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तीसरी लहर का डर तो है, लेकिन फिर भी स्कूल खोलना ज़रूरी क्यों है?

Schools should be the last to close and the first to reopen.

स्कूलों को सबसे आखिर में बंद करना चाहिए और सबसे पहले खोलना चाहिए.

यूनीसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने पिछले महीने ही स्कूल खोलने पर ज़ोर देते हुए ये बात कही थी. जब दुनिया में कोरोना पीक पर था तब भी स्कूल और पढ़ाई कई देशों के लिए प्राथमिकता का हिस्सा था. डेनमार्क, नीदरलैंड्स जैसे देशों ने तो स्कूल बहुत कम वक्त के लिए ही बंद किए थे. और अब ज्यादातर देश, लगभग 175 स्कूल शुरू कर चुके हैं. लेकिन हमारे देश में शायद स्कूल खोलना सरकारों की आखिरी प्राथमिकता है. बाज़ार, मॉल्स, पार्क सब कुछ खुल चुके हैं. हम बाहर निकलकर देखते हैं तो सब कुछ सामान्य दिखता है. ऐसा लगता है शायद लोग कोरोना को भी भूलते जा रहे हैं. भीड़भाड़ वाली जगह पर भी लोग बिना मास्क के दिख जाते हैं. कोरोना के केस कम हुए तो सरकारों की गंभीरता भी जाती रही. लेकिन स्कूल खोलने में अब भी कोरोना आड़े आ रहा है. देश में लाखों बच्चे ऐसे हैं जिनको स्कूल गए 600 दिन होने को आए हैं. कई राज्यों में बड़े बच्चों की कक्षाएं शुरू की हैं, लेकिन प्राइमरी स्कूल अब भी बंद हैं.

पढ़ाई राम भरोसे

कहने को ये कहा जा सकता है बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा था. लेकिन हम सब जानते हैं कि कैसी पढ़ाई होती है ऑनलाइन. ये वाला सिर्फ खानापूर्ति ही रहा है. यूनिसेफ की रिपोर्ट कहती है कि भारत में चार में से सिर्फ एक बच्चे के पास ही ऑनलाइन पढ़ने की सुविधा है. बाकी के पास या तो स्मार्टफोन नहीं हैं या इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं हैं. और बच्चे ही क्या स्कूलों का भी हाल भी तो ऐसा ही है. शिक्षा मंत्रालय के दिए डेटा के मुताबिक कोरोना शुरू होने से पहले देश में सिर्फ 12 फीसदी स्कूलों में ही इंटरनेट कनेक्टिविटी थी. और ढंग के कम्प्यूटर जैसी सुविधाएं भी सिर्फ 30 फीसदी स्कूलों में ही थी. ये हाल है हमारे स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर का. तो क्या ही ऑनलाइन पढ़ाई हुई होगी.

इसीलिए हर तरफ से स्कूल खोलने पर ज़ोर दिया जा रहा है. अभी संसद के मॉनसून सत्र में ही शिक्षा पर संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी थी. इसमें कहा था कि स्कूल नहीं खुलने से परिवारों के सामाजिक तानेबाने पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. पूरे दिन घरों की चारदीवारी में रहने से बच्चों का उनके माता-पिता के साथ रिश्ते में फर्क पड़ रहा है. बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है. इसलिए स्कूलों को बंद नहीं रखना चाहिए.

दिल्ली में स्कूल खुले

तो इस तरह के विमर्श के बीच राज्य सरकारों ने स्कूल खोलना तो शुरू किया है, लेकिन आंशिक रूप से. कुछ ऊपर की क्लासें ही शुरू हुई हैं. और राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में तो अभी तक स्कूल बिल्कुल भी शुरू नहीं हुए. अब जाकर दिल्ली में स्कूल खोलने पर फैसला हुआ है. 27 अगस्त को दिल्ली सरकार ने ऐलान किया है कि 1 सितंबर से दिल्ली में 9वीं से 12वीं तक के स्कूल खुलेंगे. 8 सितंबर से कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल खुलेंगे. उसके बाद बाकी छोटे बच्चों के स्कूल खोले जाएंगे. जिसकी तारीख अभी दिल्ली सरकार ने जारी नहीं की है.

