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फिजेट स्पिनर, जिसे स्ट्रेस की दवा बताकर बेचा जा रहा है जबकि असल काम कुछ और है

पिछले साल इसी सीजन में एक बमपिलाट चीज मार्केट में आई थी, पोकेमॉन गो. आम पब्लिक से लेकर सेलिब्रिटीज तक इसके इतने दीवाने थे कि पोकेमॉन पकड़ने के लिए कहीं भी घुस जाते थे. अब वही कुछ हाल इस चकरघिन्नी का हो रहा है. इस चकरघिन्नी को फिजेट स्पिनरकहते हैं. ये प्लास्टिक की होती है. किसी में मेटल भी लगा रहता है. बीच में बेरिंग लगी होती है. उसी बेरिंग वाले हिस्से पर एक अंगूठा और बीच वाली उंगली रखकर सनसना के घुमाया जाता है. कुछ ऐसे भी होते हैं जिनसे इरीटेटिंग आवाज आती है, जब बीच से हवा पास होती है. इसके बारे में सब कुछ जानने के लिए वीडियो देखो.

अगर वीडियो देखने में किसी किस्म की दिक्कत है, तकनीकी खामी है, नेट 2G पर चल रहा है तो पढ़ो.

 

 

 

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अगर आपके घर में बच्चे हैं तो इसके लिए जरूर जिद कर चुके होंगे. हो सकता है जिद पूरी भी हो गई हो. इसे खरीदने और नचाने का शौक तो जो है सो हइये है, इसे बेचने का तरीका लाजवाब है. अमेजन पर इसे एंजाइटी यानी चिंता रोग से छुटकारे का रामबाण इलाज बताकर बेचा जा रहा है. इसमें अंधेरे में लाइट भी चमकती है. जैसे रेडियम वाली घड़ी में जलती है.

 

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स्ट्रेस से इलाज का दावा पक्का नहीं है

ये इलाज वाला मसला अभी किसी साइंसटिफिक रिसर्च में प्रूव नहीं हुआ है. न ही किसी डॉक्टर ने पर्चे में लिखा है. आटिज्म यानी अपने में खोए रहने वाली बीमारी, ADHD यानी Attention Deficit Hyperactivity Disorder यानी एकाग्रता की समस्या और स्ट्रेस यानी चिंता से निपटने में ये चकरघिन्नी कितनी कामयाब होती है, इसका अभी कुछ पता नहीं है. यानी ये ऑनलाइन बिजनेस वाली वेबसाइट्स पब्लिक को बेवकूफ बना रही हैं.

वेस्ट के कुछ स्कूलों में टीचर्स ने इस पर बैन लगा दिया है. उनका कहना है कि ये खिलौना बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने की बजाय खत्म कर रहा है. उनकी एकाग्रता पढ़ाई से खिसक कर इस खिलौने पर सिमट गई है. मम्मी पापा अलग परेशान हैं. बच्चा हर काम छोड़कर चकरघिन्नी नचाता रहता है.

मेडिकल रिसर्च ये तो कहती है कि बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने के लिए फिजिकल मूवमेंट जरूरी है, लेकिन ये दुपुन्नी भर की चीज फिजिकल मूवमेंट का जरिया नहीं है. इससे सिर्फ एक उंगली हिलती है. जो न तो शारीरिक और न मानसिक रूप से बच्चे की हेल्प कर सकता है. फ्लोरिडा के एक साइकॉलजिस्ट मार्क रपोर्ट ने वॉक्स मैगजीन को बताया था कि अभी तक फिजेट स्पिनर पर कोई रिसर्च नहीं की गई है और इसके असर के बारे में अब तक साइंटिस्ट अनजान हैं. उनका कहना था कि इसका ज्यादा इस्तेमाल फायदे की जगह नुकसान कर सकता है.

किसने और कब की फिजेट स्पिनर की खोज

इसकी अनॉफिशियल आविष्कारक कैथरीन हेटिंगर हैं. अनॉफिशियल इसलिए कि उनके पास इसका पेटेंट नहीं है. हेटिंगर ने 1993 में इस डिवाइस का पेटेंट लेने के लिए अप्लीकेशन डाला था. पेटेंट मिल भी गया था. लेकिन 2005 में वापस चला गया क्योंकि उन्हें कोई कमर्शियल पार्टनर नहीं मिला था.

 

Catherine Hettinger, Image: Richard Luscombe
Catherine Hettinger, Image: Richard Luscombe

 

हेटिंगर ने मनी मैगजीन को एक इंटरव्यू दिया था. जिसमें बताया कि फिजेट स्पिनर का आइडिया बच्चों को मुश्किलों से दूर रखने का था. किसी किस्म की मेंटल हेल्थ या चिंता मिटाने के लिए नहीं. वो इजराइल गई थीं और वहां बच्चों को देखा. वो पुलिस वालों पर पत्थर फेंककर अपना मनोरंजन कर रहे थे. तब यही समझ में आया कि इनके हाथ में पत्थर छुड़ाकर कुछ और दिया जाए. यानी इस डिवाइस को शांति स्थापित करने के लिए इनवेंट किया गया था मानसिक शांति के लिए नहीं. लेकिन इसका इस्तेमाल नशे की हद तक बढ़ चुका है. बच्चे ही नहीं बड़े भी इसके चंगुल में हैं. अब तक जैसे हर 2 मिनट पर फोन उठाकर चेक करते थे, अब फिजेट स्पिनर घुमाने लगते हैं.

जाते जाते देखते जाओ कि इससे खेलने वाले क्या क्या जुगाड़ निकाल रहे हैं.


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