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'बाटला हाउस' ट्रेलर: दिल्ली पुलिस के फर्जी के एनकाउंटर से प्रेरित जॉन अब्राहम की असली फिल्म

13 सितंबर, 2008 को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में एक के बाद एक पांच बम ब्लास्ट हुए. हालांकि इन ब्लास्ट्स की तीव्रता कम थी फिर भी इस ब्लास्ट में 30 लोगों की मौत हुई और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए. आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने मेल भेजकर इस हमले की जिम्मेदारी ली. इसके ठीक पांच दिन बाद गुजरात से दिल्ली पुलिस को एक टिप मिली. ये दिल्ली में मौजूद इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकवादियों की लोकेशन के बारे में थी. इसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम जामिया नगर स्थित बाटला हाउस पहुंची. जिस घर में आतंकियों के होने की खबर थी, वहां कुल पांच लोग पाए गए. इनमें से दो की एनकाउंटर में मौत हो गई, दो लोग भाग गए और एक आदमी गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन इसी शूटआउट में इस मिशन को लीड करने वाले ऑफिसर मोहन चंद शर्मा को दो गोली लगने के बाद हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. इस घटना को नाम दिया गया ‘बाटला हाउस एनकाउंटर’.

अब इसी मसले पर फिल्म बनी है. नाम है ‘बाटला हाउस’. ‘रोमियो अकबर वॉल्टर’ के बाद जॉन अब्राहम की अगली फिल्म. पिछली दो फिल्मों की ही तरह एक बार फिर असल घटनाओं से प्रेरित होकर. फिल्म की कहानी आपने ऊपर पढ़ ली. इसमें जो चीज़ असल घटना से इतर है, वो हम आपको बता रहे हैं.

फिल्म की कहानी कितनी अलग होगी?

ओरिजिनल कहानी में गोली पुलिस टीम को लीड कर रहे मोहन चंद शर्मा को लगी थी, जिससे अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. इस फिल्म में ये चीज़ थोड़ी बदल दी गई है. फिल्म में टीम लीडर के बदले एक दूसरे पुलिसवाले को गोली लगती है. इस फिल्मी मिशन को लीड को करते हैं संजय कुमार यानी जॉन अब्राहम. ये किरदार असल में इस केस के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर संजीव कुमार से प्रेरित है.

फिल्म में एनकाउंटर के ठीक पहले एक सीन में जॉन का किरदार संजय कुमार.
फिल्म में एनकाउंटर के ठीक पहले एक सीन में जॉन का किरदार संजय कुमार.

‘बाटला हाउस’ में जॉन के साथ रवि किशन उस पुलिसवाले के रोल में दिखेंगे, जिसे एनकाउंटर में गोली लगती है. साथ में पुलिस महकमे के ऊंचे ओहदे वाले ऑफिसर के रोल में हैं मनीष चौधरी (जिन्होंने ‘जन्नत 2’ में इमरान हाशमी की ज़िंदगी नरक कर दी थी). जॉन की लकी चार्म नोरा फतेही इस बार आइटम नंबर के साथ फिल्म में एक्टिंग करती भी दिखाई देंगी. मृणाल ठाकुर फिल्म की लीडिंग लेडी हैं, जो जॉन की पत्नी के रोल में दिखाई देंगी.

'लव सोनिया' और 'सुपर 30' के बाद मृणाल इस फिल्म में नज़र आएंगी.
‘लव सोनिया’ और ‘सुपर 30’ के बाद मृणाल इस फिल्म में नज़र आएंगी.

बताया जाता है कि ये एनकाउंटर फर्जी था

बाटला हाउस एनकाउंटर को कई नेताओं और मीडिया ने फर्जी बताया था. कई रिपोर्ट्स में इस एनकाउंटर के लूपहोल्स दिखाए गए हैं लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में ये एक सफल और रियल एनकाउंटर था. न्यूज़ वेबसाइट द क्विंट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बाटला हाउस में मौजूद पांच लोगों में से किसी के आईएम से जुड़े होने के कोई सबूत नहीं मिले थे. पुलिस ने बताया कि गोली पहले लड़कों/लड़ाकों ने चलाई थी. मगर उनके बदन पर गोलियों के निशान से ऐसा बिलकुल नहीं लगता. क्योंकि शूटआउट में मारे गए एक आतिफ अमीन की पीठ में 10 गोलियां लगी थीं. वहीं मो. साजिद के सिर, गले और कंधे पर गोली मारी गई. इन घावों को देखकर ये सवाल उठने लगे कि कहीं उन लड़कों को पकड़ने के बाद टॉर्चर करके तो नहीं मारा गया.

