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जिसे पाकिस्तान आतंकी कहता है, कभी उसे बचाने के लिए गवाही दी थी इमरान खान ने

30 जून, 2020. दोपहर के करीब पाकिस्तान से आई एक ख़बर फ्लैश हुई. ख़बर थी- कराची स्थित पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर आतंकी हमला.

आतंकियों ने इस स्टॉक एक्सचेंज को क्यों निशाना बनायाक्या उनका मकसद बिज़नस डिसरप्ट करना थाक्या वो पाकिस्तानी शेयर बाज़ार को गिराना चाहते थेक्या होअगर हम आपको बताएं कि इस हमले के पीछे जिन लोगों का हाथ हैउनसे एक जमाने में बड़ी हमदर्दी थी इमरान ख़ान को. कोरी हमदर्दी नहींइतनी सहानुभूति कि इमरान ख़ान ने अदालत में खड़े होकर गवाही भी दी थी. क्या है ये हिस्ट्रीबताएंगे. लेकिन उससे पहले ये सवाल कि हमला करवाया किसने?

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पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज, जहां हमला हुआ.

हमला करवाया एक अलगाववादी चरमपंथी संगठन ने, जिसका नाम है- बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी. शॉर्ट में ये कहलाते हैं, BLA. नाम से ज़ाहिर हैइनका संबंध बलोचिस्तान से है. ये कहते हैंहमको आज़ाद बलोचिस्तान चाहिए. वो भी बस उतना नहींजितना पाकिस्तान के पास है. वो पूरा ग्रेटर बलोचिस्तानजिसे पहले हिंदुस्तान के मुगलों और फारस के सफ़ाविद एम्पायर ने बांटा. और फिर इसे बांटा ईरान-ब्रिटेन ने. थोड़ा हिस्सा ईरान गया. थोड़ा गया अफ़गानिस्तान. और थोड़ा हिस्सा आया पाकिस्तान के पास. कई सारे बलोचिस्तानी लोगों की तरह BLA भी ऐतिहासिक बलोचिस्तान को एक करके उसे अलग स्टेट बनाना चाहता है.

BLA का गढ़ हैपाकिस्तानी बलोचिस्तान. ये पाकिस्तान से सटे अफ़गान इलाकों में भी ऐक्टिव हैं. पिछले 20 साल से सक्रिय ये संगठन अब तक दर्ज़नों हमले कर चुका है. पाकिस्तान इन्हें आतंकवादी कहता है. आज से नहीं, 2006 से ही. उस दौर में पाकिस्तान के राष्ट्रपति हुआ करते थे परवेज़ मुशर्रफ़. मुशर्रफ़ हों कि ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो या ज़िया उल-हक़. बलोचिस्तान पर क्रूरता दिखाने में सब एक जैसे थे. ऐसे में BLA ने साल 2005 में मुशर्रफ़ को मारने की कोशिश की. कामयाब तो हुए नहींहां सरकार के सीधे निशाने पर ज़रूर आ गए.

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परवेज मुशर्रफ.

इसी निशाना बनाने की कड़ी में एक बड़ी घटना हुई लंदन में. यहां दो बलोच नागरिकों की गिरफ़्तारी हुई. इन पर इल्ज़ाम था कि ये BLA के सरगना हैं. लंदन में बैठकर पाकिस्तान में हिंसा करवा रहे हैं. इन दो आरोपियों में से एक का नाम था- फैज़ बलूच. और दूसरे का नाम था- हीरबयार मिरी. इन हीरबयार मिरी की पहचान जाननी चाहिए आपको. इनके अब्बा थे नवाब ख़ैर बख़्श मिरी. बड़े बलोच नेता. 70 के दशक में शुरू हुए आज़ाद बलोचिस्तान आंदोलन का बड़ा चेहरा. नवाब ख़ैर बख़्श मिरी के छह बेटे थे. इनमें से एक का नाम था- नवाबज़ादा बालाच मिरी. 2006 में बालाच मिरी BLA का मुखिया बन गया. 2007 में बालाच मारा गया. 2014 में ख़ुद नवाब मिरी भी चल बसे. इसके बाद उनके पांच बेटों के बीच BLA की लीडरशिप को लेकर बड़ी खींचतान हुई. गुटबाजी और अलगाव भी हुआ. लोग कहते हैं कि BLA का सेंट्रल कमांड आ गया बलोचिस्ता से बाहर रह रहे नवाब मिरी के बेटे हीरबयार मिरी के पास. हालांकि हीरबयार मिरी का कहना है कि वो किसी हथियारबंद गुट के मुखिया नहीं हैं.

