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ऐसा खेल देखने मिले, तो सुबह साढ़े चार बजे का अलार्म लगाकर उठना खलता नहीं

vishiइस लेख को लिखा है दिल्ली से विशी सिन्हा ने. संक्षिप्त परिचय:  ट्रिपल आई टी – इलाहाबाद से इनफॉर्मेशन सिक्योरिटी में एमएस करने के अलावा लॉ की पढ़ाई भी की है. खेल और इतिहास में विशेष रुचि है. दाल-रोटी का खर्च निकालने के लिए फिलहाल दिल्ली स्थित एक आईटी कंपनी में लीगल मैनेजर का काम करते हैं. जीवन का उद्देश्य है पढ़ना. खेल जगत पर इनके आर्टिकल्स काफी रुचि लेकर पढ़े जाते हैं. अपनी मित्रता के दायरे में ‘सर्टीफाईड सज्जन’ के नाम से मशहूर विशी सिन्हा एक हंसमुख व्यक्तिव के धनी हैं. आज भारत की ऑस्ट्रेलिया में करिश्माई सीरीज़ विजय पर लिख रहे हैं. पढ़िए-


“समर ऑफ़ 36” यानी “एडिलेड डिबैकल” के बाद श्रृंखला में वापसी करना मुश्किल लग रहा था, लेकिन मेलबर्न में अजिंक्य रहाणे के शतक और रवीन्द्र जडेजा के अर्धशतक ने भारतीय टीम को खोया आत्मविश्वास वापस दिलाया. कहा जा सकता है कि सीरीज का टर्निंग पॉइंट मेलबर्न में इन दोनों के बीच हुई साझेदारी रही. हालांकि सीरीज इस क़दर प्रतिस्पर्धी रही कि इसे इकलौता टर्निंग पॉइंट नहीं कहा जा सकता. सिडनी में आखिरी दिन ऋषभ पंत-पुजारा की साझेदारी और फिर हनुमा विहारी-अश्विन द्वारा डटकर प्रतिरोध किया जाना, अंत तक डटे रहना और इस आखिरी टेस्ट की पहली पारी में पन्त के आउट होने पर वाशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर की मैच पलट कर रख देने वाली साझेदारी, और दूसरी पारी में पुजारा-गिल की साझेदारी. कोई किसी से कम महत्त्व की नहीं रही. अंडर-19 टीम में साथ खेले पृथ्वी शॉ के प्रथम टेस्ट में लचर प्रदर्शन के बाद एकादश में शामिल किये गए शुभमन गिल ने पारी-दर-पारी उम्मीदों पर खरा उतर कर दिखाया है.

ब्रिसबेन टेस्ट में उतरते वक़्त जहां ऑस्ट्रेलियन आक्रमण के नाम कुल हजार से अधिक विकेट थे वहीं भारतीय आक्रमण द्वारा टेस्ट मैचों में लिए कुल विकेटों की संख्या सिर्फ 13 थी. नटराजन और सुन्दर तो पदार्पण ही कर रहे थे. शार्दुल ठाकुर के नाम केवल 1 टेस्ट/10 गेंद फेंकने का अनुभव था जबकि नवदीप सैनी और मोहम्मद सिराज़ के नाम भी बस इसी सीरीज में क्रमशः एक और दो टेस्ट का अनुभव था. ऐसे अनुभवहीन आक्रमण से ये अपेक्षा करना ही कठिन लग रहा था कि वे टेस्ट में प्रतिपक्षी टीम के पूरे 20 विकेट ले भी पायेंगे. यूं लग रहा था जैसे ये टेस्ट डेविड और गोलिएथ के बीच खेला जा रहा था. लेकिन भारतीय टीम के वर्तमान कैप्टेन को अपने खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा था. स्थापित खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में बेंच प्लेयर्स ने जिस तरह मिले मौकों को भुनाया, अपने खेल के स्तर को उठाया और मुक़म्मल टीम गेम दिखाया, उसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है. पूरी श्रृंखला में कुल 20 भारतीय खिलाड़ी अलग-अलग अवसर पर टेस्ट एकादश में शामिल रहे जो चार टेस्ट मचों की श्रृंखला में अभूतपूर्व रहा. पहले टेस्ट के एकादश में शामिल तीन खिलाड़ी- रहाणे, पुजारा और मयंक ही आखिरी टेस्ट में भी खेल रहे थे. ख्व़ाब में भी किसने सोचा था कि ऐसी अस्थिर टीम कंगारुओं को उन्हीं की मांद में पछाड़ देगी. गाबा में- जहां कंगारुओं को पिछले 32 बरस से कोई हरा नहीं पाया, उस मैदान पर हरा देगी. वेल डन जिंक्स एंड हिज टीम.

इतना प्रतिस्पर्धात्मक खेल देखने को मिले तो सुबह साढ़े चार बजे का अलार्म लगाकर मैच देखने के लिए उठना खलता नहीं. ऑस्ट्रेलिया में होने वाली भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट श्रृंखला हमेशा ही रोमांचक होती रही हैं. वर्तमान टीम के इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद, बिना इस टीम से क्रेडिट छीने, ये अर्ज करना चाहूंगा कि किसी भारतीय क्रिकेट टीम का ये सबसे प्रतिस्पर्धी ऑस्ट्रेलिया दौरा नहीं था, बल्कि इससे भी मानीखेज, रोमांचक श्रृंखला हो चुकी है, लेकिन वो क़िस्सा फिर कभी.


विडियो- मौका मिला तो शार्दुल ठाकुर ने बता दिया कि रिकॉर्ड कैसे ध्वस्त किये जाते हैं!

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