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हमेशा टीवी पर हंसने वाली अर्चना पूरनसिंह की रियल लाइफ में हंसी कम और गम ज़्यादा रहे

टीवी पर अनुपम खेर का एक टॉक शो आता था. ‘द अनुपम खेर शो’. शो के एक एपिसोड में मनोज बाजपेयी आए थे. जहां उन्होंने बड़ी मारक बात कही. जो उनसे उनकी मां ने ‘सत्या’ की सक्सेस के बाद कही थी. उन्होंने कहा, ‘मनोज, जिसको सफलता नहीं मिली, उसे बेवकूफ नहीं समझते.’ आजकल इस कोट की क्लिप इंस्टाग्राम वगैरह पर भी घूम रही है.

लेकिन यहां हम मनोज बाजपेयी या अनुपम खेर पर बात नहीं करेंगे. बात करेंगे उस एक्ट्रेस की, जिसका करियर मनोज की मां की कही बात के इर्द-गिर्द घूमकर रह गया. वो एक्ट्रेस जो छोटे शहर से सपने लेकर बड़े शहर आई, लेकिन वो कभी पूरे न हो सके. वो एक्ट्रेस जिसे हमने ‘कपिल शर्मा शो’ पर हमेशा हंसते देखा. और हमारे बड़ों ने उसे ‘श्रीमान श्रीमती’ पर हंसाते. लेकिन फिर भी उसकी स्ट्रगल स्टोरी से हम शायद अनजान हैं. आपको बताएंगे अर्चना पूरन सिंह के बारे में. वो अर्चना जिन्हें हमने ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘मोहब्बतें’ से लेकर ‘कुछ कुछ होता है’ तक करीब 70 से ज्यादा फिल्मों में देखा. लेकिन फिर भी वो मानती हैं कि उनके अंदर के आर्टिस्ट से लोग आजतक अपरिचित हैं.

Bollywood Kisse


# अंधियारे, बदहाल हॉल वाली दुनिया से बाहर कैसे निकली?

अर्चना देहरादून की रहने वाली हैं. बचपन से ही घर में खुराफात मचाने वाली बच्ची रहीं. वो कभी शांत नहीं बैठती. कभी किसी की नकल करना, बिना बात नाचने लगना, ये सब चलते रहता. तभी घर पर कोई गेस्ट आता तो घरवाले उनसे कहते, ‘चलो बेटा डांस कर के दिखाओ’, ‘मिमिक्री कर के दिखाओ’. बच्चों के ऐसे बर्ताव का सीधा संबंध होता है सिनेमा से. 1962 में पैदा हुई अर्चना पर 60 और 70 के दशक के हिंदी सिनेमा का खासा प्रभाव रहा. ऐसा दौर जब सिनेमा ही मनोरंजन का साधन था. उनका परिवार थिएटर में फिल्में देखने जाता. ऐसा थिएटर जहां पंखे नहीं थे. सीटें जर्जर हालत में थीं. चलते शो के बीच में बत्ती गुल हो जाती. फिर भी वो फिल्मों को इन्जॉय करतीं. घर आकर हेलेन जैसा डांस करने की कोशिश करतीं.

अर्चना 2
अर्चना बस अपने होमटाउन से निकलना चाहती थीं.

फिल्मी परदे पर देखा सब कुछ सुहाना लगता. साधना की फिल्में पसंद आईं, तो अर्चना ने साधना जैसा हेयर कट रख लिया. कुल मिलाकर उन्हें लगने लगा कि फिल्में ही हैं सब कुछ. फेमस होने का तरीका. अपने छोटे शहर से निकलने का तरीका. और रातों-रात अपना नाम चमकाने का तरीका. वो अपना शहर छोड़ बाहर की दुनिया को एक्स्प्लोर करना चाहती थीं. इसलिए 18 साल की उम्र में बॉम्बे के लिए रवाना हो गईं. वो भी सिर्फ एक सूटकेस के साथ. बॉम्बे पहुंचकर मिला उन्हें अपना पहला रियलिटी चेक. कि कोई प्रड्यूसर या डायरेक्टर उनका इंतज़ार नहीं कर रहा. समझ गईं कि काम मिलना इतना आसान नहीं. अपना खर्चा चलाने के लिए ऑड जॉब्स करना शुरू कर दिया. साथ ही मॉडलिंग भी करतीं. उनके हिस्से प्रिंट और टीवी कमर्शियल्स आते रहते. ऐसे ही एक ऐड में उन्हें डायरेक्ट किया जलाल आग़ा ने. बताया जाता है कि वो बैंड ऐड का ऐड था. जहां जलाल को अर्चना का काम काफी पसंद आया. और उन्होंने अर्चना को अपने किसी फ्यूचर प्रोजेक्ट पर साइन करने का सोचा. ये फ्यूचर प्रोजेक्ट अर्चना को मिला तो ज़रूर, लेकिन इसकी कास्टिंग का किस्सा भी अतरंगी-सा है.


