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कश्मीर में पत्थर क्यों फेंके जा रहे हैं, ये सफीना की कहानी बताती है

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कैसी होती है उन लोगों की जिंदगी जिनके मुहल्ले में रोज बंदूकें लिए लोग घूमते रहते हैं? कैसे बदलती है उनकी जिंदगी जो एक वक्त अपनी कहानियों में मशगूल होते हैं और अचानक उनका हर काम उनकी कौम और उनकी जगह का प्रतिनिधि बन जाता है? क्या होता है कि जवान हो रहे बच्चों की बात से सरकारें डरने लगती हैं?

पिछले कुछ सालों में कुछ किताबें आई हैं, जो इन सवालों की तहें उधेड़ती हैं. अफगानिस्तान पर खालिद होसैनी ने काइट रनर किताब लिखी जिसने बम से धुआं-धुआं हुए देश की अलग ही कहानी बताई, जो अमेरिका तमाम वादों के बावजूद बता नहीं पाया था. इसी तरह चीन के लेखक मा जियान ने बीजिंग कोमा किताब लिखी. इसमें तानाशाही से मिलती-जुलती सरकार की कहानी है. तिएनमैन स्क्वायर पर चली गोलियों की कहानी है. इसके बाद चीन के लोगों की बदलती जिंदगी की दास्तान है. इसी तरह तिब्बत, नाइजीरिया और मिडिल ईस्ट के लोगों ने भी अपनी कहानियां कही हैं.

इसी तरह इंडिया में कश्मीर के लोगों की दास्तान बेहद खतरनाक है. जबकि अभी कश्मीर हर जगह चर्चा में है. चाहे वो जवानों पर हुए हमले की बात हो, या फिर कश्मीरियों पर हुए अत्याचार की बात हो. इसी चीज को लेकर आए हैं युवा लेखक संचित गुप्ता. हिमाचल प्रदेश के रहने वाले, मुंबई में काम करने वाले संचित ने कश्मीर के तीन युवाओं को चुना है अपनी कहानी को प्रजेंट करने के लिए.

Kashmiri Shi'ite Muslim women and girls watch a Muharram procession ahead of Ashura in Srinagar October 21, 2015. Ashura, which falls on the 10th day of the Islamic month of Muharram, commemorates the death of Imam Hussein, grandson of Prophet Mohammad, who was killed in the 7th century battle of Kerbala. REUTERS/Danish Ismail - RTS5FZ1
कश्मीर की तस्वीर

दो लड़के और एक लड़की. सफीना, बिलाल और कश्मीरी पंडित दीवान. 90 के दशक में जवान हो रहे ये बच्चे आतंकवाद की शुरुआत देखते हैं. अपनी आइडेंटिटी बचाते हुए किस तरह वो फंसते चले जाते हैं, वो एक तरीके से कश्मीर की अपनी कहानी बन जाती है. 20 जनवरी 1990 की रात को एक घटना होती है, जो इनकी जिंदगी को बुरी तरह बदल देती है. फिर 2010 में इनकी जिंदगी फिर से ऐसे मोड़ पर आती है, जहां ये लोग एक-दूसरे से मिलते हैं. और फिर कुछ ऐसा होता है, जो ठीक नहीं होता.

संचित की किताब की कहानी तो अच्छी है, लेकिन लिखने का तरीका कुछ ऐसा है कि ये पहली किताब होने के भाव से मुक्त नहीं हो पाती. लिखने में कई जगह कमजोरियां नजर आती हैं. संचित ने खालिद होसैनी की किताब काइट रनर का भी जिक्र किया है किताब में. पर उतना कॉन्फ्लिक्ट जेनरेट नहीं कर पाते. किताब के पात्र कहानी के हिसाब से उतना टेंशन नहीं पैदा कर पाते. कई जगह ऐसा भी हुआ है कि एक ही पात्र एक ही पेज पर ऐसी चीजें कर देता है कि पाठक को कन्फ्यूजन हो जाता है. हालांकि लेखक की कोशिश है कि पात्र के कई तरह के मूड को एक साथ दिखाया जाए, पर ये प्रयास असफल हो जाता है. इसकी बानगी पहले पेज पर ही दिख जाती है.

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किताब का कवर

लेकिन ये कहने का मतलब कतई ये नहीं है कि किताब कमजोर है. आज के दौर में भारत में युवा लेखकों ने अंग्रेजी में लगातार कॉलेज और नौकरी की जद्दोजहद को ही दिखाया है. ऐसे में एक नये लेखक का एक गंभीर विषय पर किताब आना चकित करता है. संचित इसके लिए कश्मीर भी गए हैं. लोगों से मिले हैं. संचित को 90 के दशक में हो रहे राजनीतिक बदलाव का भी पूरा अंदाजा है. चाहे वो रुबैय्या सईद का अपहरण हो या फिर हिजबुल मुजाहिद्दीन का बनना, संचित ने सबको क्रॉनिकल किया है किताब में. तीनों पात्रों की जिंदगी राजनीति के हिसाब से ही बदलती है. किताब मॉडर्न ट्रेंड को अपनाते हुए चल रही है, जिसमें पाठक को बोर होने का मौका नहीं देते. ये किताब की ताकत भी है और कमजोरी भी. पाठक तेजी से पढ़ेगा लेकिन कैरेक्टर्स को लेकर थोड़ा असंतुष्ट रहेगा. पर संचित की ये पहली किताब है और विषय बेहद गंभीर है, तो बहुत से पाठक कमियों की ओर ध्यान नहीं देंगे.

सबसे अच्छी चीज है कि ये पात्र हार नहीं मानते. इनके अंदर जिज्ञासा है, लड़ने की ताकत है, फैसले लेना जानते हैं. पर ये सही हैं कि नहीं, नहीं जानते. संचित सरल भाषा का प्रयोग करते हैं. कश्मीर के सीन इनकी आंखों में बसे हुए हैं. बढ़िया वर्णन करते हैं. किताब में धीरे-धीरे गुस्सा घुसाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कश्मीर में हुआ है. किताब खत्म होते-होते पता चल जाता है कि पत्थर क्यों फेंके जाते हैं कश्मीर में. जिस हिसाब से कहानी बढ़ती है, लगता है कि अगर चीजों को सरकार संभाल नहीं पाई तो ये असंतोष ही सिस्टम बन जाएगा.

ये किताब नियोगी बुक्स पब्लिकेशन से आई है. इसकी कीमत 350 रुपये है. लेकिन अमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर रेट कम हैं.

किताब के कुछ कोट्स:

1. “If a criminal was once a saint & a saint was once a criminal, then who is the criminal & who is the saint?”

2. “They want a hero to worship, and a villain to condemn. They have found their villain today, and they would cherish it for as long as they can, till another one comes along.”

3. “All they want is to point a finger.”

4. “You killed the mandir in their homes, you killed the masjid in ours.”

5. “Revenge is an orphan in bad company she had learnt. Until it accepts the truth, it may never find grace.”

6. “This land is Kashmir! This, here, where you sit right now is Jannat. Paradise. Which you can seek while you are alive.”

7. “No one lives long in a war.”

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