Submit your post

Follow Us

बस्तर माने बारूदी सुरंग, नक्सल और पुलिस ही नहीं होता... बस्तर बैंड दिखाता है नया चेहरा

81272494 10217575384309629 7676583695989342208 N

यह लेख मुन्ना के. पाण्डेय ने लिखा है. 1 मार्च 1982 को बिहार के सिवान में जन्मे डॉ. पाण्डेय के नाटक, रंगमंच और सिनेमा विषय पर नटरंग, सामयिक मीमांसा, संवेद, सबलोग, बनास जन, परिंदे, जनसत्ता, प्रभात खबर जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में दर्जनों लेख/शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली सरकार द्वारा ‘हिन्दी प्रतिभा सम्मान (2007)’ से सम्मानित डॉ. पाण्डेय दिल्ली सरकार के मैथिली-भोजपुरी अकादमी के कार्यकारिणी सदस्य रहे हैं. उनकी हिंदी प्रदेशों के लोकनाट्य रूपों और भोजपुरी साहित्य-संस्कृति में विशेष दिलचस्पी है. वे वर्तमान में सत्यवती कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के हिंदी-विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं.


आम आदमी बस्तर का नाम सुनते ही किस तरह की तस्वीर अपने मन में बनाता होगा, इसकी कल्पना सहज की जा सकती है. पर यह तस्वीर का वह पहलू है जिसकी निर्मिति हमारे प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया ने अपने-अपने हिसाब से रची-गढ़ी है. छत्तीसगढ़ के वनों में परंपरा से अनेक संस्कृतियाँ अपने मूल रूप में मौजूद हैं, जिन पर अभी उपभोक्ता संस्कृति ने जाल नहीं फेंका, या यह कि अभी तक हमारे वन-प्रांतरों की यह अनमोल धरोहर इससे अछूती रह गयी है, यह राहत की बात है. ऐसे राहत के हिस्से को सहेजने में कई रंग-धुनियों, छवियों और अनेक स्वर-लहरियों की भी गहरी भूमिका रही है. ऐसी ही एक स्वर-लहरी बस्तर बैंड भी है. यह बस्तर का एक सांगीतिक चेहरा है. अपने रूप, दृश्यात्मकता और प्रदर्शन से यह बहुत अनूठा और चौंकाने वाला भी है.

Bastarband 2
बस्तर बैंड प्रस्तुति (फ़ाइल फ़ोटो)

‘बस्तर बैंड’ की संकल्पना रंगकर्मी अनूप रंजन पाण्डेय की है. अनूप तीन दशकों से अधिक समय तक लोक कलाओं और लोक रंगमंच पर सक्रिय रहे हैं. इन तीन दशकों से अधिक की कला-यात्रा में अनूप ने थियेटर लिजेंड हबीब तनवीर के साथ बतौर अभिनेता उनके नया थियेटर के लगभग सभी प्रमुख नाटकों में काम किया है. इतना ही नहीं, उन्होंने छतीसगढ़, विशेषकर बस्तर के लगभग सभी भीतरी अंचलों में घूम-घूमकर प्रचलन में लगभग कम हो गए और प्रयोग में भी कम आ रहे लोक एवं जनजाति वाद्य-यंत्रों को न केवल संकलित-संग्रहित किया बल्कि उन पर बारीक़ अध्ययन और विश्लेषण करके अपने साथी आदिवासी कलाकारों के साथ उसकी पुन:सर्जना करते हुए उन्हें अब बीते कुछ वर्षों से बाहरी दुनिया के सामने लगातार प्रदर्शित कर रहे हैं. अब यह लोक सांगीतिक परम्परा प्रदेश की सीमा लांघकर वैश्विक मंच पर अपनी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित कर रही हैं. अनूप रंजन को इसके लिए 2 साल पहले पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है. अनूप बताते हैं कि

“जिन दिनों मैं इस तरह के एक बैंड की संकल्पना कर रहा था, उस समय मुझे यह अहसास हुआ कि ये जो वाद्य यन्त्र धीरे-धीरे प्रयोग से हटते जा रहे हैं. इनके बजाने वाले भी कम होते जा रहे हैं. ऐसे में इनको म्यूजियम की शोभा बढ़ाने के बजाय प्रयोग में लाया जाए तथा इनको जो बजा सकते हैं, उनकी खोज की जाए .’बस्तर बैंड में बस्तर के लगभग सभी लोक एवं जनजाति समुदाय के चालीस से भी अधिक सदस्य शामिल हैं. साठ से अधिक प्रचलित और दुर्लभ वाद्य और आठ से दस बोलियों-भाषाओं का प्रतिनिधित्व बस्तर बैंड की प्रस्तुति में है.”