इस मामले में पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते लोग. इस केस को दोबारा से जांचने की बात भी कही जा रही थी.
इस मामले में पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते लोग. इस केस को दोबारा से जांचने की बात भी कही जा रही थी.

इन सवालों के जवाब में दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया. ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी पुलिस को क्लीन चिट दे दिया. लेकिन अजीब बात ये कि इस इंवेस्टिगेशन के दौरान कमीशन ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स में दिख रही बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया. तिस पर जो रिपोर्ट उन्होंने हाई कोर्ट में जमा की, उस पर कोर्ट के ऑर्डर मिलने से भी दो दिन पहले की तारीख लिखी हुई थी. पुलिस ने बताया कि उन्होंने एनकाउंटर से पहले पूरी गली और बिल्डिंग की सीढ़ियां सील कर दी थीं. बावजूद इसके पांच में से दो आतंकवादी वहां से भाग निकले. और उससे भी इंट्रेस्टिंग बात ये कि उसे न तो सीढ़ी पर खड़े पुलिसवाले ने देखा न ही गली में खड़ी पुलिस ने. इन सवालों के जवाब कभी किसी ने नहीं दिए, इसलिए इसे फर्जी एनकाउंटर माना गया.

एनकाउंटर में मारे गए स्पेशल सेल टीम के लीडर संजीव कुमार यादव. दूसरी तस्वीर में एकनाउंटर के बाद हॉस्टिपटल ले जाए जाते संजीव.
एनकाउंटर में मारे गए स्पेशल सेल टीम के लीडर संजीव कुमार यादव. दूसरी तस्वीर में एकनाउंटर के बाद हॉस्टिपटल ले जाए जाते संजीव (बीच में), जहां वो बच नहीं पाए.

फिल्म में क्या दिक्कत हो सकती है?

ट्रेलर देखकर इस बात को कंफर्म नहीं किया जा सकता कि फिल्म में कौन सी वाली कहानी को ज़्यादा एक्सप्लोर किया जाएगा. असली या ‘फर्जी’. हालांकि इसे बनाने वाली टीम का पास्ट रिकॉर्ड देखकर लगा रहा है कि इसे जनता के सेंटिमेंट के हिसाब से ही रखा जाएगा, ताकि देशभक्ति वाली फील को कैश किया जा सके. मामला ग्लोरिफिकेशन के आसपास है. हालांकि इस बार जबरदस्ती वाले ”तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तू इस जनम में जलेगा लेकिन दर्द अगले जनम तक चलेगा” और ”रोकूंगा भी और ठोकूंगा भी” टाइप डायलॉग सुनने को नहीं मिले हैं. टोन के मामले में थोड़ा डाउन है. बचाते-बचाते भी ट्रेलर के आखिर में लहराता हुआ तिरंगा दिख ही जाता है.

ट्रेलर में एक दिलचस्प सीन ये भी दिखा. इसमें दिख रहा है कि बहुत सारे मुस्लिम लोग एक ऑफिसर को घेरे हुए हैं क्योंकि वो उसे फर्जी एनकाउंटर का आरोपी मानते हैं.
ट्रेलर में एक दिलचस्प सीन ये भी दिखा. साम्प्रदायिकता ऑन पॉइंट. 

बनाई किसने है?

इस फिल्म को डायरेक्ट किया है ‘कल हो न हो’, ‘सलाम-ए-इश्क’ और ‘चांदनी चौक टू चाइना’ जैसी फिल्में बना चुके निखिल आडवानी ने. ‘पिंक’ फेम रितेश शाह ने इस फिल्म की कहानी लिखी है. फिल्म की शूटिंग 2018 सितंबर में हुई थी. इस दौरान फिल्म की टीम ने लखनऊ, दिल्ली, जयपुर और मुंबई जैसी जगहों शूट किया. फरवरी 2019 में शूटिंग खत्म हो चुकी है. ‘बाटला हाउस’ 15 अगस्त को ‘मिशन मंगल’ और ‘साहो’ के साथ थिएटर्स में उतर रही है.

फिल्म का ट्रेलर यहां देखिए:

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