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जब साउथ के बड़े कॉमेडियन ने 'बाहुबली' की देवसेना को ओछी बातें कही

सिनेमा की एक ‘क्वीन’ हैं. नहीं, वो खुद को ‘क्वीन’ नहीं बुलाती. बल्कि ऑडियंस उन्हें साउथ इंडिया सिनेमा की ‘क्वीन’ बुलाती है. इंडियन सिनेमा की लेडी सुपरस्टार. हाईएस्ट पेड इंडियन एक्ट्रेसेज़ में से एक. जिन्हें ग्लैमरस गर्ल से महारानी बनने में कोई मुश्किल नहीं आती. हर अवतार बड़ी आसानी से डॉन कर लेती हैं. जिन्हें हमने ‘बाहुबली’ की देवसेना से पहले एक और बड़ी फिल्म में देखा था. जिसका हिंदी डब टेलीकास्ट टीवी पर कितनी ही बार घिस चुका है.

बात करेंगे अनुष्का शेट्टी की. तेलुगु सिनेमा की वो ‘स्वीटी’, जो रियल लाइफ खुद को बहुत बोरिंग मानती है. बताएंगे अनुष्का की लाइफ और करियर से जुड़े कुछ किस्से. साथ ही आपको बताएंगे उनकी कुछ आउटस्टैंडिंग फिल्मों के बारे में भी.

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# योगा से ही होगा, और हुआ भी

07 नवंबर, 1981 को मंगलोर के एक कंज़र्वेटिव परिवार में स्वीटी शेट्टी का जन्म हुआ. स्वीटी से अनुष्का बनने की कहानी तो काफी लेट शुरू हुई. और शायद कभी हो भी न पाती. क्योंकि बचपन से ही स्वीटी को फिल्मों से कोई लगाव नहीं था. वो एक शांत और शर्मिली किस्म की लड़की थी. जिसे टीवी देखने जैसे काम बोर करते. सीधे, सादे तरीके से रहने वाली इस लड़की ने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की. जिसके बाद माउंट कार्मेल कॉलेज में एडमिशन लिया. वो कॉलेज जिसके अल्युमिनाई अनुष्का शर्मा और दीपिका पादुकोण भी रह चुके हैं.

स्वीटी के खानदान में ज्यादातर लोग इंजीनियर और डॉक्टर हैं. उनके पिता भी एक इंजीनियर ही हैं. घरवालों को उम्मीद थी कि स्वीटी भी इंजीनियरिंग या उससे जुड़ा ही कोई ऑप्शन ऑप्ट करेंगी. लेकिन ग्रैजुएशन के बाद स्वीटी ने जो चुना, उसने सबको चौंका दिया. उन्होंने फुल टाइम योगा टीचर बनने का फैसला कर लिया. उनके ऐसा करने के पीछे की वजह भी कॉलेज से जुड़ी है. वो बैचलर ऑफ कंप्युटर एप्लीकेशंस में अपनी ग्रैजुएशन कर रही थीं. जिस दौरान उन्हें एक योगा एंड मैडिटेशन वर्कशॉप के बारे में पता चला. उन्होंने वो वर्कशॉप अटेंड की. जहां उनकी मुलाकात योग इन्स्ट्रक्टर भरत ठाकुर से हुई. वर्कशॉप में स्वीटी के लिए कुछ बदल गया. उनकी योग में एक नई जिज्ञासा जाग गई. नतीजतन उन्होंने भरत ठाकुर से योग सीखना शुरू कर दिया.

स्वीटी योगा 1
अगर आज अनुष्का एक्ट्रेस न होती तो फुल टाइम योग टीचर होतीं.

स्वीटी के घरवाले अपनी बेटी से नाराज़ थे. कि वो कैसे इतने लोगों को योग सिखाएगी और ये सब करने की ज़रूरत ही क्या है. लेकिन स्वीटी नहीं मानी. कुछ समय रूठना-मनाना चला, जिसके बाद घरवाले मान ही गए. स्वीटी ने क्लासेज़ लेना शुरू कर दिया. उनकी लाइफ में अनुष्का बनने तक और उसके बाद का सफर एक फ़्लो की तरह चला है. जैसे सब कुछ बस होता चला गया. ऐसा वो खुद मानती हैं. उनकी योग क्लास में दो स्टूडेंट्स थे. जिनमें से एक ने तो मनोज बाजपेयी को गुस्सा दिला दिया था. नहीं रियल में नहीं. रील पर. ‘शूल’ के डायरेक्टर ईश्वर निवास और उनकी पत्नी रेगुलर तौर पर स्वीटी की क्लासेज़ अटेंड करते. ईश्वर निवास के ज़रिए उन्हें पता चला पुरी जगन्नाथ के बारे में. जो उस दौरान एक नई फिल्म पर काम कर रहे थे. और उसके लिए उन्हें एक फ्रेश फीमेल फेस की ज़रूरत थी.

