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'दुर्गा से कुछ न हुआ तो क्यों न महिषासुर ट्राई करें'

nilotpal mrinal‘दी लल्लनटॉप’ के लिए ये खत लिखा है नील्तोपल मृणाल ने. नील्तोपल झारखंड के दुमका के रहने वाले हैं.   फिलहाल दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर IAS की तैयारी कर रहे हैं. ‘डार्क हॉर्स’ नाम से नॉवेल भी लिखा है. पढ़िए नील्तोपल का ‘महिषासुर फ्रेंडली’ दोस्त लल्टु को लिखा खत:


 

प्रिय मित्र लल्टु,

कल ही गांव से लौटा हूं. तुम्हारे घर पर भी सब ठीक है. चाची(तुम्हारी मां) ने तुम्हारे लिए पंडी जी से जन्मपत्री दिखाई थी. फिर कहने पर दुर्गा पूजा कराई. तुम्हारे नौकरी चाकरी के लिए परेशान हैं.

तुम्हारे खातिर पूजा का प्रसाद और हवन का भभूत भेजा है. शाम को जब गांजा खरीदने कैंपस से बाहर निकलो तो बताना हौज खास मेट्रो पे आ दे दूंगा. मित्र अब मां तो मां ठहरी. उसे मैंने ये बताना उचित ना समझा कि तुम अब महिषा जी के साथ हो गए हो. उनको इसका ऐतिहासिक और समाजिक न्यायिक कारण समझाने में एतना देर लगता कि मेरी ट्रेन छूट सकता था और शायद तब भी आकंठ दुर्गाभक्ति मेँ डूबी वो अनपढ़ बूढ़ी मां महिषा जी के सामाजिक न्यायिक पक्ष को समझ पाती कि नहीं, पता नहीं. खैर तुमने अच्छा किया कि एक नया खेमा धर लिए हो. इतने साल तक साथ साथ दुर्गा पूजा कर भी हमने कौन सा तीर मार लिया.

रेलवे में गैंगमैन तक का भी तो फॉर्म ना किलियर हुआ. तो अब क्यूं ना एक बार महिषा ट्राई किया जाय. दोस्त मैं तुम्हारे साथ हूं. लेकिन अब जब खुल्लमखुल्ला महिषा जी के साथ हो तो इन्हेँ समाज में अधिक से अधिक मान्यता दिलाने और स्थापित करने के लिए थोड़ा मेहनत भी करना होगा. ये साल भर में एक दिन शहादत दिवस मनाने से कुछ ना उखड़ना लल्टु भाय. उल्टे डिमोरलाइज फील होता है. देखो हमें वो प्वॉइंट पकड़ना होगा, जिससे दुर्गा या अन्य देवी देवता ने हजारों साल से अपना मार्केट जमाया है.

देखो ये दुर्गा समर्थक अपने बाल बच्चोँ का नाम भी दुर्गा, भवानी, शारदा इत्यादि रखते हैं, जिससे रोज पुकारने बोलने से ये नाम जेहन में रहे और प्रभाव बना रहे. अब हमें भी अपने लोगों का नाम महिषासुर, भैंसचढ़ा, लमबलवा इत्यादि रख इस नाम को प्रचलित कर इसे मान्यता दिलानी होगी. सोचो कोई लड़का पीएचडी कर निकलेगा और नाम होगा डॉ. महिषासुर मंडल. कोई प्रोफेसर होगा, भैंसचढ़ा चौबे. कितना जादुई बौद्धिक छवि बनेगा तब महिषा जी का. अच्छा जैसे ये दुर्गा खेमे वाले अपने में कहते हैं- फलना दुर्गा जैसी सुंदर है. देवी लगती है. हमें भी अपनों के बीच महिषा जी की आकर्षक छवि गढ़नी होगी और एक दूसरे को बोलना होगा.

महराज केतना सुंदर लड़का है. एकदम महिषासुर लगता है. दांत देखिए लगता है दांते से नारियल फाड़ देगा. अच्छा जिस तरह दुर्गा खेमे वाले अपने देवी गुणगान के लिए दुर्गा चालीसा, सप्तशती और आरती वगैरह लिखा है. हमें भी कुछ नया लिख लॉन्च करना होगा. जैसे चालीसा कुछ ऐसा लिखा जा सकता है….