अनूप रंजन
अनूप रंजन पाण्डेय (फाइल फोटो)

इस बैंड का प्रत्येक सदस्य तीन-चार वाद्य यन्त्र बजाने में सक्षम है . मौखिक ध्वनियाँ, लकड़ी और तारों से बने बाजे, थाप, नृत्य आदि मिलकर एक किस्म का समन्वित जादू पैदा करते हैं. और हमें ऐसा लगता है गोया हम अपने मूल से सीधे जुड़ रहे हों. बस्तर की जितनी भी लोक समुदाय और जनजातियाँ हैं, उनकी परम्पराएं भी एक-दूसरे से अलहदा हैं. मसलन, मूरिया, दण्डामी माड़िया, धुरवा, मुंडा, परजा, भतरा, गदबा, माहरा, लोहरा, अबूझ माड़िया इत्यादि. यद्यपि बस्तर के आदिवासी अपने को कोइतुर कहलाना पसंद करते हैं. आदिम जनजातियों के वाद्य यन्त्र और परम्पराएं तक अलग हैं. बावजूद इसके अनूप ने इसे एक मंच पर बड़े ही जतन से ऐसे संयोजन से उतारा है कि सभी मिलकर न केवल छत्तीसगढ़ की बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक समृद्ध और मुकम्मल तस्वीर उपस्थित करते हैं.

बस्तर बैंड के हिस्से की खासियत

मोटे तौर पर कहें तो बस्तर बैंड केवल एक आदिवासी बैंड या उसकी नाटकीय प्रस्तुति भर नहीं है बल्कि यह आदिवासी संगीत पर केन्द्रित, बस्तर की लोक एवं जनजातीय कला परंपरा की दिशा में सक्रिय कलाकारों का समूह है. यह समूह 30 से 60 मिनट में समूचे बस्तरिया लोक एवं आदिवासी संगीत को बेहद ख़ूबसूरती से प्रेक्षकों के समक्ष प्रस्तुत करता है. यह प्रस्तुतियाँ विविध विषयों पर होती हैं, जैसे देव पाड़, प्रकृति संगीत, चाखना, मिथ कथा एवं गाथा संगीत आदि. अनूप की पिछले वर्ष राष्ट्रीय जनजातीय संग्रहालय भोपाल में देश भर से संग्रहित सुषिर लोकवाद्यों के संग्रह की प्रदर्शनी ‘गन्धर्व’ को विशेष सराहना मिली है. उन्हें लोक कला के लिए छतीसगढ़ शासन का सर्वोच्च सम्मान ‘दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है. बस्तर बैंड की एक अनूठी विशेषता और है कि इसके 20-22 महिला-पुरुष कलाकारों में से 9 कलाकार राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हैं. इनमें संगीत नाटक अकादमी सम्मान, देवी अहिल्याबाई राष्ट्रीय सम्मान और दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान शामिल हैं.

Bastar Band 6
बस्तर बैंड नृत्य

‘लिंगों देव’ और आदिम संगीत

बस्तर के आदिवासी ‘लिंगों देव’ को अपना संगीत गुरु मानते हैं . उनकी मान्यता है कि इन वाद्य यंत्रों की रचना लिंगों देव ने ही की थी . ‘लिंगों पेन’ वा ‘लिंगों पाटा’ अथवा ‘लिंगों देव’ के गीतों में इन वाद्य यंत्रों का जिक्र मिलता है. अनूप कहते हैं कि इस बैंड की प्रेरणा के मूल में लिंगो देव की गाथा और उस गाथा में वर्णित अठारह वाद्य यंत्रों का वर्णन है. यह बैंड बस्तर की सदियों से चली आ रही आदिम जीवन की लोक जिजीविषा और परंपरा का ध्वज वाहक है. अनूप रंजन पाण्डेय बताते हैं

‘मेरे आदिवासी वाद्य यंत्रों के संग्रहण के शौक ने पता नहीं कब जूनून का रूप अख्तियार कर लिया. ढाई दशक से अधिक के इस श्रमसाध्य जूनून से बैंड ने 2007-08 में अपनी शक्ल अख्तियार की.’

Bastar Band 4
बस्तर बैंड के साथ रंगकर्मी अनूप रंजन पाण्डेय

इस गीत, संगीत, नृत्य, नाट्य वाले जनजातीय धरोहर संगीत समूह की प्रस्तुति दिल्ली में आयोजित कामनवेल्थ गेम्स, भारत रंग महोत्सव, विश्व पुस्तक मेला, देशज, विरासत, आदि रंग, पृथ्वी थियेटर, लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकादमी, भारत भवन, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, इंडिया हैबिटेट सेंटर, रंगायन, थियेटर ओलम्पिक और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित आयोजनों में हो चुकी है. भारत की इस विशिष्ट लोकसंस्कृति की अनूठी यात्रा अनवरत जारी है.

