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शेल्टर होम का आरोप- HIV पॉजिटिव बच्चियों को पुलिस जबरन ले गई, वकील को भी बुरी तरह पीटा

‘पुलिस अंकल ने मेरे को मारा. फिर घसीटकर कार में बिठाया. मैंने भागने की कोशिश की, तो मेरे बाल खींच लिए. दोनों पुलिस अंकल ने मारा.’

‘मेडिसिन नहीं है हम लोगों का. सबको मारा. किसी को नहीं छोड़ा. नीता* को इतना मारा कि उसके नाक से खून बहना शुरू हो गया था. हॉल में मेरा खून था. चूड़ी से हाथ कट गया था मेरा. उन लोगों ने गेट भी तोड़ दिया. ये लोग कभी ख़ुशी से नहीं रहेंगे.’

ये एक लड़की की आवाज़ है, जो कथित रूप से एक कॉल पर बता रही है कि कैसे पुलिसवालों ने उसे और उसके साथ रह रही लड़कियों को घसीटकर शेल्टर होम से निकाला. और उनके साथ मारपीट की.

ये रिकॉर्डिंग ‘दी लल्लनटॉप’ के पास उपलब्ध है. इसमें नाम बदल दिए गए हैं.

मामला क्या है?

मामला है छत्तीसगढ़ के बिलासपुर का. यहां अमोरी नाम की जगह है. यहीं पर अपना घर नाम का शेल्टर होम चलाया जाता है. एक NGO द्वारा. ये ख़ास तौर से HIV पॉजिटिव बच्चियों के लिए है. यहां 14 लड़कियां रहती हैं. आरोप ये लगाए जा रहे हैं कि बिलासपुर के सरकंडा थाने की पुलिस ने 17 अगस्त को जबरन इन बच्चियों को वहां से निकाला और सरकारी शेल्टर होम में ट्रान्सफर किया. आरोप लगाए हैं एडवोकेट प्रियंका शुक्ला ने. उन्होंने बताया कि उनके साथ भी मारपीट हुई है. जब ‘दी लल्लनटॉप’ ने प्रियंका शुक्ला से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि वो हॉस्पिटल में एडमिट हैं. मामले की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया,

’2019 में ये मामला मेरे पास आया था. ऐसा था कि संस्था ने सरकार से अनुदान मांगा था. लेकिन उसे देने के नाम पर अधिकारी घूस मांग रहे थे. वो देने से संस्था वालों ने इनकार कर दिया. मैंने खुद भी चेक किया. संस्था HIV पॉजिटिव बच्चों के लिए अच्छा काम कर रही थी. लेकिन उनसे बच्चों को वहां से हटाने की बात की जा रही थी. मामला हाईकोर्ट तक भी गया था. ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी पार्वती वर्मा पर पहले भी आरोप लग चुके हैं भ्रष्टाचार के. उनके ऑडियो भी वायरल हुए हैं, लेकिन उन पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता.’

प्रियंका शुक्ला ने बताया कि उनके साथ भी मारपीट हुई है. महिला थाना प्रभारी अंजू चेलक ने उनके साथ मारपीट की. प्रियंका ने ये भी बताया कि पहले संस्था में 15 लड़कियां थीं. उन्हीं में एक सात साल की बच्ची थी, जिसे इसी तरह जबरन ले जाया गया था. इसी साल मई के महीने में, 15 दिनों में ही उसकी मौत की खबर आई.

‘दी लल्लनटॉप’ ने सरकंडा थाने के इंस्पेक्टर सनिप रात्रे से बात की. उन्होंने कहा,

‘पुलिस ने कोई मारपीट नहीं की है. हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर साहब ने जाने को कहा था. उन लोगों ने धक्का-मुक्की की, इसलिए उन पर FIR की गई है. बच्चे शासकीय गृह में हैं.’

‘आज तक’ के पत्रकार मनीष शरण ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने भी कोई जवाब नहीं दिया था. पार्वती वर्मा से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. संस्था के बारे में उन्होंने बताया कि यहां बच्चियों का बखूबी ध्यान रखा जाता था. उन्हें स्कूल भेजा जाता था. ट्यूशन लगे थे. दवाइयां भी समय पर मिलती थीं.

संस्था से बच्चों को निकालने की बात क्यों हुई?

मनीष शरण ने बताया कि संस्था ने सरकार से ग्रांट (अनुदान) के लिए एप्लीकेशन दी थी. महिला और बाल विकास विभाग के ज़रिए. लेकिन ये अनुदान दिलवाने के लिए कथित रूप से कुछ अधिकारियों ने उनसे घूस मांगी, जो संस्था के डायरेक्टर संजीव ठक्कर ने देने से इनकार कर दिया. उसके बाद ही संस्था की जांच-पड़ताल की जाने लगी और आरोप लगाए गए कि संस्था में बच्चियों का ध्यान नहीं रखा जा रहा.

NDTV में छपी रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने NGO के रजिस्ट्रेशन को कैंसल करने और बच्चियों को शिफ्ट करने की मांग की. इसी रिपोर्ट के अनुसार, संजीव ठक्कर ने बताया कि जब वो महिला और बाल विकास मंत्री अनिल भेडिया से मिले, तो उन्होंने सवाल पूछने शुरू कर दिए कि बच्चों को HIV कैसे हुआ. मामला हाईकोर्ट गया, तब वहां के आदेश अपर कलेक्टर संजय अलंग ने बच्चों को वहां से शिफ्ट करने का आदेश दिया.

बच्चे उस संस्था से ले जाए जाने का विरोध कर रहे थे. ‘दी लल्लनटॉप’ के पास उपलब्ध कॉल्स और वीडियोज़ दिखाते हैं कि बच्चियां रोते हुए संस्था वापस आने की मांग कर रही हैं. संस्था की जिस बिल्डिंग से उन्हें निकाला गया, वहां पर हाथापाई के निशान मौजूद थे. टूटी हुई चूड़ियां, और फर्श पर खून की बूंदें भी मौजूद थीं. हम ये वीडियो यहां इसलिए नहीं लगा रहे, क्योंकि इन वीडियोज़ में बच्चियों की पहचान सार्वजनिक होने का खतरा है.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए ट्वीट किया:

 

इस मामले में अधिकारियों की तरफ से अगर कोई जवाब आता है, तो स्टोरी अपडेट की जाएगी.


वीडियो: कानपुर शेल्टर होम में 57 लड़कियां कोरोना पॉजिटिव हैं लेकिन अधिकारियों ने ये अहम बात नहीं बताई

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