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डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, जो कभी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए पुलिस सेवा से इस्तीफ़ा दे चुके थे!

18 सितम्बर 2012. बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर का जवाहरलाल रोड. अपने घर में 12 साल की नवरुणा सो रही थी. रोज़ मां-बाप के साथ सोती थी, लेकिन उस दिन हाथों में पहली बार मेहंदी लगाई थी. तो अलग एक कमरे में सोने का फ़ैसला किया. नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती के हवाले से जो ख़बरें छपी हैं, वो बताती हैं कि नवरुणा के कमरे में खिड़की तोड़कर 3-4 लोग घुसे, और नवरुणा को अगवा करके लेते गए. अगले ही दिन केस दर्ज हुआ. कुछ दिनों बाद नवरुणा के घर के पास के नाले से पुलिस ने एक कंकाल बरामद किया. जांच एजेंसियों ने दावा किया कि कंकाल और नवरुणा के पिता का डीएनए मैच कर गया है. लिहाज़ा कंकाल नवरुणा का है. अतुल्य चक्रवर्ती ने मानने से मना कर दिया. इस मामले की जांच अब तक जारी है.

लेकिन इस घटना के कुछ ही दिनों बाद यानी 21 फ़रवरी 2013 की रात को अतुल्य बिहार पुलिस के एक अधिकारी से मिलने गए. मदद की गुहार लगाई. एक काग़ज़ पर उस अधिकारी ने तत्कालीन एडीजी क्राइम एके उपाध्याय का नम्बर लिखकर दिया. अतुल्य ने उस नम्बर पर फ़ोन मिलाया तो उनका ध्यान गया कि उनकी बेटी के अगवा होने के बाद उसी नम्बर से दो बार उनके पास फ़ोन आया था. और पीछे उन्हें अपनी बेटी की आवाज़ सुनाई दी थी, ऐसा दावा किया. इस नम्बर पर बात नहीं हो पाई. अतुल्य जिस अधिकारी से 21 फ़रवरी की रात को मिलने गए थे, उस अधिकारी पर बाद में आरोप लगाया. कहा कि उक्त अधिकारी ने भूमाफ़ियाओं से मिलकर मेरी बेटी को अगवा किया था. 

नवरुणा के माता-पिता और हाथ में नवरुणा की फ़ोटो

अधिकारी का नाम : गुप्तेश्वर पांडेय. बिहार के मौजूदा डीजीपी. सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के मामले में सुर्ख़ियाँ और कीवर्ड्स घूमघूमकर बिहार पुलिस और गुप्तेश्वर पांडेय के पास जा रहे हैं. वही गुप्तेश्वर पांडेय, जिन पर नवरुणा के पिता ने गम्भीर इल्ज़ाम लगाए थे. नवरुणा केस में अपनी जवाबदेही पर गुप्तेश्वर पांडेय कहते हैं कि वो निर्दोष हैं. बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्हें फंसाया जा रहा है.

गुप्तेश्वर पांडेय बिहार काडर के IPS अफ़सर हैं. बैच 1987. जिस समय बिहार के कई जिलों में नक्सलवाद फैला हुआ था, उन जिलों में गुप्तेश्वर पांडेय की नियुक्ति की जाती थी. मसलन, जहानाबाद, अरवल, बेगूसराय और नालंदा. बाद में मुंगेर और मुज़फ़्फ़रपुर ज़ोन के DIG भी बनाए गए. बहुत फलता-फूलता करियर.  

बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे.
बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे.

और समय के एक बिंदु पर गुप्तेश्वर पांडेय ने ऐसा काम किया, जिसकी वजह से उन पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं. 2009. लोकसभा चुनाव सिर पर. लोकल पत्रकार बताते है कि गुप्तेश्वर पांडेय ने इस साल लोकसभा चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया. लेकिन प्रशासनिक सेवा में रहते हुए चुनाव तो लड़ नहीं सकते थे, ऐसे में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का फ़ैसला किया. मतलब VRS. अर्ज़ी भी दे दी राज्य सरकार को. अर्ज़ी मंज़ूर हो गयी. 

इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित सिंह की रिपोर्ट में लिखा है कि गुप्तेश्वर पांडेय बिहार की बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. वो भी भाजपा के टिकट पर. गुप्तेश्वर पांडेय को ये सुबहा था कि बक्सर के सांसद लालमणि चौबे का टिकट भाजपा दोहराएगी नहीं.

कहते हैं कि इसी सोच-सुबहे के आधार पर गुप्तेश्वर पांडेय ने बढ़त बना ली. इस्तीफ़ा वग़ैरह सरिया दिया था कि इधर लालमणि चौबे बाग़ी हो गए. भाजपा ने टिकट लालमणि चौबे को ही पकड़ा दिया. गुप्तेश्वर पांडेय का इस्तीफ़ा बेकार हो गया. टिकट नहीं मिला था. गुप्तेश्वर पांडेय ने सर्विस में वापसी का रास्ता खोजा. इस्तीफ़ा देने के 9 महीने बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने बिहार सरकार से कहा कि वो अपना इस्तीफ़ा वापिस लेना चाहते हैं, और नौकरी पर वापिस आना चाहते हैं. 

नीतीश कुमार की सरकार थी. उन्होंने इस्तीफ़ा वापिस कर दिया और गुप्तेश्वर पांडेय की नौकरी में वापसी हो गयी. बिहार के कई अधिकारी इसे सर्विस रूल का उल्लंघन मानते हैं. कहते हैं कि चुनाव लड़ने के लिए VRS लिया, और नहीं लड़ पाए तो चुपचाप सर्विस में वापसी भी हो गयी.

और इधर गुप्तेश्वर पांडेय ये तो मानते हैं कि उन्होंने चुनाव लड़ने और राजनीति करने के लिए 2009 में सर्विस से इस्तीफ़ा दिया था, लेकिन भाजपा से नाम जोड़ा जाना ग़लत है. दी प्रिंट से बातचीत में उन्होंने कहा,

“कोई एक बयान दिखाइए जो मैंने या किसी नेता ने दिया हो कि मैं भाजपा से जुड़ना चाहता था? ये सब क़यास लगाए जा रहे हैं. और केवल इस वजह से क्योंकि भाजपा नेता शाहनवाज़ हुसैन जब नागरिक उड्डयन मंत्री थे, तो मैं तीन साल तक उनका OSD था. उससे ही लोगों को लगा कि मैं भाजपा से जुड़ना चाहता हूं. अपनी 34 साल की सर्विस में मैंने किसी नेता की तरफ़दारी नहीं की है.”

अब गुप्तेश्वार पांडेय बिहार के डीजीपी हैं. आरोप लगते हैं कि गुप्तेश्वर पांडेय को लाइमलाइट से प्यार है, लेकिन दी प्रिंट से बातचीत में गुप्तेश्वर पांडेय कहते हैं कि उन्हें ख़ुद नीतीश कुमार ने मीडिया का पोस्टर ब्वाय न बनने की सलाह दी है.


सुशांत केस: क्या बिहार पुलिस मुंबई जाकर जांच कर सकती है?

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