ईश्वर और उनकी पत्नी स्वीटी के अच्छे दोस्त थे. उन्होंने स्वीटी को कहा कि उन्हें पुरी की फिल्म के लिए ट्राई करना चाहिए. स्वीटी को एक्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं थी. न ही कोई ट्रेनिंग हासिल थी. इसलिए उन्होंने ‘हां, हम्म’ कर के टाल दिया. कास्टिंग वाली बात स्वीटी के गुरु भरत तक भी पहुंची. वो भी उन्हें मनाने में लग गए. कि कम से कम पुरी जगन्नाथ से बात तो कर के देखो. सबको हां करके टालने के बाद स्वीटी ने पुरी से मिलने का सोचा. मिलने पर पुरी ने उनसे उनके पोर्टफोलियो से कोई फोटो मांगी. स्वीटी इस दुनिया और इसकी टर्मिनोलॉजी से बिल्कुल अनजान थीं. उन्होंने सीधा अपने पर्स से एक पासपोर्ट फोटो निकालकर पुरी के हाथ में थमा दी. ऐसा जेस्चर देखकर पुरी हंसने लगे और स्वीटी को हैदराबाद आकर मिलने को कहा.


# ‘चिंता ता चिता चिता’ वाली फिल्म, जिसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा

स्वीटी की ज़िम्मेदारी सिर्फ पुरी जगन्नाथ को दी गई कमिटमेंट ही नहीं थी. उनके लिए योग क्लास भी ज़रूरी थी. उस दौरान वो मुंबई में रहा करती थीं. अपनी क्लास का काम निपटाकर हैदराबाद पहुंची. पुरी जगन्नाथ की इस नई फिल्म में बतौर लीड नागार्जुन थे. जो उस दौरान हैदराबाद में ही थे. अपनी फिल्म ‘मास’ की शूटिंग के वास्ते. जिसे हम सब ‘मेरी जंग’ के नाम से पहचानते हैं. स्वीटी को लगा कि उन्हें बस मिलने के लिए बुलाया जा रहा है. लेकिन हैदराबाद पहुंचने पर पता चला कि उनका लुक टेस्ट होना है. मेकअप लगाया गया. स्टिल फोटोज़ के लिए पोज़ करने को कहा गया.

सुपर
अनुष्का की पहली फिल्म, जहां उन्हें बस प्रॉप की तरह यूज़ किया गया.

स्वीटी इस सब में कच्ची थीं. उनसे कोई चिन अप करने को कहता तो गर्दन को स्ट्रेच कर ऊपर तक ले जाती. जिसे देख यूनिट के लोग हंसने लगते. डांस करने को कहा गया. यहां भी स्वीटी का हाथ तंग था. ऊपर से इतने सारे लोगों के सामने परफॉर्म करने में शर्म भी आए. उन्हें लगा कि जैसा अनुभव रहा है, उस हिसाब से तो उन्हें कोई सिलेक्ट नहीं करने वाला. लेकिन उनका सोचना गलत निकला. उन्हें सिलेक्ट कर लिया गया. नागार्जुन को लगा कि भले ही ये लड़की नई है लेकिन इसमें पोटेंशियल है. अगर हम इसे चांस नहीं देंगे तो कौन देगा.

