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क्या है पीएम मोदी का 'संचय जल, बेहतर कल' अभियान, जिसे देश में पड़ रहे सूखे का इलाज बताया जा रहा है?

जुलाई का महीना है. मौसम है बारिश का. आमतौर पर जुलाई की पहली तारीख तक मॉनसून पूरे देश में बरस रहा होता है. लेकिन 1 जुलाई का दिन आया और चला गया. देश के एक तिहाई हिस्से बारिश से अब भी दूर हैं. एक हफ्ते की देरी मॉनसून ने केरल आने में कर दी और फिर रही सही कसर पूरी कर दी साईक्लोन वायु ने. नतीजा – जून के महीने में हमें हमारे हिस्सा की महज़ दो तिहाई बारिश मिली. पांच सालों में ये सबसे बुरी स्थिति है. पिछले ही मॉनसून के बाद हमने लगभग सूखे के हालात देखे थे. खेती के लिए पानी नहीं था, जानवर बिना चारे के दम तोड़ रहे थे और शहरों को पानी पिलाने वाले तालाब और झीलें इस तरह सूखीं कि उनमें बच्चों ने क्रिकेट खेला. इस हालत में कमज़ोर मॉनसून आने वाले साल को भयावह बना सकता है. तो एक ही सवाल है – सरकार क्या कर रही है? इस सवाल का जवाब 1 जुलाई के रोज़ मोदी सरकार ने एक बड़े ऐलान की शक्ल में दिया. जल शक्ति मंत्रालय ने ‘संचय जल, बेहतर कल’ नाम से एक अभियान शुरु किया है.

क्या है संचय जल, बेहतर कल?

लगभग 4 महीने बाद पीएम मोदी ने रेडियो कार्यक्रम मन की बात की, जिसमें उन्होंने पानी को लेकर नई योजना के बारे में बताया.
लगभग 4 महीने बाद पीएम मोदी ने रेडियो कार्यक्रम मन की बात की, जिसमें उन्होंने पानी को लेकर नई योजना के बारे में बताया.

30 जून को मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि जिस तरह स्वच्छ भारत अभियान के तहत सफाई पर मिशन मोड में काम हुआ है, जल संरक्षण के लिए भी उसी तरह के प्रयास की ज़रूरत है. मोदी की बात में कीवर्ड था जनभागीदारी. कि लोग आगे आएं और पानी सहेजने को लेकर अपने पारंपरिक तौर तरीके सबसे बांटें. मोदी की कही लाइन पर ही जल शक्ति मंत्रालय मॉनसून के साथ-साथ पूरे देश में एक जनभागीदारी और जागरूकता अभियान चलाना चाहता है. इसी अभियान का नाम रखा गया है संचय जल, बेहतर कल. इसका पहला फेज़ होगा 1 जुलाई से लेकर 15 सितंबर 2019 तक. मॉनसून वाली हवाएं हिमालय से टकराने के बाद फिर समंदर की ओर लौटती हैं. ये लौटता हुआ मॉनसून कहलाता है रिट्रीटिंग मॉनसून. देश के जिन इलाकों में रिट्रीटिंग मॉनसून बरसता है, उनमें संचय जल, बेहतर कल का दूसरा फेज़ भी चलेगा. ये होगा 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2019 तक.

कैसे होगा काम?

MAY 10, 2011 Banda : In summer of crop failure, water crisis, starvation deaths and suicides looms over Bundelkhand. This well in BundelkhandÕs Goira Mugli village is the lifeline for several villages in the vicinity. Women trek several miles under the scorching sun to fetch water. Photo : Naeem Ansari
मोदी सरकार ने देश के 256 जिलों के 1592 ब्लॉक की पहचान की है, जहां पानी की स्थिति बेहद गंभीर है.

