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BPSC AE 2017: मेन्स का रिजल्ट मांग रहे छात्रों पर बरसीं लाठियां

19 अगस्त, 2020. पटना में बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन यानी BPSC के गेट पर कुछ अभ्यर्थी हाथ में तख्तियां लेकर बैठे थे. ये अभ्यर्थी BPSC से AE 2017 भर्ती का रिजल्ट जारी करने की मांग कर रहे थे. BPSC की तरफ से कोई जवाब मिलता, इससे पहले ही पुलिस ने इन पर लाठीचार्ज कर दिया और गेट के सामने से उठा ले गई. लाठीचार्ज में कई छात्रों को चोट आई है. किसी की उंगली टूट गई है, तो किसी का सिर फूट गया है. लेकिन इन छात्रों को इस सवाल का जवाब नहीं मिला कि रिजल्ट कब आएगा?

मार्च 2017 में BPSC की ओर से जारी किया गया विज्ञापन
मार्च 2017 में BPSC की ओर से जारी किया गया विज्ञापन

क्या है मामला? 

मार्च 2017 में BPSC ने एक वैकेंसी निकाली. इस वैकेंसी के जरिए अलग-अलग विभागों में 1284 असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) भर्ती किए जाने थे. लगभग डेढ़ साल बाद 15 सितंबर, 2018 को इसका प्रिलिम्स का एग्जाम हुआ. 30 जनवरी, 2019 को प्रिलिम्स का रिजल्ट जारी किया गया. फरवरी में प्रिलिम्स एग्जाम के कुछ सवालों पर विवाद शुरू होता है. BPSC के जवाब को गलत बताते हुए कुछ अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले जाते हैं. मेन्स की परीक्षा देने वाले सुमित बताते हैं- 

हाईकोर्ट की सिंगल बेन्च ने जजमेंट दिया कि अभ्यर्थियों के ऑब्जेक्शन पर विचार कीजिए. अगर इनका ऑब्जेक्शन सही पाया जाता है, तो इनका फिर से मेन्स एग्जाम लीजिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि रिक्रूटमेंट प्रोसेस चलता रहना चाहिए, वो प्रभावित न हो. BPSC ने तय समय में मेन्स एग्जाम लिया. साथ में सिंगल बेंच के जजमेंट के खिलाफ डबल बेंच में अपील की. तब से ये मामला कोर्ट में ही है. बीपीएसी भी ने भी इसे पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल रखा है. 

पटना हाकोर्ट के सिंगल बेंच का आदेश
पटना हाकोर्ट के सिंगल बेंच का आदेश

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने BPSC को एक्सपर्ट कमेटी बनाकर विवादित सवालों की जांच करने का आदेश दिया. साथ में ये भी कहा कि अगर इन अभ्यर्थियों का दावा सही निकलता है, तो इनका अलग मेन्स लिया जाए. इसी बीच 27-31 मार्च, 2019 तक मेन्स एग्जाम भी आयोजित होती है. मुख्य परीक्षा के बाद 21 मई, 2019 को BPSC पटना हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के जजमेंट के खिलाफ डबल बेंच में जाता है. BPSC का तर्क है कि हमने पहले ही एक्सपर्ट कमेटी से अपनी ऑन्सर की चेक करवाई है. ऐसे में नई कमेटी बनाकर फिर से चेक करवाने का कोई तुक नहीं है. BPSC के वकील संजय पांडेय बताते हैं,

पहले हमने वेबसाइट पर ऑन्सर की जारी कर दिया था, जिस पर अभ्यर्थियों ने ऑब्जेक्शन किया. इस ऑब्जेक्शन को जांचने के लिए BPSC ने एक नई एक्स्पर्ट कमेटी बनाई, जिसमें आईआईटी के प्रोफेसर्स और अन्य एक्सपर्ट शामिल थे. इस कमेटी ने अपनी तरफ से जांच करके कमीशन को रिकमेंड किया. इसके बाद BPSC ने रिजल्ट पब्लिश किया. जब एक एक्सपर्ट कमेटी ने सब चेक कर लिया है, तो फिर अब दूसरे एक्सपर्ट कमेटी की क्या जरूरत है?

