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मायावती के भाई आनंद 7 साल में 7 करोड़ से 1316 करोड़ के मालिक कैसे बन गए?

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बीएसपी चीफ मायावती के भाई आनंद के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है. इनकम टैक्स विभाग ने नोएडा में 7 एकड़ का बेनामी प्लॉट जब्त कर लिया है. इसकी वैल्यू करीब 400 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इसके साथ ही मायावती, उनकी भाभी विचित्रलेखा और भाई आनंद सुर्खियों में आ गए हैं. और सुर्खियों में आ गई है उनकी प्रॉपर्टी.

कौन हैं आनंद कुमार

तारीख- 22 अगस्त, 2002. शहर- लखनऊ. जगह- आवास और शहरी विकास मंत्री लालजी टंडन का घर. मुख्यमंत्री मायावती थाली में चांदी की राखी सजाकर टंडन को राखी बांधने पहुंचीं. सियासी राखी को निजी रिश्तों का नाम दिया गया. टंडन ने मायावती की खूब आवभगत की. मायावती ने लालजी टंडन को भाई बताया और उनकी पत्नी कृष्णा टंडन को भाभी. मगर ये सियासी भाई-भाभी थे.

मायावती के असल भाई-भाभी कहीं और थे. मायावती के सगे भाई आनंद उस समय नोएडा अथॉरिटी में क्लर्क थे. मई, 2002 में जब मायावती ने तीसरी बार यूपी जैसे अहम सूबे की कमान संभाली, उस समय मायावती के भाई नोएडा अथॉरिटी के मामूली बाबू थे. आंखों में चश्मा लगाए, फाइलों से घिरे आनंद को तब तक बहुत कम लोग जानते थे. मायावती की भाभी विचित्रलेखा तब तक एक घरेलू महिला थीं.

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक आनंद और विचित्रलेखा की जिंदगी में बड़ा बदलाव इसी साल आया. मायावती के मुख्यमंत्री बनने के करीब साल भर बाद. अप्रैल, 2003 उनके भाई के परिवार ने एक बड़ा दांव खेला. मायावती की भाभी विचित्रलेखा ने मसूरी में एक होटल खरीदा. नाम था- होटल शिल्टन. इसे खरीदा होटल लाइब्रेरी क्लब लिमिटेड नाम की कंपनी ने. ये मायावती के परिवार का पहला बड़ा कॉरपोरेट इन्वेस्टमेंट था. करीब तीन साल बाद इस होटल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में मायावती के भाई आनंद भी शामिल हो गए.

…और इस तरह मायावती के परिवार ने कॉरपोरेट की दुनिया में कदम रख दिया. साल 2007 में मायावती चौथी बार यूपी की सीएम बनीं. बीएसपी की इस जीत के बाद मायावती के भाई आनंद ने नोएडा अथॉरिटी की नौकरी को गुडबॉय बोल दिया. और फिर पूरी तरह कारोबार की दुनिया में कूद गए.

आनंद के कारोबार में आई तेजी

मायावती के फिर से सीएम बनने के बाद आनंद ने एक के बाद एक कई कंपनियों का गठन किया. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2007 से 2012 के बीच आनंद ने करीब 49 कंपनियों का गठन किया. इनमें से ज्यादातर का कारोबार रियल एस्टेट से जुड़ा था.

इनकम टैक्स विभाग का आरोप है कि 2007 तक आनंद के पास करीब 7.1 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी थी. 2014 तक उनकी प्रॉपर्टी बढ़कर 1316 करोड़ रुपए से ज्यादा की हो गई. इन 7 सालों में 5 साल मायावती की सरकार थी. आनंद के मुताबिक ऐसा उनकी कंपनियों के मुनाफे की वजह से हुआ है. कंपनियों के मुनाफे में 18 हजार फीसदी का उछाल आया था.

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक साल 2009 में आनंद ने ईशा प्रॉपर्टी और साची प्रॉपर्टी नाम की दो कंपनियों का गठन किया. ये दोनों कंपनियां 2017 तक निवेश फर्म के तौर पर काम कर रही थीं. इन दोनों कंपनियों ने कई बड़े-बड़े निवेश कर रखे हैं. दोनों कंपनियों में आनंद और उनकी पत्नी विचित्रलेखा की हिस्सेदारी है.

आनंद के पास दोनों कंपनियों की 97.22 फीसदी हिस्सेदारी है. साल 2015 तक साची प्रॉपर्टी के पास करीब 100 करोड़ रुपए का और ईशा प्रॉपर्टी के पास करीब 70 करोड़ रुपए का रिज़र्व फंड था. दोनों कंपनियों ने ग्रेटर नोएडा के आकृति होटल में निवेश कर रखा है.

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक आनंद और विचित्रलेखा की कंपनियों ने मोरान प्लांट एंड मशीनरी, योगिता डेवलपर्स, पवनपुत्र एडवरटाइजिंग एंड फेसर टेक्नोलॉजीज, ग्लोबस कंस्ट्रक्टर एंड डेवलपर्स और ग्लोबस पॉवर जनरेशन जैसी कंपनियों में पैसा लगा रखा है. मायावती के भाई और भाभी ने नवीन इन्फ्रा डेवलपर्स एंड इंजीनियर्स में भी पैसा लगा रखा है. नवीन इन्फ्रा ने कुछ वक्त पहले नई दिल्ली के सरदार पटेल रोड पर ऑफिस खरीदा था. ये ऑफिस मायावती के चाणक्यपुरी वाले घर से कुछ ही दूरी पर है. आनंद और विचित्रलेखा ने एक और कंपनी बनाई है नाम है- वी एंड ए ट्रेडिंग. वी का मतलब विचित्रलेखा और ए का मतलब आनंद हो सकता है.

इनकम टैक्स का आरोप है कि 2014 तक आनंद ने 49 से ज्यादा कंपनियां बनाईं. इनमें से 12 कंपनियों में आनंद खुद डायरेक्टर थे. कई में उनकी पत्नी विचित्रलेखा भी डायरेक्टर थीं. 2007 से 2012 तक जब मायावती यूपी की सीएम थीं, तब 5 कंपनियों -फैक्टर टेक्नोलॉजीज, होटल लाइब्रेरी, साची प्रॉपर्टीज, दीया रियल्टर्स और ईशा प्रॉपर्टीज के जरिए जमकर पैसा इकट्ठा किया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक आनंद की 49 कंपनियों ने जेपी, यूनिटेक और DLF के साथ मिलकर 2012 तक 760 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया. आरोप है कि ज्यादातर कंपनियां फर्जी थीं. होटल लाइब्रेरी क्लब प्राइवेट लिमिटेड का मार्च 2012 तक बैंक बैलेंस 320 करोड़ रुपए था. इसी से जुड़ी एक और कंपनी थी- रिवोल्यूशनरी रियल्टर्स. मार्च 2012 तक इस फर्म का बैंक बैलेंस था 54 करोड़ रुपए. इससे एक और कंपनी जुड़ी थी तमन्ना डेवलपर्स. मार्च 2012 तक इसके पास 160 करोड़ रुपए थे.

किन कंपनियों पर कसा है शिकंजा?

सब जांच के दायरे में हैं. इनकम टैक्स विभाग के साथ-साथ ईडी की भी जांच चल रही है. आने वाले वक्त में ये जांच मायावती तक भी पहुंच सकती है.


वीडियो: SP-BSP गठबंधन तोड़ने के मायावती ने ऐसे कारण बताए कि BJP हंस रही होगी

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