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कौन हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया को BJP में लाने वाले ज़फ़र इस्लाम?

ज्योतिरादित्य सिंधिया. नए नवेले भाजपाई. पुराने कांग्रेसी. 10 मार्च, 2020 यानी होली के दिन उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की थी. उसके बाद उन्होंने और शाह ने पीएम मोदी से मुलाकात की. और सिंधिया के बीजेपी में जाने की बात कंफर्म हो गई. वैसे तो खबर आई कि शाम तक सिंधिया बीजेपी जॉइन कर लेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अलगे दिन दोपहर तक का इंतजार करना पड़ा. फाइनली अब सिंधिया भाजपा के हो गए हैं.

राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले ये जानना चाहते हैं कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के ‘दोस्त’ ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में शामिल कराने के पीछे किसका ‘हाथ’ है. कौन था, जिसने बीजेपी आलाकमान के सामने ज्योतिरादित्य सिंधिया की बात पहुंचाई. कौन है, जिस पर बीजेपी हाईकमान ने इतना भरोसा किया.

न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, सिंधिया को अमित शाह से मिलवाने और पीएम मोदी तक पहुंचाने वाले नेता कोई और नहीं, बीजेपी प्रवक्ता ज़फ़र इस्लाम हैं. इस्तीफे के ऐलान से पहले सिंधिया दो बार पीएम मोदी से मिले. पहली बार 9 मार्च की शाम जब ये खबरें आईं कि सिंधिया समर्थक 16 विधायक बेंगलुरु पहुंच गए हैं. पीएम मोदी से सिंधिया की दूसरी मुलाकात हुई  10 मार्च की सुबह. होली के दिन.

इस मुलाकात के वक्त ज़फ़र इस्लाम 7, लोक कल्याण मार्ग पर मौजूद थे. जब गृहमंत्री अमित शाह ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर प्रधानमंत्री आवास पहुंचे थे, उस समय भी ज़फ़र इस्लाम गृहमंत्री अमित शाह की गाड़ी में मौजूद थे. ज़फ़र को सिंधिया के दिल्ली स्थित उनके घर पर भी देखा गया. इसके बाद मीडिया का ध्यान ज़फ़र इस्लाम पर गया.

पांच महीने पहले लिखी गई पटकथा!

ज़फ़र सिंधिया को पहले से जानते थे. उस समय से जब सिंधिया कांग्रेस के कोटे से केंद्रीय वाणिज्य मंत्री थे. तब ज़फ़र राजनीति में नहीं आए थे. बैंक में काम करते थे. जान पहचान पुरानी थी. सिंधिया एक साल से कांग्रेस से नाराज चल रहे थे. कभी केंद्रीय मंत्री रहे संधिया के पास इस दौरान न तो सांसदी थी और न ही विधायकी. कांग्रेस ने उन्हें इस कदर नजरअंदाज किया था कि संगठन में भी उन्हें कोई पद नहीं दिया गया था. ‘खाली हाथ’ सिंधिया करते भी क्या. बीजेपी में जाने की सोचने लगे. जैसा कि उन्होंने अपने इस्तीफे वाले पत्र में भी लिखा है कि एक साल से उनके कांग्रेस छोड़ने के रास्ते तैयार किए जा रहे थे.

ऐसे में ज़फ़र इस्लाम से उनकी पुरानी जान पहचान काम आई. सूत्रों की मानें तो सिंधिया ने ज़फ़र के सामने बीजेपी में जाने की अपनी इच्छा जाहिर की. ज़फ़र ने उनकी बात बीजेपी हाईकमान तक पहुंचाई. इसके बाद ज्योतिरादित्य को बीजेपी में लाने की कवायद और मध्यप्रदेश में ‘ऑपरेशन लोटस’ की पटकथा लिखी गई. कहा जा रहा है कि इस पूरे ऑपरेशन में बीजेपी की तरफ से सिर्फ लॉजिस्टिक और अन्य सहायता दी गई. पूरा ऑपरेशन ज्योतिरादित्य के मुताबिक ही चला.

IANS के मुताबिक, सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने को लेकर ज़फ़र और सिंधिया में पांच महीने से बात चल रही थी.

कौन हैं ज़फ़र इस्लाम?.

पहली पहचान बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता. अक्सर डिबेट में बीजेपी का बचाव करते टीवी चैनलों पर दिख जाते हैं. 17 सितंबर, 2018 को इंडियन एक्सप्रेस में उन्होंने एक आर्टिकल लिखा था. पीएम मोदी के बर्थ-डे पर. इस आर्टिकल में उन्होंने लिखा,

मैं फाइनेंस सेक्टर में काफी काम कर चुका था. 2013 में जब मैंने राजनीति में आने के लिए सोचा, उस समय मैं ड्यूश बैंक का एमडी था. कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के नेताओं से मेरी मुलाकात हुई. मैंने पाया कि सबको सत्‍ता का लालच है. इसके अलावा कोई उद्देश्य नहीं है. इसी दौरान इत्तेफाक से नरेंद्र मोदी से मेरी मुलाकात हो गई, जो उस वक्त से गुजरात के बाहर अपनी पहचान तेजी से बना रहे थे. मोदी गर्मजोशी से मुझसे मिले. पूछा कि राष्‍ट्र-निर्माण के सपने के साथ जुड़ना चाहते हैं तो जुड़ सकते हैं.

5 अप्रैल, 2014 को ज़फ़र इस्लाम ने बीजेपी जॉइन की थी. लोकसभा चुनाव के दौरान. इसी आर्टिकल में वो लिखते हैं कि बीजेपी जॉइन करने की बात उनके घरवालों को पसंद नहीं आई. क्योंकि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों के मन में बीजेपी को लेकर एक डर पैदा कर दिया था.

मोदी सरकार ने ज़फ़र इस्लाम को 2017 में एयर इंडिया का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया. इसके साथ ही वो बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. मध्य प्रदेश चुनाव के दौरान बीजेपी ने उन्हें मध्य प्रदेश का मीडिया प्रभारी बनाया था. तीन महीने से ज्यादा समय तक वो मध्य प्रदेश में ही रहे. अमित शाह की गुडलिस्ट में ज़फ़र का नाम है. इसलिए जब उन्होंने सिंधिया वाली बात शाह को बताई तो आलाकमान ने उन पर भरोसा जताया और आज सिंधिया बीजेपी के हो गए हैं.


होली के दिन कांग्रेस में भूचाल लाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की पूरी कहानी

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