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क्या होती है ये पेंशन स्कीम, जो आपका बुढ़ापा सुरक्षित करती है?

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हम आप बाप-दादा के ज़माने से सुनते आए हैं. बेटा, सरकारी नौकरी कर लो इसमें पेंशन मिलती है. बुढ़ापा आराम से कट जाएगा. और फिर रात-दिन घुटनों के बल होकर वो रट्टा मारना शुरू करते थे कि घुटने दुखने लगते थे. आखिर सरकारी नौकरी जो करनी थी. आज भी लाखों की तादाद में बच्चे सरकारी नौकरी और फिर ‘बुढ़ापे में पेंशन’ की चाह में दिन-रात एक किए हैं. सरकारी नौकरी की गारंटी देने वाले कोचिंग सेंटर आपको हर शहर में मिल जाएंगे. पर एक अदद नौकरी की जुगाड़ में जुटे लाखों नौजवानों को शायद अब तक ये पता भी नहीं कि सरकार ने साल 2004 से पेंशन से अपना पल्ला झाड़ लिया है. सरकार ने एक नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस बना दिया है. रिटायरमेंट के बाद उसी कर्मचारी को पेंशन मिलेगी, जो इस स्कीम में पैसा जमा करेगा. स्कीम से अलग रहने वाला कर्मचारी पेंशन का हकदार नहीं होगा.  एनपीएस प्राइवेट कर्मचारी और आम लोगों के लिए भी है. ये एनपीएस क्या है, इसको आज हम विस्तार से समझेंगे. मोदी सरकार ने हाल ही में इस योजना में एक बदलाव किया है. अब सरकारी कर्मचारी के खाते में केंद्र सरकार ने अपना अंशदान 10 से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है. इसे भी समझेंगे. लेकिन शुरुआत एनपीएस से.

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ये एनपीएस होता क्या है?

सरकार ने पहली जनवरी 2004 से कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस की शुरुआत की. पहले इसे सरकारी नौकरी में आने वाले नए भर्ती कर्मचारियों के लिए लांच किया गया. इसमें सेना और आर्म्ड फोर्सेज को शामिल नहीं किया गया. कोई पांच साल बाद यानी 1 मई 2009 को इस स्कीम को प्राइवेट कर्मचारियों के साथ-साथ देश के आम आदमी के लिए भी खोल दिया गया. अब हम-आप यानी देश का हर नागरिक एनपीएस में अपना खाता खुलवा सकता है. खाताधारक की ओर से हर महीेने इस खाते में एक तय रकम जमा की जा सकती है. इस स्कीम के शुरू हो जाने पर सरकार ने पुरानी पेंशन योजना से तौबा कर ली. पुरानी योजना में सरकार कर्मचारियों के वेतन से एक हिस्सा काटती थी. और उसका मैनेजमेंट करती थी. फिर रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को हर महीने एक निश्चित रकम देती रहती थी.

कितनी तरह के खाते?

एनपीएस में दो तरह के खाते होते हैं. पहला यानी टीयर-1  अकाउंट सरकारी कर्मचारियों के लिए होता है. दूसरा खाता, जिसे टीयर-2 कहते हैं, आम लोगों के लिए होता है. टीयर-1 खाते में सरकारी कर्मचारी को अपनी बेसिक सेलरी का 10 फीसदी अंशदान पेंशन फंड में करना होता है. कर्मचारी के खाते में इतना ही अंशदान यानी 10 फीसदी रकम सरकार भी जमा करती रही है. इसी सरकारी अंशदान को मोदी सरकार ने अभी 10 से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है.

मान लेते हैं, रितेश सरकारी कर्मचारी हैं. उनकी महीने की पगार 30,000 रुपए है. इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक ग्रॉस सेलरी यानी पूरी तनख्वाह का 30 से 45 फीसदी हिस्सा मूल वेतन में रहता है. रितेश के केस में अगर उसकी बेसिक सेलरी 30 परसेंट मान लें, तो 30,000 रुपए के हिसाब से मूल वेतन 9,000 रुपए बनेगा. अब 9,000 रुपए का 10 फीसदी यानी 900 रुपए रितेश को अपने एनपीएस खाते में जमा करने होंगे. जब रितेश अपने खाते में 900 रुपए जमा करेगा, तभी 900 रुपए का अंशदान सरकार भी करेगी. इस तरह रितेश के पेंशन के खाते में 1800 रुपए जमा हो जाएंगे. अब मोदी सरकार ने अपना अंशदान 10 से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है यानी सरकारी अंशदान 4 फीसदी बढ़ा है. इस तरह 1800 में 360 रुपए और जुड़ जाएंगे. कुल मिलाकर पेंशन फंड में जाने वाली रकम 2160 रुपए बनेगी.

