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कविता कृष्णमूर्ति की आवाज से एक बहनापा सा लगता है

उनकी आवाज से एक बहनापा है. सुनता हूं तो लगता है कि इसे कभी किसी टाइम के खांचे में फंसे होने के दौरान गुना था. और साथ गिरह खुली थीं दरमियां की. उन्होंने हिंदी में बहुत ज्यादा तो नहीं गाया. मगर 30 साल से भी ज्यादा के फासले में कई यादगार गाने दिए. बात हो रही है कविता कृष्णमूर्ति की. 25 जनवरी 1958 को नई दिल्ली में उनका जन्म हुआ था.

कविता का असल नाम शारदा है. उनके पापा HRD वाले मंत्रालय में कर्मचारी थे. और भारत की विविधता को सलाम. कि उत्तर भारत के सबसे बड़े शहर में एक तमिल अय्यर परिवार की लड़की ने सबसे पहले जो संगीत सीखा, वह था बंगाल का रबींद्र संगीत.

कविता महज 9 साल की थीं, जब उन्होंने लता मंगेशकर के साथ गाना गाया. साल था 1967. तब लता किवदंती बनने की राह पर काफी आगे निकल चुकी थीं. लता और कविता ने एक टैगोर सॉन्ग रिकॉर्ड किया था. इसमें संगीत था हेमंत कुमार का.

कविता का बचपन लुटियंस दिल्ली की सरकारी कॉलोनी में बीता था. वह बड़े होकर आईएफएस अधिकारी बनना चाहती थीं. मगर फिर म्यूजिक में ऐसी लौ लगी कि बलराम पुरी से क्लासिकल सीखने लगीं. और आधी पढ़ाई में ही बंबई शिफ्ट हो गईं.

कविता ने मुंबई के मशहूर सेंट जेवियर्स कॉलेज से इकॉनमिक्स में बीए किया. इस दौरान वह हेमंत कुमार की बेटी रानू मुखर्जी से मिलीं. एक बार फिर से संगीत की राह खुली. मन्ना डे ने उनसे रेडियो के लिए कई जिंगल्स गवाए. फिर मुलाकात हुई हेमा मालिनी की मम्मी जया चक्रवर्थी से. उन्होंने कविता को लक्ष्मीकांत तक पहुंचाया.

लक्ष्मीकांत ने कविता को अपने संरक्षण में ले लिया. उस दौरान मुंबई के सिने सर्कल में ये हल्ला था. कि लक्ष्मीकांत के पास एक कमाल की साउथ इंडियन लेडी सिंगर है. मगर वो उसे और किसी के लिए नहीं गाने देता.

कुछ ही बरसों में भरम छंट गया. कविता को पहला ब्रेक भी उन्होंने नहीं बल्कि आनंद बख्शी ने दिया. साल 1980 में आई फिल्म का नाम था मांग भरो सजना. जितेंद्र-रेखा की इस फिल्म में कविता ने गाया फोक सॉन्ग. काहे को बियाही बिदेस. फिल्म में गाने को जगह नहीं मिली. पर यहां आप उसे सुन सकते हैं

हालांकि इसी गाने को एक साल बाद उमराव जान में भी और भी बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया गया. पूरी गंवारू धमक के साथ. जगजीत कौर की आवाज ने इसे ये इज्जत बख्शी.

कविता का पहला सुपरहिट गाना था फिल्म ‘प्यार झुकता नहीं’ में. बोल थे, तुमसे मिलकर, न जाने क्यों. इसका डुएट लता मंगेशकर ने शब्बीर कुमार के साथ गाया था. सोलो कविता को मिला. एक बच्चा पर्दे पर अपनी मां के लिए गा रहा है. और पीछे, कविता के सुर हैं.

इसके बाद उनके साल दर साल हिट आते रहे. मिस्टर इंडिया से चल निकला सिक्का अभी तक रुका नहीं. मगर पहला बड़ा अवॉर्ड मिला 1995 में. विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म 1942 ए लव स्टोरी के गाने के लिए. फिल्मफेयर बेस्ट प्लेबैक सिंगर, फीमेल. आइए सुनें. प्यार हुआ चुपके से.

कविता ने फिल्मफेयर अवॉर्ड में हैट्रिक मारी. प्यार हुआ चुपके से के बाद अगले साल उन्होंने यारना के लिए गाया, मेरा पिया घर आया. और फिर 1997 में खामोशी के लिए गाया, आज मैं ऊपर. सबने उन्हें ट्रॉफी दिलाई.

आप सुनिए मेरा पिया घर आया. बदमाश गाना. इससे कविता की रेंज समझ आती है. कि वह सिर्फ ठहरे हुए गाने ही नहीं और भी बरत सकती हैं.

कविता ने 11 नवंबर 1999 को वायलिनिस्ट एल सुब्रमण्यम से शादी की. बेंगलुरु में. और अब वही शहर उनका ठिकाना है. कविता ने बच्चे नहीं किए. पति के पहली शादी से 4 बच्चे हैं. उनमें दो म्यूजिक फील्ड में हैं. सब साथ रहते हैं. पति-पत्नी म्यूजिक इंस्टिट्यूट चलाते हैं. कविता पूरी दुनिया में परफॉर्म करती हैं. हर तरह के संगीत के साथ संगत बैठाती हैं.

और लास्ट में मुबारकबाद के साथ मेरा फेवरिट कविता कृष्णमूर्ति सॉन्ग. मेरे अजीज कवि इरशाद कामिल के बोलों को जब उन्होंने होठों से छुआ. फिल्म है इम्तियाज अली की रॉकस्टार. देखिए कैसा सूफियाना मिजाज. इश्क पोर पोर से टपकता.

तुम हो पास मेरे

साथ मेरे हो

तुम यूं

जितना महसूस करूं तुमको

उतना ही पा भी लूं

तुम हो मेरे लिए

मेरे लिए हो तुम यूं

खुद को मैं हार गया

तुमको मैं जीता हूं

और गर अब भी कविता की आवाज को और खंगालने का मन हो तो ये भजन. प्रभु जी मेरे अवगुण चित्त न धरो.


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