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UPSC CSE 2020 को पोस्टपोन करने की मांग क्यों हो रही है

UPSC. यानी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन. संघ लोक सेवा आयोग. UPSC हर साल एक परीक्षा करवाता है- सिविल सर्विस एग्जाम (CSE). आम बोलचाल की भाषा में ये IAS-IPS की परीक्षा कहलाती है. इस साल भी UPSC सिविल सर्विस एग्जाम करवा रहा है. इसका प्रीलिम्स यानी कि प्रारंभिक परीक्षा 4 अक्टूबर को होनी है. चूंकि कोरोना काल चल रहा है, इसलिए आयोग ने परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए कई सारे निर्देश जारी किए हैं. ये निर्देश आए 9 सितंबर को.

जैसे ही ये निर्देश आयोग की तरफ से आए, सोशल मीडिया पर UPSC से जुड़े कई हैशटैग ट्रेंड में आ गए. मसलन #PostponeUPSC_CSE, #postponeupscoct4, #ListenToUPSC_CSE_Aspirant.

जैसा कि हैशटैग से ही पता चल रहा है, ये ट्रेंड चलाने वाले लोग 4 अक्टूबर को होने वाली परीक्षा को टालने की मांग कर रहे हैं. ये चाहते हैं कि परीक्षा की तारीख कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ा दी जाए. पटना में कुछ अभ्यर्थी पिछले पांच दिनों से भूख हड़ताल पर भी हैं. क्यों मांग कर रहे हैं ये लोग ऐसा? इसकी कई वजहें हैं. हमने अलग-अलग राज्यों के कई सारे UPSC CSE के अभ्यर्थियों से बात की. उन्होंने एग्जाम पोस्टपोन कराने की मांग के पीछे जो वजह बताई, वो ये हैं-

# सबसे बड़ी और प्रमुख वजह है लगातार बढ़ रहे कोरोना केसेज. देश में इस समय 90 हजार के लगभग कोरोना केस रोज आ रहे हैं. हर साल करीब आठ-नौ लाख अभ्यर्थी UPSC CSE में हिस्सा लेते हैं. ऐसे में लाखों अभ्यर्थियों का बाहर निकलना, ट्रैवल करना और एग्जाम देकर वापस आना एक बड़ी समस्या है.

दूसरी समस्या रुकने की है. जिन अभ्यर्थियों का सेंटर दूसरे शहर में है, उनके सामने वहां ठहरने की समस्या है. इसके अलावा प्री की परीक्षा दो शिफ्ट में होती है. दोनों के बीच लगभग तीन घंटे का गैप होता है. छात्रों का कहना है कि पेपर खत्म होते ही अभ्यर्थियों को बाहर कर सेंटर बंद कर दिया जाता है. इन तीन घंटों में वे न तो कुछ कर सकते हैं, न ही कहीं बैठ सकते हैं.

तीसरी समस्या है सेंटर्स की संख्या. UPSC ने देशभर के 72 शहरों में सेंटर बनाए हैं. ट्विटर पर ट्रेंड चला रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि ये पर्याप्त नहीं है. इन अभ्यर्थियों की मांग है कि सेंटर्स की संख्या बढ़ाई जाए, जो अभ्यर्थियों के लिए सुलभ हो.

बिहार, असम और ओडिशा के कई हिस्से अभी भी बाढ़ प्रभावित हैं. इन इलाकों से आने वाले अभ्यर्थी भी परीक्षा की डेट बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं.

4 अक्टूबर को होने वाली परीक्षा को आगे बढ़ाने की मांग करने वालों में डॉक्टर, पुलिस सर्विस के लोग और अन्य कोरोना वॉरियर्स भी शामिल हैं. बड़ी संख्या में कोरोना वॉरियर्स की कैटेगरी में आने वाले लोग UPSC CSE में शामिल होंगे. इन लोगों की भी मांग है कि परीक्षा को आगे बढ़ाया जाए.