संचय जल, बेहतर कल के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालय पानी पर काम करने के लिए साथ आएंगे. कमान रहेगी केंद्रीय पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के हाथ में. देश के 256 ज़िलों में पानी की कमी से जूझ रहे 1592 ब्लॉक्स की पहचान की गई है. Central Ground Water Board के मुताबिक इनमें से –

# 313 ब्लॉक क्रिटिकल हैं. याने यहां स्थिति बेहत खराब है

# 1000 ब्लॉक में 100% के करीब पानी ज़मीन से निकाल लिया गया है

# 94 ब्लॉक ऐसे भी हैं जिनमें पानी की उपलब्धता ही कम है.

केंद्र से अफसरों की टीम इन ब्लॉक्स का दौरा करेगी और यहां जल संरक्षण के लिए पांच काम किए जाएंगे –

# रेनवॉटर हार्वेस्टिंग यानी बारिश के पानी को ज़मीन में पहुंचाने का इंतज़ाम. इसके लिए बारिश का पानी जगह-जगह रोका जाता है. पानी धीरे-धीरे ज़मीन में रिसता है और ज़मीन में पानी का लेवल बढ़ता है.

# बावड़ियों, तालाबों और कुओं की मरम्मत. ये एक बड़ा ज़रूरी कदम है. देश भर में तालाब पाटकर स्कूल से लेकर मैरिज हॉल बने हैं. कभी जहां सिंघाड़ों की खेती होती थी, वहां आज कॉलोनियां खड़ी हैं. संचय जल बेहतर कल अगर तालाबों और झीलों पर हुए अतिक्रमण पर लगाम लगा पाया तो ये देश के इतिहास में मील का पत्थर होगा. क्योंकि आजतक किसी सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया है.

सरकार की नई योजना में कुओं के मरम्मत की बात कही गई है.
सरकार की नई योजना में कुओं के मरम्मत की बात कही गई है.

# तीसरा काम होगा बोरवेल से वॉटर रीचार्ज. बोरवेल के ज़रिए अब तक पानी ज़मीन से निकालने पर ही रहा है. लेकिन बंद पड़े बोरवेल उम्दा वॉटर रीचार्ज सिस्टम बन सकते हैं. क्योंकि ये पानी को सीधे ज़मीन की गहराई में उतारते हैं. ये शहरी इलाकों में बड़े काम आ सकता है क्योंकि यहां पर वॉटर रीचार्ज पिट बनाने के लिए जगह की कमी बड़ा मुद्दा है. छोटे प्लॉट पर घर बनाने वाले ठीक सवाल करते हैं कि भैया वॉटर रीचार्ज के लिए गड्ढा कहां बना लें. फिर उन्हें ये डर भी रहता है कि गड्ढे से तो सीलन भी होगी. बोरवेल से वॉटर रीचार्ज इन दोनों समस्याओं का हल है.

# चौथा काम होगा वॉटरशेड डेवलपमेंट. ये थोड़ा पेचीदा काम है. वॉटरशेड का मतलब होता है एक खास इलाके में पानी का सिस्टम. वॉटरशेड ज़मीन के उस पूरे हिस्से को कहते हैं जिसका पानी आखिर में किसी एक जगह इकट्ठा होता हो जैसे कोई झील या फिर कोई नदी. वॉटरशेड को आप एक उलटे छाते की तरह समझ सकते हैं. उलटे छाते में पानी की बूंद कहीं गिरे, वो बीच में आकर जमा होगी. वॉटरशेड की सीमा आसपास की ज़मीन की ढलान से बनती है. वॉटरशेड्स को सहेजने के लिए सरकार किस तरह के कदम उठाना चाहती है, ये फिलहाल पूरी तरह साफ नहीं है.

Villagers looking at water tank waiting for Water Crisis to be over in Rajasthan ( Rural Areas, News Profile )
सरकार की योजना में वॉटरशेड बनाना भी शामिल है, लेकिन ये थोड़ा पेचीदा काम है.

# वृक्षारोपण. पेड़ों से बारिश का क्या नाता है, आप ठीक समझते हैं. जल शक्ति मंत्रालय ने अपनी प्रेस रिलीज़ में intensive afforestation की बात की है. माने एक तय जगह पर खूब सारे पेड़ लगाए जाएंगे.

ये सारे काम करने के लिए पहले से चल रही स्कीमों का सहारा भी लिया जाएगा. मसलन मनरेगा, इंटीग्रेटेड वॉटरशेड मैनेजमेंट प्रोग्राम और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना.