# पहले रोल के चक्कर में सारे दांत झड़ जाते

जलाल और अर्चना अच्छे दोस्त बन चुके थे. एक दिन अर्चना को डेंटिस्ट के पास जाना था. जलाल भी साथ हो लिए. कहा कि मुझे रास्ते में जावेद सिद्दीकी से मिलना है. उसके बाद हम सीधा तुम्हारे डेंटिस्ट के पास चल लेंगे. यहां बता दें कि वो जावेद सिद्दीकी ही हैं जिन्होंने ‘DDLJ’, ‘सोल्जर’, ‘ताल’ और ‘मम्मो’ समेत अनेकों फिल्मों के डायलॉग्स लिखे. खैर, दोनों जावेद साहब के घर पहुंचे. जहां जलाल और उनके बीच एक कहानी को लेकर डिस्कशन चला. कॉमेडी ट्रैक था. हीरो का नाम था महेश और हीरोइन थी सीमा. बातचीत के बाद जलाल और अर्चना अपनी गाड़ी में लौट आए. जलाल ने अर्चना से पूछा कि अभी जो तुमने सुना, वो कैसा लगा. अर्चना ने कहा कि उन्हें कहानी बहुत पसंद आई.

जलाल ने अर्चना का रिएक्शन नोट कर लिया. गाड़ी आगे बढ़ी और थोड़ी देर बाद अर्चना डेंटिस्ट की चेयर पर बैठी थी. उनका मुंह खुला था और डेंटिस्ट ड्रिल करने को तैयार. तभी जलाल ने उनसे एक सवाल किया. ‘अर्चना, मैं जानता हूं कि तुम एक मॉडल हो. लेकिन क्या तुम एक्टिंग करना चाहोगी’. अर्चना को टू प्लस टू करते देर नहीं लगी कि जलाल उन्हें सीमा का रोल ऑफर कर रहे हैं. वो अपनी सीट से उठकर चौंक गईं. यहां मेंशन करना ज़रूरी है कि इस पूरे सवाल-जवाब के दौरान वो ड्रिल अर्चना के मुंह में ही थी. जिसपर उनके डेंटिस्ट ने उन्हें डांट लगाई. वो भी नहीं चाहता होगा कि कोई भी पेशंट बिना बात ही कम दांत लेकर वापस जाए.

जलाल
जलाल अपने शो की लीड में अर्चना को ही लेना चाहते थे.

जलाल जिस कहानी पर काम कर रहे थे. उस पर एक टीवी शो बनाया गया. जिसे आज हम सब ‘मिस्टर या मिस’ के नाम से जानते हैं. अब जलाल ने अर्चना को साइन तो कर लिया था. लेकिन असली मुसीबत तो अब आने वाली थी. सबसे पहले तो वो एजेंसी, जो शो पर काम कर रही थी, उन्होंने जलाल को आगाह किया कि मॉडल्स को एक्टिंग नहीं आती. इन्हें साइन करना एक बड़ा रिस्क है. और दूसरी बात थी कि अर्चना के अपोज़िट थे जयंत कृपलानी. मंझे हुए थिएटर आर्टिस्ट. अर्चना और उनका कॉम्बिनेशन ही काफी कॉन्ट्रास्टिंग था. लेकिन जलाल ऐसी बातों को दरकिनार कर अपने फैसले पर कायम रहे.