अभ्यर्थियों का आरोप है कि BPSC जानबूझकर मामले को ठंडे बस्ते में डाले हुए है. गलत ऑन्सर का ही मामला 64वीं और 65वीं BPSC का भी फंसा था, जिसे BPSC ने एक से दो महीने में ही सुलझा लिया. मेन्स देने वाले आशीष कुमार बताते हैं, 

आप सोचिए, मार्च 2017 की वैकेंसी है. सितंबर 2018 में प्री हुआ. 27 मार्च, 2019 को मेन्स हुआ और अभी अगस्त 2020 तक रिजल्ट नहीं आया है. हाईकोर्ट में केस चल रहा है. इससे पहले जो चेयरमैन साहब थे, वो लगातार कहते रहे कि अगले हफ्ते आ जाएगा, अगले महीने आ जाएगा. कैलेंडर भी यही कहता है कि अगस्त में रिजल्ट दे देना था. लेकिन देखिए एक साल हो गया है.

इसी तरह के केस BPSC की दूसरी भर्तियों में भी थे. उनमें मसला कोर्ट में गया, सिंगल बेंच में, डबल बेन्च में, हर जगह से क्लियर हो गया. लेकिन हमारा अभी तक कुछ नहीं हुआ. हमारे साथ की जो वैकेंसी थी, उनका प्री-मेन्स-इंटरव्यू सब हो गया और रिजल्ट भी आ गया, लेकिन हमारा नहीं आया. BPSC के गेट पर हमने प्रोटेस्ट किया, तो लाठीचार्ज हो गया. 

हालांकि संजय पांडेय इस बात को नकार देते हैं कि BPSC जान-बूझकर मसले को लटका रहा है. वे कहते हैं, 

अभी सुनवाई नहीं हो पा रही है. लॉकडाउन की समस्या की वजह से लिस्टिंग नहीं हो पा रहा है. अभी तो देख रहे हैं कि सब बंद ही है. हम लोगों के पक्ष में ही आदेश आएगा, इसकी हमें पूरी उम्मीद है.  

सरकारी इंजीनियर बनने का ख्वाब लिए हुए ये युवा पिछले तीन साल से कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहे हैं. पढ़ाई कर रहे हैं. एग्जाम दे रहे हैं. कोर्ट में लड़ रहे हैं. सड़क पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं. लाठी खा रहे हैं. सारी योग्यता होने के बावजूद बेरोजगार होकर टहल रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ विभाग में पद खाली हैं, जिसकी वजह से कामकाज भी प्रभावित हो रहा है.

दिल्ली के बड़े संस्थान से पढ़ाई के बाद अच्छी खासी विदेशी नौकरी छोड़कर BPSC मेन्स देने वाले एक अभ्यर्थी ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा- 

आए दिन आप देखिए, जरा सी बारिश में पूरा पटना डूब जाता है. उद्घाटन होते ही सड़क टूट जाती है, ये किसका फेल्योर है? ये सब इंजीनियर्स का काम है. लेकिन जब इंजीनियर्स की पोस्ट ही खाली रहेगी, तो काम करेगा कौन? पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त है. लेकिन पता नहीं क्यों इन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. पूरा मजाक बना रखा है. परेशान होकर हम सब लोग प्रोटेस्ट के लिए गए, तो लाठीचार्ज हो गया. हम सबने मास्क पहना हुआ था. हम सब शांति से बैठे थे. किसी का हाथ टूट गया है, किसी का सिर फट गया है. मेरे भी पैर में चोट लगी है. हम लोग को भी बिहार से उतना ही लगाव है, जितना कोई नेता या कोई अधिकारी टीवी पर आकर दावा करता है. 

डेढ़ साल से ये अभ्यर्थी BPSC के चक्कर लगा रहे हैं. कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं. नेताओं, अधिकारियों, मंत्रियों के चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है. जहां भी जाते हैं, यही जवाब मिलता है कि कोर्ट में केस पेंडिंग है, हम क्या कर सकते हैं? लेकिन इस सवाल की जवाबदेही कोई नहीं तय करता कि कोर्ट में मैटर गया ही क्यों? ये भुक्तभोगी पूछ रहे हैं कि कौन जिम्मेदार है इसका? इतना बड़ा आयोग क्या किसी परीक्षा के लिए 150 सही सवाल-जवाब नहीं तय कर सकता है? किसकी जिम्मेदारी है ये करना? अगर तीन साल में किसी वैकेंसी के दो स्टेप भी पूरे नहीं हो पाए हैं, तो ये किसकी जिम्मेदारी है? क्या ये BPSC और राज्य सरकार की असफलता नहीं है?

इन सवालों के जवाब जानने के लिए हमने BPSC के डिप्टी सेक्रेटरी मनोज झा से बात की. उन्होंने कहा कि इसके लिए कंट्रोलर साहब से बात करिए. कंट्रोलर साहब से हमने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई. अगर कोई जवाब आता है, तो हम उसे अपडेट कर देंगे.


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