ये तो मॉनसून की बात हुई, कोई लॉन्ग टर्म प्लान भी है सरकार के पास?

संचय जल, बेहतर कल के तहत जब ये पांच काम पूरे हो जाएंगे तो ब्लॉक और ज़िला स्तर पर water conservation plan बनेगा. इसके तहत किसानों को सिंचाई के बेहतर तरीके बताए जाएंगे जिनमें कम पानी लगता है. देश भर में काम करने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों के तहत आने वाले इलाकों में किसानों को बीज चुनने में मदद की जाएगी. किसानों से ऐसी फसलें उगाने की अपील की जाएगी जिनमें पानी की खपत कम होती हो.

इस आंदोलन को लॉन्च करने के लिए केंद्र को उसके हिस्से की तारीफ मिलनी चाहिए. राष्ट्रपति के अभिभाषण से लेकर अब तक नियमित अंतराल पर केंद्र ने पानी की समस्या पर गंभीर होने के संकेत दिए हैं. लेकिन इस तारीफ के साथ ही एक चेतावनी भी है. कि ये आखिरी गाड़ी है, जो चूक गई तो फिर चूक ही जाएगी. भारत में आबादी बहुत है और पानी भी खूब बरसता है पर जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह खुद स्वीकार करते हैं कि भारत में बारिश का 8 फीसदी ही ज़मीन में पहुंच पाता है. बाकी बहकर समंदर में चला जाता है. ज़मीन में पानी होना इसलिए ज़रूरी है कि वो पीने के पानी का इकलौता स्त्रोत बन चुका है. नदियां सूखती जा रही हैं. बांध उन्हीं शहरों को पानी नहीं पिला पा रहे जहां बने हैं.

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जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह खुद स्वीकार करते हैं कि भारत में बारिश का 8 फीसदी ही ज़मीन में पहुंच पाता है.

ऐसे में जल शक्ति मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना नल से जल को लेकर भी संशय पैदा होता है. भाजपा अपने घोषणापत्र में वादा कर चुकी है कि 2024 तक भारत के हर घर में पीने का पानी नल से पहुंचा दिया जाएगा. एक नज़र में ये एक बेजोड़ योजना लगती है. देश के हर बाशिंदे को साफ पीने का पानी घर बैठे मिले, ये किसी भी ज़िम्मेदार सरकार का काम है. लेकिन ये पानी आएगा कहां से, इसपर सिर धुना जाना बाकी है. केंद्र को इसके लिए भूमिगत जल इस्तेमाल करना पड़ेगा और वहां तेज़ी से जहर फैल रहा है. गंगा के पूरे पट्टे पर आर्सेनिक की मार है. क्योंकि कुओं की गहराई पर पानी नहीं है. ज़्यादा गहरे जाते हैं तो पानी के साथ उसमें घुले तत्व भी निकलते हैं, जो शरीर को हानि पहुंचाते हैं.

Water problem
देश का एक हिस्सा पानी की भयंकर कमी से जूझ रहा है, वहीं मुंबई फिलहाल पानी से बेहाल हुई पड़ी है.

ये चेतावनी इसलिए भी दी जा रही है, कि जब आप सूखे पर ये खबर पढ़ रहे हैं, मुंबई से लगातार मौतों की खबर आ रही हैं. ये वो लोग हैं जो लगातार बारिश की वजह से हुई दुर्घटनाओं के चलते मारे गए. मुंबई शहर का आंकड़ा खबर लिखे जाने तक 30 को छू रहा था. दिल्ली में बारिश का इंतज़ार और मुंबई में बारिश से मौतें. ये हमारे समय में जल प्रबंधन की सबसे मारक तस्वीर है. ये न दोहराई जाए, इसलिए ज़रूरी है कि सरकार का ये महत्वाकांक्षी अभियान सफल हो और इसमें आपका और हमारा योगदान किसी सूरत में कम न पड़े.


मोदी सरकार लाई सूखे का इलाज -जलशक्ति अभियान|दी लल्लनटॉप शो| Episode 249

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