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तुलसीदास ने अकबर से कहा- 'मैं सदा वर्तमान में रहूंगा, महाराज!'

1 अप्रैल 2018 को दिल्ली के 'अकैडमी ऑफ फाइन आर्ट ऐंड लिटरेचर' में 'समकालीन अवधी साहित्य में प्रतिरोध' पुस्तक (संपादक- डॉ. अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी) के लोकार्पण और परिचर्चा के दौरान ये बातें प्रख्यात साहित्यकार असगर वजाहत ने कहीं. लोकभाषा की बात थी, तो वे अवधी व हिन्दी दोनों में बोले. प्रस्तुति है राघव देवेश की, जो किरोड़ीमल कॉलेज (DU) से M.A. कर रहे हैं.

अवधी प्रेमियन क हमार नमस्कार!

हमार जिला है फतेहपुर. इलाहाबाद औ कानपुर के बीच मा. उधर है बांदा. हमार अवधी थोड़ी भिन्न अवधी हय. काहे से कि बुन्देली कै थोरा सा प्रभाव है यहिपै. यहि किताब के बारे मा बहुत, पर्याप्त, चर्चा भई. बहुत बढ़िया. बहुत पक्छन का उद्घाटित किहा गवा. उनका दोहराउब अच्छा न होये. अवधी के माध्यम से कुछ बातचीत किहा जाय, तौ बढ़िया रहे.

आजकल तुलसीदास पर यक नाटक लिखि रहे हन. इस माने मा अवधी के छेत्र मा घूमि रहे हन. अवधी कय काम चलि रहा है.

हमारा ई मानना है कि तुलसीदास का साहित्य प्रतिरोध का ही साहित्य है. वैसे ही प्रतिरोध का साहित्य है, जैसे ईरान में फिरदौसी का. प्रतिरोध राजसत्ता से भी है. प्रतिरोध जड़ता से भी है. अन्याय अत्याचार से भी है. जनपक्ष में ई प्रतिरोध है. हमार नाटक मा तुलसीदास हैं. अकबर हैं. अब्दुल रहीम खानखाना हैं. बीरबल हैं. अऊर दुइ-चार-छः पात्र हैं.

कार्यक्रम में बोलते असगर वजाहत
कार्यक्रम में बोलते असगर वजाहत

कहा जात है कि अकबर बुलायिन रहयं तुलसीदास का. काहे से कि अकबर बहुत सौकीन रहयं कि सारी प्रतिभा का जमा कयि लेव सीकरी मा. जे जौन काम मा उत्तम है, बढ़िया है, ओका बुलाय लेव. तुलसीदास नाहीं गये. काहे नाहीं गये, काहे ऊ बुलायिस इनका, कौन कारन रहै, या बात खुल के सामने नाहीं आय पाई है.

हम अयिसा किया है अपने नाटक मा कि, कल्पना मा, सपना मा तुलसीदास और अकबर आमने-सामने हैं. वइ इनसे पूछि रहे हैं कि भाई काहे आप नहीं आये? हम सम्मान के साथ बुलावा रहे आपका. तुलसीदास उत्तर देत हैं. दोनौ की बातचीत वहि दृश्य मा हय. दृश्य कय अंत का हुअत हय:

मंच पर सम्राट अकबर के ऊपर कुछ पोथी-पोथे गिरत हैं. गोस्वामी जी से पूछत हैं, ई का गिर रहा? गोस्वामी जी कहत हैं, महाराज ई आपकै प्रशंसा, आपकी महानता की गाथा है, आपकी विजय, आपकै योगदान, आपका साम्राज्य, आपकी नीतियां हैं और आप इतिहास में अमर हो गये हैं महाराज, अमर. अकबर तुलसीदास से पूछते हैं, और तुम? तुलसीदास कहते हैं कि मैं सदा वर्तमान में रहूंगा महाराज, वर्तमान में.

asghar

इतिहास में नहीं, तुलसीदास वर्तमान में रहेंगे. वह कवि जो वर्तमान में रहता है, उसकी भाषा और उसका महत्व आप देखिये. वह इतिहास में नहीं है. अब एक-दो और अवधी के रोचक प्रसंग आपके सामने रखित है.

रघुवीर सहाय हिन्दी के बहुत बड़े कवि रहे. उनके साथ गये रहन फतेहपुर. यक बाई एलेक्सन मा. रोड़वेज की बस से कच्चे रास्ते में चले. धूल-धक्कड़ सब पूरे चेहरे-वेहरे में कपड़े-वपड़े में लग गयी. एक आदमी बस में बैठा रहै. अंगौछे से अपना झाड़ रहा रहै. ऊ कहिस- बड़ा पौडर लग गवा है. बड़ा पौडर लग गवा! रघुवीर सहाय कहिन, देखा आपने देखा! ये कविता है. इस छेत्र के लोगों की जो सेंसिबिलिटी है वह काव्यात्मक है. ये साधारण भाषा में बात नहीं करते. ये कविता है. तो, अवध की भूमि, एक प्रकार से कविता के लिए एक उर्वर भूमि है.

कार्यक्रम की एक तस्वीर
कार्यक्रम की एक तस्वीर

अब सुनिये एक और रोचक प्रसंग.

हमारे फतेहपुर में एक दोस्त थे. दोस्त क्या थे, बुजुर्ग थे हमसे. नाम था गणेश आज़ाद. वे गये बंबई. बंबई में किसी अंधेरी गली से निकर रहे थे. पीछे से किसी ने चाकू लगा दिया और कहा- “जौन तुम्हरे पास हुवय तौन रख दियौ.” गणेश आज़ाद समझ गये कि, हो न हो, यह आदमी फतेहपुर का है. उन्होंने कहा- “फतेहपुर के हो का?” वह घूमकर सामने आ गया. बोला- “अरे भैया, हमका नहीं पहिचानेव!” पकड़ के लिपट गया. अरे भैया आप, बड़ी भारी गलती भयी हमसे! कहिन कि गलती क छोड़ौ, तुम का करि दियौ, हम तौ डरि गये रहन. कहिस कि भैया, अब चाय पिलाये बिना तौ हम आपका न जाय दियब. चाय पियै चलौ.

इसका क्लाइमेक्स यह है कि चाय पिलाने के बाद उसने कहा- “भैया, यक कलम है ई, ईका आप रखि लेव.” उन्होंने कहा- “ई का?” उसने कहा- “रखि लेव. भेट है हमरी तरफ से.” उन्होंने कहा- “ये है क्या?” उसने कहा- “आपसे पहिले जौन मिला रहे ना, उनके लगे से ई कलम मिली. हमरे लिये तौ ई कौनौ काम कै है नहीं. आप रखि लेव, हम दे रहे हन.” उन्होंने कहा- “हम न लेंगे, चोरी का माल है.” उसने कहा- “भैया आपसे का मतलब. अरे हम भेंट दे रहे हैं न आपको. बड़े प्रेम से आप रक्खौ.” चाय-वाय पिला के विदा किया.

बुक लॉन्च की एक तस्वीर
बुक लॉन्च की एक तस्वीर

यह है भाषा का काम. विशेष रूप से जब आप बाहर रह रहे हों, तो भाषा कितना जोड़ती है, शक्ति देती है. यह जो किताब का काम हुआ है, यह बहुत प्रशंसा योग्य है, एक बड़ा काम हुआ है. इस प्रकार के और काम हों और वे लोगों तक जाएं. सबसे बड़ी बात यह है. बधाई सभी अवधी प्रेमियों को.


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