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वो गाना, जिसने पहली बार बेनज़ीर भुट्टो को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनवा दिया

बेनज़ीर भुट्टो की 27 दिसंबर 2007 में रावलपिंडी में चुनावी रैली के दौरब हत्या कर दी गई थी. 14 साल बाद आज उनके हत्यारों पर पाकिस्तान की अदालत फैसला सुना सकती है. 30 अगस्त को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. करांची के ऐतज़ाज़ शाह, दक्षिणी वज़ीरिस्तान के शेर ज़मन लाढ़ा, रावलपिंडी के हसनैन गुल, एन रफ़ाक़त और चारसद्दा के रशीद अहम उर्फ तुराबी पर हत्या का आरोप है. जबकि पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर लापरवाही और बेनज़ीर को धमकी देने का आरोप है. बेनज़ीर भूट्टो का ये किस्सा उनके पहली बार प्रधानमंत्री बनने का है.

बेनज़ीर जब पाकिस्तान की पहली बार प्रधानमंत्री बनीं वो तारीख थी 2 दिसंबर 1988. ये तरीख इतिहास है, क्योंकि किसी मुस्लिम मुल्क की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं बेनज़ीर. सियासत उनको अपने पिता और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो से विरासत में मिली थी. कट्टरपंथ से भरपूर पाकिस्तान जैसे देश में एक औरत का चोटी पर पहुंचना आसान नहीं था. वहां सत्ता अब तक स्थिर नहीं हो पाई है. कब तख्तापलट हो जाए कुछ नहीं पता. ऐसी राजनीति में दो बार बेनज़ीर का पीएम बनना उनकी काबिलियत ही थी. अगर चुनावी रैली के दौरान साल 2007 में बम धमाके में उनकी मौत न होती तो वो तीसरी बार भी पीएम बन गई होतीं.

Benazir

विरोधियों ने पहली बार उनको पीएम बनने से रोकने के लिए सियासत की हर चाल चली. लेकिन उन चालों पर एक गाना भारी पड़ गया. ये गाना बेनज़ीर भुट्टो के लिए गाया गया, जो उन्हें पीएम की कुर्सी तक ले गया. गाने ने पाकिस्तानी जनता को झूमने पर मजबूर कर दिया.

साल 1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो प्रधानमंत्री बने. 1977 में जनरल जिया उल हक ने उनका तख्ता पलट कर दिया. 1979 में बेनजीर के पिता ज़ुल्फ़िकार को फांसी दे दी गई. जिया उल हक ने खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया. इसके बाद 1985 में एक गैर पार्टी चुनाव हुआ. इसमें मुहम्मद खान जुनेजो प्रधानमंत्री बने. लेकिन उन्हें 1988 में पद छोड़ना पड़ा. और फिर जिया उल हक की मौत के बाद उसी साल पाकिस्तान में जनरल इलेक्शन हुए.

आसिफ अली जरदारी और बेनज़ीर भुट्टो की शादी का फोटो.
आसिफ अली जरदारी और बेनज़ीर भुट्टो.

16 नवंबर 1988 को पाकिस्तान में वोट पड़ने थे. ये तारीख मुक़र्रर कराने में विरोधियों का हाथ था, क्योंकि उस वक़्त बेनज़ीर प्रेग्नेंट थीं. उनके पहला बच्चा होने वाला था. उनकी शादी 18 दिसंबर 1987 को आसिफ अली जरदारी के साथ हुई थी. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी इस षड़यंत्र में शामिल थी. वो भी चाहती थी कि बेनज़ीर की पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी चुनाव हार जाए. उनके मुखालिफ वोट किसी एक पार्टी को ही चले जाएं, ताकि बेनज़ीर जीत न सकें.

बिलावल भुट्टो के साथ बेनज़ीर भुट्टो. (Source : The Nation)
बिलावल भुट्टो के साथ बेनज़ीर भुट्टो. (Source : The Nation)

चुनाव के वक़्त बेनज़ीर प्रचार न कर सकें, इसलिए ये वक़्त चुनाव के लिए चुना गया था. 16 नवंबर को इलेक्शन था. और 21 सितंबर को बेनज़ीर के बेटा पैदा हुआ. जिसका नाम बिलावल भुट्टो रखा गया.

बिलावल भुट्टो.
बिलावल भुट्टो.

चुनाव की तारीख के अलावा सियासी पार्टियों ने एक और चाल चली. उनकी पार्टी के निशान ‘तलवार’ को कैंसिल करा दिया. जबकि उनकी पार्टी तलवार के सिंबल पर एक बार लोकल बॉडी इलेक्शन और दो बार जनरल इलेक्शन लड़ चुकी थी. बेनज़ीर से ‘तलवार’ छीन ली गई. ताकि चुनाव में नुकसान हो जाए. मतदाता कंफ्यूज़ हो जाएं. 1988 के चुनाव के लिए उन्हें थमा दिया गया ‘तीर’ का सिंबल.

लेकिन किस्मत बुलंद थी. तीर निशाने पर लगा. इस तीर को निशाना दिखाया शाज़िया ख़ुश्क के गाने ‘दिला तीर बिजा’ ने. जिसका मतलब था तीर दिल में उतर गया. इस गाने को कंपोज़ किया था ज़हूर खान ज़ेबी ने. ये गाना लोगों के दिल में उतर गया. गाने में बेनज़ीर भुट्टों के संघर्ष को बताया गया. दुश्मनों पर निशाना लगाया गया. और लोगों के दिल में उतर जाने वाले आशिकी वाले तीर का एहसास कराया गया.

छोटे से बच्चे को घर छोड़कर बेनज़ीर जनसभाएं करने लगीं. चुनावी रैली में बेनज़ीर के जोशीले भाषण और गाने की धुन पर लोग झूमने लगे. इस गाने ने बेनज़ीर के लिए मतदाताओं में जोश भर दिया. गाने की पहली पंक्ति थी, ‘दिला तीर बिजा, ईहयां दुश्मन अथी’ 

जो लाइनें समझ आते हैं वो हैं

हम नाचेंगे, हम गायेंगे, ये सदा हम लगाएंगे
जिए भुट्टो
हम नाचेंगे, हम गायेंगे, ये सदा हम लगाएंगे
जिए भुट्टो बेनजीरे, जिए भुट्टो बेनजीरे

ये गाना पीपीपी की रैलियों में आज भी बजता है. और लोग नाचने लग जाते हैं. गाने के बोल सिंधी में भी हैं, लेकिन सुनने पर आनंदित करता है.

तीर मतदाताओं के दिल में उतर गया और दुश्मन पर निशाना लग गया. बेनज़ीर प्रधानमंत्री बन गईं. लेकिन वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं. भ्रष्ट्राचार के आरोपों के बाद 1990 में राष्ट्रपति ग़ुलाम इस्हाक़ खान ने बेनज़ीर भुट्टो की सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया था. और 1993 में वो चुनाव के बाद छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करके दूसरी बार प्रधानमंत्री बनीं थीं.


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