वाद्य यंत्र : आदिम संगीत के अनूठे नाम

ये जो वाद्य-यंत्र आपको इस दुनिया से किसी और दुनिया में आसानी से लेकर चले जाते हैं, उनके नाम उतने ही दुरूह हैं. इन वाद्य-यंत्रों में गोगा, ढोल, मिरगिन ढोल, सियाडी, बाजा, बेदुर, सुलुड, चिटकुल, उजीर, किकिड, तेहंडोर, गोती, नरपराय, गुटापराय, चरहे, ढुसिर, मुंडा, तुपकी, अकुम, तोड़ी, तुडबड़ी, नंगूरा, धुरवा ढोल, माडिया ढोल, पेन ढोल, वेरोटी, बोपोर, गुगेनाडा, तुद्रा, कोटोड़का, कुन्डीड़, धनकुल, गोतीबाजा, तोड़ी, ढुंगरु, किन्दरा आदि हैं. अगर हम इस बैंड के सदस्यों पर ध्यान दें तो इसमें कोया समाज या कोइतोर समाज के मुरिया, दण्डामी, मुंडा, महरा, भतरा, लोहरा, परजा, हलबा, मिरगिन, अदबा आदि समाजों के पारंपरिक और विभिन्न अवसरों पर प्रस्तुत किए जाने वाले संस्कार गीत-संगीत-नृत्य को उसकी सामूहिकता में सम्मिलित किया गया है.

Bastar Band
बस्तर बैंड में इस्तेमाल होने वाला वाद्य यंत्र ढोल

बस्तर बैंड प्रकृति का संगीत है और ऐसे प्रयासों की सराहना होनी चाहिए. इतना ही नहीं, यह बैंड अपने सांगीतिक प्रयासों से हमारे तथाकथित शहराती और विकसित समाजों की सोच से परे बस्तर की उस तस्वीर को सामने लाता है जहाँ इस विकसित समाज ने उसे बारूदी ढेर पर बैठा विस्फोटक ज्वलनशील जगह बना दी है. जब आज पूँजी आधारित व्यवस्था ने बस्तर को आदिवासियों, उनकी जमीनों, खनिजों और संसाधनों के दोहन की जगह बना दी है, ऐसे में यह बैंड बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाता है, जिसको देखने का अवकाश किसी के पास नहीं है या कोई देखना ही नहीं चाहता. पर यह जेठ की झुलसाने वाली दुपहरी में बरसात की ठंडी फुहार की मानिंद है. बस्तर बैंड देखते हुए हो सकता है आपको फौरी तौर पर कुछ अनूठी चीज़ न मिले, लेकिन यह बैंड अपने वाद्य यंत्रों, नृत्यों, गीतों और प्रस्तुतियों की ईमानदारी से आपको रोमांचित करता है. देश के इस कम चिन्हे गए इलाके की अद्भुत सांस्कृतिक विरासत के प्रति उत्सुकता वाला भाव पैदा करता है. इसमें कोई दो-राय नहीं.

बस्तर बैंड बस्तर के आदिम संगीत का प्रतिनिधि है और लोक की शक्ति का पर्याय भी, जिनमें वास्तविक भारत और उसकी संस्कृति बसती है. यह निरंतर नई-नई परम्पराओं से लगातार परिचित होता हुआ नए-रूप-ढंग को अपने प्रदर्शन में शामिल करता रहा है. अनूप जैसे संस्कृतिकर्मी इस भौतिकवादी समय में भी शिद्दत से एक लुप्त होती जा रही लकीर को सहेजने में और उसको वैश्विक पटल पर रखने के लिए अपने आदिवासी मित्रों के साथ मिलकर प्रयासरत हैं. आप बस्तर बैंड जैसे प्रयासों के साझी बनिए क्योंकि बस्तर माने केवल जमीन और वनों का एक उपजाऊ टुकड़ा, नक्सल, पुलिस, बारूद या लैंड माइन्स ही नहीं होता.


विडियो- बस्तर में रिपोर्टिंग के वक्त पत्रकारों को बताई जाती हैं ये सावधानियां

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

रामचंद्र गुहा की किताब 'क्रिकेट का कॉमनवेल्थ' के कुछ अंश.

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

शुद्ध और असली स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर करियर ग्राफ़ बाद में गिरता ही चला गया.

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.