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मफलरमैन बनने और उसके हिट होने की कहानी बड़ी दिलचस्प है

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आम आदमी पार्टी के ओवरसीज़ मीडिया और आईटी एंड इनोवेशन हेड हैं अंकित लाल. उन्होंने एक किताब लिखी है. नाम है ‘इंडिया सोशलः हाऊ सोशल मीडिया इज़ लीडिंग द चार्ज एंड चेंजिंग द कंट्री ‘. किताब का ये अंश उन्होंने ‘दि लल्लनटॉप’ के साथ शेयर किया. पढ़ेंः

लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी की स्थिति खराब थी. हालांकि पार्टी का पहला लोकसभा चुनाव था और पार्टी 4 सीटों के साथ लोकसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल हो गई थी. फिर भी मीडिया ने इसको एक बड़ी हार के तौर पर दिखाया.

अंकित लाल की बुक इंडिया सोशल आ रही है.
अंकित लाल; उनकी बुक ‘इंडिया सोशल’ का कवर.

भाजपा की सोशल मीडिया टीम ने दिल्ली राज्य से इस्तीफा देने का और लोकसभा में उम्मीद जितना अच्छा प्रदर्शन ना कर पाने का सारा दोष केजरीवाल के सर मढ़ दिया. इस तरह से केजरीवाल की छवि का मजाक बनना पार्टी के लिए भी हानिकारक साबित हो रही था.

उनके मफलर, खांसी और सामान्य पहनावे, सभी चीजों के लिए उनका मजाक उड़ाया जा रहा था. मनोज कुरील जिन्होंने कभी इंडिया अगेंस्ट करप्शन के Facebook पेज के लिए कार्टून बनाए थे, अब केजरीवाल और अन्य आप नेताओं के बारे में कार्टून बनाने लगे. यह कार्टून ‘नीति सेंट्रल’ और अन्य भाजपा की तरफ झुकाव रखने वाली वेबसाइट पर अक्सर देखी जाती थी.

2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद आम आदमी पार्टी में फिर से जोश भरना एक चैलेंज था, पर इसे किया गया.
2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद आम आदमी पार्टी में फिर से जोश भरना एक चैलेंज था, पर इसे किया गया.

चुनाव जल्दी ना करवाकर भाजपा ने हमें एक मौका दिया कि हम अपने संगठन को वापस से एकत्रित कर सकें, जमीन पर भी और सोशल मीडिया पर भी. लोकसभा के समय जितने लोगों से संपर्क हुआ था, उन्हें और पुराने लोगों को मिलाकर वापस से जिम्मेदारियां बांटी गईं. गौर करने लायक बात यह है कि सोशल मीडिया टीम में तीन लोगों को छोड़कर कोई भी दिल्ली का निवासी नहीं था.

सोशल मीडिया के जिस एक क्षेत्र में हमने महारत हासिल कर ली थी, वह था ट्विटर ट्रेंड्स. हालत ऐसी थी कि केजरीवाल ने एक बार हंसते हुए कहा,” मुझे लगता है तुम लोगों ने या तो छोटे को हैक कर लिया है या अंदर किसी से तुम्हारी बातचीत है.” हालांकि ऐसा कुछ था नहीं. हम लोगों ने समय-समय पर अलग-अलग रणनीतियां अपनाई थीं और जो काम करती थीं उन्हें प्रयोग में रखा जाता था अथवा नई रणनीति खोजी जाती थी. कुछ तकनीके सामान्य थीं. कुछ, जैसे पुराने बैनरों पर नया हैशटैग लगाकर चलाना और देश-विदेश में बैठे वॉलंटियर्स को ट्विटर ट्रेंड में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करना और थोड़ी सी नई.

अाम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया कैंपेन्स का पार्टी को काफी फायदा मिला.
अाम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया कैंपेन्स का पार्टी को काफी फायदा मिला.

मैं दिल्ली स्थित एक टीम बनाने के प्रयास में लग गया. इसके लिए सुमित नेगी, जोकि एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर थे और 2012 से अपनी नौकरी छोड़कर पूरी तरह से पार्टी के कार्य में समर्पित थे, को इस चीज की बागडोर दी गई.