पुरी जगन्नाथ की फिल्म का नाम था ‘सुपर’. जहां नागार्जुन के साथ लीड में दो एक्ट्रेसेज़ थीं. स्वीटी और आयशा टाकिया. फिल्म पर काम करते वक्त स्वीटी को अपना नाम अज़ीब लगने लगा. एक्टर्स आमतौर पर अलग स्क्रीन नेम रखते हैं. उन्होंने भी रख डाला. अब वो स्वीटी की जगह अनुष्का शेट्टी बन चुकी थीं. अनुष्का मानती हैं कि उन्हें उस वक्त एक्टिंग का ए भी समझ नहीं आता था. इसलिए जैसा डायरेक्टर कहता, वैसा ही वो कर डालतीं. वास्तविकता में ‘सुपर’ में उन्हें एक्टिंग के लिए साइन भी नहीं किया गया था. उन्हें फिल्म में बस ग्लैमर टूल के तौर पर दिखाया गया. फिल्म रिलीज़ हुई. जिसके बाद हर क्रिटिक के कॉलम में एक ही बात. कि ‘सुपर’ में अनुष्का अपनी एक्टिंग दिखाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी बॉडी दिखाने के लिए थीं.

अनुष्का और राजामौली
राजामौली एक्टिंग कर के दिखाते और अनुष्का हूबहू उनकी नकल करतीं.

‘सुपर’ के बाद आई ‘महानंदी’ का भी हाल कुछ ऐसा ही रहा. कुल मिलाकर अनुष्का को सिर्फ ग्लैमर अपील बढ़ाने के लिए ही इस्तेमाल किया जा रहा था. उन्हें लगा कि ऐसा ही चलता रहा तो उन्हें फिर से अपने योगा टीचर वाले करियर पर लौटना होगा. वापस मुड़ने की पूरी तैयारी भी कर ली थी. लेकिन फिर उस एक कॉल ने सब कुछ बदल कर रख दिया. वो कॉल था एसएस राजामौली का. जो अनुष्का को अपनी फिल्म में साइन करना चाहते थे. ये फिल्म थी ‘विक्रमारकुडू’. जो अनुष्का के डूबते फिल्मी करियर के लिए संजीवनी साबित हुई. ऐसा नहीं था कि फिल्म पर काम करने के दौरान अनुष्का एक उम्दा एक्टर बन चुकी थीं. उनका ये पक्ष अभी भी कमजोर था. इसलिए वो डायरेक्टर राजामौली को अपने सीन्स इनैक्ट करने को कहती. और फिर जैसा राजामौली करते, हूबहू उसकी नकल कर लेतीं. ‘विक्रमारकुडू’ ने बॉक्स ऑफिस पर तूफान मचा दिया. फिल्म का क्रेज़ ऐसा रहा कि नॉन पैन इंडिया वाले दौर में इसे कन्नड़, तमिल, बंगाली और हिंदी में बनाया गया. अक्षय कुमार की फिल्म ‘राउडी राठौड़’ इसका हिंदी वाला रीमेक थी. ‘विक्रमारकुडू’ के बाद तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में अनुष्का की जगह मज़बूत हो गई. उनकी तरफ आने वाले फिल्म ऑफर्स का ग्राफ ऊपर ही जाने लगा.


# जब सबको घर भेजने वाले सोनू सूद खुद घर में बंद थे

‘विक्रमारकुडू’ के बाद अनुष्का को बड़े स्टार्स के साथ स्क्रीन शेयर करने के मौके मिलते रहे. उन्होंने चिरंजीवी की फिल्म ‘स्टालिन’ में कैमियो किया. नागार्जुन के साथ फिर नज़र आईं. फिल्म ‘डॉन’ में. नंदमुरी बालाकृष्णा के साथ ‘ओका मगाड़ू’ में काम किया. लेकिन ये सभी फिल्में ऐसी थीं कि यहां अगर अनुष्का की जगह कोई और एक्ट्रेस भी होती, तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था. मतलब इन फिल्मों के किरदार खास उनके लिए नहीं लिखे गए थे. कहना गलत नहीं होगा पर वो यहां सिर्फ ग्लैमर अपील के लिए थीं. लेकिन ये सिलसिला भी खत्म होने वाला था. वो फिल्म आने वाली थी. जिसके बाद राइटर्स खास अनुष्का को ध्यान में रखकर किरदार लिखने वाले थे.

साल था 2009. जनवरी का महीना. ‘अरुंधती’ सिनेमाघरों पर रिलीज़ हुई. एक हीरोइन सेंट्रिक फिल्म. उन दिनों कमर्शियल तेलुगु सिनेमा में फीमेल एक्टर को लीड बनाकर रची गई कहानियां आम नहीं थी. ‘अरुंधती’ में अनुष्का ने डबल रोल निभाया. जैजम्मा और उसकी वंशज अरुंधती का. करीब 13 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस हॉरर फैंटेसी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बाकी फिल्मों की क्लास लगा दी. 70 करोड़ रुपए का बिज़नेस किया. उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्म साबित हुई. जिस इंडस्ट्री को चलाने का ज़िम्मा अब तक मेल सुपरस्टार्स के हिस्से माना जाता था, वहां अनुष्का ने पूरा सिस्टम हिला डाला.