किसी भी शो को चैनल से अप्रूव कराने से पहले उसका एक पायलट एपिसोड शूट करना पड़ता है. ताकि चैनल वालों को शो का सही आइडिया मिल जाए. जलाल अब ‘मिस्टर या मिस’ का पायलट शूट करने जा रहे थे. जिसका खर्च आने वाला था करीब 60,000 रुपए. जो उस टाइम के हिसाब से एक बड़ा अमाउंट था. जलाल को अर्चना को लेकर की गई कास्टिंग पर पूरा भरोसा था. लेकिन इतना भरोसा अर्चना को खुद पर नहीं था. इसलिए उन्होंने जलाल से कहा कि अगर पायलट रिजेक्ट हो जाता है तो उसकी लागत वो अपने पिता से मंगवा लेंगीं. चैनल को पायलट दिखाया गया. और नौबत आई अर्चना की अपने घर से पैसे मंगवाने की. क्योंकि पायलट रिजेक्ट हो चुका था. अर्चना अपने पिता को कॉल करने ही वालीं थी कि उन्हें जलाल ने रोक लिया. उन्होंने बताया कि ये सच है कि पायलट फिर से शूट करना पड़ेगा. लेकिन चैनल को उसके दोनों एक्टर्स पसंद आए. अर्चना और जयंत की जोड़ी काम कर गई.

पायलट फिर से शूट किया गया. शो अप्रूव हुआ. और टेलीकास्ट भी. ‘मिस्टर या मिस’ अगले 26 हफ्तों तक दूरदर्शन पर आता रहा.


# वो फिल्म, जहां हीरो लड़की को गोद में उठाकर वर्कआउट करता था

एटीज़ में नसीरुद्दीन शाह ने आला दर्जे की फिल्मों में काम किया. वो इंडियन आर्ट हाउस सिनेमा का चेहरा बन चुके थे. आर्ट हाउस सिनेमा से भले ही एक्टर का मन तृप्त हो जाए. लेकिन ज़ेब भरने के लिए कमर्शियल सिनेमा का ही रुख करना पड़ता है. उन्होंने भी किया. पंकज पराशर एक फिल्म पर काम रहे थे. जिसकी कहानी हॉलीवुड फिल्म ‘Beverly Hills Cop’ से बिना पूछे उधार ली हुई थी. नसीर पुलिस वाले का रोल करने वाले थे. उनके साथ लीड में साइन किया गया डिम्पल कपाड़िया को. फिल्म का नाम था ‘जलवा’.

अगर आप डिम्पल की फिल्मोग्राफी देखेंगे तो पाएंगे कि वहां ‘जलवा’ नाम की कोई फिल्म नहीं. वजह थी कि साइन करने के बाद उन्होंने फिल्म छोड़ दी. फिल्म अटक जाए और प्रड्यूसर का नुकसान हो, ऐसा होने से टालने के लिए पंकज ने सुझाव दिया. कि डिम्पल की जगह अर्चना पूरन सिंह को साइन कर लो. पंकज इससे पहले ‘करमचंद’ पर अर्चना के साथ काम चुके थे. इसलिए उन्होंने प्रड्यूसर को कंविंस कर लिया. फिल्म में नसीर जैसे एक्टर हैं, बस इतना ही चाहिए था अर्चना को ये फिल्म साइन करने के लिए. बतौर लीड, ये उनकी पहली फिल्म थी. लेकिन वो पहले भी एक फिल्म में दिखाई दे चुकी थी. महज कुछ सेकंड्स के लिए. उन्होंने 1982 में आई ‘निकाह’ के गाने ‘फ़ज़ा भी है जवां जवां’ में सेल्स गर्ल का रोल निभाया.

जलवा
एटीज़ और नाइंटीज़ में ऐसे अजीबोगरीब पोस्टर्स कोई हैरानी की बात नहीं थे.