महिषा सोये थे खा के मुर्गा
सुतले में त्रिशुल भोंक गईं दुर्गा
महिषा को कंफ्यूजन भारी
घर घुसी कैसे ये नारी
महिषा ने गुस्से मेँ देखा
दुर्गा ने सुदर्शन फेंका
महिषा को हुई चिंता भारी
एतना पावर में कैसे एक नारी
महिषा ने एक चाकू निकाला
दुर्गा ने तलवार और भाला
दुर्गा बोली तू शांति भंग करता है
लेडिज को तंग करता है
बोले महिषा आरोप है झुठा
इस हफ्ते तो ना किसी को लूटा
महिषा तू बामपंथ समर्थक
काम करता है खाली निरर्थक
महिषा बोले रह होश में देवी
वर्ना वसुलूं जगत से लेवी
भले दे त्रिशुल मेरे कंठ पर
वार ना करना बामपंथ पर
ऐ नारी ले काम अकल से
सोये में मारे है छल से
ऐ महिषा अब होश मेँ आजा
खड़ी यहीं हूं जा मुंह धो के आजा
तू पुरूष मारे है बल से
मैं मारी तो बोले छल से

मित्र लल्टु कुछ ऐसा चालीसा लिख हम महिषा जी के प्रति सहानुभुति और उनकी वीरता का भौकाल बना दुर्गा को छल से मारने वाली साबित कर उन्हे बैकफुट पर धकेल सकते हैं. अच्छा एक मेन बात कि दुर्गा खेमा उन्हें अपनी मां बता जय माता दी टाइप टैग लाइन लगाए रहता है. क्यूं ना हम भी महिषा जी को एज ए फादर लॉन्च कर “जय पप्पा जी” टैग लाइन बना लें.

अच्छा ये लोग दुर्गा जी के बारे में कई मिथक जुटा उनको गुणकारी शक्तिशाली, विद्वान, नैतिक दिखाने वाला ग्रंथ रचे हैं. इसके जवाब में हमको भी कुछ झूठ सच जोड़ एक महिषासुत्त रचना होगा. जिसमें किस्सा होगा…

महिषा एक बहुत ही भोला भाला सीधा नौजवान था. जिसका सारा ध्यान अपने कॉलेज की पढ़ाई पर रहता था. एक दिन कॉलेज जाते वक्त उसे रास्ते में कुछ लड़कियों ने छेड़ दिया. उसने तुरंत कॉलेज जा रोते हुए प्रिंसिपल से उन लड़कियों की शिकायत कर दी. इसी बात से क्षुब्ध लड़कियों में एक दुर्गा ने बदले की भावना से रात को लाइब्रेरी में पढ़ते पढ़ते सो गए महिषा पर छल से वार कर दिया.

महिषासुर हीरो है या विलेन! प्लीज कन्फर्म

मित्र लल्टु ये कथा पढ़े लिखे बुद्धिजीवियों को अपने खेमे में खिंचेगी. एक पढ़ने लिखने वाले भोले युवा महिषा का शोषण कोई भी करुणा और दया एवं प्रगतिशिलता से भरा बुद्धिजीवी बर्दाश्त ना करेगा और हमारे महिषा खातिर देश भर मेँ समर्थन जुटने लगेगा. अच्छा लास्ट में एक आरती भी लिखना होगा, जिसे एक मीका से, दूसरा दलेर मेंहदी से गवा लेंगे, क्योंकि अनूप जलोटा और नरेंद्र चंचल दुर्गा खेमे के गायक हैं. और उनका संगीत भी अब आउटडेटेड हो चुका है.

मीका गाएगा, ‘बैल, भैंसन लंगुर की, आरती कीजे महिषासुर की. और दलेर एक झुमाऊ आरती देंगे- सड्डे भैंस चढ़ोगे तो ऐश करोगे. देखना ये सुन लोग पल्सर बेच भैंस खरीद लेंगे. तो मित्र लल्टु अगर सच में महिषा के साथ प्रतिबद्धता के साथ खड़े हो उनके लिए कुछ करना चाहते हो तो ये सब उतनी ही ईमानदारी करके दिखाओ जितनी ईमानदारी से दुर्गा खेमे वाले अपनी मां दुर्गा के लिए कर दिखाते हैं.

और केवल ये सब बस एक क्षणिक आवेश में आके यूनिक दिखने का तमाशा भर है और बस विरोध के लिए विरोध का हथियार भर है तो मुझे अफसोस है कि मैं एक अवसरवादी भड़काऊ नकारे आदमी का मित्र था जो ना मेरा हुआ, ना मां के भभूत का. ना दुर्गा का. ना महिषा का. अब हजारों साल से स्थापित मान्यता को एक दिन की बकलोली या एक शहादत दिवस और चंद पर्चों पोस्टरों से तो ना ढाह पाओगे मित्र. कुछ तगड़ा और लगातार करो. एक ऐसा बस विध्वंसक भर ना बनो जो कल अपने मतलब और अपने विचारधारा के खुराक के लिए रावण और भस्मासुर का भी उपयोग कर ले. कम से कम जिसके साथ रहो. पूरी ईमानदारी के साथ मरते दम रहना. चाहे दुर्गा या चाहे महिषा. भयंकर शुभकामनाएं तुमको. जय हो.

औरतों को कमजोर मानने के चलते मारा गया था महिषासुर

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