अब बात, टीयर-2 खाते की. आमतौर पर ये अकाउंट आम लोगों के लिए होता है. कोई भी शख्स ये अकाउंट ओपन करा सकता है. सरकारी कर्मचारी भी टीयर-2 खाता खुलवा सकते हैं. इन खातों में सरकार कोई अंशदान नहीं करती है. इसका मतलब ये हुआ कि रितेश ने अगर टीयर -2 खाता खुलवाया होता तो उसके पेंशन खाते में महीने में कुल 900 रुपए ही जमा होते.

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किसके लिए है ये स्कीम?

एनपीएस में 18 से 60 साल तक का कोई भी शख्स अकाउंट खुलवा सकता है. किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक में खाता खुल जाता है. एनएसडीएल के माध्यम से ऑनलाइन भी अकाउंट ओपन कर सकते हैं. टीयर-1 खाते में साल में कम से कम 1000 रुपए जमा करने होंगे. इस अकाउंट से 60 साल की उम्र से पहले पैसा नहीं निकाला जा सकता है. 60 साल से पहले अगर आप इस फंड से पैसा निकालेंगे, तो अपको कुल जमा रकम का 20 फीसदी ही मिलेगा. इसमें भी ये शर्त है कि जो पैसा आप पेंशन फंड से निकालेंगे, उसकी 80 फीसदी रकम आपको किसी बीमा स्कीम में लगानी होगी. कर्मचारी रिटायरमेंट के वक्त अपने कुल पेंशन फंड की 60 फीसदी रकम ले सकते हैं. बाकी 40 प्रतिशत फंड से उनको पेंशन मिलती रहेगी. टीयर-2 खाते में अपनी मर्जी से इनवेस्ट कर सकते हैं और पैसा निकाल भी सकते हैं.

कैसे बढ़ता है एनपीएस में पैसा?

एनपीएस का पैसा 8 फंड मैनेजरों के पास इकट्ठा होता है. ये 8 फंड मैनेजर हैं-  एसबीआई पेंशन फंड, एलआईसी पेंशन फंड, यूटीआई रिटायरमेंट सॉल्यूशंस, रिलायंस कैपिटल पेंशन फंड, कोटक पेंशन फंड, बिरला सनलाइफ पेंशन स्कीम, एचडीएफसी पेंशन फंड  और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल पेंशन फंड. कोई भी खाताधारक इन 8 पेंशन फंड में से किसी एक को चुन सकता है. इस वक्त ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों का पैसा एसबीआई पेंशन फंड, यूटीआई रिटायरमेंट सॉल्यूशन और एलआईसी फंड मैनेज कर रहे हैं. हर फंड मैनेजर की अपनी- अपने स्ट्रैटिजी होती है. खाताधारकों से इकट्ठा की गई रकम को ये अपनी काबिलियत के हिसाब से शेयर, सरकारी बांड और प्राइवेट कंपनियों के बांड में निवेश करते हैं. जाहिर सी बात है अगर एनपीएस का पैसा शेयर मार्केट में ज्यादा लगेगा, तो जोखिम भी ज्यादा ही होगा. अगर आपका पैसा सरकारी बांड में लगेगा, जो एक निश्चित अवधि में तय रिटर्न ही देते हैं, तो आपका पैसा सुरक्षित रहेगा. बस रिटर्न के लिए संतोष करना होगा. प्राइवेट कंपनियों के बांड भी तय रिटर्न देते हैं, लेकिन ये सरकारी बांड जैसे जोखिम रहित नहीं होते.

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अब तक कैसा रहा रिटर्न?

एसबीआई, एलआईसी और यूटीआई केंद्र सरकार के कर्मचारियों के फंड को 1 अप्रैल 2008 से मैनेज कर रहे हैं. एसबीआई के पास 29,254.83 करोड़ रुपए का, यूटीआई के पास 27,490.44 करोड़ और एलआईसी के पास 25,532.34 करोड़ रुपए का एनपीएस फंड है. अगर इनका 10 साल का रिटर्न देखें तो 28 फरवरी 2018 तक एसबीआई ने 9.94 परसेंट और एलआईसी और यूटीआई ने करीब 9.6 फीसदी रिटर्न दिया है.


वीडियोः 

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