हालांकि अन्य पार्टियां आप और उसके नेताओं के विरुद्ध बातें करने में व्यस्त थीं. हमने उस नकारात्मक बातचीत का हिस्सा न बनने का फैसला किया. पूर्व पत्रकार आशीष खेतान ‘दिल्ली डायलॉग’ नाम का एक प्रस्ताव लेकर आए. प्रस्ताव बहुत ही आसान और प्रभावकारी था. सोच यह थी कि दिल्ली से जुड़े मुद्दों को उन मुद्दों से जुड़े विभिन्न दिल्लीवासियों के माध्यम से समझा जाए. सभी से बातचीत करने के बाद जो बातें निकलें, उन्हें घोषणा पत्र के रूप में निकाला जाए. खेतान, आदर्श शास्त्री, मीरा सान्याल और प्रीति शर्मा मेनन को मिलाकर एक टीम बनाई गई जिसे मिलकर इस पूरे काम को करना था. साथ ही साथ इसका सोशल मीडिया कैंपेन भी प्लान किया गया. एक वेबसाइट बनाई गई, जिसके द्वारा दिल्ली डायलॉग के विभिन्न चरणों और मुद्दों के बारे में लोग अपने विचार रख सकते थे.

सोशल मीडिया पर चला विजन दिल्ली कैंपेन कामयाब रहा.
सोशल मीडिया पर चला दिल्ली डायलॉग कैंपेन कामयाब रहा.

सोशल मीडिया टीम ने जब भी कोई बड़ा कार्यक्रम हुआ, उसका फेसबुक पर लाइव प्रसारण और उसके बारे में सोशल मीडिया पर बातचीत हो, यह सुनिश्चित किया. कोशिश यह थी कि दिल्ली के लोगों को पता चले कि यह एक पार्टी है जो उनकी समस्याओं का समाधान करने के बारे में सचमुच चिंतित है.

उस साल नवंबर में केजरीवाल 10 दिन की विपस्सना के लिए गए. लगभग उसी समय इंग्लैंड के मैनचेस्टर में रहने वाले एक साथी, शादाब ने एक पोस्टर बनाया. यह पोस्टर हॉलीवुड फिल्म अब्राहम लिंकन से प्रेरित था. शादाब कहते हैं,”जब मैंने पोस्टर बनाया तो मुझे पता नहीं था यह इतना बड़ा हिट हो जाएगा. एक साथी वॉलंटियर, डॉक्टर नेहल ने मुझसे कुछ बनाने के लिए कहा और फिर यह बना. करीब एक हफ्ता लग गया इसको बनाने में पर इसकी सोच पहले ही क्षण से बहुत ही साफ़ थी. पोस्टर बनाते वक्त मेरे दिमाग में एक बैकग्राउंड म्यूजिक चल रहा था: 49 दिनों के गौरव के बाद, वह फिर आ रहा है…”

शादाब ने पोस्टर में केजरीवाल को ‘मफलरमैन’ नाम से संबोधित किया था. आरती जोकि ट्विटर की टीम को मेंटर करती हैं, को लगा कि इस पोस्टर को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हम मफलरमैन के बारे में एक ट्विटर ट्रेंड करें. उससे पहले तक इस शब्द का प्रयोग सिर्फ केजरीवाल की खांसी और उनके मफलर का मजाक उड़ाने के लिए किया गया था.

मफलरमैन कई दिनों तक ट्विटर पर ट्रेंड में रहा.
मफलरमैन कई दिनों तक ट्विटर पर ट्रेंड में रहा.

केजरीवाल विपस्सना में थे और मुझे यकीन था कि अन्य नेता इसके लिए नहीं मानेंगे. पर एक सामान्य कार्यकर्ता को कोई कुछ बोलने या लिखने से कैसे रोक सकता है. 20 नवंबर की सुबह आरती ने #Mufflerman का प्रयोग करते हुए पहला ट्वीट किया. 11:30 तक प्रति मिनट 40 ट्वीट हो रहे थे इस हैशटैग पर. 2:30 बजे तक हर 35 सेकंड में एक ट्वीट हो रहा था. #Mufflerman ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा था. और ऐसा नहीं था कि सिर्फ आप कार्यकर्ता इसका प्रयोग कर रहे थे, सामान्य लोग भी कर रहे थे. मफलरमैन वायरल हो चुका था.

ट्विटर ट्रेंड सामान्यता कुछ घंटों में गायब हो जाते हैं. मैंने सबसे ज्यादा समय तक जो ट्रेंड देखा था, वह 72 घंटे तक चला था. पर मफलरमैन जाने का नाम ही नहीं ले रहा था. 3 दिन हो गए और वह फिर भी ट्रेंड कर रहा था. पार्टी के मीडिया सेल ने तब इसके औपचारिक रूप से प्रयोग की अनुमति दी. यहां तक कि मीडिया भी इससे अछूता नहीं रहा. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के ‘दिल्ली टाइम्स’ में मफलरमैन को आधा पेज की जगह दी गई.


Video: आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष का लल्लनटॉप इंटरव्यू

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