अरुंधती का रंग खूब गाढ़ा चढ़ा
‘अरुंधती’, वो फिल्म जिसने इंडस्ट्री की आंखें खोल दी. कि अनुष्का सिर्फ ग्लैमर मॉडल नहीं.

ऑडियंस पर भी ‘अरुंधती’ का रंग खूब गाढ़ा चढ़ा. अनुष्का बताती हैं कि फिल्म के बाद बच्चे उन्हें जैजम्मा, जैजम्मा पुकारकर उनके पास आते. वो ‘अरुंधती’ ही थी जिसने अनुष्का को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया. जो क्रिटिक्स अब तक अनुष्का को सिर्फ ग्लैमर डॉल की तरह देख रहे थे, उनके भी सुर बदले. उन्होंने ‘अरुंधती’ को पूरी तरह अनुष्का शेट्टी की फिल्म बताया. फिल्म में उनकी परफॉरमेंस को उनका बेस्ट काम बताया. ‘अरुंधती’ की कामयाबी ने एक मैसेज बड़ा लाउड एंड क्लियर भेजा. कि महिलाओं को सिर्फ प्रॉप की तरह नहीं समझा जा सकता. वो आगे आकर लीड कर सकती हैं, और बॉक्स ऑफिस रेज भी बन सकती हैं.


# जब गुस्साई भीड़ की वजह से अनुष्का को खुद अपना मेकअप करना पड़ा

2006 में आर माधवन की फिल्म आई थी. ‘रेंडू’. वो फिल्म जिससे अनुष्का ने तमिल सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की. उसके करीब तीन साल बाद उन्होंने अपनी दूसरी तमिल फिल्म में काम किया. विजय के साथ. फिल्म थी ‘वेत्तईकारन’. अपने कंटेम्पररी एक्टर्स के मुकाबले अनुष्का ने बहुत कम फिल्में की हैं. तेलुगु सिनेमा से शुरुआत करने के बाद तेलुगु फिल्मों ने ही उन्हें व्यस्त रखा. यही वजह है कि ज्यादा तमिल या किसी और भाषा की फिल्में करने का टाइम नहीं मिल पाया. फिल्म इंडस्ट्री में अनुष्का की इमेज अपने काम से काम रखने वाली एक्ट्रेस की है. यानी जो विवादों में नहीं पड़ती. लेकिन उनके करियर की एक बड़ी कंट्रोवर्सी भी तमिल सिनेमा की ही देन है. वो तमिल सिनेमा जहां उन्होंने बस चुनिंदा फिल्में की हैं.

कार्ति 2
यूनियन के गुस्से पर कार्ति ने अनुष्का के मेकअप आर्टिस्ट को घर भेज दिया.

हुआ यूं कि अनुष्का कार्ति की फिल्म ‘एलेक्स पांडियन’ की शूटिंग कर रही थीं. तभी वहां तमिल फिल्म वर्कर्स यूनियन के करीब 30 मेम्बर पहुंच गए. गुस्से में. उनको आपत्ति ये थी कि अनुष्का एक तमिल फिल्म में काम कर रही हैं. और उनका मेकअप आर्टिस्ट दूसरे स्टेट का है. ऐसा नहीं चलेगा. या तो कोई तमिल आर्टिस्ट हायर करो. वरना अपने मेकअप आर्टिस्ट को बोलो कि अपना नाम गिल्ड में रजिस्टर कराए. अनुष्का के मेकअप आर्टिस्ट और यूनियन का पंगा पिछले कुछ समय से चल रहा था. जब यूनियन की बात नहीं मानी गई तो वो सेट पर आ धमके.

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कार्ति बीच में आए. उन्होंने यूनियन के लोगों को समझाया. साथ ही अनुष्का के मेकअप आर्टिस्ट को फिल्म सेट छोड़कर जाने को कहा. बताया जाता है कि इस पूरे वाकये से अनुष्का बहुत हर्ट हुईं. यूनियन वालों की धमकी सुनकर उन्हें रोना आ गया. जिसके बाद कार्ति ने उन्हें समझाया. अनुष्का ने किसी और मेकअप आर्टिस्ट को हायर नहीं किया. और आगे अपना मेकअप खुद ही किया.


