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Breonna Taylor Case के फैसले से अमेरिका में इतना विरोध क्यों हो रहा है?

कल्पना कीजिए कि आधी रात बीत चुकी है. आप अपने घर के भीतर गहरी नींद में सो रहे हैं. एकाएक तीन हथियारबंद लोग आपका गेट तोड़कर घर में घुस आएं. आप क्या सोचेंगे उनके बारे में? यही न कि वो अपराधी हैं. अगर इस वक़्त वो तीनों आपसे कहें कि वो पुलिस अफ़सर हैं, तो क्या आप उनपर यकीन करेंगे? वो भी तब, जब उनके शरीर पर वर्दी तक न हो.

छह महीने पहले अमेरिका में ऐसा ही एक केस हुआ

उस रात एक 26 साल की महिला को उसी के घर में छह गोलियां मार दी गईं. इस केस पर अब बड़ा फैसला आया है. तीन आरोपी पुलिसवालों में से एक को दोषी करार दिया गया है. मगर ये दोष उस महिला की हत्या का नहीं है. दोष तय हुआ है मारी गई महिला के पड़ोसियों की जान ख़तरे में डालने का. इस फैसले से एकबार फिर अमेरिका में दंगा भड़क गया है. ये क्या मामला है, विस्तार से बताते हैं आपको.

ये आपबीती है ब्रेओना टेलर की. उम्र, 26 साल. अमेरिका में कन्टॉकी नाम का एक राज्य है. इसका सबसे बड़ा शहर है- लूएवल. यहीं पर एक छोटे से किराये के घर में अपनी बहन के साथ रहती थीं ब्रेओना. वो एक अस्पताल के इमरजेंसी रूम में टेक्निशियन थीं. ब्रेओना की ज़िंदगी अच्छी चल रही थी. कुछ ही दिनों पहले उन्होंने एक कार खरीदी थी. अगला टारगेट था, ख़ुद का घर खरीदना. ब्रेओना ने सोचा था, घर खरीद लें तो अपने बॉयफ्रेंड केनेथ वॉकर के साथ मिलकर परिवार शुरू करेंगी. ब्रेओना और वॉकर ने तो बच्चे का नाम भी सोच लिया था.

Louisville
कन्टॉकी राज्य का सबसे बड़ा शहर- लूएवल. (गूगल मैप्स)

फिर आई 13 मार्च, 2020 की तारीख़

पिछले चार रातों से ब्रेओना की नाइट शिफ़्ट में ड्यूटी लग रही थी. इस रोज़ जल्दी छुट्टी मिली, तो ब्रेओना ने अपने बॉयफ्रेंड वॉकर के साथ वक़्त बिताने का फैसला किया. दोनों ने पहले एक रेस्तरां में डिनर किया. फिर सोचा, घर चलकर आराम से कोई फिल्म देखी जाए.

आमतौर पर ऐसी किसी डेट के लिए ब्रेओना वॉकर के फ्लैट में जाती थीं. इसलिए कि वॉकर अकेले रहते थे. मगर उस रोज़ ब्रेओना का घर भी खाली था. उनकी बहन शहर के बाहर गई हुई थी. ऐसे में डिनर के बाद वॉकर को साथ लेकर ब्रेओना अपने फ्लैट पर आ गईं. दोनों ने टीवी पर एक फिल्म लगाई. फिल्म देखते-देखते ही ब्रेओना को नींद आ गई.

जिस वक़्त ब्रेओना की आंख लगी, उसी वक़्त हाथ में पिस्तौल लिए तीन लोग दबे पांवों से ब्रेओना के घर की तरफ बढ़ रहे थे. ये तीनों पुलिस के अंडरकवर अधिकारी थे. पुलिस को शक़ था कि ब्रेओना का बॉयफ्रेंड वॉकर ड्रग डीलर है. पुलिस ने सोचा, अगर ब्रेओना के घर पर औचक छापा मारा जाए तो शायद कुछ सबूत हाथ लग सकता है.