खैर, ‘जलवा’ रिलीज़ हुई. फिल्म चल निकली. अर्चना को लगा कि उन्होंने नसीर के साथ काम कर लिया. अब कुछ करने की क्या ज़रूरत भला! हर डायरेक्टर-प्रड्यूसर उन्हें खोजता हुआ आएगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. ‘जलवा’ के बाद उनके करियर की दशा-दिशा नहीं बदली. अर्चना अपने इंटरव्यूज़ में बताती हैं कि उस दौरान मैनेजर्स और पीआर इतना कॉमन नहीं था. और इंडस्ट्री में उनका कोई गॉडफादर भी नहीं था. जो उन्हें गाइड कर सके. इसलिए जो रोल उनके सामने आ रहे थे, वो उन्हें एक्सेप्ट करने लगीं. ‘अभिषेक’ और ‘आज के अंगारे’ जैसी फिल्मों में उन्होंने मेजर किरदार निभाया. लेकिन ये किसी भी लिहाज़ से महान फिल्में नहीं थी.

फिर शुरू हुआ वो दौर, जहां अर्चना को सिर्फ प्रॉप की तरह यूज़ किया जाने लगा. वो ‘मोना डार्लिंग’ टाइप रोल करने लगीं. ‘अग्निपथ’ में उन्होंने कांचा चीना की गर्लफ्रेंड का कैरेक्टर प्ले किया. सनी देओल की ‘आग का गोला’ में भी उनके किरदार के साथ किया ट्रीटमेंट कुछ अलग नहीं था. उसका किरदार पॉज़िटिव रहता या नेगेटिव, उसे बस सपोर्टिंग कैरक्टर्स में समेट कर रख दिया जाता. उस समय अर्चना फिल्म इंडस्ट्री के तौर तरीकों के अनजान बस सर्वाइव करना चाहती थीं. इसलिए अपनी फिल्मोग्राफी में ऐसी अनर्गल फिल्में जोड़ती गईं. अर्चना खुद मानती हैं कि भले ही उन फिल्मों में बड़े स्टार्स थे लेकिन फिर भी उन फिल्मों ने उनकी कोई मदद नहीं की. उन्हें ज़रूरत थी बहुत बड़े चेंज की.


# फ्लॉप एक्ट्रेस से देश की पहली स्टैंड अप कॉमिक कैसे बनीं?

अर्चना को अपने फिल्मी करियर से वो सफलता नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थीं. ऐसा नहीं था कि उन्हें ऑफर नहीं आ रहे थे. लेकिन जो रोल मिल रहे थे, वो विलन की साइडकिक टाइप ही थे. जहां आज नहीं तो कल उन्हें आसानी से रिप्लेस किया जा सकता था. इसलिए उन्होंने समय रहते खुद को फिल्मों से दूर कर लिया. और ध्यान दिया टीवी की तरफ. फिल्मों से पहले ही वो टीवी पर काम कर भी चुकी थीं. ‘करमचंद’ और ‘मिस्टर या मिस’ जैसे शोज़ में.

अग्निपथ में कांचा चीना की गर्लफ्रेंड
फिल्मों में अर्चना को प्रॉप की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा था.

हालांकि, टीवी पर आना उनके लिए गेम चेंजर साबित हुआ. 1993 में आया ‘वाह क्या सीन है’. जिसने उन्हें टीवी की लाफ्टर क्वीन बना दिया. शो को अर्चना होस्ट करती थीं. शो में होता यूं था कि फिल्मों के अजीबोगरीब सीन दिखाए जाते. और बैकग्राउंड में अर्चना अपनी कमेंट्री करतीं. इंडियन टीवी पर ये बिल्कुल नया था. ऊपर से अब तक महिलायें कॉमेडी स्पेस को लीड भी नहीं कर रही थीं. यहां अर्चना को शो संभालते देखना ऑडियंस के लिए रिफ्रेशिंग था. उनका ये अवतार खासा पसंद किया गया. ‘वाह क्या सीन है’ के बाद अर्चना को मिला ‘श्रीमान श्रीमती’. जहां उन्होंने प्रेमा शालिनी नाम की एक्ट्रेस का रोल निभाया. शो में अर्चना एक एक्सेंट के साथ अपने डायलॉग्स डिलीवर करती थीं. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि प्रेमा शालिनी का एक्सेंट उन्होंने मुनमुन सेन पर बेस किया था.

प्रेमा शालिनी
प्रेमा शालिनी, जिन्हें आप बिना एक्सेन्ट के इमैजिन नहीं कर पाएंगे.

