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क्या थे शिया वक्फ़ बोर्ड के दावे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले खारिज किया?

अयोध्या राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद. 134 साल पुराने इस ज़मीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. 9 नवंबर को सीजेआई रंजन गोगोई ने इस मामले में फैसला सुनाया. पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की थी. चीफ जस्टिस ने कहा कि फैसला यूनैनिमस है यानी सभी जजों की सम्मति से लिया गया है.

आगे बढ़ने से पहले दो लाइन में जान लेते हैं कि फैसला क्या है?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले को बरकरार नहीं रखा गया है. अयोध्या की जिस 2.77 एकड़ की विवादित ज़मीन पर विवाद था, वो रामलला विराजमान को दी जाएगी. वहीं मुस्लिम पक्ष को किसी और जगह पर 5 एकड़ जमीन दी जाएगी.

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पढ़िए दी लल्लनटॉप पर अयोध्या भूमि विवाद की टॉप टू बॉटम कवरेज.

सीजेआई ने अपना फैसला पढ़ना शुरू किया शांति की अपील के साथ. इसके बाद उन्होंने बताया कि इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज कर दी गई है. शिया वक्फ बोर्ड अगस्त, 2017 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. शिया वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड नहीं शिया वक्फ बोर्ड की है.

सीजेआई ने कहा,

“हमने शिया वक्फ़ बोर्ड की तरफ से फाइल की गई स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) को खारिज कर दिया है, जिसमें फैज़ाबाद कोर्ट के 1946 के फैसले को चुनौती दी गई थी. बाबरी मस्जिद का निर्माण मीर बाकी ने करवाया था. लेकिन ये उचित नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट धर्मशास्त्र के क्षेत्र में दखल दे.”

दरअसल, बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर की सेना के एक जनरल ने करवाया था. उनका नाम था मीर बाक़ी ताशकंदी. बताया जाता है कि बाबर को खुश करने के लिए मीर बाक़ी ने मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर रख दिया था. मीर बाक़ी शिया मुसलमान थे. इस वजह से शिया वक्फ बोर्ड बाबरी मस्जिद पर दावा करता रहा है.

अयोध्या विवाद में क्या है शिया वक्फ बोर्ड का स्टैंड?

उत्तर प्रदेश सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं वसीम रिज़वी. अक्टूबर 2017 में जब राम मंदिर बाबरी मस्जिद मामले में मध्यस्थता की बात शुरू हुई तो रिज़वी ने कहा कि अयोध्या में कोई मस्जिद नहीं थी, सिर्फ राम मंदिर ही था. उन्होंने यहां तक कहा था कि शिया वक्फ़ बोर्ड राम मूर्ति के लिए चांदी के 10 तीर देगा.


वीडियो- अयोध्या केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर क्या थे हिंदू और मुस्लिम पक्ष के तर्क?

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