13 मार्च, 2020 को आधी रात के बाद ये तीनों पुलिस अधिकारी यही रेड मारने ब्रेओना के घर पहुंचे. इन तीनों के नाम थे- ब्रेट हैनकिसन, माइल्स कोसग्रोव और जोनाथन मैटिंगली. इनके पास ब्रेओना के घर की तलाशी का वारंट तो था, मगर शरीर पर वर्दी नहीं थी. न ही इन्होंने ब्रेओना के घर का दरवाज़ा खटखटाया. वो सीधे घर का फ्रंट गेट तोड़ने लगे.

Breonna Taylor
ब्रेओना टेलर (एपी)

तीनों अफ़सरों ने 31 राउंड से ज़्यादा गोलियां चलाईं

घर का गेट इस तरह तोड़े जाते हुए देखकर ब्रेओना और वॉकर डर गए. उन्हें लगा कि कोई ग़लत इरादे से घर में घुसने की कोशिश कर रहा है. वॉकर ने हिम्मत जुटाकर पूछा- कौन है? मगर दरवाज़ा तोड़ रहे अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया. ऐसे में बचाव के लिए वॉकर ने अपनी पिस्तौल निकाली. गेट तोड़कर जैसे ही पहला आदमी घर में घुसा, वॉकर ने उसपर गोली चला दी. वॉकर को कैसे पता चलता कि वो पुलिसवाले पर गोली चला रहा है?

वॉकर की गोली से एक पुलिसवाला जख़्मी हो गया. जवाब में तीनों पुलिसवाले भी फायरिंग करने लगे. तीन में से एक अफ़सर- ब्रेट हैनकिसन ने तो अंधाधुंध गोलियां दागीं. घर का ऐसा कोई कमरा नहीं बचा, जिसमें फायरिंग न की गई हो. उस रात उन तीनों अफ़सरों ने मिलकर 31 राउंड से ज़्यादा गोलियां चलाईं वहां.

उनकी चलाई छह बुलेट्स ब्रेओना को भी लगीं. खून से लथपथ ब्रेओना मरने से पहले ख़ूब छटपटाईं. अपनी मां को पुकारते, खांसते-खांसते बेदम होकर ब्रेओना ने दम तोड़ा. गोली लगने के करीब छह मिनट बाद तक वो ज़िंदा थीं. मगर तीनों पुलिसवालों में से किसी को भी उन्हें बचाने का ख़याल नहीं आया.

Brett Hankison, Jonathan Mattingly And Myles Cosgrove
पुलिस अफसर ब्रेट हैनकिसन, जोनाथन मैटिंगली और माइल्स कोसग्रोव. (एपी)

ब्रेओना ब्लैक न होतीं तो?

ब्रेओना टेलर निर्दोष थीं. उनके खिलाफ़ कोई आरोप नहीं था. पुलिस को उनके बॉयफ्रेंड पर ड्रग्स डीलिंग का शक़ था. मगर वॉकर तो कभी-कभार ही ब्रेओना के घर आते थे. ऐसे में क्या आधी रात के वक़्त इस तरह ब्रेओना के घर में घुस आना सही था? क्या लापरवाही से ताबड़तोड़ गोलियां चलाना सही था? पुलिस पर गोली ब्रेओना ने नहीं, उनके बॉयफ्रेंड ने चलाई थी. वो भी इस ग़लतफ़हमी में कि कोई ग़लत इरादे से घर में घुस आया है. क्या ये ग़लतफ़हमी स्वाभाविक नहीं थी?

