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30 हजार गैरदल‍ितों ने BJP की दलित विधायक, कांग्रेस के पूर्व दलित मंत्री का घर फूंका

राजस्थान के करौली जिले में एक तहसील है हिंडौन. कहते हैं कि इस कस्बे का नाम मिथकीय राजा हिरणकश्यप के नाम पर रखा गया है. 2 अप्रैल के रोज हिंडौन जिस आग में जल रहा था, वो किसी होलिका की लगाई हुई नहीं थी और ना ही इसमें किसी प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की जा रही थी.

2 अप्रैल को एससी एसटी (प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटीज़) ऐक्ट में हुए बदलाव के विरोध में दलित संगठनों का प्रदर्शन था. जाटव समाज की बगीची से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन डेम्प रोड तक पहुंचते-पहुंचते हिंसक हो गया. यह सुबह करीब 11 बजे की बात है. अगले पांच घंटे तक शहर उपद्रवियों के हवाले था. हिंडौन रेलवे स्टेशन पर बनी टिकट खिड़की को आग के हवाले कर दिया गया. रेलवे कंट्रोल पैनल तोड़ दिया गया. आरपीएफ चौकी फूंक दी गई. पास ही मौजूद रोडवेज बस स्टैंड पर 7 सरकारी बसों में आग लगा दी गई. 90 के करीब वाहन फूंक दिए गए.

प्रदर्शन के दौरान रेल की पटरी उखाड़ते दलित प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन के दौरान रेल की पटरी उखाड़ते दलित प्रदर्शनकारी

शहर के सरकारी अस्पताल में तोड़-फोड़ की गई. यहां के मरीज पहले से ही परेशान थे. शहर के सरकारी अस्पताल में कुल 35 में 25 डॉक्टर एससी-एसटी वर्ग से आते हैं. इनमें से 23 हड़ताल पर चले गए. इसके अलावा गैर-मेडिकल स्टाफ भी हड़ताल पर था. उपद्रवियों की एक टुकड़ी यहां भी पहुंच गई. यहां पर मरीजों के साथ भी बदसलूकी की गई. आलम यह था कि उपद्रवियों ने स्कूल बस तक को नहीं छोड़ा. शहर के दो बड़े स्कूल अग्रसेन कन्या विद्यालय और निर्मल हैप्पी स्कूल की बसों पर उपद्रवियों ने कब्जा कर लिया. बस में मौजूद स्कूली लड़कियों के साथ छेड़-छाड़ की गई. 2 अप्रैल की शाम तक पुलिस ने धारा 144 लगा दी और स्थितियों पर जैसे-तैसे नियंत्रण पाया गया.

45 साल के दीनदयाल पंसारी हिंडौन की स्टेशन रोड पर मौजूद वॉल पेंट की दूकान चलाते हैं. यह पहली मर्तबा था कि वो किसी प्रदर्शन में भाग ले रहे थे. हिंडौन में दलित संगठनों के हिंसक प्रदर्शन के विरोध में प्रदर्शन की घोषणा 2 अप्रैल की शाम को ही हो गई थी. यह प्रदर्शन गैर-दलित और गैर-आदिवासी बिरादरियों की तरफ से बुलाया गया था, जो ‘सर्व समाज’ के बैनर तले एकजुट हुई थीं.

दलित प्रदर्शनकारियों ने रेलवे पुलिस चौकी फूंक दी
दलित प्रदर्शनकारियों ने रेलवे पुलिस चौकी फूंक दी

इस प्रदर्शन का जो ढांचा तय किया गया था, वो सनातनी था. इसमें 2 अप्रैल के दलित प्रदर्शन में हुए नुकसान का मुआवजा दिए जाने का ज्ञापन एसडीएम को सौंपा जाना था. प्रदर्शन का नेतृत्व किसी एक संगठन के हाथ में होने की बजाए अलग-अलग बिरादरियों के छोटे-छोटे संगठनों के हाथ में था. प्रदर्शन को उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिला. हिंडौन और आस-पास के गांवों से 30,000 के करीब प्रदर्शनकारी सुबह से जुटने लगे थे. दीनदयाल भी इसी भीड़ का हिस्सा थे. वो बताते हैं-

“सुबह दस बजे के करीब हजारों की भीड़ शहर से चौपड़ सर्किल से होते हुए एसडीएम कार्यालय की तरफ जाने लगी. बात हो रही थी कि एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शन में हुए नुकसान का मुआवजा मांगा जाएगा. शहर के ज्यादातर व्यापारी भी इस प्रदर्शन में शामिल हो गए. जैसे ही चौपड़ सर्किल पहुंचे पुलिस ने हमें तीन तरफ से घेर लिया. पुलिस वालों का कहना था कि शहर में धारा 144 लगी हुई है और इस तरह का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता.