# ‘बाहुबली’ के बिना बात पूरी कैसे हो?

इंडियन सिनेमा को इस सदी की सबसे बड़ी और यादगार फिल्में दी एसएस राजामौली ने. ‘बाहुबली’ सीरीज़. जिसके हर एक पहलू के बारे में पहले ही कितना कुछ लिखा और कहा जा चुका है. 2015 में आई ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ में अनुष्का की देवसेना का ज्यादा रोल नहीं था. पूरी फिल्म भल्लालदेव की कैद में रही. बाद में महेंद्र बाहुबली आकर छुड़ा ले जाता है. बस इतना सा रोल था. उनके किरदार की असली परीक्षा होती है ‘बाहुबली: द कंक्लूज़न’ में. जहां देवसेना को तीरंदाज़ी करते, लड़ते हुए दिखाया गया. देवसेना का कैरक्टर कितना प्रोग्रेसिव था. इसका अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि वो भल्लालदेव के शादी के रिश्ते को रिजेक्ट कर अपनी पसंद से शादी करना चाहती थी.

एक्शन फिल्म्स
अनुष्का ने ‘बाहुबली’ के लिए तीरअंदाज़ी और घुड़सवारी सीखी.

एक्शन फिल्म्स में अनुष्का अपने ज्यादातर स्टंट्स खुद ही करती हैं. यहां भी उन्होंने ऐसा ही किया. पूरी तरह देवसेना के अवतार में ढलने के लिए उन्होंने घुड़सवारी, तीरंदाज़ी और तलवार चलाना सीखा. अपनी डाइट पर काम किया. कार्ब कम कर हाई प्रोटीन डाइट अडॉप्ट की. फिल्म के लिए अनुष्का को अपना वेट कम करना था. उनके लिए स्पेशल 45 मिनट डेली वर्कआउट डिज़ाइन किया गया. अनुष्का ने पूरी डेडिकेशन से काम किया. और नतीजा सबके सामने है. लेकिन अपनी इसी ओवर द टॉप डेडिकेशन का उन्हें खामियाज़ा भी भुगतना पड़ा है. हुआ यूं कि 2019 में चिरंजीवी, अमिताभ बच्चन, विजय सेतुपति, सुदीप स्टारर एक पीरियड ड्रामा फिल्म आई थी. ‘साय रा नरसिम्हा रेड्डी’. एक बड़े बजट की फिल्म. जहां अनुष्का को सिर्फ कैमियो करना था. उनके किरदार का एक एक्शन सीक्वेन्स था. जिसे उन्होंने खुद ही शूट करने का फैसला लिया. मीडिया रिपोर्ट्स दावे करने लगीं कि स्टंट करने के दौरान अनुष्का बुरी तरह चोटिल हो गई हैं. यहां तक कि उनका पैर भी फ्रैक्चर हो गया.

हालांकि, कुछ समय बाद अनुष्का और उनकी टीम ने इस खबरों का खंडन कर दिया. लेकिन मीडिया का ये बड़ा तबका यही कहता रहा कि अनुष्का की इंजरी वाली बात को छुपाया जा रहा है.


# जितना किया, सब अपने लिए

‘आप फिल्में किस हिसाब से चुनती हैं’. अनुष्का से जब भी ये सवाल किया गया, उन्होंने हमेशा एक ही जवाब दिया. वो फिल्में हमेशा अपने लिए करती हैं. किसी फिल्म में उन्हें किसी एक्टर के साथ काम करना होता है. तो किसी दूसरी में किसी खास डायरेक्टर या प्रड्यूसर के साथ. वरना अगर किसी फिल्म से कोई ऐसा टेक्निशियन जुड़ा होता है, जिसके साथ काम करने की उनकी इच्छा है. तब भी वो उस फिल्म को हां बोल देती हैं. उनकी फिल्मोग्राफी में 100-200 फिल्में नहीं शामिल. लेकिन जितनी भी हैं, वो उनके पसंद का काम है. उनकी फिल्मोग्राफी की कुछ हाईलाइटिंग फिल्मों के बारे में जानते हैं.

