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ब्लैक फंगस के बाद अब वाइट फंगस के मरीज मिले, कितनी खतरनाक है ये बीमारी?

कोरोना के कहर के बीच इन दिनों ब्लैक फंगस नाम की बीमारी ने नई दहशत फैला दी है. इसके बढ़ते मरीजों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वो ब्लैक फंगस या म्यूकरमायकोसिस (mucormycosis) को महामारी घोषित करें. कई राज्यों ने ऐसा कर भी दिया है. लेकिन इसी बीच एक नए तरह का इंफेक्शन देखने को मिल रहा है. इसे वाइट फंगस कहा जा रहा है. क्या है ये इंफेक्शन? इसके कुछ केस बिहार और यूपी में दिखे हैं. आइए जानते हैं क्या है वाइट फंगस और इसका इलाज कैसे कराया जा सकता है.

कहां-कहां मिले वाइट फंगस के केस

बिहार की राजधानी पटना से 19-20 मई को ब्लैक फंगस के 4 मरीजों की सूचना मिली. इसी दिन यूपी के बनारस में 70 साल के एक मरीज में ये बीमारी देखने को मिली. यूपी में वाइट फंगस का यह पहला कंफर्म केस बताया जा रहा है. इस मरीज को पिछले महीने कोरोना हुआ था. इलाज के लिए उसे दिल्ली लाया गया. ठीक होने के बाद 23 अप्रैल को वह वापस उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के अपने घर चला गया. कुछ दिन बाद ही उसे आंख में परेशानी होने लगी. दिखने में दिक्कत आने लगी. आंख में पानी भी आने लगा. इलाज के लिए वह बनारस के अस्पताल पहुंचा. डॉक्टर क्षितिज आदित्य ने उसका इलाज किया, और वाइट फंगस की जानकारी दी.

डॉक्टर क्षितिज ने इंडिया टुडे को बताया कि

मरीज को कोरोना होने के बाद लगातार स्टेरॉयड पर रखा गया था. डिस्चार्ज होने के कुछ दिन बाद से ही उसे कम दिखने और आंख से पानी बहने की शिकायत हो रही थी. जब मेरे पास यह केस आया, तो मुझे यह खून से आंख में पहुंचा हुआ इंफेक्शन लगा. हमने जांच कराई. पता चला कि यह वाइट फंगस है. जिसने भी कोरोना से इलाज के दौरान हाल ही में स्टेरॉयड लिया हो या डायबीटीज का पेशेंट हो, उसे आंख में किसी भी तरह की दिक्कत होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बिहार के पटना मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर एसएन सिंह ने बताया कि बिहार में वाइट फंगस के और केस भी हो सकते हैं. डॉक्टर सिंह के अनुसार, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, डायबीटीज, एड्स और किडनी ट्रासप्लांट करने वालों में इस बीमारी का ज्यादा खतरा है. कोरोना के इलाज के दौरान ऑक्सीजन लेते वक्त लापरवाही बरतने से भी वाइट फंगस की दिक्कत आ सकती है. डॉक्टर एसएन सिंह ने कहा-

लोग अक्सर ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ जो ह्यूमिडिफायर लगाते हैं, उसमें नल का साधारण पानी भर लेते हैं. इस तरह के पानी से ऑक्सीजन देने पर मरीज को वाइट फंगस हो सकता है.

डॉक्टर एसएन सिंह ने डाउन टु अर्थ वेबसाइट को बताया कि

वाइट फंगस का एक मरीज खुद डॉक्टर ही है. कोरोना जैसे लक्षण दिखने के बाद उसने टेस्ट कराया. वह कोरोना निगेटिव निकला. लेकिन उसे चेस्ट में इंफेक्शन महसूस हो रहा था. हमने उसके कुछ टेस्ट किए, और इसमें हमें वाइट फंगस मिला.

Oxygen
डॉक्टरों ने वाइट फंगस के इंफेक्शन के पीछे ऑक्सीजन देने में लापरवाही को भी एक कारण बताया है. . (सांकेतिक फोटो-PTI)

कहां असर करता है वाइट फंगस?

वाइट फंगस शरीर के किसी भी अंग में फैल सकता है. इनमें आंख, फेफड़े, मस्तिष्क, नाखून, स्किन, प्राइवेट पार्ट और किडनी शामिल हैं. द लल्लनटॉप से बात करते हुए रिम्स रांची के माइक्रोबायलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर मनोज कुमार ने बताया कि

फंगस अलग-अलग रंग का होता है. हर फंगस वातावरण में मौजूद है. जैसे ही शरीर कमजोर होता है, फंगस इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. हम जिसे वाइट फंगस कह रहे हैं, असल में वह एस्परजिलस (Aspergillus) और कैंडिडा (Candida) हैं. ये फंगस का एक परिवार है, जो शरीर के विभिन्न अंगों पर उग आता है. फेफड़ों, महिलाओं के प्राइवेट पार्ट, आंख आदि में यह ज्यादा पाया जाता है. ऐसा नहीं है कि ये बीमारी कोई नई है. ये पहले भी लोगों को होता रहा है. लेकिन केस बहुत कम आते थे. अब कोरोना के इलाज में एस्टेरॉयड के इस्तेमाल से केस बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं. इसका कोरोना इंफेक्शन से कुछ लेना-देना नहीं है.

पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉक्टर राजकुमार ने द लल्लनटॉप को बताया कि

ब्लैक फंगस या वाइट फंगस वातावरण में हमेशा मौजूद रहे हैं. इन्हें हम मौकापरस्त फंगस इंफेक्शन की तरह समझ सकते हैं. हम सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगस इंफेक्शन को शरीर के भीतर ले जाते हैं, लेकिन शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता उन्हें पनपने नहीं देती. कोरोना के मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता गिरने से फंगस इंफेक्शन का अटैक होता है. यह कोई नई बात नहीं है. बस कोरोना में ऐसे केसों की संख्या बढ़ने से लोग डरे हुए हैं. ब्लैक फंगस तो काफी घातक है, लेकिन वाइट फंगस से किसी की जान गई हो, ऐसा अभी सुनने में नहीं आया है.

इसका इलाज क्या है?

डॉक्टर कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों को यही सलाह दे रहे हैं कि शरीर के किसी भी अंग में दिक्कत होने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करें. बलगम और म्यूकस का टेस्ट करके वाइट फंगस का पता लगाया जा सकता है. वाइट फंगस का इलाज डॉक्टर सामान्य एंटी फंगल दवाइयों और इंजेक्शन के जरिए कर रहे हैं. अभी तक बिहार और यूपी में जो केस मिले हैं, उन मरीजों की हालत स्थिर बनी हुई है. किसी की जान जाने की खबर नहीं है. डॉक्टर मनोज कुमार का कहना है कि किसी भी तरह के इंफेक्शन की जानकारी जितनी जल्दी डॉक्टर को दी जाएगी, ठीक होने के चांस उतने बढ़ जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरी नहीं कि हर फंगल इंफेक्शन ब्लैक फंगस या म्यूकरमायकोसिस की तरह खतरनाक ही हो.


वीडियो – कोरोना में जो ब्लैक फंगस बीमारी आंखें निकलवा रही, उसमें मारक इंजेक्शन ढूंढे नहीं मिल रहा है

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