दिल्ली में पिछले कई दिनों से कोरोना के मामले 100 से कम ही आ रहे हैं. गुरुवार को 45 नए मामले आए थे. जबकि बुधवार को 35 मामले आए थे और एक मरीज की मौत हुई थी. अब तक एक करोड़ 46 लाख वैक्सीन के डोज़ भी लगाए जा चुके हैं. यानी सब कुछ ठीक चल रहा था. यानी कोरोना के मोर्चे पर सब काबू में चल रहा था, सिर्फ स्कूल खोलना ही बाकी था. और उसकी तारीख भी आज सरकार ने दे दी है. दिल्ली के अलावा देश के और कौन से राज्यों में अभी स्कूल खुल गए या खुलने वाले हैं, उस पर भी बात कर लेते हैं.

Manish Sisodia
मनीष सिसोदिया ने 27 तारीख़ को ऐलान किया कि दिल्ली में कक्षा-6 के बाद के स्कूल अब धीरे-धीरे खोले जाएंगे.

बाकी राज्यों की स्थिति

सबसे पहले हरियाणा की बात. हरियाणा में जुलाई में ही स्कूल खोल दिए गए थे. 16 जुलाई से 9 से 12वीं तक की कक्षाएं शुरू हुई. और फिर 6 से 8 तक के बच्चों के लिए भी स्कूल खोल दी. हालांकि बच्चों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य नहीं है. पैरेट्स की मर्ज़ी पर है. हरियाणा में चौथी और पांचवीं के बच्चों के लिए भी 1 सितंबर से स्कूल शुरू कर दी जाएगी. स्कूल आने वाले बच्चों के पैरेंट्स से लिखित में परमिशन ली जाएगी. और छोटे बच्चों को स्कूल बुलाने पर अभी फैसला नहीं हुआ है.

राजस्थान की बात करते हैं. यहां अभी स्कूल बंद हैं. 1 सितंबर से 9 से 12वीं तक के स्कूल खोलने का ऐलान गहलोत सरकार ने किया है.

उत्तर प्रदेश में चलते हैं. वहां अगस्त के दूसरे महीने में 9 से 12वीं वालों के ऑफलाइन क्लासेज शुरू कर दी गई थी. 23 अगस्त से 6 से 8 वालों के लिए भी स्कूल खोल दी. और अब 1 सितंबर से पहली से पांचवीं वालों की स्कूल शुरू हो जाएगी. यानी सितंबर से पहले की तरह स्कूल चलने लगेंगे.

उत्तराखंड में 6 से 12वीं की स्कूल 2 अगस्त से शुरू कर दी थी. बिहार में 16 अगस्त से पहले से 8वीं तक के बच्चों के लिए भी स्कूल खोल दी गई. असम, आंध प्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों में भी स्कूल शुरू हो गए हैं. हालांकि महाराष्ट्र, केरल और पश्चिम बंगाल में अभी स्कूल शुरू होने की तारीख नहीं आई है.

क्यों खुलने चाहिए स्कूल?

जितने भी राज्यों में अभी स्कूल खोले गए हैं उनमें एक-दो को छोड़कर बाकी में प्राइमरी की कक्षाएं अभी शुरू नहीं की गई हैं. जबकि कई एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि स्कूल बंद होने का सबसे ज्यादा नुकसान छोटे बच्चों को ही हुआ है, इसलिए उनकी कक्षाएं शुरू कहना सबसे ज़रूरी है. लेकिन फिर तीसरी लहर का डर भी है. देश में कई दिनों से कोरोना के केस भी नहीं घट रहे हैं. रोजाना वाले मामलों का आंकड़ा 25 से 50 हजार के बीच झूल रहा है. ये भी बात आई थी कि तीसरी लहर अगर शुरू होती है तो उसमें बच्चों में ज्यादा संक्रमण हो सकता है. अभी बच्चों का टीकाकरण भी शुरू नहीं हुआ. इसलिए शायद पैरेंट्स के मन में भी डर हो कि छोटे बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए या नहीं. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि बच्चों को स्कूल भेजने में कोई खतरा नहीं है. हाल ही में देश के 55 बड़े डॉक्टर्स और शिक्षाविदों ने मिलकर प्रधानमंत्री और सभी मुख्यमंत्रियों को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने कई तर्क देकर बताया है कि क्यों तीसरी लहर की आशंका के बीच भी स्कूल खोले जाने चाहिए.

