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डियर दयाशंकर, मायावती मर्द होतीं तब भी 'वेश्या' कहते?

माननीय दया शंकर सिंह जी,

और आपके जैसे हजारों लोग.

आप बहुत बड़े आदमी हैं. UP के बीजेपी वाइस प्रेसिडेंट हैं. सुबह से शाम तक पचासों लोग आपको सलामी ठोंकते होंगे. पांव छूते होंगे. निश्चित ही आप बड़े काबिल होंगे. जो इस पद पर हैं. पार्टी का काम-धाम देखते हैं. लेकिन ये सब आप बिना दिमाग का इस्तेमाल किए कैसे करते हैं? या फिर इन सब पचड़ों में ही दिमाग इतना खप जाता है, कि मीडिया के सामने बेदिमाग बातें करने लगते हैं?

आपने BSP प्रेसिडेंट मायावती को ‘वेश्या’ कहा. बल्कि उससे भी ‘बदतर’ कहा. ये कहा कि वो पैसे लेकर टिकट बेचती हैं. और वेश्याओं का तो कमसकम ईमान होता है. आप तो जिससे पैसे लेती हैं, उससे लॉयल भी नहीं रहतीं. दूसरे ग्राहक को ज्यादा पैसों में टिकट बेच देती हैं.

जो आपने एक औरत के प्रति अपनी घिनही मानसिकता सामने रखी है. जी करता है खड़े होकर बजा दें ताली. एक बात बताइए. अगर मायावती की जगह कोई मर्द नेता होता, तो उसे आप क्या कहते? पर चूंकि मायावती एक औरत हैं, इसलिए उनसे असहमति को जिस्म की बातों और सेक्स से जोड़कर देखना आपके लिए कितना आसान है ना?

मायावती औरत होने की सजा भुगत रही हैं, इस बात की नहीं कि वे दूसरे दल में हैं. क्योंकि आपने सीखा ही यही है कि जब औरत पर गुस्सा निकालना हो, तो उसे वेश्या, रंडी, छिनाल कहना सबसे आसान तरीका है. परोक्ष रूप से उसे कह दिया जाए कि वो एक मर्द की नहीं है और यह उसका सबसे बड़ा अपमान है. किसी भी औरत का वजूद,  आखिर उसके सेक्शुअल बिहेवियर पर आकर क्यों ठहर जाता है? क्यों आप अपशब्दों के तौर पर किसी और गाली का इस्तेमाल न कर सके? औरत छोटे कपड़े पहने, सिगरेट पिए, बाहर घूमे, मॉडलिंग करे, एक्ट्रेस हो, या एक सफ़ल नेता हो. क्यों हर सूरत में उसे ‘वेश्या’ ही कहा जाता है? किसी भी स्त्री से खफा होते हैं आप तो यही कह देते होंगे? बल्कि ज्यादा त्रासद तो ये है कि झुंझलाहट में औरतें खुद औरतों को ‘बेइज्जत’ करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करती हैं.

आपके जैसे लोग ही होते हैं, जो औरत को कभी सेक्स से अलग कर नहीं देख पाते हैं. उनका प्रमोशन होता है तो कहते हैं बॉस के साथ किया होगा. उनकी फिल्में चलती हैं तो कहते हैं प्रड्यूसर के साथ किया होगा. नेता बनती हैं तो कहते हैं बड़े नेताओं के साथ किया होगा. आपने बीजेपी में जो तरह-तरह के पद संभाले हैं, आपसे किसी ने न पूछा होगा, कितने लोगों के साथ किया. लेकिन औरतों इस देश में हर रोज ये सुनती हैं. हर रोज सहती हैं. क्योंकि आपके जैसे लोगों के हाथ में ही सारा निजाम है.

जब आपको कोई मर्द घूस लेता दिखेगा, क्या आप उसे भी वेश्या कहेंगे?

दयाशंकर जी, खासी उम्र है आपकी. केंद्र में रूलिंग पार्टी के हैं आप. थोड़ी बोल-बचन की ट्रेनिंग लीजिए. आपकी मंत्री जी तो ‘डियर’ कहने पर ही नाराज़ हो जाती हैं.

सादर,
एक युवा औरत

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