‘श्रीमान श्रीमती’ ओरिजिनल ‘भाभीजी घर पर हैं’ था. 2020 के लॉकडाउन में जो पुराने शोज़ टीवी पर लौटे थे, उनमें से एक ‘श्रीमान श्रीमती’ भी था. जिसने अपने री-रन के दौरान अच्छी रेटिंग्स एन्जॉय की. अर्चना ने अपनी कॉमेडी की नई पारी को सिर्फ एक्टिंग तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने शोज़ भी डायरेक्ट किए. जिनमें से प्रमुख था ‘जाने भी दो पारो’. डीडी मेट्रो पर प्रसारित होने वाले इस शो में अर्चना के साथ उनके ‘श्रीमान श्रीमती’ के को-एक्टर राकेश बेदी भी थे. साथ ही फ़ारुख शेख और नीना गुप्ता जैसे एक्टर्स भी कास्ट का हिस्सा थे. ‘जाने भी दो पारो’ भी उनके कामयाब शोज़ की लिस्ट में जाकर जुड़ गया. टीवी की सक्सेसफुल इनिंग्स का फायदा अर्चना के फिल्मी करियर को भी हुआ. अब उन्हें सब्स्टेंस वाले रोल मिलने लगे. जहां उन्हें सिर्फ प्रॉप की तरह नहीं देखा जाता था. जैसे उनकी फिल्मोग्राफी में से सबसे यादगार किरदारों में से एक है ‘कुछ कुछ होता है’ की मिस ब्रेगेंज़ा. जो राहुल से पूछती है कि प्यार क्या है. बताया जाता है कि करण जौहर ने फिल्म में मिस ब्रेगेंज़ा का कैरक्टर खास अर्चना को ध्यान में रखकर लिखा था.

जो इंडस्ट्री एक दशक पहले तक अर्चना को आइटम गर्ल की तरह ट्रीट कर रही थी. वहां अब उनके लिए स्पेसिफिक रोल्स लिखे जा रहे थे. ये कमाल मुमकिन हुआ टीवी की वजह से.


# अर्चना की वो फोटो, जिसपर मीडिया ने अमिताभ बच्चन का जीना मुश्किल कर दिया

नाइंटीज़ में एक फिल्म मैगजीन आती थी. सिने ब्लिट्ज़. मतलब अभी भी आती है. साल 1990 की बात है. उसके एक एडिशन में अर्चना की फोटो छपी. जिसे देखकर लग रहा था कि उसे दूर से शूट किया गया है. फोटो में अर्चना के साथ एक और शख्स दिखाई दे रहा था. मैगजीन ने फोटो छापकर लिखा,

ये स्टोरी ऐसे लोगों के बारे में है जिनके साथ हमारी कुछ अच्छी यादें जुड़ी हैं. और अब हम जिनकी ज़िंदगी तबाह करने जा रहे हैं.

अर्चना की फोटो मैगजीन में छपी
मैगजीन के वो पन्ने जहां अर्चना और अमिताभ के नाम पर स्टोरी छापी गई.

इस सबटेक्स्ट के ऊपर बड़े-बड़े फॉन्ट में लिखा था, ‘अर्चना-अमिताभ’. मैगजीन ने आगे लिखा कि अमिताभ और ‘जलवा’ एक्ट्रेस अर्चना के बीच बहुत बड़ा अफेयर चल रहा है. हमने दोनों को वहां देखा, यहां पकड़ा टाइप तमाम बातें छाप दी. मैगजीन का इश्यू मार्केट में आया. जिसके बाद अमिताभ बच्चन के घर की फोन लाइन लगातार बिज़ी आने लगी. मीडिया वाले उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थे. इस स्टोरी से रिलेटेड कुछ भी बात उनके मुंह से सुनना चाहते थे. लेकिन अमिताभ ने कुछ नहीं कहा.

