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दुनिया में सिर्फ ये दो लोग हैं, जिनके पास नोबेल प्राइज और ऑस्कर अवॉर्ड दोनों हैं

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लॉस एंजिल्स में 90वां ऑस्कर अवॉर्ड्स समारोह संपन्न हुआ. लिस्ट तो अब तक आपको तमाम टीवी चैनल वाले बता ही चुके होंगे कि किसने क्या हासिल किया. हम आपको कुछ और बताने वाले हैं.

ऑस्कर अवॉर्ड और नोबेल प्राइज के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे. मोटा-माटी फिर से जान लीजिए. ऑस्कर अवॉर्ड सिनेमा की फील्ड में असाधारण काम करने पर हासिल होता है. एक्टिंग, डायरेक्शन, सिंगिंग, राइटिंग इनमें से किसी भी एक डिपार्टमेंट में अच्छा काम करने पर आप ऑस्कर के दावेदार बन सकते हैं. कैटेगरीज और भी हैं.

नोबेल पुरस्कार शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उम्दा काम करने पर दिया जाता है. इस पुरूस्कार को सर्वोच्च सम्मान हासिल है.

दुनियाभर में इन दोनों पुरस्कारों को अपने-अपने क्षेत्र में अल्टीमेट सम्मान माना गया है. किसी एक का भी आपके ड्राइंग रूम में होना गर्व की बात है. क्या हो अगर किसी इंसान के पास दोनों अवॉर्ड हो!

नोबेल प्राइज 1901 से बांटा जा रहा है. ऑस्कर अवॉर्ड्स की शुरुआत 1929 में हुई थी. इन ढेर सारे सालों में ऐसे सिर्फ दो लोग इस धरती के तख्ते पर हुए, जिनके पास ये दोनों अवॉर्ड्स हैं.

ये दो महानुभव थे जॉर्ज बर्नार्ड शॉ और बॉब डिलन.

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

बर्नार्ड शॉ एक आला दर्जे के प्ले राइटर थे. इसके अलावा वो आलोचक और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट भी थे. उन्होंने फिल्मों के लिए भी लिखा. 1925 में साहित्य के लिए नोबेल प्राइज दिया गया. 13 साल बाद उन्हें ऑस्कर भी मिला. ‘पिगमेलियन’ फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखने के लिए. ऑस्कर हासिल करते वक़्त उनकी उम्र 82 साल थी.

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ.
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ.

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ अपनी हाज़िरजवाबी के लिए मशहूर थे. एक किस्सा सुनाते हैं.

एक दिन पुरानी किताबों की दुकान में शॉ को उनकी ही लिखी एक किताब मिल गई. जिसपर उन्होंने अपने हाथ से अपने एक मित्र के लिए लिखा हुआ था: “प्रिय मित्र….. को, आदर सहित, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ.”

शॉ ने फ़ौरन वह किताब खरीद ली और उसी मित्र को वह किताब फिर से भेज दी. नीचे नोट में लिखा था, “अपडेटेड आदर के साथ, जॉर्ज बर्नार्ड शा.”

2016 तक जॉर्ज बर्नार्ड शॉ विश्व में ऐसे अकेले आदमी थे, जिनके पास ऑस्कर और नोबेल दोनों थे. फिर उनके बराबर में बॉब डिलन आ बैठे.

बॉब डिलन

बॉब डिलन अमेरिकन गायक, गीतकार और लेखक हैं. जब जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की मौत हुई थी बॉब सिर्फ 9 साल के थे. 60 के दशक में अमेरिका में जब क्रॉस कल्चरल मूवमेंट ज़ोरों पर था, तब बॉब एक पूरी पीढ़ी की आवाज़ बन गए थे. अमेरिका में उन्हें जनगायक और लोकगायक के रूप में बेशुमार सम्मान हासिल है. ठीक उसी तरह जैसे भारत में आल्हा और बिरहा गाने वाले गायकों का सम्मान है. 1965 में आए बॉब के गीत ‘लाइक अ रोलिंग स्टोन’ ने लोगों की चेतना को झिंझोड़कर रख दिया था. बॉब ने एक पूरी नस्ल की ओर से सभ्यता के ठेकेदारों से सवाल किया था: “हाऊ डज़ इट फ़ील, टु बी विदाउट होम, लाइक अ रोलिंग स्टोन?”

उनके गाने “ब्लोइन इन द विंड” और “टाइम्स दे आर अ-चेंजिन” युद्ध विरोधी मुहिमों के एंथम बन गए थे. उन्होंने पॉप गीतों को कविताई की आभा बख्शी.

बॉब डिलन.
बॉब डिलन.

बॉब को 2000 में बेस्ट ओरिजिनल सॉंग कैटेगरी में ऑस्कर अवॉर्ड मिला. फिल्म थी ‘वंडर बॉयज’ और गाना था, ‘थिंग्स हैव चेंज्ड’.

साहित्य में उन्हें नोबेल दिए जाने की चर्चा तो कई साल चली लेकिन अवॉर्ड मिलते-मिलते 2016 आ गया. 13 अक्टूबर 2016 को उन्हें साहित्य के नोबेल पुरुस्कार से नवाज़ा गया.

इन दो महानुभवों के अलावा और किसी के हिस्से ये सम्मान अब तक नहीं आया है.


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