ऐसे कई सवाल उठे इस केस में. सबसे बड़ा सवाल था, चमड़ी के रंग का. ब्रेओना ब्लैक थीं. रिसर्च बताते हैं कि अमेरिका का पुलिसिया तंत्र ब्लैक्स के प्रति पूर्वग्रह से भरा है. ब्लैक कम्यूनिटी के लोग अक्सर ही संदिग्ध समझ लिए जाते हैं. उनके साथ डील करते हुए अमानवीयता दिखाई जाती है. जैसे, मई 2020 में हुई जॉर्ज फ्लॉइड की हत्या का केस. पुलिस ने जॉर्ज को संदिग्ध समझकर अरेस्ट करने की कोशिश की. इस दौरान एक पुलिस अफ़सर ने इतना ज़ोर लगाया कि जॉर्ज का दम घुट गया और वो मर गए. ऐसे और भी कई केस हैं. ज़्यादातर मामलों में पुलिसिया हिंसा का शिकार होने वाले पीड़ित ब्लैक्स हैं. ऐसे में सवाल उठा कि अगर ब्रेओना ब्लैक न होतीं, तो भी क्या तफ़्तीश के नाम पर पुलिस ने वैसी ही लापरवाही दिखाई होती?

George Floyd
मई 2020 में जॉर्ज फ्लॉइड की हत्या कर दी गई थी. (एपी)

ब्रेओना टेलर के साथ हुआ सलूक अमेरिका में पुलिस की हिंसा और नस्लीय अन्याय का प्रतीक बन गया. आम लोग तो बोले ही, सिलेब्रिटीज़ भी चुप नहीं रहे. डेमोक्रैटिक पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मिशेल ओबामा ने ब्रेओना का ज़िक्र किया. सिंगर ब्यॉन्से ने ब्रेओना के केस में शामिल तीनों पुलिस अधिकारियों पर केस दर्ज किए जाने की मांग की. अमेरिका के बड़े बास्केटबॉल खिलाड़ियों ने मैच के बाद के अपने इंटरव्यूज़ में बार-बार ब्रेओना का नाम लिया. ओप्रा विन्फ्रे ने अपने ‘ओ मैगज़ीन’ के कवर पर ब्रेओना की तस्वीर लगाई. पिछले 20 सालों से इस मैगज़ीन के कवर पर ओप्रा के सिवाय किसी और की तस्वीर नहीं लगी थी.

Michelle Obama
मिशेल ओबामा (एपी)

क्या असर हुआ इस मुहिम का?

जून 2020 में पुलिस महकमे ने तीनों आरोपी अफ़सरों में से एक- डिटेक्टिव ब्रेच हैनकिसन को नौकरी से निकाल दिया. उस रात ब्रेओना के घर में सबसे ज़्यादा फायरिंग हैनकिसन ने ही की थी. हैनकिसन पर कार्रवाई का कारण बताया गया- वॉन्टन एनडेंजरमेंट. क़ानूनी भाषा में इसका मतलब होता है-

किसी इंसान के जीवन के मोल की अनदेखी करते हुए ऐसी हरक़त करना जिसके कारण किसी के मरने या गंभीर रूप से घायल होने का ख़तरा पैदा हो जाए.

मगर डिटेक्टिव हैनकिसन को ब्रेओना की हत्या के लिए निलंबित नहीं किया गया था. उन्हें अंधाधुंध गोलियां चलाकर पड़ोस के घर में रह रहे तीन लोगों की जान ख़तरे में डालने के चलते नौकरी से निकाला गया था. मगर ब्लैक कम्यूनिटी और ऐक्टिविस्ट्स का कहना था कि वारदात में शामिल बाकी दोनों अधिकारियों पर भी केस दर्ज हो. तीनों पर हत्या का केस चले.

Brett Hankison
पुलिस अफसर ब्रेट हैनकिसन (एपी)

ग्रैंड जूरी का फैसला क्या आया?

