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चार ही लोगों का दीवाना है पंजाब. चौथा बब्बू मान है

आप पंजाब गए हो कभी? गए होगे तो वहां देखे होंगे सरसों के खेत, हट्टे-कट्टे सरदार, गुरुद्वारे, लम्बी चौड़ी गाड़ियां. जिस पर ध्यान नहीं गया होगा वो मैं बता देता हूं. गाड़ियों के पीछे लगी तस्वीरें. 4 ही लोगों का दीवाना हैं पंजाब. भगत सिंह, भिंडरावाला, गुरदास मान और आखिरी बब्बू मान.

पहले तीन को तो लगभग पूरी दुनिया जानती होगी लेकिन ये जो चौथा है ना बब्बू मान, ये पंजाबी सिंगर है. इसे चुनिंदा लोग जानते हैं. और जो जानते हैं वो ऐसा जानते हैं कि एक टाइम पे तो ‘बाई’ के बड़े वाले फैन रहे होंगे. ये जो ‘बाई’ लिखा है न इसका मतलब हमारे पंजाब में भाई होता है. तो सुनो ये बंदा अपना ‘बाई’ है. बाई इसलिए कि एक नम्बर का खड़कू है. गरारी जहां अटक जाती है वहां से हिलता नहीं. सभ्य लोग शायद  पागल समझते हैं.

पॉलिटिक्स में इंटरेस्ट नहीं है, पर जब भगवंत मान के लिए कैम्पेनिंग करने जाता है तो साथ ही बोल देते हैं कि तभी तक सपोर्ट करूंगा जब तक भगवंत पॉलिटीशियन नहीं बन जाता. हमारा बाई अपने हिसाब से रहता है, अपने हिसाब से कहता है. परवाह नी मारता. न आपकी, न मेरी और न इस सोसाइटी की.

सबसे पहले आपको गाना सुनाते हैं बाई का. समझ आ जाएगा किसकी बात कर रहा हूं:

मैं पंजाब से हूं. गाड़ी, राइफल, चण्डीगढ़, जट, सरदारी. ये चीज़े हमारे वहां के लगभग हर गाने में मिल जाती है. गाने में इसलिए मिलती हैं क्योंकि हमारे वहां ज़्यादातर लोग इन सबके पीछे ही कमले हैं. और हां एक चीज़ और. बदला.

हमारे गानों में बदला लेने की बातें भी खूब होती हैं. इन सब गानों की भरमार थी 80 के दशक में. तब गाते थे चमकीला. शहर से लेकर गांव तक, खूब फेमस थे. समाज की बुराइयों की बात भी करते थे गानों में. गोली मार दी थी उन्हें 1988 में.

वे मर गए और साथ ही ऐसे गाने भी गायब हो गए. और इसके बाद शुरू हुआ पंजाब में पॉप गायकी का दौर. सरदूल सिकंदर, सुरजीत बिंदरखिया जैसे गायकों के गानों के बिना हर फंक्शन, पार्टी अधूरी लगने लगी.

पर क्या करें! खून गरम हैं ना हम पंजाबियों का. कब तक ‘जट दी पंसद’ और ‘यार बोलदा’ जैसे स्वीट सॉन्ग सुनते रहते. खुर्की होते हैं न हम. शोर शराबा ना हो तो पता कैसे चले कि पंजाबी हैं. ऐसे में एंट्री मारी बब्बू मान नें. पहली दो एल्बम तो बाई ने भी शरीफ आशिकों वाली निकाली. तब तक सब गाने ऐसे थे जैसे बाई को खुद नई-नई आशिकी हुई हो. गाने गा रहे थे ‘सज्जन रुमाल दे गया’ और ‘तू मेरी मिस इंडिया’ जैसे. ठीक-ठाक से चले भी, पर बाई की लॉटरी लगी साल 2001 में. एल्बम आई ‘सौन दी झड़ी’. 8 गाने थे इसमें. सारे गाने एक से एक फाड़ू. उसी का एक गाना था, कब्ज़ा. तो इस गाने के साथ ही एक बार फिर वापसी हुई पंजाबी गानों में बंदूकें, दोनाली और बदला लेने की. खूब चला. सालों साल. पढ़ने से याद नहीं आएगा. नीचे वाला लिंक खोलो. ‘गरंटी’ है आपकी भी यादें ताज़ा हो जाएंगी मेरी तरह.

बाई इस एल्बम के साथ ही स्टार बन गया. फिर 2003 में हवाएं फिल्म से अपना डेब्यू किया. फिल्म खास नहीं चली पर बाई चलता रहा. साल 2004 में एलबम आई ‘ओही चन ओही रातां’. और फिर ‘प्यास’. इन एल्बम में सैड सांग्स की भरमार थी पर लोगों को खूब पसंद आए. इन्हीं में एक सैड सौंग ‘मितरां दी छतरी’ भी था. पर ये गाना तो हमारे यहां पार्टियों में भी खूब बजता था.

तब एक साथ बाई के इतने दुख भरे गाने आए कि लगा जैसे खुद का ब्रेक-अप हुआ हो. अपनी गर्लफ्रेंड की याद में अगर आप भी डुबकी लगाए रहते हों तो बब्बू मान का ये गाना आपके लिए है. सुन लो.

बाई खास इसलिए है कि उसमें जिगरा बौत है. जिगरा अपनी बात रखने का, अपने मन की करने का. बताता हूं कैसे. पंजाबी जो होते हैं न वो सब सह लेते हैं…. बस धर्म की बात न हो! ‘यू आर द लव चार्जर’ वाले जो बाबा है न गुरमीत राम रहीम जी इंसान, उनके कपड़ो को लेके तगड़े वाली कंट्रोवर्सी हुई थी हमारे यहां. पंजाबियों का कहना था कि बाबा ने गुरू गोबिंद सिंह जी की बराबरी करने की कोशिश की है. लोग भड़क गए. बाई को भी गुस्सा आया. उनके पास हथियार था गायकी का. तो गाना गाया, “इक बाबा नानक सी जिने तुरके दुनिया गाह ती, इक अज कल बाबे ने बत्ती लाल गड्डी ते लाती”. हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि ये गाना बब्बू ने पंजाब वाले बाबा रणजीत सिंह के लिए गाया था. खैर आप बाबाओं का लोड मत लो, गाना सुनो.

चलो खूब हुआ मनोरंजन, अब अर्टिकल खत्म करते हैं. और ये बताए बिना खत्म कर नहीं सकते कि बाई आज कल क्या कर रहा है. आज की बात करें तो उनको फोन किया था इंटरव्यू को लिए. बोले की रिकार्डिंग चल रही है और फिर जाना है फॉरेन (देश से बाहर). मैंने अपने दोस्त से उनका नम्बर लिया था इंटरव्यू के लिए. वो पहले ही बोला था कि, “तैनू पता तां है, बाई नू हैगा नी मीडिया दा चस्का”. हां ये एक और कमाल की बात है बाई में. बिल्कुल भी मीडिया फ्रेंडली नहीं हैं और ना ही होना चाहते. कहते हैं कि, “मैनू नी लोड़ है मीडिया-मूडिया दी”. तो बाई अपना घैंट है एक दम. अपनी मस्ती में मस्त. ऐसे ही मस्ती भरे गाने नीचे लगा रहा हूं. खास अच्छे नहीं लगे लोगों को लेकिन लोगों की चिंता बब्बू को कहां.

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