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जब बेगम अख्तर ने कहा, 'अच्छी शराब अच्छे गिलास में ही पीते हैं'

बेगम अख्तर की आवाज रिकॉर्डिंग के बेहद शुरुआती दौर में दर्ज की गईं वो स्वर लहरियां हैं, जिनके सहारे प्रेम के अनगिनत पल भ्रूण हत्या का शिकार होने से बचते रहे. उनकी गायकी सुकून और मरहम का पर्याय लगती है. कभी-कभी तो हैरत होती है कि अख्तरी बाई (उनका पिछला नाम) न होतीं तो चोट खाए आशिक क्या करते और कहां जाते. रैप और रीमिक्स के जमाने में फरवरी की गुनगुनी धूप की तरह वह हर बार हमारी संवेदना के सूक्ष्म तारों को कामयाबी से सहलाती हैं.


बेगम के बारे में दिग्गज शायर कैफी आजमी कहते थे, ‘गजल के दो मायने होते हैं, पहला गजल और दूसरा बेगम अख्तर.’ ‘मल्लिका-ए-गजल’ पद्मभूषण बेगम अख्तर का आज जन्मदिन है. इस मौके पर पेश-ए-खिदमत हैं उनकी जिंदगी के कुछ बेशकीमती लम्हे, जो हमें हर्फों की शक्ल में मिलते हैं.


फ्लर्ट भी करती थीं बेगम अख्तर

बेगम अख्तर का जिक्र आते ही लोग उनकी तसल्लीबख्श आवाज याद करते हैं, लेकिन उनके शरारतभरे पहलू से बेहद कम लोग वाकिफ हैं. उर्दू के बड़े शायरों में से एक जिगर मुरादाबादी और बेगम अख्तर की बड़ी गहरी दोस्ती थी. बेगम का घर लखनऊ में था, जहां जिगर अक्सर अपनी पत्नी के साथ ठहरा करते थे. बेगम की शागिर्द रहीं शांति हीरानंद बताती हैं बेगम अख्तर जिगर से खूब फ्लर्ट किया करती थीं.

बेगम अख्तर और जिगर मुरादाबादी
बेगम अख्तर और जिगर मुरादाबादी

एक बार जब जिगर और बेगम साथ बैठे थे तो बेगम मजाक में बोलीं, ‘क्या ही अच्छा हो कि हमारी आपसे शादी हो जाए. सोचिए कि हमारे बच्चे कैसे होंगे. मेरी आवाज और आपकी शायरी का शानदार मिश्रण!’

इस बात जिगर ने जोरदार ठहाका लगाया और कहा, ‘वो तो ठीक है, पर अगर उन बच्चों की शक्ल मेरी तरह निकल गई तो क्या होगा.’


अच्छी शराब अच्छे गिलास में ही पीते हैं

सेना के जवानों के लिए एक कार्यक्रम के मकसद से बेगम एक मर्तबा कश्मीर गईं. लौटने लगीं तो फौज के अफसरों ने उन्हें व्हिस्की की कुछ बोतलें दीं. उस समय कश्मीर के सीएम शेख अब्दुल्लाह थे, जिन्होंने श्रीनगर के एक हाउस बोट में उनके ठहरने का इंतजाम कराया था. रात में बेगम ने वेटर से कहकर अपना हारमोनियम हाउस बोट की छत पर मंगा लिया.

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फिर उन्होंने अपने साथ कश्मीर गईं रीता गांगुली से शराब पीने की इजाजत मांगी. रीता के हामी भरते ही वेटर गिलास और सोडा ले आया. फिर बेगम ने रीता से कहा, ‘जरा नीचे जाओ और देखो कि कोई सुंदर गिलास रखा है क्या. ये गिलास देखने में अच्छा नहीं है.’ रीता दूसरा गिलास लाईं, उसे धोया और बेगम के लिए जाम बनाया.

बेगम ने जाम उठाया और चांद की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘अच्छी शराब अच्छे गिलास में ही पी जानी चाहिए.’ इसके बाद बेगम और रीता की महफिल कई घंटों तक चली, जहां बेगम ने ‘कल चौदहवीं की रात थी’ भी गाई.


जब बेगम छ: बार में पूरी देख पाईं ‘पाकीजा’

बेगम अख्तर को सिगरेट की लत थी. उन्हें चेन स्मोकर भी बताया जाता है. यही वजह थी कि वो ‘पाकीजा’ फिल्म छ: बार में देख पाई थीं. फिल्म देखते समय जब भी उन्हें सिगरेट की तलब लगती थी, वो हॉल से बाहर आकर सिगरेट पीने लगती थीं. जब तक वो वापस लौटतीं, तब तक फिल्म का कुछ हिस्सा निकल जाता था.

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अगले दिन फिल्म के उस हिस्से को देखने के लिए वो फिर से सिनेमाहॉल जातीं. ऐसा करते-करते बेगम छ: बार में ‘पाकीजा’ फिल्म पूरी देख पाई थीं.


अब जबकि आज बेगम का जन्मदिन है, तो इस मौके पर उनकी गजलों के पसमंजर में उन्हें याद न किया, तो खुदा की कसम बड़ी नाफरमानी होगी. तो लीजिए…

शकील बदायूंनी की लिखी ‘ऐ मुहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया’ अख्तरी बाई की सबसे मशहूर गजलों में से है.

हिंदुस्तान में शास्त्रीय रागों पर आधारित गजल गायकी को ऊंचाइयों पर पहुंचाने का सेहरा अख्तरी बाई के सिर ही बंधना चाहिए. पेश है, ‘कोयलिया मत कर पुकार करेजा लगे कटार…’

जब गालिब को गाया बेगम ने, ‘ये न थी हमारी किस्मत, जो विसाल-ए-यार होता’

एक वक्त वो भी था जब सामाजिक बंधनों की वजह से बेगम साहिबा को गाना छोड़ना पड़ा. दुनिया की इनायात ने उनका दिल तोड़ दिया.

1974 में बेगम अख्तर ने अपने जन्मदिन पर कैफी आजमी की ये गजल गाई. ‘सुना करो मेरी जान, इनसे उनसे अफसाने, सब अजनबीं हैं यहां, कौन कहां किसे पहचाने’.

सुनिए, पंडित जसराज और बेगम अख्तर की आवाज. खमाज और काफी राग, होरी ठुमरी. कैसी ये धूम मचाई रे, कन्हैया.

और आखिर में वो गजल, जिसे भूलने का सवाल ही नहीं उठता

ये स्टोरी ‘दी लल्लनटॉप’ के लिए कुलदीप ने की थी.


वीडियो देखें:

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