हांतो हम थे लंदन के कोर्ट केस पर. ये बात है जनवरी 2009 की. हीरबयार और फैज़ बलोच का ट्रायल चल रहा था. इसी दौरान ख़बर आई कि इमरान ख़ान इन दोनों के सपोर्ट में आगे आए हैं. सपोर्ट ऐसे कि जनवरी, 2009 को इस्लामाबाद से वाया वीडियो कॉल हिरबयार और फैज़ के सपोर्ट में गवाही दी. इस गवाही में इमरान ने जो कहावो आपको सुनना चाहिए. इमरान के कहे का सार कुछ यूं है-

मी लॉर्डअगर मैं बलोचिस्तान का रहने वाला होतातो मैं भी हिंसा का रास्ता इख़्तियार करने पर आमादा होता. बलोचिस्तान सबसे गरीब प्रांत है पाकिस्तान का. सेना ने वहां कई नागरिकों को अगवा किया. कइयों की हत्या की. करीब 75 हज़ार लोगों को बेघर कर दिया. चुनावों में धांधली की. अदालतों को कंट्रोल किया. जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग किया. आतंकवाद के संदिग्धों को अमेरिका के हवाले करने के बदले उनसे इनाम लिया. मुशर्रफ़ ने बलोचिस्तान में राजनीतिक हल निकालने के ज़रियों को खारिज़ किया. इसलिए कि सेना का आदमी केवल सेना के ही तौर-तरीके समझता है.

ब्रिटेन के अख़बार एक्सप्रेस डॉट यूके‘ ने इमरान की गवाही पर रिपोर्टिंग की थी. इसके मुताबिकहीरबयार के वकील हेनरी ब्लैक्सलैंड ने इमरान से पूछा-

बलोचिस्तान के हालात की जानकारी है आपको. क्या इसी के मद्देनज़र आपने कहा है कि अगर आप बलूची होतेतो अपनी रक्षा के लिए बंदूक उठा लेते. क्या आपने यही कहा है?

इस पर इमरान ने जवाब दिया-

अपने लोगोंअपनी आबादी के अधिकारों की रक्षा के लिए मैं ऐसा करता. मुझे लगता है कि अगर मेरे पास लोकतांत्रिक तरीके से संसद पहुंचने का कोई ज़रिया नहीं होतातो शायद मैं ऐसा करता. बलोचिस्तान में ज़्यादातर चुनावों में भारी धांधली होती है. अगर मेरे पास बलोचिस्तान और वहां के लोगों पर हो रहे अत्याचारों पर आवाज़ उठाने का कोई तरीका नहीं होताअगर मेरे ज़्यादातर हमवतन गरीबी रेखा से नीचे ज़िंदगी बसर कर रहे होतेतो फिर बताइए कि मैं और किस तरीके से अपनी नाराज़गी अभिव्यक्त करताबलोचिस्तान में सैकड़ों लोग लापता कर दिए गए. ग़ैरक़ानूनी तरीके से हत्याएं की गईं. बलोचिस्तान के साथ यूं बरता गया मानो ये पाकिस्तान का हिस्सा न होकर इसका ग़ुलाम हो.

अदालत में ये बयान देने वाले इमरान ख़ान अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं. उसी पाकिस्तानी आर्मी के मातहतजिसने बलोचिस्तान के लोगों को बर्बाद किया. आज भी कर रही है. आज भी बलोचिस्तान के लोगों को बुनियादी अधिकार नहीं मिल रहे. वो अपनी ही मिट्टी में ग़ुलामों की तरह बरते जा रहे हैं. मगर आज इमरान को उनकी सुध नहीं. बलोचिस्तान पर होने वाला अत्याचारबलोचिस्तान से हमदर्दीसब ख़त्म हो गई है. कभी जिससे हमदर्दी थीवही BLA अब आतंकवादी है इमरान के लिए. और भारतवो है BLA का मददगार. जिस हमले की जिम्मेदारी BLA ने लीउसके बारे में 30 जून को इमरान ने बयान दिया-

इस बात में कोई सुबहा नहीं कि कराची में हुए हमले के पीछे भारत का ही हाथ है.

अफ़सोस कि इमरान ने ये बयान उसी संसद में दियाजहां पहुंचकर बलोचिस्तान जैसे मसले उठाने की बात करते थे वो. नेताओं में ये खासियत होती है. वो बड़ी जल्दी चीजें भूल जाते हैं.


ऐसा क्या हुआ कि भारत, पाकिस्तान के उच्चायोग में स्टाफ कटौती की नौबत आ गई

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