इन्हीं मांगों पर 23 सितंबर को अमेरिका से एक बड़ी ख़बर आई. कन्टॉकी स्टेट की एक ग्रैंड जूरी ने 23 सितंबर को इस केस पर अपना फैसला सुनाया. इसमें डिटेक्टिव हैनकिसन को दोषी पाया गया. ब्रेओना की हत्या का दोषी नहीं. बल्कि अंधाधुंध फायरिंग करके ब्रेओना के पड़ोसियों की जान जोख़िम में डालने का दोषी पाया गया. उस रात हैनकिसन के साथ दो और पुलिस अफ़सर भी थे. उनपर क्या कहा ग्रैंड जूरी ने? कहा कि उनपर कोई केस नहीं बनता. ग्रैंड जूरी के मुताबिक, उन दोनों अफ़सरों ने गोली चलाकर कोई ग़लती नहीं की. उनपर फायरिंग हुई थी. ऐसे में जवाबी कार्रवाई के लिए गोली चलाना न्यायसंगत था.

हमने इस डिसिज़न के बारे में बताते हुए कहा ग्रैंड जूरी का फैसला. ये ग्रैंड जूरी क्या है? ये मुकदमा चलाने के पहले की व्यवस्था है. इसको समझ लीजिए एक तरह का पैनल. ये पैनल तय करता है आरोपी के ऊपर मुकदमा चलाए जाने का आधार है या नहीं. ग्रैंड जूरी की कार्यवाही पब्लिक नहीं होती. बस अटॉर्नी जनरल सामने आकर ग्रैंड जूरी के फैसले की जानकारी लोगों को दे देते हैं.

23 सितंबर की दोपहर जैसे ही ग्रैंड जूरी का ये फैसला पब्लिक में आया, अमेरिका में हंगामा मच गया. लोग विरोध के लिए सड़कों पर उतर आए. लूएवल शहर, जहां ब्रेओना की हत्या हुई, वहां शाम होते-होते दंगा हो गया. प्रदर्शनकारियों की एक भीड़ ने दो पुलिस अफ़सरों को गोली मारकर जख़्मी कर दिया. हिंसा को देखते हुए लूएवल शहर में रात नौ बजे से सुबह साढ़े छह बजे तक कर्फ्यू लगाना पड़ा. न्यू यॉर्क, फिलाडेल्फिया, सैन डिएगो, पोर्टलैंड समेत कई अमेरिकी शहरों में इसी तरह प्रदर्शन हो रहे हैं.

Breonna Taylor Protest
हज़ारों लोग ब्रेओना टेलर के समर्थन में सड़कों पर हैं. (एपी)

क्या कह रहे हैं ये प्रदर्शनकारी?

उनका कहना है कि ये न्याय नहीं, तमाशा है. तीनों में से एक भी अफ़सर को ब्रेओना की हत्या का दोषी नहीं माना गया. एक अधिकारी को दोषी ठहराया भी, तो पड़ोसियों की जान ख़तरे में डालने के लिए. ग्रैंड जूरी के फैसले से सबसे ज़्यादा दुखी है ब्लैक कम्यूनिटी. उनका आरोप है कि सिस्टम हर तरह से उनके साथ अन्याय करता है. कई जगह प्रदर्शनकारी रोते हुए भी दिखे.

ब्रेओना की हत्या को 200 दिन होने वाले हैं. आजतक किसी को भी उनकी हत्या के लिए अरेस्ट नहीं किया गया. अरेस्ट करना तो दूर, आरोप तक नहीं तय किया गया. अभी तो ये तक नहीं बताया गया कि ब्रेओना को लगी गोलियां किसकी पिस्तौल से चली थीं. ग्रैंड जूरी के फैसले में भी ब्रेओना की हत्या पर एक शब्द नहीं है. अगर कोई भी जूडिशल सिस्टम इसे न्याय कहता है, तो उसे ख़ुद पर तरस खाना चाहिए. ये न्याय नहीं, किसी भोथरे चाकू से थोड़ा-थोड़ा काटकर, रत्ती-रत्ती छीलकर तड़पाते हुए जिबह करने की प्रक्रिया है.


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