अभ्यर्थियों का कहना है कि यह एक प्रशासनिक भर्ती परीक्षा है, न कि NEET और JEE की तरह एकेडमिक एंट्रेंस एग्जाम. UPSC CSE की प्री. परीक्षा में हुई चूक से एक साल और एक अटेम्प्ट बेकार हो जाएगा. CSE में केवल एक स्टेज की तैयारी नहीं होती है. प्री, मेन्स और इंटरव्यू- तीनों की तैयारी सालभर चलती है. अगर किसी को प्री या मेन्स से पहले कोरोना हो जाता है, तो उसका पूरा साल और अटेम्प्ट, दोनों बेकार हो जाएंगे.

अधिकतर छात्र दिल्ली जैसे शहरों में रहकर तैयारी करते हैं. यहां कोचिंग इंस्टीट्यूट और लाइब्रेरी में अच्छा-खासा स्टडी मैटेरियल मिल जाता है. कोरोना महामारी के दौरान अधिकतर अभ्यर्थी अपने घर चले गए, जहां न तो उनके पास लाइब्रेरी की सुविधा है, न ही कायदे से स्टडी मैटेरियल. हर साल करीब 10 लाख अभ्यर्थी CSE में शामिल होते हैं, जबकि पोस्ट केवल 800-1000 के बीच में होती है. ऐसे में दूर-दराज के इलाकों से आने वाले छात्र जो लॉकडाउन के दौरान पिछले पांच-छह महीनों में कायदे से नहीं पढ़ पाए हैं, वे उन अभ्यर्थियों के मुकाबले बहुत पीछे रह जाएंगे, जो शहरों में रहते हैं और सुविधासंपन्न हैं. एक तबके का मानना है कि ये खुले तौर पर समान अवसर के अधिकारों का हनन है. सवाल केवल परीक्षा का ही नहीं, बल्कि समान अधिकारों की भी है.

ये तो उन छात्रों की बात हो गई, जो चाहते हैं कि परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी जाए. 4 अक्टूबर को होने वाले प्री एग्जाम को दिसंबर या जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया जाए. लेकिन #ListenToUPSC_CSE_Aspirant पर ट्वीट कर रहे छात्रों में बड़ी संख्या में वो लोग भी हैं, जो एग्जाम पोस्टपोन कराने की बजाय एक कम्पन्सेशन अटेम्प्ट की मांग कर रहे हैं.

भेदभाव का आरोप क्यों?

जून-जुलाई में काफी अभ्यर्थियों ने UPSC से सेंटर बदलने की मांग की. वजह ये थी कि अधिकतर अभ्यर्थी दिल्ली या फिर दूसरे बड़े शहरों में रहकर तैयारी करते हैं. लेकिन जब लॉकडाउन हुआ, तो कोचिंग क्लासेज के साथ-साथ लाइब्रेरी और स्टडी सेंटर भी बंद हो गए. इसके अलावा लॉकडाउन की वजह से अभ्यर्थियों को रहने व खाने में भी दिक्कतें आने लगीं. ऐसे में अभ्यर्थी अपने घर वापस चले गए. सेंटर बदलने की मांग इसलिए शुरू हुई, ताकि जो जहां हो, वहीं पास के सेंटर पर एग्जाम दे सकें.

UPSC ने एक नोटिफिकेशन जारी कर सेंटर बदलने का ऑप्शन दिया. साथ ही ये भी ऑप्शन दिया कि अगर कोई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहता है, तो वो अपना नाम वापस ले सकता है. ताकि ऐसे छात्र जो परीक्षा न देना चाहते हों, उनके लिए भी UPSC को इंतजाम न करना पड़े. UPSC के इस विंडो से छात्रों को भी एक फायदा हुआ. फायदा ये कि अगर किसी छात्र को लगता है कि उसकी तैयारी पूरी नहीं है, तो वो अपना नाम वापस ले सकता है. अभ्यर्थियों का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जिसका ये कहना है कि ये विंडो खोलकर UPSC ने स्वीकार किया है कि COVID की वजह से तैयारी प्रभावित हुई है. साथ ही इन अभ्यर्थियों का ये भी आरोप है कि UPSC इनके साथ भेदभाव कर रहा है. कैसे, बताते हैं.