School
देश में लाखों बच्चे ऐसे हैं जिनको स्कूल गए 600 दिन होने को आए हैं. कई राज्यों में बड़े बच्चों की कक्षाएं शुरू की हैं, लेकिन प्राइमरी स्कूल अब भी बंद हैं. (फोटो- PTI)

इंडिया टुडे ने इस चिट्ठी के बड़े बिंदु छापे हैं. क्या तर्क हैं, आप भी देख लीजिए.

>> चिट्ठी में कहा है कि डेल्टा वेरिएंट को लेकर चिंता जताई जा रही है लेकिन देश की दो तिहाई की आबादी पहले ही इस वायरस के संपर्क में आ चुकी है. इनमें बड़ी तादाद में बच्चे भी शामिल हैं.

>> दूसरा तर्क दिया गया है कि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कोरोना की वैक्सीन लगाना जरूरी शर्त नहीं होनी चाहिए. क्योंकि अमेरिका का डेटा बताता है कि 25 साल से कम वालों में कोरोना से मौत का खतरा बिल्कुल कम रहता है.

>> तीसरी बात. कई अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि स्कूल सुपरस्पेडर नहीं हो सकते. यानी अगर बच्चे स्कूल जाते हैं और कोई कोरोना संक्रमित होता भी है तो सब बच्चों को हो जाए, ऐसा नहीं होगा.

इन एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि अगर कुछ पैरेंट्स बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते तो, ये व्यवस्था वैकल्पिक रख ली जाए. लेकिन कम से स्कूल तो शुरू करने चाहिए. कुछ और भी हेल्थ एक्सपर्टस स्कूल खोलने की हिमायत कर रहे हैं.

महामारी विशेषज्ञ डॉ चंद्रकांत लहरिया ने इंडिया टुडे को बताया कि अभी स्कूल खोलने का सही वक्त है. बल्कि हम तो स्कूल खोलने में लेट हैं. 17 महीने में हमें देख लिया है कि बच्चों में कोरोना का खतरा बहुत कम है, इसलिए उन्हें शिक्षा से वंचित रखना गलत है.

तो क्या तीसरी लहर का डर नहीं है?

तो इस तरह से एक बड़ा हिस्सा स्कूल खोलने की हिमायत कर रहा है. हालांकि कोरोना की तीसरी लहर वाले डर को भी खारिज नहीं किया जा सकता है. मई में दूसरी लहर का पीक आने के बाद कोरोना के केस तेज़ी से कम हुए लेकिन पिछले दो महीने से केस कम होना बंद हो गए हैं. केरल राज्य में 20 हज़ार से ऊपर मामले आ रहे हैं. अगर पिछले 24 घंटों की बात करें तो देश में 44 हजार 658 नए केस आए हैं. जबकि 496 लोगों की मौत हुई है. 88 फीसदी नए मामले सिर्फ 5 राज्यों से आ रहे हैं. पहले नंबर पर केरल है. केरल में पिछले 24 घंटों में सबसे ज्यादा 30 हज़ार 77 मामले आए हैं. दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र. वहां में 5 हजार 108 नए मामले आए हैं. तमिलनाडु में 1559 केस, कर्नाटक में 1539 और कर्नाटक में 1213 नए मामले आए हैं.

यानी केरल के अलावा बाकी राज्यों में अभी ज्यादा मामले नहीं आ रहे. अच्छी बात ये है कि देश में 18 से ज्यादा उम्र के 50 फीसदी लोगों को टीके की कम से कम से एक डोज़ लग चुकी है. देश में गुरुवार तक कुल डोज़ वाला आंकड़ा 61 करोड़ से ऊपर चला गया था. टीकाकरण का ये आंकड़ा भी तीसरी लहर का डर कम करता है. तो कुल मिलाकर कोरोना बढ़ने या तीसरी लहर का डर तो अभी हमारी ज़िंदगी से नहीं जाने वाला है. लेकिन बच्चों की पढ़ाई भी उतनी ही ज़रूरी है. कोरोना वाली सावधानियों के बीच स्कूल भी शुरू किए जाने चाहिए, ये सभी राज्य सरकारों की अब प्राथमिकता होनी चाहिए.


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