लोग पुलिस को लेकर पहले से गुस्से में थे. कल के प्रदर्शन में पुलिस हमारी दुकानों को बचाने में पूरी तरह से नाकामयाब रही थी. पहले तो पुलिस को समझाने की कोशिश की गई कि हम सिर्फ एसडीएम को ज्ञापन देना चाहते हैं लेकिन जब पुलिसवाले नहीं माने तो वहां झड़प शुरू हो गई.”

2 अप्रैल के रोज प्रदर्शन के लिए सड़को पर उतरे दलित
2 अप्रैल के रोज प्रदर्शन के लिए सड़को पर उतरे दलित

2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने में नाकामयाब रहने के बाद पुलिस ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही थी. देखते ही देखते आंसू गैस के गोले छोड़े जाने लगे. लाठीचार्ज शुरू हो गया. रबर की गोलियां दागी जाने लगीं. दूसरे लोगों को भागता देख दीनदयाल पंसारी भी वहां से हटकर अपने घर पर चले आए. इसके बाद पुलिस ने शहर में मार्च करके कर्फ्यू जारी करने की सूचना दे दी.

भरोसी लाल ने भरोसा खो दिया

दीनदयाल पंसारी तो घर लौट गए लेकिन प्रदर्शनकारियों का एक गुट चौपड़ सर्किल से स्टेशन रोड की तरफ बढ़ने लगा. करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ये लोग भूतपूर्व मंत्री भरोसी लाल जाटव के घर पर थे. भरोसी 2008 में यहां से कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं. वो 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की राजकुमारी जाटव के हाथों चुनाव हार गए थे.

2 अप्रैल के प्रदर्शन के वक़्त भरोसी लाल जाटव हिंडौन में ही मौजूद थे. अफवाह और कयासबाजी सबसे ज्यादा अराजकता के बीच फैलती हैं. शाम तक शहर के लोगों के बीच यह धारणा मजबूत होती चली गई कि इस हिंसक प्रदर्शन के पीछे भरोसी लाल जाटव का भी हाथ है. तरह-तरह की सूचनाएं आने लगीं. मसलन यह दावा किया जा रहा था कि प्रदर्शन के दौरान भरोसी लाल जाटव के बेटे नरेश जाटव ने तीन राउंड फायरिंग भी की. सच्चाई जो भी हो, लेकिन लोगों के बीच भरोसी लाल के प्रति असंतोष चरम पर पहुंच गया.

पूर्व मंत्री भरोसी लाल जाटव
पूर्व मंत्री भरोसी लाल जाटव

3 अप्रैल की दोपहर 12 बजे भरोसी लाल जाटव के घर के बाहर खड़ी भीड़ ने उनके घर को आग के हवाले कर दिया. यहां से आधा किलोमीटर दूर मौजूदा बीजेपी विधायक राजकुमारी जाटव का घर है. भरोसी लाल के घर में आग लगाने के बाद भीड़ ने अपना रुख मौजूदा विधायक के घर की तरफ कर लिया. दोनों बड़े सियासी दलों के नेताओं के घर में आग लगा दी गई. इस तरह कल के हिंसक प्रदर्शन के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन को हिंसक होने में वक़्त नहीं लगा.

फिलहाल शहर में कर्फ्यू है. 2 अप्रैल के हिंसक प्रदर्शन के सिलसिले में अबतक 30 से ज्यादा लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं. 10 तारीख को गैर दलितों और गैर आदिवासियों ने प्रदर्शन का आह्वान किया हुआ है. हिंडौन की घटना सूबे की पुलिस के लिए सबक है. अगर 10 तारीख को होने जा रहे प्रदर्शन के लिए बेहतर तैयारी नहीं की गईं, तो स्थितियां बेकाबू होने में वक़्त नहीं लगेगा.


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