जिनका ये आखिरी मौका है

जिन छात्रों का ये आखिरी मौका है, उनके सामने गंभीर समस्या है. हमने कुछ ऐसे अभ्यर्थियों से बात की, जिनका ये लास्ट चांस है. अगले साल वे ओवरएज हो जाएंगे. हरियाणा के अभिषेक कहते हैं-

UPSC ने दोबारा नाम वापस लेने का जो विंडो दिया, वो इसीलिए दिया कि जिन्हें लगता है कि COVID की वजह से उनकी तैयारी प्रभावित हुई है, वे अपना अटेम्प्ट खराब न करें. ये अच्छी बात है. लेकिन हम ये चाहते हैं कि ये सुविधा फाइनल अटेम्प्ट वालों को भी मिले. COVID की वजह से फाइनल अटेम्प्ट वालों की तैयारी भी प्रभावित हुई है. ये हमारे साथ भेदभाव है. मेरे माता-पिता दोनों इस समय COVID पॉजिटिव हैं. मैं खुद होम क्वारंटीन में हूं.

जबलपुर की रहने वाली उर्वशी का भी ये लास्ट अटेम्प्ट हैं. उनकी भी यही समस्या है. उनके पति इस समय COVID पॉजिटिव हैं. उर्वशी का कहना है कि UPSC की तैयारी करने वालों के लिए एक-एक दिन का बहुत महत्व होता है. लेकिन इस वक्त वे सेल्फ आइसोलेशन में हैं और अपनी तैयारी के लिए पूरा समय नहीं दे पा रही है.

तो ये लास्ट अटेम्प्ट वाले चाहते क्या हैं? इस सवाल का जवाब झारखंड के निशांत देते हैं. निशांत का भी ये लास्ट अटेम्प्ट है. निशांत कहते हैं-

अगर UPSC बाकी अभ्यर्थियों को ड्रॉपआउट करने का ऑप्शन देता है, तो फिर हमें क्यों नहीं? हम कोई एक्स्ट्रा या एडिशनल अटेम्प्ट की मांग नहीं कर रहे हैं. लॉकडाउन की वजह से हम उस तरह से नहीं पढ़ पाए हैं. हम तैयारी नहीं कर पाए हैं. हम इस साल एग्जाम में नहीं बैठेंगे, अगर UPSC हमें भरोसा दिलाए कि अगले साल हमें एग्जाम में बैठने का मौका दिया जाएगा. UPSC पहले भी ऐसा कर चुका है.

UPSC CSE 2020 के लिए नोटिफिकेशन फरवरी में निकाला गया था. इस साल 796 पदों के लिए वैकेंसी जारी की गई है. नोटिफिकेशन में कहा गया था कि प्री एग्जाम 31 मई, 2020 को आयोजित किया जाएगा. लेकिन बाद में इसे कोरोना और लॉकडाउन की वजह से टाल दिया गया था. यूपीएससी सिविल सेवा एग्जाम के जरिए इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस), इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) और इंडियन फॉरेन सर्विस (आईएफएस), रेलवे ग्रुप ए (इंडियन रेलवे अकाउंट्स सर्विस), इंडियन पोस्टल सर्विस, इंडियन ट्रेड सर्विस सहित अन्य सेवाओं के लिए सेलेक्ट किया जाता है. ये वो पद हैं, जो हमारे देश की दशा और दिशा तय करते हैं. उम्मीद है कि UPSC इन भविष्य के ब्यूरोक्रेट्स की बातों को जरूर सुनेगा.


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