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असम के प्रस्तावित गौरक्षा कानून की खास बातें, जो इसे देश में सबसे ज्यादा सख्त बनाती हैं

असम. पूर्वोत्तर का राज्य. हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में यहां बीजेपी ने जीत हासिल की है, और हिमंत बिस्व सरमा सीएम बने हैं. 12 जुलाई को विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन था. इसी दिन सीएम ने राज्य के अंदर गायों की सुरक्षा से संबंधित विधेयक (Assam cow protection Bill) विधानसभा में पेश किया. ‘असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021’ में गायों के संरक्षण से जुड़े सख्त नियम-कायदे रखे गए हैं. आइए बताते हैं कि इस विधेयक में आखिर है क्या, और बाकी राज्यों के गौरक्षा कानूनों से यह कैसे अलग है.

8 साल तक सज़ा, 5 लाख तक जुर्माना

देश के तमाम राज्यों में गौरक्षा से जुड़ा कानून मौजूद है. इसे बनाने की प्रेरणा राज्यों को संविधान के एक नीति निर्देशक तत्व से मिली है. संविधान में बताए गए नीति निर्देशक तत्व राज्यों या केंद्र पर बाध्यकारी तो नहीं हैं लेकिन इन्हें बेहतर प्रशासन के सूत्र कहा जा सकता है. इनका वर्णन संविधान के अनुच्छेद 36 से 52 के बीच मिलता है. इनमें से अनुच्छेद 48 कहता है कि

“राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से संगठित करने का प्रयास करेगा. खासतौर पर गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू मवेशियों की नस्लों के संरक्षण, सुधार और वध पर रोक लगाने के लिए कदम उठाएगा.”

बाकी राज्यों की तरह अब असम में भी गोवध रोकने के लिए कानून लाया जा रहा है. इस विधेयक के मुख्य प्रावधान ये हैं-

# विधेयक की धारा 7, ‘मवेशियों के परिवहन पर प्रतिबंध’ में कहा गया है कि वैध परमिट के बिना असम से उन राज्यों में मवेशियों को लाने-ले जाने पर बैन होगा, जहां मवेशियों के वध पर रोक का कानून नहीं है. ऐसा न सिर्फ दो राज्यों के बीच, बल्कि लाते-ले जाते वक्त अगर असम बीच में पड़ता है, तब भी मवेशियों को ले जाने पर रोक रहेगी. ऐसे में पूर्वोत्तर के उन राज्यों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है जहां बिहार, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे राज्यों से बीफ सप्लाई होता है. इन राज्यों में बीफ बैन नहीं है, लेकिन इन राज्यों तक बीफ सप्लाई का रास्ता असम से होकर जाता है.

# बिना वैध दस्तावेजों के मवेशियों को राज्य के भीतर (एक जिले से दूसरे में) भी ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकेगा. हालांकि एक जिले के भीतर चराने या खेती के लिए, पशुपालन के उद्देश्य से या फिर रजिस्टर्ड पशु बाजारों से मवेशियों को ले जाने के लिए किसी परमीशन की जरूरत नहीं होगी.

# कोई भी व्यक्ति अधिकारियों से ‘प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से’ मिली परमीशन वाली जगह के अलावा कहीं और बीफ ना तो खरीद सकेगा और ना बेच सकेगा. इनमें वे क्षेत्र शामिल हैं, जहां मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और अन्य बीफ ना खाने वाले समुदाय बसे हुए है. किसी मंदिर, सत्र (16वीं शताब्दी के कवि-संत शंकरदेव द्वारा स्थापित वैष्णव मठ) या अधिकारियों द्वारा निर्धारित क्षेत्र के 5 किलोमीटर के अंदर भी बीफ की खरीद-बिक्री नहीं हो सकेगी.

# दोषी पाए जाने पर किसी व्यक्ति को कम से कम 3 साल की सजा होगी, जिसे 8 साल तक बढ़ाया जा सकेगा. 3 लाख का जुर्माना भी होगा, जो अधिकतम 5 लाख तक जा सकेगा. दोबारा पकड़े जाने पर सजा दुगनी होगी.

असम के शिक्षा और वित्त मंत्री हिमांत बिस्व शर्मा, जिन्होंने धार्मिक शिक्षा संस्थानों को बंद करने का ऐलान किया है. (फोटो- PTI)
असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा गोवध पर ज्यादा सख्त कानून लाने की बात पहले भी करते रहे हैं. (फाइल फोटो- PTI)

इन राज्यों में हैं सख्त कानून

अगर पूर्वोत्तर के राज्यों को छोड़ दिया जाए तो देश के अमूमन हर राज्य में गौवध को लेकर कानून बने हुए हैं. कहीं कानून ज्यादा सख्त हैं तो कहीं थोड़े नरम. सख्त कानून वाले राज्यों में कर्नाटक, यूपी, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्य आते हैं. एक नजर इनमें मिलने वाली सजा पर-

# यूपी में गोवध के लिए बनाए गए मूल कानून का पालन न करने पर 2 साल की सजा या 1000 हजार रुपए जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. हालांकि राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अगस्त 2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) विधेयक 2020 पास किया है. इसमें 10 साल की सजा और 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है.

# कर्नाटक में 3 से 7 सात साल की सज़ा, और 50 हजार से 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है.

# हरियाणा में 10 साल की सज़ा और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है.

# दिल्ली में 5 साल तक की सज़ा और 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाता है.

बाकी राज्यों में 6 महीने से 2 साल तक की सज़ा और 2 से 5 हज़ार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन कहीं भी मंदिर या धार्मिक स्थलों से 5 किलोमीटर के एरिया में बीफ बेचे-खरीदे जाने जैसा बैन नहीं है.

असम के विपक्षी दलों ने भी इस प्रावधान को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने इसे एक धर्म विशेष को निशाना बनाने वाला बताया है. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने कहा कि गोवा, मेघालय और नगालैंड जैसे राज्यों में, जहां भाजपा सरकार का हिस्सा है, वहां भी ऐसा ही सख्त कानून क्यों नहीं लाया जाता? बता दें कि मेघालय और नगालैंड में गोवध को लेकर कोई कानून नहीं है. गोवा में जो कानून है, उसमें दोषी पाए जाने पर सिर्फ 6 महीने की सज़ा और 1000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है. वहीं, असम के इस प्रस्तावित कानून पर मेघालय के सीएम कोनराड संगमा भी चिंता जता चुके हैं. उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार से दखल की मांग भी की जाएगी.


वीडियो – इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- यूपी सरकार गोवध निषेध कानून का बेजा इस्तेमाल कर रही

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