वजह थी कि अमिताभ पहले से जानते थे कि ऐसा कुछ होने वाला है. दरअसल, सिने ब्लिट्ज़ ने अमिताभ और अर्चना के नाम से जो फोटोज़ छापी थीं, वो बस एक अप्रैल फूल प्रैंक था. उन फोटोज़ में अमिताभ थे ही नहीं. बल्कि उनके डुप्लीकेट एक्टर विजय सक्सेना को यूज़ किया गया था. मैगजीन ने अमिताभ को प्रैंक के बारे में बताने से पहले वादा किया था कि वो उसी एडिशन में छाप देंगे कि ये सिर्फ एक प्रैंक था. हालांकि, मसाले के चक्कर में वो अपना वादा भूल गए.


# पार्टी में मिला बदतमीज़ लड़का, जो अर्चना से शादी करने के लिए रात को मंदिर पहुंच गया

अर्चना मानती हैं कि उनके करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें कोई गाइड करने वाला नहीं था. जिस वजह से उन्होंने गलत फैसले लिए. ऐसे फैसले, जिनका खामियाज़ा उनके करियर और लव लाइफ दोनों ने भुगता. कम लोग जानते हैं कि अर्चना ने करियर के शुरुआत में ही शादी कर ली थी. वो शादी लंबे समय तक नहीं चल पाई. और उसका अनुभव उनके लिए एक ट्रॉमा बन गया. यही वजह है कि वो उस बारे में मीडिया में कभी बात नहीं करती. टीवी ने अर्चना के एक्टिंग करियर को सेकंड चांस दिया. पर क्या ऐसा सेकंड चांस उनकी लव लाइफ को मिल पाया?

एक बार अर्चना अपने एक दोस्त की पार्टी में गई थीं. वो एक कोने में बैठकर मैगजीन पढ़ रही थीं. तभी एक झटके में उनके हाथ से किसी ने मैगजीन छीन ली. वो भी बिना पूछे. उन्होंने पलटकर देखा कि ये बेवकूफ शख्स है कौन. तो पाया कि मैगजीन एक लड़के के हाथ में थीं. वो उसे पहचानती भी नहीं थी. तो और गुस्सा आया. कि जान न पहचान और इतनी बदतमीज़ी. वो लड़का एक मॉडल था. जिसका ऐड उस मैगजीन में छपा था. अपने दोस्तों को ऐड दिखाने के चाव में उसने ध्यान तक नहीं दिया कि मैगजीन कौन पढ़ रहा है. वो लड़का भी अपने दोस्त की ही पार्टी में आया हुआ था. आगे जैसे शाम बढ़ी, अर्चना को उस लड़के से इन्ट्रोडयूस करवाया गया. जिसका नाम था परमीत सेठी.

अर्चना और परमीत 1
अर्चना और परमीत ने चार साल लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी कर ली.

दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई. परमीत ने अतिउत्साह में की गई अपनी हरकत के लिए माफी मांगी. अर्चना को भी समझ आया कि उनका फर्स्ट इम्प्रेशन गलत था. ये लड़का कोई बेवकूफ नहीं. दोनों की मुलाकात उस पार्टी के बाहर भी हुई. दोस्ती हुई. जो धीरे-धीरे प्यार में तब्दील हो गई. अर्चना और परमीत करीब चार साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहे. जिस दौरान एक रात परमीत जागकर उठ खड़े हुए. अर्चना से सवाल किया कि क्या आप किसी और का इंतज़ार कर रही हैं. क्योंकि मैं तो नहीं कर रहा. अर्चना ने कहा कि वो भी किसी का इंतज़ार नहीं कर रहीं. परमीत का इसपर सुझाव था कि फिर शादी कर लेते हैं. अर्चना ने पांच मिनट का समय लिया. पांच मिनट बाद जवाब दिया कि ठीक है, शादी कर लेते हैं.

रात 12 बजे का वक्त था. परमीत आर्य समाज मंदिर पहुंच गए. शादी करने के लिए. पंडित को जगाया. उसने कहा कि ये कोई शादी का समय है भला. सुबह आना. शादी का मुहूर्त सुबह है. अर्चना और परमीत सुबह पहुंच गए. उनके साथ उनके दो-तीन दोस्त थे. जिनकी मौजूदगी में उन्होंने शादी कर ली. दो फिल्मवाले, जिनकी लव स्टोरी एक फिल्मी नोट पर शुरु हुई.


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