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इंडिया का सबसे कंजूस बॉलर, जिसने लगातार 21 ओवर मेडेन फेंके थे

17 जनवरी 2020. दिन शुक्रवार. जगह मुंबई. इंडियन क्रिकेट का एक रिकॉर्डधारी गेंदबाज हमारे बीच नहीं रहा. 86 की उम्र में बापू नादकर्णी का निधन हो गया. 1955 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपने इंटरनेशनल कैरियर की शुरुआत की थी. 13 साल लंब सफ़र में 41 टेस्ट खेले. खाते में 88 विकेट आए. मशहूर हुई तो उनकी किफ़ायती गेंदबाजी. बैट्समैन को बांधकर रख देने की काबिलियत बापू नादकर्णी की पहचान थी.

बापू नादकर्णी की पहचान का एक किस्सा आपकी नज़र: 

एक बहुत ही सेक्सिस्ट टिप्पणी प्रचलन में है. महिलायें कंजूस होती हैं. अगर इस बात में आप यकीन करते हैं तो यकीनन आपने कभी क्रिकेट नहीं देखा. हर गेंदबाज कंजूस बनना चाहता है. वो गेंदबाज भी, जो पुरुष हैं.

क्रिकेट के इतिहास के सबसे कंजूस बॉलर्स में से एक. बापू नाडकर्णी. लेफ़्ट आर्म स्पिनर. कहते हैं कि बैट्समैन को इनके ख़िलाफ़ स्कोर करने के लिए बस एक ही ऑप्शन मिलता था – ज़ीरो. नाडकर्णी ने अपने जीवन में प्रति ओवर मात्र 1.67 रन दिए. 1960-61 के सीज़न में पाकिस्तान के खिलाफ़ कानपुर में इनका बॉलिंग फिगर था – 32 ओवर में 23 रन. इन फेंके गए 32 ओवर में 24 ओवर मेडेन थे. अगले मैच में 34 ओवर फेंके. उनमें 24 मेडेन. कुल रन दिए 24. ये मैच दिल्ली में खेला गया था. और उसके बाद इंग्लैंड से वो मशहूर टेस्ट मैच जिसमें अंग्रेज बल्लेबाज बापू के खिलाफ़ रन बनाने को तरस गए थे.

1964 की सीरीज़. पहला टेस्ट. इंडिया वर्सेज़ इंग्लैंड. इससे पहले 1950 के दशक में टेस्ट क्रिकेट का ग्राफ़ गिर रहा था. हर कोई बैक फुट पर खेल रहा था और खेल बोरिंग होता जा रहा था. कप्तानी में भी अग्रेशन गायब चल रहा था. जबकि 1960 के दशक में नए लोग आने शुरू हुए थे. वो जो अपने दिमाग से भी खेलते थे और अग्रेसिव खेल में विश्वास रखते थे. रिची बेनॉड इसमें एक बड़ा नाम था. इंग्लैंड की टीम 7 हफ़्तों के टूर पर इंडिया आई हुई थी. दो वॉर्म-अप मैचों के बाद पहला टेस्ट शुरू हुआ. मद्रास में.

नवाब पटौदी ने टॉस जीता. 30,000 दर्शकों के सामने पहले बैटिंग करने का फ़ैसला किया. इंडिया पहले दिन 277 पर 2 रन. ओपनर बुधि कुंदरन का स्कोर 170 नॉट आउट. दूसरे दिन इंडिया की शानदार बैटिंग. दिन खतम होने के डेढ़ घंटा पहले इनिंग्स डिक्लेयर हुई. पूरा स्कोर – 457-7. डेढ़ घंटे में इंडिया ने 2 विकेट खा लिए. कुल 63 रन दिए.

बापू नादकर्णी की कंजूसी भरी गेंदबाजी के किस्से आज भी मशहूर हैं.(फोटो: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)
बापू नादकर्णी की कंजूसी भरी गेंदबाजी के किस्से आज भी मशहूर हैं.(फोटो: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

इंग्लैंड के प्लेयर्स पर्दे के पीछे भी हालातों से लड़ रहे थे. मिकी स्टीवर्ट पहले ही दिन होटल वापस चले गए. उन्हें पेट दर्द और भयानक बुखार था. अगले दिन पहले सेशन के बाद जिम पार्क्स भी बीमार पड़ गए. तीसरे दिन फ्रेड टिटमस और बैरी नाइट भी बीमार थे मगर वो मैदान पर मौजूद थे. पार्क्स और स्टीवर्ट अभी भी होटल में ही थे. स्टीवर्ट को बैटिंग करनी थी और होटल के बाहर एक कार तैनात की गयी जिससे ज़रूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत मैदान भेजा जा सके.

इन हालात में इंग्लैंड के पास एक ही ऑप्शन था. इंग्लैंड ने वही बोरिंग खेल खेलना शुरू किया. अपने हथियार लगभग डालते हुए, मैच को बचाने के लिए सब कुछ रोकने की राह पर चल पड़े. लंच के पहले, तीसरे दिन 86 रन बने. एक विकेट गिरा. केन बैरिन्ग्टन बैटिंग के लिए आये और मैच को और भी झेलाऊ बना दिया. दिन के आखिरी दो घंटे में मात्र 27 रन बने.

तीसरे दिन लंच के बाद नाडकर्णी को बुलाया गया. वो अपनी लो-ट्रैजेक्ट्री गेंदें फेंकने लगे. दोनों बैट्समेन सब कुछ ब्लॉक करने लगे. यहां तक कि सीधे बल्ले पर आती गेंदें अभी वापस लौट कर बॉलर के पास पहुंच रही थीं. नाडकर्णी रन ही नहीं दे रहे थे. लंच के बाद 12 ओवर तक एक भी रन नहीं बना. चंदू बोर्डे की एक गेंद पर एक सिंगल आया. फिर अकाल. नाडकर्णी ने 21 ओवर और 5 गेंदें फेंकीं, बिना एक भी रन दिए. शाम को चाय होने से ठीक पहले 3 बजकर 5 मिनट पर पहला सिंगल लिया गया.

दिन के आखिरी 90 मिनट में रन बने. कुछ तेज़ी से. 59 रन. एक विकेट भी गिरा. नाडकर्णी ने कुल 29 ओवर फेंके. 26 मेडेन फेंके. 3 रन दिए.

नाडकर्णी ने अगले दिन कुल 3 ओवर और फेंके. 1 मेडेन फेंका और 2 रन दिए. यानी कुल मिला के 32 ओवर में 27 मेडेन और 5 रन. ये ऐतिहासिक स्पेल तो ज़रूर था मगर खतरनाक नहीं. उसी इनिंग्स में चंदू बोर्डे ने 88 रन देकर 5 विकेट लिए थे.

अगली इनिंग्स में नाडकर्णी को कम इस्तेमाल किया गया. 6 ओवर में 4 मेडेन. 6 रन. अच्छी बात ये रही कि उन्हें विकेट भी मिले. 2 विकेट.

इस पूरी सीरीज़ में नाडकर्णी को कुल 9 विकेट मिले. अपने 212 ओवर में मात्र 278 रन दिए.


 वीडियो- इंडिया की हार की वो 5 वजहें जो वर्ल्ड कप से पहले शुभ संकेत नहीं है

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