबरी आज तक कोई नहीं कर पाया है. 1999 के वर्ल्डकप में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की ओर से सबसे ज़्यादा रन बनाए.


उमर अकमल – कामरान अकमल – अदनान अकमल

कामरान तीनों भाइयों में बड़े हैं. उनका नाम लेते ही सबसे पहले याद आता है 2011 के वर्ल्डकप का पाकिस्तान-न्यूज़ीलैण्ड मैच. इस मैच में कीपिंग करते हुए भाईजान ने 1 बार नहीं, 2 बार नहीं, पूरे 6 बार बैट्समैन को आउट करने का मौक़ा गंवाया था. तब से उनकी जो ट्रोलिंग होती है, वो आज तक जारी है. हालांकि भारतीयों को वो किसी और वजह से भी याद रहेंगे. 2005 में मोहाली में उन्होंने अब्दुल रज्ज़ाक के साथ मिलकर एक ऐसा टेस्ट मैच बचाया था, जिसमें भारत की जीत तय लग रही थी.

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उमर, कामरान के बाद टीम में आए. सबसे छोटे भाई हैं. अपनी आतिशी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं. अपने डेब्यू वर्ल्ड कप मैच में मैन ऑफ़ द मैच रहे. उमर उन चुनिंदा पाकिस्तानी खिलाड़ियों में से थे जिन्हें कैरीबियन प्रीमियर लीग में पिक किया गया.

अदनान बीच के भाई हैं लेकिन खेले सबसे बाद में. विकेटकीपर हैं. 2010 में टेस्ट डेब्यू किया. उस वक़्त के विकेटकीपर ज़ुल्क़रनैन हैदर के अप्रत्याशित रिटायरमेंट के बाद उन्हें बुलाया गया. आजकल पाकिस्तान के रेगुलर विकेटकीपर हैं.


एंडी फ्लॉवर-ग्रांट फ्लॉवर

फ्लॉवर भाइयों के ज़िक्र के बिना ज़िम्बाब्वे क्रिकेट की चर्चा पूरी हो ही नहीं सकती. बरसों तक दोनों भाइयों ने ज़िम्बाब्वे को क्रिकेट जगत में एक समर्थ प्रतिद्वंदी बनाए रखा.

बड़े भाई एंडी को ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलख्रिस्ट जितना ही शानदार विकेटकीपर बल्लेबाज़ माना जाता है. उन्होंने दस सालों से ज़्यादा तक अपनी टीम के लिए विकेटकीपिंग की और अपने देश के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक रहे. 2000-01 के भारत दौरे पर उन्होंने महज़ चार इनिंग्स में 550 रन बनाए थे. वो दुनिया के अकेले ऐसे बल्लेबाज़ हैं, जिन्होंने वर्ल्ड कप के मैच में डेब्यू करते हुए सेंचुरी लगाई. बाद के दिनों में इंग्लैंड के कोच के रूप में भी वो बेहद सफल रहे.

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छोटे भाई ग्रांट भी कम नहीं थे. ज़िम्बाब्वे के बेहतरीन ऑलराउंडर्स में उनका शुमार होता है. लेफ्ट आर्म स्पिन बॉलिंग किया करते थे. टीम के लिए ओपन करते थे. उनका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट था उनकी फील्डिंग. गली में उनकी चपलता का जवाब नहीं था. 2014 में उन्होंने पाकिस्तान के बैटिंग कोच की ज़िम्मेदारी भी संभाली थी.


इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के माइक हसी-डेविड हसी, साउथ अफ्रीका के एल्बी मॉर्केल-मोर्ने मॉर्केल, इंग्लैंड के टोनी ग्रेग-ईयन ग्रेग, ऑस्ट्रेलिया के ही ब्रेट ली-शेन ली, शॉन मार्श-मिशेल मार्श जैसे भाइयों की जोड़ियां रही हैं, जिन्होंने अपने देश की क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया.


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