#1. बिल्ला (2009)

जब प्रभास और अनुष्का बाहुबली और देवसेना बनकर साथ लड़ नहीं रहे थे. तब वो बिल्ला और माया बने घूम रहे थे. एक गैंगस्टर और उसकी लव इंटरेस्ट. ‘बिल्ला’ किसी भी ऐंगल से महान फिल्म नहीं. यहां भी अनुष्का को ग्लैमर अपील बढ़ाने के लिए रखा गया. ‘अरुंधती’ के बाद आई ‘बिल्ला’ में अनुष्का का ट्रांज़िशन देख फैन्स हैरान थे. लेकिन वो ‘बिल्ला’ ही थी जिसकी वजह से अनुष्का को ऑब्जेक्टीफिकेशन का सब्जेक्ट बनना पड़ेगा. सिर्फ आम जनता से नहीं बल्कि फिल्म फ्रेटर्निटी से जुड़े लोगों से भी. अली नाम के एक एक्टर हैं. आईएमडीबी की माने तो करीब 400 फिल्में कर चुके हैं. उन्होंने एक ईवेंट में अनुष्का को लेकर भद्दा कमेंट किया. जिसका कॉनटेक्स्ट ‘बिल्ला’ ही थी.

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‘अरुंधती’ के बाद उनकी अगली फिल्म थी ‘बिल्ला’.

अली ने कहा कि अनुष्का एक गर्म जलेबी है जिसे हर कोई खाना चाहता है. उनकी जांघों पर कमेंट किया. कोई बड़ा एक्टर किसी महिला के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है. वो भी पब्लिक स्टेज पर. तो ये हमारी सोसाइटी के बारे में बहुत कुछ कह जाता है. अली की कड़ी आलोचना हुई. जिसके बाद उन्होंने अपने कमेंट्स के लिए माफी भी मांगी.

#2. वेदम (2010)

अनुष्का के करियर का पहला एक्सपेरिमेंटल रोल. जहां उन्होंने एक प्रॉस्टिटयूट का कैरक्टर प्ले किया. अपने रोल के बारे में उन्होंने बताया कि फिल्म के डायरेक्टर क्रिश को शर्म आ रही थी. वो ठीक से कैरक्टर के बारे में ब्रीफ नहीं कर पा रहे थे. उसके इर्द-गिर्द की बातें बताते गए. जिसके बाद एक पॉइंट पर अनुष्का ने पूछा कि क्या ये एक वेश्या का किरदार है. नैरेशन में अनुष्का को स्क्रिप्ट पसंद आई. और उन्होंने फिल्म साइन कर ली.

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स्क्रिप्ट सुनते ही हां कर दिया था.

फिल्म के लो बजट प्रॉडक्शन थी. चूंकि अनुष्का को अपना किरदार इतना पसंद आया कि उन्होंने ‘वेदम’ के लिए 30 पर्सेंट फीस कम कर दी. फिल्म पर अपने काम की बदौलत उन्होंने बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता.

#3. साइज़ ज़ीरो (2015)

फिल्म में अनुष्का के कैरक्टर का वेट उनसे काफी ज्यादा था. मेकर्स चाहते थे कि पैडिंग वगैरह की मदद से ये इफेक्ट क्रिएट कर लिया जाए. लेकिन अनुष्का ने ऐसा कुछ भी करने से मना कर दिया. डाइट कॉन्शियस इंडस्ट्री में उन्होंने करीब 20 किलो वेट गेन किया. फिल्म से लोगों को शिकायतें रही कि ये अपनी मैसेजिंग के साथ इंसाफ नहीं कर पाई. लेकिन अनुष्का के हिस्से सिर्फ तारीफ़ें ही आईं. वो पहले ही अपने आप को साबित कर चुकी थीं. इस फिल्म ने उनकी डेडिकेशन पर वैल्यू एडिशन वाला काम किया.

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फिल्म के लिए अनुष्का ने करीब 20 किलो वजन बढ़ाया.

पिछले कुछ समय से अनुष्का बड़ी फिल्मों को लीड कर रही हैं. फिर चाहे वो ‘रुद्रमादेवी’ हो या ‘भागमती’. यही वजह है कि उन्हें लेडी सुपरस्टार कहा जाता है. वो आगे भी कमाल काम करती रहेंगी. ऐसी हमें उम्मीद है.


वीडियो: अनुष्का शेट्टी योगा टीचर बनते बनते ‘बाहुबली’ की देवसेना कैसे बन गईं?

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